राजनीति में अक्सर जीत और हार के समीकरण विकास कार्यों और जातीय आंकड़ों पर तय होते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी और महाभारत कालीन हस्तिनापुर (Hastinapur) सीट पर 'श्राप' और 'मिथक' का डर नेताओं के सिर चढ़कर बोलता है। इसका ताज़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब योगी सरकार में जलशक्ति राज्यमंत्री और हस्तिनापुर से दो बार के विधायक दिनेश खटीक (Dinesh Khatik) ने भरे मंच से एक चौंकाने वाला ऐलान कर दिया।READ ALSO:-बिजनौर में 'लव जिहाद' जैसा मामला: इंस्टाग्राम पर वसीम से 'समीर' बना युवक, हिन्दू युवती को जाल में फंसाया; बजरंग दल ने दबोचकर पुलिस को सौंपा
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मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिनेश खटीक ने साफ शब्दों में कहा कि वह तीसरी बार हस्तिनापुर विधानसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके पीछे उन्होंने कोई राजनीतिक कारण नहीं, बल्कि महाभारत कालीन 'द्रौपदी के श्राप' (Draupadi's Curse) को वजह बताया। उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है और सियासी गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई है।
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क्या है पूरा मामला?

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घटना बुधवार की है, जब मेरठ के एक स्कूल में वार्षिक समारोह का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम (Acharya Pramod Krishnam) मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे, जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर राज्यमंत्री दिनेश खटीक मंच पर आसीन थे।
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छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए दिनेश खटीक भावुक हो गए। उन्होंने महाभारत काल का जिक्र करते हुए हस्तिनापुर की ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं पर बात की। इसी दौरान उन्होंने अपने मन की बात जाहिर करते हुए कहा कि हस्तिनापुर एक 'श्रापित भूमि' है और यहां से बार-बार चुनाव जीतना असंभव सा है।
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वायरल वीडियो में क्या बोले मंत्री जी?

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दिनेश खटीक का 5 मिनट 30 सेकंड का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह माइक पर बेहद संजीदगी से अपनी बात रख रहे हैं।
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उन्होंने कहा:
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"जो महाभारत का दृश्य (लीला) यहां दिखाया गया, वह अद्भुत है। यह भी एक संयोग है कि मुझे न गुरुजी ने बुलाया, न आपने, लेकिन मैं यहां हूं। कल्कि धाम वाले गुरुजी ने मुझसे कहा था कि हस्तिनापुर के विधायक को भी यह लीला दिखाइए।"
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इसके बाद उन्होंने असली मुद्दा छेड़ा:

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"मैं उसी हस्तिनापुर से विधायक हूं। मेरे मन में अक्सर एक बात आती है। हस्तिनापुर सीट का इतिहास रहा है कि यहां से एक बार विधायक बनने के बाद कोई दोबारा नहीं जीत पाता। मीडिया मुझसे पूछती थी कि क्या आप दोबारा जीतेंगे? तब मैंने कहा था कि यह श्रापित भूमि है, जिस पर द्रौपदी का श्राप है।"
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'मोदी-योगी ने बचा लिया, वरना मेरी क्या औकात'

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अपने संबोधन में दिनेश खटीक ने स्वीकार किया कि 2022 के चुनाव में उनका दोबारा जीतना किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने अपनी जीत का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया।
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उन्होंने कहा:

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"जब यहां कोई दोबारा नहीं जीत पाया, तो दिनेश खटीक की क्या औकात थी? लेकिन देश में मोदी जी और प्रदेश में योगी जी जैसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने मेरी नैया पार लगाई और मुझे दोबारा विधायक बना दिया। अब कुदरती मेरे मन से यह आवाज आ रही है कि मैं दो बार इस श्रापित भूमि से विधायक बन गया, लेकिन अब मुझे यहां से तीसरी बार विधायक नहीं बनना। यह मेरे मन की बात है जो मैं आपको बता रहा हूं।"
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क्या है हस्तिनापुर का वो 'अजीबोगरीब मिथक'?

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हस्तिनापुर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमेशा से चर्चा का विषय रही है। इस सीट से जुड़े दो बड़े मिथक (Myths) हैं:
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    सरकार बनाने का रास्ता: कहा जाता है कि हस्तिनापुर सीट जिस पार्टी का प्रत्याशी जीतता है, प्रदेश में सरकार उसी पार्टी की बनती है। पिछले कई चुनावों से यह ट्रेंड सही साबित हुआ है।
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    दोबारा न जीतने का श्राप: दूसरा और डरावना मिथक यह है कि यहां से कोई भी विधायक लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीत पाता।
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दिनेश खटीक ने 2017 में पहली बार यहां से जीत हासिल की थी। 2022 में जब उन्होंने दोबारा चुनाव लड़ा, तो उन पर इस मिथक को तोड़ने का भारी दबाव था। भाजपा की लहर और संगठनात्मक मजबूती के चलते उन्होंने 2022 में भी जीत दर्ज की और इस मिथक को तोड़ दिया। लेकिन अब, तीसरी बार के लिए उनके मन में 'द्रौपदी के श्राप' का डर घर कर गया है।
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कौन हैं दिनेश खटीक?

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दिनेश खटीक मूल रूप से मेरठ के मवाना थाना क्षेत्र के कस्बा फलावदा (Phalawda) के रहने वाले हैं। वर्तमान में वह मेरठ के गंगानगर में निवास करते हैं।
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    राजनीतिक पृष्ठभूमि: दिनेश खटीक शुरू से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा से जुड़े रहे हैं। उनके पिता भी संघ के पुराने कार्यकर्ता थे और भाई नितिन खटीक जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं।
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    व्यवसाय: राजनीति के अलावा उनका फलावदा में ईंट-भट्टे का व्यवसाय है।
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    सफर: 2017 में भाजपा ने उन्हें हस्तिनापुर (सुरक्षित) सीट से टिकट दिया था। उन्होंने बसपा के कद्दावर नेता योगेश वर्मा को हराकर पहली बार विधानसभा में कदम रखा। 2022 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की और योगी सरकार में राज्यमंत्री बने।
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आचार्य प्रमोद कृष्णम की मौजूदगी और उसके मायने

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इस कार्यक्रम में आचार्य प्रमोद कृष्णम की उपस्थिति ने मामले को और दिलचस्प बना दिया है। आचार्य प्रमोद, जो हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा और पीएम मोदी के करीब आए हैं, मंच पर दिनेश खटीक की बातें सुन रहे थे। मंत्री ने अपने भाषण में आचार्य प्रमोद और कल्कि धाम का विशेष उल्लेख किया।
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दिनेश खटीक ने कहा कि वह पुराण और भागवत पढ़ते हैं, इसलिए उन्हें पता है कि हस्तिनापुर में महाभारत के समय क्या हुआ था और उस श्राप का प्रभाव आज भी क्यों माना जाता है।
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सियासी गलियारों में चर्चा: सीट बदलेंगे या लेंगे संन्यास?

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मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक पंडित कई तरह के कयास लगा रहे हैं:
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    सीट बदलने की तैयारी: क्या दिनेश खटीक अगले चुनाव (2027) में हस्तिनापुर छोड़कर किसी और सुरक्षित सीट की तलाश में हैं?
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    डर या रणनीति: क्या यह बयान वास्तव में अंधविश्वास से प्रेरित है या फिर क्षेत्र में एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को भांपते हुए यह एक सुरक्षित निकास (Safe Exit) की रणनीति है?
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    विपक्ष को मौका: विपक्षी दलों ने इस बयान को लपक लिया है। उनका कहना है कि भाजपा के मंत्री अब विकास की बात करने के बजाय अंधविश्वास और श्राप के पीछे छिप रहे हैं।
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21वीं सदी के भारत में जब हम मंगल और चांद पर जाने की बात करते हैं, तब एक जिम्मेदार पद पर बैठे मंत्री का 'श्राप' के डर से चुनाव न लड़ने की बात करना आश्चर्यजनक है। हालांकि, हस्तिनापुर का इतिहास और वहां के चुनावी नतीजे वाकई में इस मिथक को बल देते रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या दिनेश खटीक अपने इस फैसले पर अडिग रहते हैं या पार्टी हाईकमान के दबाव में उन्हें 2027 में फिर से उसी 'रणभूमि' में उतरना पड़ेगा जिससे वह डर रहे हैं।
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