खबरीलाल डेस्क
देहरादून (ब्यूरो रिपोर्ट)। देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियां जल्द ही देश के एक सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा और वैज्ञानिक संवाद की गवाह बनने वाली हैं। भारत के समक्ष वर्तमान में खड़ी कुपोषण की पुरानी समस्या और आधुनिक युग के तेजी से बढ़ते 'जीवनशैली जनित रोगों' (Lifestyle Diseases) की दोहरी चुनौती से निपटने के लिए देश के दिग्गज चिकित्सा विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और नीति-निर्माता देहरादून में एक साझा मंच पर एकत्रित होंगे।READ ALSO:-मोटर व्हीकल एक्ट में ऐतिहासिक बदलाव: अब 16 साल के बच्चे भी बनवा सकेंगे ड्राइविंग लाइसेंस, लेकिन भारी वाहन चालकों के लिए अग्निपरीक्षा; जानिए 2025 के नए नियम
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न्यूट्रिशन काउंसिल ऑफ इंडिया (NCI) और राजकीय दून मेडिकल कॉलेज (GDMC) के संयुक्त तत्वावधान में 'द्वितीय राष्ट्रीय पोषण एवं जनस्वास्थ्य सम्मेलन (NCICON 2026)' का आयोजन किया जा रहा है। यह दो दिवसीय महासम्मेलन 21 और 22 फरवरी 2026 को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के भव्य प्रांगण में आयोजित होगा।
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मुख्य अतिथि: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत करेंगे शुभारंभ

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सम्मेलन के आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार की सक्रिय भागीदारी रहने वाली है। उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि (Chief Guest) के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति के लिए सहमति प्रदान कर दी है। वे ही इस राष्ट्रीय सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मेलन न केवल राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा, बल्कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
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क्यों अनिवार्य है यह सम्मेलन? दोहरी चुनौतियों का समाधान

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आज भारत एक ऐसी स्थिति में है जहाँ उसे एक साथ दो विपरीत मोर्चों पर लड़ना पड़ रहा है। न्यूट्रिशन काउंसिल ऑफ इंडिया (NCI) के अध्यक्ष डॉ. क्षितिज भारद्वाज ने सम्मेलन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत आज एक अजीब दोराहे पर खड़ा है।
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    कुपोषण (Malnutrition): देश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में आज भी बच्चों और महिलाओं में कुपोषण एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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    जीवनशैली रोग: इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में खराब खान-पान और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोग जैसी बीमारियां महामारी की तरह फैल रही हैं।
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डॉ. भारद्वाज के अनुसार, "NCICON 2026 वैज्ञानिक संवाद, नवाचार और नीति-उन्मुख समाधानों के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान करेगा, जो नैदानिक पोषण (Clinical Nutrition) को सीधे जनस्वास्थ्य (Public Health) के साथ जोड़ने का काम करेगा।"
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देशभर के दिग्गज विशेषज्ञों का जमावड़ा

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देहरादून का यह सम्मेलन चिकित्सा जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों के आगमन का साक्षी बनेगा। इस आयोजन में शामिल होने वाले प्रमुख विशेषज्ञों की सूची में निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
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विशेषज्ञ का नाम
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पद एवं संस्थान
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प्रो. सी.एम. सिंह
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निदेशक, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS), लखनऊ।
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प्रो. नरसिंह वर्मा
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केजीएमयू (KGMU), लखनऊ के पूर्व विभागाध्यक्ष।
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पद्मश्री प्रो. कमलाकर त्रिपाठी
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वरिष्ठ चिकित्सक, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)।
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डॉ. केंजोम नोगमदिर
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सीआरपीएफ (CRPF)।
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प्रो. राखी अग्रवाल
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डीन, राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंसेज विश्वविद्यालय।
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इन दिग्गजों के अलावा, एम्स (AIIMS) ऋषिकेश, सीएसआईआर (CSIR) और देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के लगभग 200 प्रतिनिधि और 100 से अधिक शोधार्थी (Researchers) अपने नवीनतम शोध पत्र (Research Papers) प्रस्तुत करेंगे।
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सम्मेलन के मुख्य आकर्षण: किन विषयों पर होगा मंथन?

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सम्मेलन का एजेंडा व्यापक और बहुआयामी है। दो दिनों तक चलने वाले सत्रों में निम्नलिखित विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी:
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    रोग निवारण में पोषण की भूमिका: कैसे सही खान-पान बीमारियों को होने से पहले ही रोक सकता है।
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  3. \r\n
    मेटाबॉलिक सिंड्रोम: मोटापा, मधुमेह (Diabetes) और उनसे जुड़े जोखिमों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    खाद्य सुरक्षा और विषाक्तता (Food Safety and Toxicity): मिलावट और खाद्य पदार्थों में मौजूद हानिकारक तत्वों की पहचान और रोकथाम।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    सतत खाद्य प्रणाली: पोषण शिक्षा और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित खाद्य संसाधनों की उपलब्धता।
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  8. \r\n
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सम्मान और प्रोत्साहन: चिकित्सा जगत के सितारों को मिलेगा पुरस्कार

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सम्मेलन का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू चिकित्सा सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करना है। 'न्यूट्रिशन काउंसिल ऑफ इंडिया' द्वारा इस वर्ष निम्नलिखित राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे:
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    प्रो. नरसिंह वर्मा उत्कृष्टता पुरस्कार: यह सम्मान अहमदाबाद के विख्यात डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. बंसी साबू को उनके मधुमेह प्रबंधन (Diabetes Management) में किए गए अतुलनीय कार्य के लिए दिया जाएगा।
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    प्रो. कमलाकर त्रिपाठी उत्कृष्टता पुरस्कार: यह सम्मान प्रो. सी.एम. सिंह को चिकित्सा शिक्षा और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके असाधारण नेतृत्व के लिए प्रदान किया जाएगा।
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आयोजन समिति का दृष्टिकोण: शोध से नीति तक की दूरी

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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के जैवरसायन (Biochemistry) विभाग के अध्यक्ष और इस सम्मेलन के आयोजन सचिव प्रो. (डॉ.) राजीव कुशवाहा ने आयोजन की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि "पोषण किसी भी राष्ट्र के स्वास्थ्य की आधारशिला है।" उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन शोध (Research), चिकित्सा अभ्यास (Practice) और नीति (Policy) के बीच की खाई को पाटने का काम करेगा।
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'स्वस्थ भारत' की परिकल्पना की ओर एक कदम 

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देहरादून में आयोजित होने वाला यह NCICON 2026 सम्मेलन न केवल उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह देश की भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों के लिए एक रूपरेखा भी तैयार करेगा। युवा शोधार्थियों और वैज्ञानिकों के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है, जहाँ वे वरिष्ठ विशेषज्ञों से सीखकर 'स्वस्थ भारत' की परिकल्पना को धरातल पर उतारने में मदद कर सकेंगे।
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(यह विस्तृत रिपोर्ट न्यूट्रिशन काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और आधिकारिक इनपुट्स पर आधारित है।)