लखनऊ/गाजियाबाद: भारत में रसोई गैस (LPG) महज एक ईंधन नहीं है, बल्कि यह करोड़ों घरों के बजट और दिनचर्या की धुरी है। पिछले कुछ हफ्तों से अंतरराष्ट्रीय कारणों (खासकर मिडिल ईस्ट संकट) के चलते एलपीजी की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह चरमरा गई है। आयात में हो रही देरी और स्टॉक की कमी को देखते हुए, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिसने रातों-रात उपभोक्ताओं की नींद उड़ा दी है।READ A;LSO:-मेरठ में 'कचरे से क्रांति': अब गीले कूड़े से बनेगी CNG गैस; शहर से हमेशा के लिए खत्म होंगे बदबूदार कूड़े के पहाड़, 20 हजार घरों के रोशन होंगे चूल्हे
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गैस सिलेंडरों की किल्लत और लोगों द्वारा 'पैनिक बुकिंग' (घबराहट में अतिरिक्त गैस बुक करना) को रोकने के लिए तेल कंपनियों ने 'राशनिंग' (Rationing) का रास्ता अपनाया है। अब आप अपनी मर्जी से जब चाहें तब गैस सिलेंडर बुक नहीं कर सकते। गैस एजेंसियों के पास नए सॉफ्टवेयर अपडेट और आदेश पहुंच चुके हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
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इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि नए नियम क्या हैं, किस श्रेणी के उपभोक्ता को कितने दिन बाद गैस मिलेगी, और यदि आपका गैस पहले खत्म हो जाता है तो आपको किन सवालों का सामना करना पड़ेगा।
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एलपीजी सप्लाई के नए नियम: किसे, कितने दिन में मिलेगा सिलेंडर?

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गैस की कमी से निपटने के लिए तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा है और हर श्रेणी के लिए बुकिंग का एक 'लॉकिंग पीरियड' (Locking Period) तय कर दिया है। यूपी एलपीजी एसोसिएशन और गाजियाबाद एलपीजी एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इन नियमों को तत्काल प्रभाव से (Immediately) लागू कर दिया गया है।
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A. सिंगल सिलेंडर वाले उपभोक्ता (25 दिन की लिमिट)

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जिन उपभोक्ताओं के पास गैस एजेंसी का केवल एक ही सिलेंडर (Single Connection) है, उनके लिए नियम थोड़े राहत भरे हैं, लेकिन फिर भी सख्त हैं।
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    नया नियम: सिंगल सिलेंडर वाले उपभोक्ताओं को अब पिछली डिलीवरी के ठीक 25 दिन बाद ही नया सिलेंडर मिलेगा।
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    प्रभाव: यदि किसी बड़े परिवार में एक सिलेंडर 20 दिन में ही खत्म हो जाता है, तो उन्हें अगले 5 दिन तक बिना गैस के या किसी अन्य विकल्प (जैसे इंडक्शन या लकड़ी) पर निर्भर रहना पड़ेगा। सॉफ्टवेयर 25 दिन से पहले बुकिंग स्वीकार ही नहीं करेगा।
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B. डबल सिलेंडर वाले (DBC) उपभोक्ता (35 दिन की लिमिट)

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जिन उपभोक्ताओं के पास डबल बॉटल कनेक्शन (Double Cylinder Connection) है, यानी जिनके पास एक एक्स्ट्रा (रिजर्व) सिलेंडर रहता है, उनके लिए नियम कड़े किए गए हैं।
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    नया नियम: डबल सिलेंडर वालों को अब एक रिफिल मिलने के 35 दिन बाद ही दूसरे सिलेंडर की आपूर्ति की जाएगी।
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    तर्क: कंपनियों का तर्क है कि चूंकि इन उपभोक्ताओं के पास पहले से एक भरा हुआ बैकअप सिलेंडर मौजूद है, इसलिए वे गैस की कमी के इस दौर में लंबे समय तक अपना काम चला सकते हैं। इससे वह गैस उन लोगों को दी जा सकेगी जिनके पास सिंगल सिलेंडर है।
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C. उज्ज्वला योजना वाले उपभोक्ता (45 दिन की लिमिट)

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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत देश के करोड़ों गरीब और बीपीएल (BPL) परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए हैं। इस श्रेणी के लिए नियम सबसे सख्त किए गए हैं।
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    नया नियम: उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अब एक सिलेंडर भराने के बाद, दूसरा सिलेंडर पूरे 45 दिन बाद ही मिलेगा।
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    कारण: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उज्ज्वला योजना के अधिकांश लाभार्थी आर्थिक तंगी के कारण औसतन 40 से 50 दिनों में एक सिलेंडर की खपत करते हैं। इसलिए इस लंबी अवधि को तय किया गया है ताकि कम आय वर्ग की गैस को कमर्शियल या ब्लैक मार्केट में डाइवर्ट (Divert) होने से रोका जा सके।
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कमर्शियल सिलेंडरों (19 Kg) पर भी भारी संकट: सिर्फ आपात सेवाओं को राहत

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रसोई गैस के साथ-साथ होटलों, रेस्टोरेंट्स और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलो के नीले (कमर्शियल) सिलेंडरों की सप्लाई पर भी भारी ब्रेक लग गया है।
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अरुण कुमार (अध्यक्ष, गाजियाबाद एलपीजी एसोसिएशन) ने बताया कि कमर्शियल सिलेंडरों का स्टॉक भी बेहद सीमित है। आम व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए इनकी सप्लाई रोक दी गई है या बहुत कम कर दी गई है।
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    किसे मिल रही है गैस? फिलहाल कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति सिर्फ आपातकालीन सेवाओं (Emergency Services) जैसे बड़े अस्पतालों की कैंटीन, और शिक्षण संस्थानों (Educational Institutions) के हॉस्टल मेस तक ही सीमित कर दी गई है, ताकि मरीजों और छात्रों को भूखा न रहना पड़े।
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    रेस्टोरेंट्स पर मार: इसके चलते छोटे-बड़े ढाबों, रेस्टोरेंट्स और स्ट्रीट फूड वेंडर्स पर भारी संकट मंडराने लगा है। कई जगह कालाबाजारी (Black Marketing) की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं।
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BPCL का नया 'इंटेरोगेशन' प्रोसेस: 12 सिलेंडर का कोटा पार किया तो देने होंगे सवालों के जवाब

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गैस की किल्लत को देखते हुए भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने एक बेहद सख्त और नई प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी थी, जो अब और भी सख्ती से लागू की जा रही है।
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भारत सरकार के नियमानुसार, एक परिवार को एक वित्तीय वर्ष (Financial Year) में रियायती दर (Subsidized rate) पर अधिकतम 12 सिलेंडर मिलते हैं। लेकिन अब, गैस की कमी के चलते 12 सिलेंडर का सालाना कोटा पूरा कर चुके उपभोक्ताओं के लिए 13वां सिलेंडर बुक करना एक "टेढ़ी खीर" बन गया है।
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हेलो बीपीसीएल (Hello BPCL) ऐप पर पूछताछ

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यदि कोई उपभोक्ता अपने सालाना 12 सिलेंडर रिफिल करा चुका है और वह नई बुकिंग करना चाहता है, तो उसे सीधे बुकिंग नहीं मिलेगी। उसे 'हेलो बीपीसीएल' (Hello BPCL) मोबाइल ऐप पर जाकर कुछ अनिवार्य सवालों के जवाब (Questionnaire) देने होंगे। जब तक उपभोक्ता इन सवालों का संतोषजनक जवाब दर्ज नहीं करेगा, सिस्टम सिलेंडर बुक नहीं करेगा।
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ऐप पर पूछे जाने वाले अनिवार्य सवाल (Mandatory Questions):

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    सवाल 1: क्या आपके परिवार में छह (6) या इससे अधिक सदस्य हैं? (यह जानने के लिए कि खपत ज्यादा क्यों है)।
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    सवाल 2: क्या आपके परिवार में इन दिनों कुछ मेहमान आए हुए हैं? (अस्थायी खपत बढ़ने का कारण)।
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    सवाल 3: क्या आपके घर में हाल-फिलहाल में कोई शादी, भंडारा, पूजा या अन्य कोई बड़ा सामाजिक/धार्मिक कार्यक्रम है?
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    सवाल 4: क्या आप इस गैस का उपयोग 'अन्य घरेलू उपयोग' (जैसे पानी गर्म करना, या गृह उद्योग) के लिए कर रहे हैं?
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सवालों के पीछे का मकसद: बीपीसीएल और अन्य तेल कंपनियों का मानना है कि कई बार घरेलू गैस (जो सस्ती होती है) का इस्तेमाल व्यावसायिक कार्यों (Commercial purposes) या ब्लैक मार्केटिंग के लिए किया जाता है। गैस संकट के इस समय में, एक-एक किलो गैस की मॉनिटरिंग की जा रही है। यदि कंपनियों को लगता है कि उपभोक्ता के जवाब संदिग्ध हैं, तो वे एजेंसी को भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के निर्देश भी दे सकती हैं।
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इस महा-संकट की जड़ क्या है? (The Root Cause of the Crisis)

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आम जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर अचानक से देश में गैस की इतनी किल्लत क्यों हो गई कि कंपनियों को राशनिंग और सवालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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आयात निर्भरता और खाड़ी युद्ध

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भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता है, लेकिन हम अपनी कुल जरूरत का 55% से 60% एलपीजी विदेशों से आयात (Import) करते हैं। हमारा मुख्य आपूर्तिकर्ता (Supplier) मध्य पूर्व (सऊदी अरब, कतर, यूएई) है।
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    लाल सागर का संकट: इजराइल-हमास युद्ध और लाल सागर में हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के कारण, एलपीजी लेकर आने वाले विशाल जहाजों (VLGCs) को अपनी सुरक्षा के लिए स्वेज नहर का रास्ता छोड़कर 'केप ऑफ गुड होप' (अफ्रीका के नीचे से) का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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    शिपमेंट में देरी: इस लंबे रास्ते के कारण जहाजों को भारत पहुंचने में 15 से 20 दिन का अतिरिक्त समय लग रहा है। जब पीछे से गैस की खेप (Shipment) ही बंदरगाहों पर लेट पहुंच रही है, तो बॉटलिंग प्लांट्स में गैस का प्रेशर कम हो गया है और यही कमी एजेंसियों के गोदामों तक पहुंच गई है।
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आम आदमी पर प्रभाव और सामाजिक चुनौतियां

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तेल कंपनियों द्वारा लागू किए गए ये नियम भले ही 'स्टॉक मैनेजमेंट' (Stock Management) के नजरिए से सही हों, लेकिन आम जनता के लिए यह किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है।
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    बड़े परिवारों का संकट (Large Families): जिन घरों में संयुक्त परिवार (Joint Family) हैं और सदस्यों की संख्या 8 से 10 है, वहां एक सिलेंडर मुश्किल से 18-20 दिन चलता है। अब 25 या 35 दिन की लिमिट के कारण उन्हें कई दिनों तक भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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    उज्ज्वला लाभार्थियों की पीड़ा: 45 दिन की लिमिट गरीब परिवारों के लिए कठिन हो सकती है। यदि किसी गरीब परिवार में त्योहार या बीमारी के कारण गैस जल्दी खत्म हो गई, तो उन्हें 45 दिन तक दोबारा लकड़ी या चूल्हे के धुएं में खाना पकाने को मजबूर होना पड़ेगा।
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    कालाबाजारी का डर (Fear of Black Marketing): जब भी किसी आवश्यक वस्तु की राशनिंग होती है, 'ब्लैक मार्केट' सक्रिय हो जाता है। अब लोग चोरी-छिपे 1500 से 2000 रुपये में सिलेंडर खरीदने को मजबूर हो सकते हैं, जिससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
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इस संकट में गैस कैसे बचाएं?

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जब तक अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) सामान्य नहीं हो जाती और ये सख्त नियम लागू हैं, तब तक उपभोक्ताओं को स्मार्ट तरीके से गैस की बचत करनी होगी। यहाँ कुछ कारगर टिप्स दिए गए हैं:
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    प्रेशर कुकर का अधिकतम उपयोग: खाना पकाने के लिए हमेशा प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करें। इससे गैस की 20% से 30% तक बचत होती है।
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    ढककर पकाएं: बर्तनों को हमेशा ढक्कन से ढककर खाना पकाएं, इससे भाप बाहर नहीं निकलेगी और खाना जल्दी पकेगा।
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    सामग्री पहले से तैयार रखें: गैस ऑन करने से पहले सब्जियां काटना, मसाले निकालना और आटा गूंथना जैसे सभी काम पूरे कर लें। गैस जलाकर इन कामों को करने से ईंधन व्यर्थ होता है।
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    वैकल्पिक ऊर्जा का प्रयोग: इंडक्शन कुकटॉप (Induction Cooktop), माइक्रोवेव या इलेक्ट्रिक केतली का इस्तेमाल बढ़ाएं, ताकि एलपीजी पर निर्भरता कम हो सके। (जैसा कि सरकार एथेनॉल चूल्हों पर भी काम कर रही है, भविष्य में वह भी एक विकल्प बनेगा)।
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कब मिलेगी इस संकट से निजात?

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एलपीजी एसोसिएशन और तेल कंपनियों का यह स्पष्ट कहना है कि 25, 35 और 45 दिनों की यह लिमिट कोई स्थायी नियम नहीं है। यह एक 'आपातकालीन व्यवस्था' (Emergency Measure) है, जिसे देश के सीमित गैस स्टॉक को बचाने और हर घर तक थोड़ी-बहुत गैस पहुंचाने के लिए लागू किया गया है।
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जैसे ही खाड़ी देशों से आने वाले एलपीजी शिपमेंट की स्थिति सामान्य होगी और भारत के बंदरगाहों पर गैस का पर्याप्त रिज़र्व बन जाएगा, इन सख्त नियमों को धीरे-धीरे वापस ले लिया जाएगा। तब तक आम जनता को संयम बरतना होगा, 'पैनिक बुकिंग' से बचना होगा और गैस का सोच-समझकर (Judiciously) इस्तेमाल करना होगा।
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