उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक ऐसी खौफनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जो किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की कहानी जैसी लगती है। गाजियाबाद के जिस मशहूर यूट्यूबर को कुछ समय पहले एक जानलेवा हमले का शिकार होना पड़ा था, उसके बारे में अब एक ऐसा सच सामने आया है जिसने पुलिस और आम जनता दोनों को हिला कर रख दिया है। एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक (Ex Muslim Salim Wastik), जिसका सरेआम गला रेतने की कोशिश की गई थी, वह दरअसल कोई आम पीड़ित नहीं है। पुलिस जांच में यह शख्स पिछले 26 सालों से फरार एक क्रूर हत्यारा निकला है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने शनिवार को गाजियाबाद में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया है।READ ALSO:-बिजनौर में नकल माफियाओं पर प्रशासन सख्त: DM जसजीत कौर ने किया होमगार्ड परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण, CCTV से रखी जा रही चप्पे-चप्पे पर नजर
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गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि दिल्ली पुलिस की टीम शनिवार सुबह सलीम के गाजियाबाद स्थित आवास पर पहुंची थी। लंबी पूछताछ के बाद पुलिस उसे अपने साथ दिल्ली ले गई। जिस व्यक्ति को लोग एक निडर वक्ता और धार्मिक कट्टरपंथ का शिकार मान रहे थे, उसके हाथ एक 13 साल के मासूम बच्चे के खून से रंगे हुए हैं।
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1995 का वह खौफनाक हत्याकांड: मार्शल आर्ट ट्रेनर से बना कातिल
\r\n\r\nएक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक की खौफनाक दास्तान आज की नहीं, बल्कि तीन दशक पुरानी है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अफसरों के मुताबिक, असली कहानी 20 जनवरी 1995 को शुरू होती है। उस समय सलीम वास्तिक को लोग 'सलीम खान' के नाम से जानते थे। सलीम खान दिल्ली के एक स्कूल में बच्चों को मार्शल आर्ट (Martial Arts) की ट्रेनिंग देता था।
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उसी स्कूल में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक संपन्न कारोबारी का 13 साल का बेटा संदीप बंसल भी पढ़ाई करता था। पैसों के लालच में सलीम ने अपने एक साथी अनिल के साथ मिलकर एक भयानक साजिश रची। जब मासूम संदीप स्कूल जा रहा था, तब इन दोनों ने उसका अपहरण (Kidnapping) कर लिया।
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अपहरण के बाद सलीम और अनिल ने एक पीसीओ (PCO) से बच्चे के कारोबारी पिता को कॉल किया और महज 30 हजार रुपए की फिरौती मांगी। जब उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई, तो उन्होंने पिता को बच्चे की हत्या की धमकी दी। दरिंदगी की हद पार करते हुए इन दोनों ने सच में उस 13 साल के बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात के बाद दिल्ली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सलीम और अनिल को गिरफ्तार कर लिया और उन्हीं की निशानदेही पर बच्चे का शव भी बरामद किया गया था।
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26 सालों से पुलिस को चकमा दे रहा था एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक
\r\n\r\nसंदीप बंसल हत्याकांड में गिरफ्तारी के बाद सलीम पर लंबा मुकदमा चला। न्यायपालिका ने इस जघन्य अपराध को गंभीरता से लिया और साल 1997 में दिल्ली की एक अदालत ने सलीम खान और उसके साथी अनिल को उम्रकैद (Life Imprisonment) की सख्त सजा सुनाई।
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सजा काटने के दौरान, साल 2000 में सलीम किसी तरह पैरोल (Parole) पर जेल से बाहर आने में कामयाब हो गया। पैरोल पर बाहर आते ही वह पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर अंडरग्राउंड हो गया। बीते 26 सालों से पुलिस उसे सरगर्मी से तलाश रही थी। इस दौरान वह उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ और अंततः गाजियाबाद में अपनी पहचान और नाम बदलकर छिपता रहा। इसी बीच, 2011 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था, लेकिन मुजरिम पुलिस की पकड़ से कोसों दूर था।
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14 चाकू लगने और एनकाउंटर की वह घटना जिसने खोला राज
\r\n\r\nकहते हैं कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, एक दिन उसके पाप का घड़ा जरूर भरता है। एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। 27 फरवरी को दिनदहाड़े गाजियाबाद स्थित उसके ऑफिस में घुसकर उस पर जानलेवा हमला किया गया था। बिना नंबर प्लेट की बाइक से आए नकाबपोश हमलावरों ने सलीम पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए थे।
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इस हमले में उसके शरीर पर 14 बार चाकू मारे गए थे और उसका गला रेतने की कोशिश की गई थी। चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी आ गए और हमलावर उसे अधमरा छोड़कर फरार हो गए। सलीम करीब एक महीने तक दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल (GTB Hospital) में मौत से जंग लड़ता रहा, जहां उसके दो बड़े ऑपरेशन हुए।
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बाद में गाजियाबाद पुलिस ने इस हमले को अंजाम देने वाले दो सगे भाइयों, गुलफाम और जीशान, को एक एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। जांच में पता चला कि ये दोनों सलीम के इस्लाम विरोधी वीडियो से खफा थे। लेकिन, इस पूरे हाई-प्रोफाइल ड्रामे और मीडिया कवरेज ने अनजाने में सलीम का असली चेहरा दुनिया और दिल्ली पुलिस के सामने बेनकाब कर दिया। जो छिपना चाहता था, वह अपनी यूट्यूब की प्रसिद्धि के कारण पकड़ा गया।
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मौलवी से 'एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक' बनने का सफर
\r\n\r\nपुलिस की जांच में सलीम की जिंदगी के कई हैरान करने वाले पहलू सामने आए हैं। उसका मूल घर शामली जिले में है। करीब 20 साल पहले वह शामली से भागकर गाजियाबाद के लोनी इलाके की अशोक विहार कॉलोनी में आकर बस गया। यहां उसने परिवार बसाया, जिसमें उसकी पत्नी और एक बेटा उस्मान खान है।
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गाजियाबाद में शुरुआत में उसने कंस्ट्रक्शन का काम किया और कुछ समय तक मौलवी की भूमिका भी निभाई। लेकिन, बाद में उसका इस्लाम धर्म से मोहभंग हो गया। करीब सात साल पहले उसने आधिकारिक रूप से इस्लाम धर्म छोड़ दिया और अपने नाम के आगे 'खान' हटाकर ‘वास्तिक’ (Wastik) जोड़ लिया। इसके बाद वह एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक के नाम से मशहूर होने लगा।
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उसने अली गार्डेन कॉलोनी में जमीन लेकर मकान और ऑफिस बनवाया। यहीं से उसने कई टीवी चैनलों के साथ एग्रीमेंट किया और धार्मिक डिबेट्स में एक 'एक्स-मुस्लिम' की हैसियत से हिस्सा लेने लगा। बाद में उसने 'सलीम वास्तिक 0007' नाम से अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। वह अपने वीडियो में मदरसों की शिक्षा, हलाला, हदीस और तीन तलाक जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कुरान की आयतों का हवाला देकर सवाल उठाता था। इन्हीं विवादित वीडियो के कारण उसे धमकियां मिलती थीं और अंततः उस पर हमला हुआ।
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आखिर क्यों लोग छोड़ रहे हैं इस्लाम? 'एक्स मुस्लिम' संगठनों का दावा
\r\n\r\nसलीम वास्तिक की कहानी ने 'एक्स-मुस्लिम' मूवमेंट को भी चर्चा में ला दिया है। सलीम की तरह कई अन्य लोग भी अपने धर्म को छोड़ रहे हैं। इस संदर्भ में केरल के 'एक्स मुस्लिम ऑफ केरल' (Ex-Muslims of Kerala) संगठन के सह-संस्थापक आरिफ थिरुवट के दावे गौर करने लायक हैं।
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आरिफ इस्लाम छोड़ने की कई वजहें बताते हैं। उनका कहना है, "सबसे बड़ी बुराई गुलाम प्रथा है। इसमें औरतों को कमतर माना जाता है और नफरत करना सिखाते हैं। मुसलमान रहते हुए मैं भी अपनी पत्नी से बुरा बर्ताव करता था।" आरिफ का दावा है कि उनके पास ऐसे डेटा हैं जो बताते हैं कि केरल में मुसलमानों की लगभग 30% आबादी (हर 4 में से एक व्यक्ति) इस्लाम छोड़ चुकी है।
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एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि अपराध का साया इंसान का पीछा कभी नहीं छोड़ता। जो व्यक्ति सोशल मीडिया और टीवी डिबेट्स में धर्म और नैतिकता के बड़े-बड़े उपदेश दे रहा था, वह हकीकत में एक लालची और बेरहम कातिल था, जिसने 30 हजार रुपये के लिए एक 13 साल के मासूम की जान ले ली थी। 26 साल तक कानून की आंखों में धूल झोंकने के बाद अंततः वह सलाखों के पीछे है। यह घटना सोशल मीडिया के इस दौर में एक बड़ा सबक है कि इंटरनेट पर दिखने वाला हर चेहरा सच नहीं होता। दिल्ली पुलिस की यह सफलता निश्चित रूप से संदीप बंसल के परिवार को सालों बाद न्याय का अहसास कराएगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.