गाजियाबाद/उत्तर प्रदेश: खेल के मैदान पर खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होना एक आम बात है, लेकिन जब यह प्रतिस्पर्धा जलन, ईर्ष्या और खूनी रंजिश में तब्दील हो जाए, तो अंजाम बेहद खौफनाक होता है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad) से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने पूरे खेल जगत और आम जनमानस को झकझोर कर रख दिया है। इंटरनेशनल भारतीय पैरा एथलीट चिराग त्यागी (Para athlete Chirag Tyagi), जो देश के लिए कई मेडल जीत चुके थे और हाल ही में एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर घर लौट रहे थे, उनकी गाजियाबाद में बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी गई।READ ALSO:-"बकरा हलाल होते देखा है? आओ दिखाते हैं..." कहकर की थी 11वीं के छात्र की हत्या, गाजियाबाद पुलिस ने 50 हजार के इनामी असद को एनकाउंटर में किया ढेर
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सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाला कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि उनका ही साथी पैरा खिलाड़ी और कभी उनका बेहद करीबी दोस्त रहा यश खटीक (Yash Khatik) है। गाजियाबाद पुलिस (UP Police) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया है और इस खौफनाक हत्याकांड की पूरी परतें खोल दी हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर वो कौन सी वजह थी जिसने एक होनहार खिलाड़ी की जान ले ली और कैसे इस पूरी वारदात को अंजाम दिया गया।
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क्यों हुई हत्या? 'डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन' से शुरू हुई रंजिश और कामयाबी से जलन
\r\n\r\nएक उभरते हुए सितारे को मौत के घाट उतारने के पीछे की असली कहानी पेशेवर जलन और एक पुरानी शिकायत से जुड़ी है। गाजियाबाद के डीसीपी (DCP) धवल जायसवाल ने इस पूरे हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि चिराग त्यागी और आरोपी यश खटीक के बीच पहले बहुत ही गहरी दोस्ती थी। दोनों साथ में अभ्यास करते थे और एक ही फील्ड से जुड़े थे। लेकिन, चिराग की लगातार बढ़ती कामयाबी यश की आंखों में खटकने लगी थी।
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डीसीपी जायसवाल के अनुसार, वारदात की मुख्य जड़ एक पुरानी घटना है। एक बार खेल प्रतियोगिताओं के लिए होने वाले अनिवार्य 'दस्तावेज सत्यापन' (Document Verification) के दौरान चिराग त्यागी ने यश खटीक के खिलाफ किसी अनियमितता को लेकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर खेल समिति ने कड़ी कार्रवाई करते हुए यश खटीक की पात्रता (Qualification) को पूरी तरह से रद्द कर दिया था।
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रविवार को पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे चिराग के चचेरे भाई आशीष ने भी पुलिस की इस थ्योरी की पुष्टि की। आशीष ने भारी मन से बताया कि चिराग लगातार अपने खेल करियर में ऊंचाइयों को छू रहा था, जबकि यश का करियर उस शिकायत के बाद अंधकार में चला गया था। इसी बात को लेकर यश अंदर ही अंदर चिराग से भयंकर रंजिश पालने लगा था और उसे अपनी बर्बादी का जिम्मेदार मानने लगा था। इसी जलन और प्रतिशोध की आग में जलते हुए यश ने इस खौफनाक खूनी खेल की साजिश रची।
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वारदात का दिन: गोल्ड मेडल की खुशी और मौत का सफर
\r\n\r\nजिस दिन चिराग त्यागी की हत्या हुई, वह दिन उनके करियर का एक बहुत बड़ा दिन था। चिराग बेंगलुरु के श्री कांतीरवा स्टेडियम में 26 से 28 मई तक आयोजित 8वीं 'इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स इंटरनेशनल प्रतियोगिता' में हिस्सा लेकर लौट रहे थे। इस प्रतियोगिता में गाजियाबाद के 6 पैरा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया था, जिनमें चिराग का नाम सबसे ऊपर था।
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जिला पैरा एसोसिएशन के सचिव मोनू कुमार ने जानकारी दी कि चिराग ने इस प्रतिष्ठित इवेंट में 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक (Gold Medal) और 1500 मीटर दौड़ में रजत पदक (Silver Medal) जीतकर पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया था। इस शानदार जीत के साथ ही चिराग ने इसी साल 18 से 24 अक्टूबर के बीच जापान में होने वाले आगामी 'एशियन पैरा गेम्स' (Asian Para Games) के लिए भी सफलतापूर्वक क्वालिफाई कर लिया था।
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चिराग के सगे चाचा दीपक त्यागी ने बताया कि बेंगलुरु के ट्रेनिंग कैंप में एक सप्ताह का कड़ा अभ्यास करने के बाद 29 मई को चिराग दिल्ली पहुंचे थे और वहां नेहरू स्टेडियम में ठहरे थे।
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कैसे बुना गया मौत का जाल?
\r\n\r\nगाजियाबाद पुलिस की सघन जांच और रास्तों के सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) खंगालने पर वारदात की पूरी टाइमलाइन सामने आई है:
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- \r\n दिल्ली से वापसी: चिराग त्यागी ने अपने पूर्व दोस्त यश खटीक के साथ मिलकर दिल्ली से गाजियाबाद आने के लिए एक ओला कैब (Ola Cab) बुक की। दोनों कैब से गाजियाबाद के हिंडन इलाके तक पहुंचे।\r\n \r\n
- \r\n साईं उपवन का रुख: हिंडन पहुंचने के बाद, किसी बहाने से यश, चिराग को गाजियाबाद कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुनसान 'साईं उपवन' (Sai Upvan) की ओर ले गया।\r\n \r\n
- \r\n खौफनाक अंजाम: साईं उपवन के सुनसान इलाके में पहुंचते ही यश खटीक ने अपने पास पहले से छिपाकर रखी गई पिस्टल निकाली और चिराग पर सीधा फायर कर दिया। गोली लगने से मौके पर ही इस होनहार अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की दर्दनाक मौत हो गई।\r\n \r\n
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एसीपी (ACP) उपासना पांडेय ने बताया कि त्वरित कार्रवाई करते हुए मुरादनगर निवासी आरोपी यश खटीक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस की कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी यश ने अपना जुर्म भी पूरी तरह से कबूल कर लिया है। मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस ने चिराग की प्रेमिका, उनके कोच और परिजनों से भी लंबी पूछताछ की है। फिलहाल, चिराग के शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
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"मैं 3 बजे तक घर आ जाऊंगा..." एक किसान पिता का इकलौता सहारा छिना
\r\n\r\nचिराग त्यागी का परिवार गाजियाबाद के मुरादनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बसंतपुर सेथली गांव का निवासी है। चिराग के पिता मनोज त्यागी पेशे से एक साधारण किसान हैं और चिराग उनका इकलौता बेटा था। एक किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना कोई छोटी उपलब्धि नहीं थी।
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चिराग के चाचा दीपक त्यागी ने रुंधे गले से उस मनहूस दिन को याद करते हुए बताया कि घटना वाले दिन सुबह करीब 8:10 बजे चिराग का फोन आया था। उसने बड़े उत्साह के साथ कहा था कि, "चाचा, मैं आज दोपहर 3 बजे तक घर पहुंच जाऊंगा।" पूरा परिवार अपने चैंपियन बेटे के स्वागत की तैयारियों में जुटा था।
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लेकिन, जैसे-जैसे दोपहर ढली, चिराग का मोबाइल फोन अचानक स्विच ऑफ हो गया। परिवार की चिंता बढ़ने लगी। कुछ ही घंटों बाद गाजियाबाद कोतवाली पुलिस का एक फोन आया, जिसने परिवार की दुनिया ही उजाड़ दी। पुलिस ने बताया कि चिराग के साथ कुछ गंभीर अनहोनी हो गई है और उन्हें तुरंत थाने आना होगा। जब परिवार के लोग वहां पहुंचे, तो उन्हें साईं उपवन के पास चिराग का खून से लथपथ शव मिला। अपने इकलौते और होनहार जवान बेटे की इस तरह बेरहमी से हत्या की खबर सुनते ही पिता मनोज त्यागी और मां निशा त्यागी पूरी तरह से बेसुध होकर गिर पड़े। पूरे बसंतपुर सेथली गांव में आज मातम पसरा हुआ है।
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एक नजर चिराग त्यागी के शानदार खेल सफर पर: देश का मान बढ़ाने वाला धावक
\r\n\r\nचिराग त्यागी भारत के उन गिने-चुने होनहार पैरा-धावकों (Para-Runners) में से एक थे, जिन पर पूरे देश को गर्व था। वह मुख्य रूप से T-12 कैटेगरी (दृष्टिबाधित / Visual Impairment एथलीटों की श्रेणी) के अंतर्गत 100 मीटर और 400 मीटर की फर्राटा दौड़ प्रतियोगिताओं में भाग लेते थे। राष्ट्रीय स्तर पर वह हमेशा उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते थे। उनका अब तक का खेल का सफर उपलब्धियों से भरा रहा है:
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- \r\n नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप (2025): चेन्नई के ऐतिहासिक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित की गई 23वीं नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चिराग ने अपना लोहा मनवाया। उन्होंने पुरुषों की 400 मीटर दौड़ (T12 श्रेणी) में पहला स्थान हासिल कर स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीता था। यह दौड़ उन्होंने मात्र 50.89 सेकंड के शानदार समय में पूरी की थी।\r\n \r\n
- \r\n खेलो इंडिया पैरा गेम्स: भारत सरकार की पहल 'खेलो इंडिया पैरा गेम्स' में भी इस धावक ने राष्ट्रीय स्तर पर अपना दबदबा दिखाया। यहां उन्होंने पुरुषों की 100 मीटर (T12 श्रेणी) की बेहद तेज दौड़ में दूसरा स्थान प्राप्त कर रजत पदक (Silver Medal) अपनी झोली में डाला था।\r\n \r\n
- \r\n दुबई 2026 पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री: अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी धाक जमाते हुए, हाल ही में दुबई में आयोजित हुई 2026 पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में चिराग त्यागी ने पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया और देश के लिए कांस्य पदक (Bronze Medal) जीता था।\r\n \r\n
- \r\n एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई: इन लगातार शानदार प्रदर्शनों के दम पर ही उन्होंने आगामी एशियाई पैरा गेम्स (जापान) के लिए अपनी जगह पक्की की थी, जो किसी भी एथलीट का सबसे बड़ा सपना होता है।\r\n \r\n
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क्या होती है पैरा एथलेटिक्स में T-12 कैटेगरी?
\r\n\r\nचिराग त्यागी जिस T-12 कैटेगरी में दौड़ते थे, वह उन पैरा एथलीटों के लिए आरक्षित होती है, जिनकी आंखों की रोशनी (Vision) बहुत कम होती है, लेकिन वे पूरी तरह से दृष्टिहीन (Blind) नहीं होते।
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इस श्रेणी को आम भाषा में ऐसे समझा जा सकता है कि एक सामान्य दृष्टि वाला व्यक्ति जिस चीज को 60 मीटर की दूरी से बिल्कुल साफ-साफ देख सकता है, उसी चीज को स्पष्ट रूप से देखने के लिए एक T-12 खिलाड़ी को उसके बहुत करीब, यानी लगभग 2 मीटर या उससे भी कम दूरी तक जाना पड़ता है।
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इन खिलाड़ियों के सामने का विजन (Central Vision) कुछ हद तक काम करता है, लेकिन उनके आसपास का हिस्सा यानी 'साइड विजन' (Peripheral Vision) बेहद कम होता है या बिल्कुल नहीं होता। उनका देखने का दायरा इतना अधिक सीमित होता है कि उन्हें ऐसा महसूस होता है मानो वे एक बेहद पतली और अंधेरी सुरंग (Tunnel) के अंदर से बाहर की दुनिया को देख रहे हों। ऐसे गंभीर शारीरिक संघर्षों के बावजूद चिराग त्यागी जैसे खिलाड़ियों का ट्रैक पर फर्राटा भरना उनके अदम्य साहस और बेजोड़ दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण था।
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गाजियाबाद में हुई पैरा एथलीट चिराग त्यागी की यह हत्या न केवल उनके परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि देश के खेल जगत के लिए भी एक बहुत बड़ा झटका है। हमने एक ऐसा सितारा खो दिया है, जो आने वाले एशियन गेम्स में भारत का तिरंगा लहराने के लिए पूरी तरह तैयार था। पुलिस प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि इस खौफनाक साजिश को रचने वाले आरोपी यश खटीक को अदालत से कड़ी से कड़ी सजा मिले, ताकि भविष्य में खेल भावना को कलंकित करने की जुर्रत कोई और न कर सके।