खबरीलाल डेस्क
आज के आधुनिक समाज में जहां लोगों को अपनी मर्जी से जीवन जीने और दोस्त बनाने की आजादी है, वहीं कुछ असामाजिक तत्व 'मोरल पुलिसिंग' (नैतिक पहरेदारी) के नाम पर सरेआम कानून अपने हाथ में ले रहे हैं। ताजा मामला दिल्ली से सटे गाजियाबाद के हाई-प्रोफाइल इलाके इंदिरापुरम का है, जहां मंगलवार को एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने इलाके की कानून-व्यवस्था और लोगों की मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना में एक युवक को सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि वह जिस लड़की के साथ घूम रहा था, वह दूसरे समुदाय की थी और उसने हिजाब पहना हुआ था। यह घटना न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि समाज में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की एक सोची-समझी कोशिश भी नजर आती है।READ ALSO:-रक्षाबंधन पर NCRTC का 'महा-तोहफा': नमो भारत लगाएगी 47 एक्स्ट्रा फेरे, अब न ट्रैफिक का झंझट, न स्टेशन पर इंतजार!
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घटना का विस्तृत विवरण: गौर ग्रीन सोसायटी के पास पार्क का है मामला

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वायरल हो रहा यह वीडियो महज 53 सेकेंड का है, लेकिन यह पूरी घटना की भयावहता को बयां करने के लिए काफी है। मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली गौर ग्रीन सोसायटी के पास स्थित एक सार्वजनिक पार्क की है। शिवम नाम का युवक अपनी एक महिला मित्र के साथ पार्क में बैठा था। युवती ने हिजाब पहना हुआ था। इसी दौरान अचानक चार-पांच युवकों का एक गुट वहां आ धमकता है। उन्होंने बिना कोई कारण पूछे शिवम को घेर लिया और उसके साथ हाथापाई शुरू कर दी।
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 युवक को कई थप्पड़ मारे। कहा- “हिंदू बहनें नहीं बची हैं क्या?”

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वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हमलावर किस कदर हावी हैं। शिवम खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन आरोपी उसे लगातार थप्पड़ मार रहे हैं और उसके साथ धक्का-मुक्की कर रहे हैं। इस दौरान वहां से गुजर रहे लोग मूकदर्शक बने रहे, जो समाज की संवेदनहीनता को भी दर्शाता है।
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 युवकों ने युवती से भी गाली-गलौज की।

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हमलावरों की सांप्रदायिक गालियां और नफरत भरी मानसिकता

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इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू मारपीट से ज्यादा हमलावरों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा है। हमलावरों में से एक युवक पूरी घटना का अपने मोबाइल से वीडियो बना रहा था, ताकि वे अपनी इस 'गुंडागर्दी' का प्रदर्शन कर सकें।
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वीडियो में आरोपी खुलेआम सांप्रदायिक गालियां देते हुए सुने जा सकते हैं। वे शिवम को पीटते हुए कहते हैं, "तेरा नाम शिवम है... हिंदू बहनों के साथ घूमो।" इसके बाद वे हमलावर उस सहमी हुई युवती की तरफ मुड़ते हैं और उसे भी भद्दी गालियां देते हुए कहते हैं, "क्या मुस्लिम लड़के मर गए हैं क्या, जो तुम इसके साथ घूम रही हो? क्या मुसलमान लड़के खत्म हो गए हैं?" ये शब्द स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि यह मारपीट किसी व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह नफरत और कट्टरता से प्रेरित एक 'हेट क्राइम' है, जिसका मकसद दो समुदायों के बीच नफरत का बीज बोना है।
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सहमी रही प्रेमिका, डर के मारे मांगनी पड़ी माफी

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जब यह पूरी घटना घट रही थी, तब शिवम की महिला मित्र (युवती) खौफ के मारे एक तरफ खड़ी थी। अचानक हुए इस हमले और भीड़ की आक्रामकता ने उसे बुरी तरह डरा दिया था। आरोपियों की गालियां और धमकियां सुनकर युवती इस कदर खौफजदा हो गई कि वह लगातार माफी मांगने लगी।
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वायरल वीडियो में वह डरी हुई आवाज में कहती सुनाई दे रही है, "भैया, मैं यहां से जा रही थी... मुझे माफ कर दो।" इसके बाद वह घबराहट में वहां से चली जाती है। एक लड़की को सार्वजनिक जगह पर इस तरह सरेआम अपमानित करना और उसे डराना महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलता है।
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पुलिस का एक्शन: वायरल वीडियो और कार नंबर से तलाश जारी

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मंगलवार को जैसे ही यह 53 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। स्थानीय निवासियों और सोशल मीडिया यूजर्स ने गाजियाबाद पुलिस को टैग करते हुए आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। मामले की गंभीरता और सांप्रदायिक संवेदनशीलता को देखते हुए इंदिरापुरम पुलिस तुरंत हरकत में आ गई।
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एसीपी का बयान: इस पूरे मामले पर इंदिरापुरम के एसीपी (ACP) सूर्यबली मौर्य ने आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने बताया, "मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से हमारे संज्ञान में आया है। प्रारंभिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि यह वीडियो इंदिरापुरम के एक पार्क का ही है। वीडियो में कुछ युवक एक लड़के के साथ मारपीट करते और अभद्र भाषा का प्रयोग करते दिखाई दे रहे हैं।"
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कार के नंबर से खुलेगा राज: पुलिस की जांच का एक अहम सुराग वीडियो में ही छिपा है। जिस जगह पर शिवम को पीटा जा रहा था, ठीक उसी के बराबर में एक कार खड़ी हुई दिखाई दे रही है। पुलिस ने उस कार के रजिस्ट्रेशन नंबर (नंबर प्लेट) को ट्रेस कर लिया है। एसीपी मौर्य ने कहा, "हम कार के नंबर के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं। जल्द ही मारपीट करने वाले और वीडियो बनाने वाले युवकों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।"
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सख्त कानूनी कार्रवाई की है दरकार

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गाजियाबाद की यह घटना कोई इकलौता मामला नहीं है। बीते कुछ समय में उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां कुछ स्वयंभू ठेकेदार धर्म या नैतिकता के नाम पर कानून अपने हाथ में ले लेते हैं। इस तरह की घटनाएं न केवल संविधान द्वारा दिए गए 'स्वतंत्रता के अधिकार' का हनन हैं, बल्कि यह समाज में एक खतरनाक मिसाल भी पेश करती हैं।
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कानूनी जानकारों का मानना है कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ मारपीट, सार्वजनिक स्थान पर शांति भंग करने, महिलाओं का शील भंग करने (गाली-गलौज) और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने (आईटी एक्ट और आईपीसी/बीएनएस की संबंधित धाराओं) के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अब सबकी निगाहें गाजियाबाद पुलिस पर टिकी हैं कि वह कितनी जल्दी इन 'मोरल पुलिस वालों' को सलाखों के पीछे पहुंचाकर एक कड़ा संदेश देती है।