भारतीय सिनेमा के इतिहास को खंगाला जाए तो एक समय ऐसा था जब पुलिस की खाकी वर्दी पर केवल 'हीरो' का एकाधिकार माना जाता था। अमिताभ बच्चन से लेकर सलमान खान और अजय देवगन तक, पुरुष सितारों ने पुलिस के किरदार को एक लार्जर दैन लाइफ (Larger than life) छवि दी। लेकिन बदलते वक्त और आधुनिक सिनेमा ने इस रूढ़िवादी सोच को पूरी तरह से तोड़ दिया है।READ ALSO:-मेरठ में खौफनाक वारदात: 22 वर्षीय युवक को चाकुओं से गोदा, गला रेता और फिर सीने में उतार दी गोली; ईद की रंजिश में हुई हत्या का पुलिस ने 2 घंटे में किया पर्दाफाश
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अब बॉलीवुड की दबंग बेटियां पर्दे पर केवल रोमांस या रोने-धोने वाले किरदारों तक सीमित नहीं हैं। आज की अभिनेत्रियां जब खाकी वर्दी पहनकर पर्दे पर उतरती हैं, तो गुंडों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है और सिनेमाघरों में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठती है। कई मशहूर अभिनेत्रियों ने अपनी शानदार स्क्रीन प्रेजेंस, एक्शन पैक्ड सीन्स और बेजोड़ आत्मविश्वास के जरिए यह साबित कर दिया है कि खाकी सिर्फ एक वर्दी नहीं, बल्कि किरदार की ताकत और महिलाओं के स्वाभिमान का प्रतीक है। आइए नज़र डालते हैं बॉलीवुड की उन दमदार अभिनेत्रियों पर, जिन्होंने वर्दी में अपने अभिनय का ऐसा दम दिखाया जिसे दर्शक कभी भुला नहीं पाएंगे।
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रानी मुखर्जी: ‘मर्दानी’ का खौफनाक और निडर अवतार
\r\n\r\nबॉलीवुड की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शुमार रानी मुखर्जी ने यशराज बैनर की फिल्म 'मर्दानी' (Mardaani) और इसके सीक्वल 'मर्दानी 2' में पुलिस अधिकारी की भूमिका को एक बिल्कुल नए मुकाम पर पहुंचा दिया।
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सीनियर इंस्पेक्टर शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में रानी ने जो निडरता दिखाई, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली थी। इस फिल्म में उनका सामना बाल तस्करी (Child Trafficking) करने वाले खूंखार अपराधियों और सीरियल किलर्स से होता है। रानी मुखर्जी के किरदार की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उसमें हॉलीवुड स्टाइल का अतिरंजित एक्शन नहीं था, बल्कि एक रीयलिस्टिक अप्रोच थी। शिवानी शिवाजी रॉय की आंखों में एक तरफ जहां अपराधियों को कच्चा चबा जाने वाली सख्ती थी, वहीं दूसरी तरफ अपहृत बच्चियों को बचाने के लिए एक मां जैसा असीम जज़्बा और करुणा भी नजर आई। उन्होंने साबित किया कि एक महिला पुलिस अधिकारी का असली हथियार उसकी बुद्धि और उसका अदम्य साहस होता है।
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अदा शर्मा: दो अलग फिल्मों में खाकी के दो बिल्कुल अलग रंग
\r\n\r\nहाल ही के वर्षों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुकीं अदा शर्मा ने पुलिस के किरदार को एक नहीं, बल्कि दो बिल्कुल अलग-अलग फ्लेवर में पेश किया है।
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'कमांडो' (Commando) फ्रेंचाइजी में उन्होंने इंस्पेक्टर भावना रेड्डी का किरदार निभाया। यह किरदार बेबाक, तेज-तर्रार और एक्शन से भरपूर था, जिसमें एक खास तरह का स्वैग (Swag) और ह्यूमर भी मौजूद था। उनका यह स्टाइलिश कॉप अवतार युवाओं को बेहद पसंद आया। वहीं दूसरी ओर, सुदीप्तो सेन के निर्देशन में बनी फिल्म 'बस्तर: द नक्सल स्टोरी' (Bastar: The Naxal Story) में अदा शर्मा ने IPS नीरजा माधवन के रूप में अपना बेहद गंभीर और ग्रिट्टी (Gritty) अवतार दिखाया। लाल आतंक और नक्सलवाद से लड़ती एक आईपीएस अधिकारी के रूप में उनका यह शांत, लेकिन खौफनाक रूप दर्शकों के दिलों में उतर गया। एक ही अभिनेत्री द्वारा पुलिस के किरदार में इतने अलग और चुनौतीपूर्ण रंग दिखाना उनकी बहुमुखी प्रतिभा (Versatility) को दर्शाता है।
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तब्बू: ‘दृश्यम’ में खामोशी से मचाया खौफ
\r\n\r\nबॉलीवुड में जब भी सबसे इंटेंस और प्रभावशाली पुलिस अधिकारियों की बात होगी, तो फिल्म 'दृश्यम' (Drishyam) की आईजी मीरा देशमुख (IG Meera Deshmukh) का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। बेहतरीन अभिनेत्री तब्बू ने इस किरदार में जान फूंक दी थी।
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इस फिल्म में तब्बू ने न तो कोई फाइट सीन किया और न ही किसी गुंडे को सड़क पर दौड़ाकर पीटा, लेकिन इसके बावजूद पूरी फिल्म में उनका खौफ साफ महसूस होता है। उनके किरदार की ताकत उनका व्यक्तित्व, उनकी ठंडी और भेदने वाली निगाहें, और एक मां की तड़प थी जिसका बेटा गायब है। विजय सालगांवकर (अजय देवगन) के परिवार से पूछताछ के दौरान तब्बू के चेहरे के भाव और उनकी खामोशी किसी थर्ड-डिग्री टॉर्चर से कम असरदार नहीं थी। मीरा देशमुख के रूप में तब्बू ने यह स्थापित कर दिया कि एक सीनियर पुलिस अधिकारी का माइंड गेम हथियारों से कहीं ज्यादा घातक होता है।
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प्रियंका चोपड़ा: ‘जय गंगाजल’ और ‘डॉन’ में दिखा देसी गर्ल का पुलिसिया रौब
\r\n\r\nग्लोबल आइकन बन चुकीं प्रियंका चोपड़ा ने भी खाकी वर्दी पहनकर बड़े पर्दे पर खूब जलवे बिखेरे हैं। प्रकाश झा के निर्देशन में बनी फिल्म 'जय गंगाजल' (Jai Gangaajal) में उन्होंने एसपी आभा माथुर की एक बेहद सशक्त भूमिका निभाई।
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बिहार की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म में एसपी आभा माथुर को एक ऐसे जिले का प्रभार मिलता है, जो पूरी तरह से राजनेताओं, बाहुबलियों और भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के चंगुल में है। प्रियंका ने इस फिल्म में भ्रष्टाचार और अपराध से जूझती एक ईमानदार और दृढ़ अधिकारी का किरदार निभाया। लाठीचार्ज से लेकर गुंडों को उन्हीं की भाषा में जवाब देने तक, प्रियंका ने खाकी की गरिमा को शानदार तरीके से पर्दे पर उतारा। इसके अलावा, सुपरहिट 'डॉन' (Don) फ्रेंचाइजी में रोमा के रूप में उनका पुलिसिया अंदाज कहीं ज्यादा स्टाइलिश और एक्शन-ओरिएंटेड रहा, जहां वे इंटरनेशनल क्रिमिनल डॉन को पकड़ने के लिए मार्शल आर्ट्स का इस्तेमाल करती नजर आईं।
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सान्या मल्होत्रा: ‘कटहल’ में पुलिस की भूमिका में हास्य और करारा व्यंग्य
\r\n\r\nजब बात पुलिस के किरदार की होती है, तो अक्सर दिमाग में सिर्फ सीरियसनेस और एनकाउंटर की तस्वीरें आती हैं। लेकिन सान्या मल्होत्रा ने फिल्म 'कठल' (Kathal) में इस स्टीरियोटाइप को पूरी तरह तोड़ दिया।
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इस सटायरिकल (व्यंग्यात्मक) कॉमेडी फिल्म में सान्या ने इंस्पेक्टर महिमा बसोर की भूमिका अदा की। फिल्म की कहानी एक विधायक के घर से चोरी हुए दो कटहलों को ढूंढने की असामान्य और हास्यास्पद जांच पर आधारित है। महिमा के किरदार के जरिए सान्या ने बहुत ही हल्के-फुल्के अंदाज में व्यवस्था, पुलिस पर राजनीतिक दबाव और सिस्टम की खामियों पर करारा सवाल उठाया है। सान्या का यह किरदार बताता है कि पुलिस का काम केवल गोलियां चलाना नहीं, बल्कि कई बार हास्यास्पद राजनीतिक आदेशों और जमीनी हकीकत के बीच संतुलन बनाना भी होता है।
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बॉलीवुड की महिला पुलिस अधिकारियों पर एक नजर (A Quick Glance)
\r\n\r\n| \r\n अभिनेत्री (Actress) \r\n | \r\n \r\n फिल्म का नाम (Movie) \r\n | \r\n \r\n किरदार का नाम (Character Name) \r\n | \r\n \r\n किरदार की मुख्य विशेषता (Key Trait) \r\n | \r\n
|---|---|---|---|
| \r\n रानी मुखर्जी \r\n | \r\n \r\n मर्दानी (Mardaani) \r\n | \r\n \r\n सीनियर इंस्पेक्टर शिवानी शिवाजी रॉय \r\n | \r\n \r\n निडर, बुद्धिमान और समाज के दुश्मनों के प्रति सख्त रवैया \r\n | \r\n
| \r\n तब्बू \r\n | \r\n \r\n दृश्यम (Drishyam) \r\n | \r\n \r\n आईजी मीरा देशमुख (IG Meera Deshmukh) \r\n | \r\n \r\n नियंत्रित तीव्रता, साइकोलॉजिकल दबाव और माइंड गेम \r\n | \r\n
| \r\n प्रियंका चोपड़ा \r\n | \r\n \r\n जय गंगाजल (Jai Gangaajal) \r\n | \r\n \r\n एसपी आभा माथुर (SP Abha Mathur) \r\n | \r\n \r\n सिस्टम के भ्रष्टाचार और बाहुबलियों से सीधी टक्कर \r\n | \r\n
| \r\n अदा शर्मा \r\n | \r\n \r\n कमांडो / बस्तर \r\n | \r\n \r\n इंस्पेक्टर भावना रेड्डी / IPS नीरजा \r\n | \r\n \r\n स्टाइलिश एक्शन और नक्सलवाद के खिलाफ ग्रिट्टी अवतार \r\n | \r\n
| \r\n सान्या मल्होत्रा \r\n | \r\n \r\n कटहल (Kathal) \r\n | \r\n \r\n इंस्पेक्टर महिमा बसोर (Mahima Basor) \r\n | \r\n \r\n राजनीतिक दबाव के बीच सिस्टम पर हास्य और व्यंग्य \r\n | \r\n
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इन सभी अभिनेत्रियों ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से यह साफ कर दिया है कि खाकी वर्दी पुरुषसत्तात्मक समाज की बपौती नहीं है। जब एक महिला इस वर्दी को पहनती है, तो उसमें कर्तव्यनिष्ठा, साहस, और न्याय के प्रति एक अलग ही तरह की संवेदनशीलता जुड़ जाती है। दर्शकों ने इन किरदारों को न सिर्फ प्यार दिया, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी इन फिल्मों को हिट कराकर यह साबित किया कि समाज अब मजबूत और निर्णय लेने वाली महिलाओं को पर्दे पर देखना चाहता है। इन किरदारों ने समाज की आम लड़कियों को भी यह प्रेरणा दी है कि वे भी अपने स्वाभिमान और ताकत के बल पर किसी भी क्षेत्र में अपनी बादशाहत कायम कर सकती हैं।