बॉलीवुड में हमेशा से ही ऐतिहासिक और देशभक्ति से लबरेज कहानियों का एक अलग और खास मुकाम रहा है। दर्शक उस दौर की कहानियों से खुद को गहराई से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। इसी कड़ी में इस साल की सबसे बेसब्री से इंतजार की जाने वाली फिल्मों में से एक, 'बंटवारा 1947' (Bantwara 1947) का दमदार और इंटेंस टीज़र आखिरकार रिलीज़ हो गया है। अपने शानदार मोशन पोस्टर और किरदारों के दमदार पोस्टर्स के रिलीज़ होने के बाद से ही, इस फिल्म ने दर्शकों और क्रिटिक्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। अब, टीज़र के सामने आने के बाद फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट का लेवल सातवें आसमान पर पहुंच गया है। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि हिम्मत, बलिदान और कभी न टूटने वाले इंसानी जज्बे का एक जीता-जागता दस्तावेज़ होने वाली है।READ ALSO:-मौसम का 'रौद्र रूप': 19 जून को दिल्ली-NCR में भयंकर धूल भरी आंधी, तो बिहार में 80km/h की रफ्तार से तबाही मचाएगा तूफान, IMD का महा-अलर्ट
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टीज़र में क्या है खास: इतिहास के सबसे दर्दनाक पन्नों की झलक
\r\n\r\n'बंटवारा 1947' का यह दिलचस्प और इंटेंस टीज़र दर्शकों को इतिहास के सबसे बड़े और दर्दनाक मोमेंट्स में से एक में सीधे तौर पर ले जाता है। भारत की आज़ादी की खुशी और उसी के साथ जुड़ा हुआ वो दर्दनाक बंटवारा, जिसने एक पल में पूरे देश को दो टुकड़ों में बांट दिया और हमेशा के लिए करोड़ों जिंदगियों को बदल कर रख दिया।
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टीज़र की शुरुआत एक बेहद ही इमोशनल और दिल को झकझोर देने वाले बैकग्राउंड स्कोर (BGM) के साथ होती है, जो आपको उस दौर के खौफ और दर्द का अहसास कराता है। दमदार डायलॉग्स, खून से सनी ट्रेनें, लोगों का पलायन और आंखों में आंसू लिए परिवारों की झलक रोंगटे खड़े कर देती है। यह टीज़र इतिहास के सबसे उथल-पुथल भरे चैप्टर के दौरान उम्मीद और लचीलेपन के जज्बे को दिखाता है। कहानी के केंद्र में एक ऐसा हीरो है (जिसे सनी देओल निभा रहे हैं), जो डर और नफरत के उस खौफनाक माहौल से ऊपर उठकर असाधारण बहादुरी की मिसाल बनता है। वह सिर्फ अपनी जान नहीं बचाता, बल्कि इंसानियत को बचाने के लिए एक ढाल बनकर खड़ा हो जाता है।
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तीन दशकों बाद एक साथ आ रही है सनी देओल और राजकुमार संतोषी की आइकॉनिक जोड़ी
\r\n\r\nइस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) में से एक है सनी देओल और दिग्गज निर्देशक राजकुमार संतोषी का महा-मिलन। जब भी इन दोनों ने साथ काम किया है, बॉलीवुड के इतिहास में नए रिकॉर्ड बने हैं। चाहे वह 'घायल' (1990) का एंग्री यंग मैन हो, 'दामिनी' (1993) का 'ढाई किलो का हाथ' वाला वकील हो, या फिर 'घातक' (1996) का एक्शन अवतार, इस जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर हमेशा तहलका मचाया है।
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अब, लगभग तीन दशकों (30 साल) के लंबे इंतज़ार के बाद, राजकुमार संतोषी और सनी देओल की यह बहुप्रतीक्षित (मोस्ट-अवेडेट) वापसी दर्शकों के लिए किसी बड़े सिनेमाई तोहफे से कम नहीं है। 'गदर 2' की ऐतिहासिक सफलता के बाद सनी देओल का स्टारडम इस वक्त चरम पर है और राजकुमार संतोषी जैसे परफेक्शनिस्ट डायरेक्टर के साथ उनका जुड़ना यह गारंटी देता है कि फिल्म में एक्शन के साथ-साथ इमोशन्स का भी एक परफेक्ट डोज़ देखने को मिलेगा।
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दिग्गज और शानदार कलाकारों की फौज
\r\n\r\n'बंटवारा 1947' केवल सनी देओल के कंधों पर नहीं टिकी है, बल्कि इसमें भारतीय सिनेमा के कुछ सबसे बेहतरीन और मंझे हुए कलाकारों की एक पूरी फौज शामिल है, जो इस कहानी में जान फूंकने का काम करेंगे:
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- \r\n सनी देओल (Sunny Deol): 'तारा सिंह' के रूप में देश का दिल जीतने के बाद, सनी देओल एक बार फिर से एक ऐसे किरदार में नज़र आ रहे हैं जो मिट्टी से जुड़ा है। उनका एग्रेशन और उनकी आंखों में दिखने वाला दर्द फिल्म की सबसे बड़ी ताकत होगा।\r\n \r\n
- \r\n प्रीति जिंटा (Preity Zinta): बॉलीवुड की डिंपल गर्ल प्रीति जिंटा लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर दमदार वापसी कर रही हैं। 'द हीरो: लव स्टोरी ऑफ अ स्पाई' के बाद सनी देओल और प्रीति जिंटा को फिर से एक साथ स्क्रीन शेयर करते देखना फैंस के लिए एक नॉस्टैल्जिक अनुभव होगा। प्रीति की मौजूदगी फिल्म को एक खास चार्म देती है।\r\n \r\n
- \r\n शबाना आज़मी (Shabana Azmi): अपनी दमदार और यथार्थवादी एक्टिंग के लिए मशहूर शबाना आज़मी इस फिल्म में एक बेहद क्रिटिकल और इमोशनल भूमिका में हैं। उनका किरदार बंटवारे के उस दर्द को पर्दे पर उकेरेगा जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।\r\n \r\n
- \r\n अली फज़ल (Ali Fazal): 'मिर्ज़ापुर' फेम अली फज़ल अपनी वर्सेटिलिटी के लिए जाने जाते हैं। इस हिस्टोरिकल ड्रामा में उनकी एंट्री से कहानी में एक नया और इंटेंस एंगल जुड़ गया है। उनका लुक और किरदार दर्शकों को सरप्राइज़ कर सकता है।\r\n \r\n
- \r\n अभिमन्यु सिंह (Abhimanyu Singh): अपने निगेटिव किरदारों और स्क्रीन प्रेजेंस से खौफ पैदा करने वाले अभिमन्यु सिंह इस फिल्म में विलेन या एक बेहद जटिल किरदार के रूप में नज़र आ सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n करण देओल (Karan Deol): सनी देओल के बेटे करण देओल भी इस भव्य प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। बाप-बेटे की इस जोड़ी को बड़े पर्दे पर एक साथ देखना यकीनन एक दिलचस्प अनुभव होने वाला है।\r\n \r\n
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1947 का बैकड्रॉप: क्यों आज भी प्रासंगिक है यह कहानी?
\r\n\r\n1947 का विभाजन केवल जमीनों का बंटवारा नहीं था, बल्कि वह दिलों का, परिवारों का और सदियों से एक साथ रह रहे लोगों का बंटवारा था। 'बंटवारा 1947' उस दौर की क्रूरता को तो दिखाती ही है, लेकिन इसका मुख्य फोकस इंसानियत पर है। जब चारों तरफ खून-खराबा और नफरत का माहौल था, तब भी कुछ ऐसे लोग थे जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की मदद की। यह फिल्म उन्हीं अनसुने हीरोज़ को एक ट्रिब्यूट है। राजकुमार संतोषी अपनी फिल्मों में सामाजिक मुद्दों और मानवीय संवेदनाओं को बहुत ही बारीकी से पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इस फिल्म के जरिए वह दर्शकों को उस दर्द से रूबरू कराएंगे जो हमारे पूर्वजों ने झेला था।
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सिनेमाटोग्राफी और वीएफएक्स (VFX) से सजी एक भव्य दुनिया
\r\n\r\nटीज़र में नज़र आ रही विजुअल क्वालिटी यह स्पष्ट कर देती है कि मेकर्स ने 1947 के दौर को रिक्रिएट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पुरानी दिल्ली और लाहौर की गलियां, पुराने स्टीम इंजन वाली ट्रेनें, लोगों का पहनावा और उस दौर का पूरा प्रोडक्शन डिज़ाइन बहुत ही प्रामाणिक (Authentic) लग रहा है। इसका वीएफएक्स और कैमरा वर्क फिल्म को एक हॉलीवुड जैसी ग्रैंड फील दे रहा है। इसके साथ ही फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक एक साइलेंट वॉरियर की तरह काम कर रहा है जो बिना कुछ बोले ही आंखों में नमी ला देता है।
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बॉक्स ऑफिस पर 'बंटवारा 1947' से उम्मीदें
\r\n\r\n'गदर 2' ने जिस तरह से 500 करोड़ से ज्यादा की कमाई करके बॉक्स ऑफिस के सूखे को खत्म किया था, उसे देखते हुए ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि 'बंटवारा 1947' भी बॉक्स ऑफिस पर कमाई के नए झंडे गाड़ सकती है। सनी देओल का एक्शन, राजकुमार संतोषी का डायरेक्शन, 1947 का इमोशनल प्लॉट और एक जबरदस्त स्टार कास्ट—यह फिल्म एक परफेक्ट ब्लॉकबस्टर मटेरियल नज़र आ रही है।
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अंत में यही कहा जा सकता है कि 'बंटवारा 1947' का यह टीज़र सिर्फ शुरुआत है। पूरी पिक्चर का आना अभी बाकी है। इस फिल्म ने रिलीज़ से पहले ही एक बड़ा बज (Buzz) क्रिएट कर दिया है और दर्शकों को अब इसके ट्रेलर और रिलीज डेट का बेसब्री से इंतज़ार है। यह फिल्म यकीनन भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनकर उभरेगी।