नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर (NCR) में बढ़ते वायु प्रदूषण के गंभीर संकट से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और कड़ा सुझाव दिया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अब बाजारों में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की संख्या बढ़ गई है, इसलिए आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाया जा सकता है।READ ALSO:-PM Modi Biopic: पद्मश्री एक्ट्रेस रवीना टंडन बनेंगी PM मोदी की मां 'हीराबेन'! साउथ एक्टर उन्नी मुकुंदन निभाएंगे लीड रोल
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न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद और उपयोग को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी। कोर्ट का यह सुझाव एनसीआर पेट्रोल-डीजल बैन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने EV को बताया बेहतर विकल्प
\r\n\r\nसुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाने की जोरदार वकालत की है। पीठ ने खासकर पेट्रोल-डीजल से चलने वाले महंगे और लग्जरी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की अपील की।
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न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि कुछ अनुभवों के आधार पर यह विचार सामने आया है कि अब इलेक्ट्रिक वाहनों के बाजार में बहुत अच्छी और बड़ी कारें उपलब्ध हैं। ये EV उतनी ही सुविधाजनक हो सकती हैं जितनी कि अन्य ईंधन खपत करने वाली गाड़ियां हैं, जिनका उपयोग कई वीआईपी और बड़ी कंपनियां कर रही हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सबसे पहले महंगे वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के बारे में सोचना चाहिए, जिससे आम आदमी पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि भारतीय आबादी का एक छोटा हिस्सा ही इन वाहनों को वहन कर सकता है।
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EV नीति की समीक्षा की जरूरत
\r\n\r\nन्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि देश की मौजूदा EV नीति की फिर से समीक्षा की जरूरत हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस नीति को बने हुए लगभग पांच साल हो चुके हैं, और बाजार के बदलते परिदृश्य को देखते हुए इसे फिर से देखने की आवश्यकता है।
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कोर्ट ने इस मामले को चार हफ्ते बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया, जिसके पहले अटॉर्नी जनरल को अब तक जारी अधिसूचनाओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है।
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सरकार ने कोर्ट के सुझाव पर जताई सहमति
\r\n\r\nअटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट के इस सुझाव पर तुरंत सहमति जताई है। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वर्तमान में EV वाहनों को लेकर काफी काम किया जाना बाकी है, और सरकार इस पर गहनता से ध्यान दे रही है।
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अटॉर्नी जनरल ने कहा, "भविष्य को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के इस सुझाव पर गहनता से विचार किया जाएगा और इसकी पूरी रूपरेखा को तैयार किया जाएगा।" उन्होंने बताया कि इसे लेकर सरकार में पहले ही कई बैठकें हो चुकी हैं। सरकार का यह रुख दर्शाता है कि एनसीआर पेट्रोल-डीजल बैन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में नीतिगत बदलाव जल्द ही देखने को मिल सकते हैं। यह कदम न केवल प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा, बल्कि देश को हरित और टिकाऊ परिवहन की ओर भी ले जाएगा।
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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोल और डीजल वाहनों, खासकर महंगे लग्जरी वाहनों पर चरणबद्ध तरीके से बैन लगाने का सुझाव दिया है। कोर्ट ने कहा कि बाजार में EV वाहनों की बढ़ती उपलब्धता के कारण अब यह कदम उठाया जा सकता है। सरकार ने भी एनसीआर पेट्रोल-डीजल बैन पर कोर्ट के सुझाव से सहमति जताते हुए गहन विचार-विमर्श का आश्वासन दिया है।