खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर प्रदूषण (Pollution) की घनी चादर में लिपटी हुई है। हवा में घुलते जहर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने अब तक के सबसे सख्त कदम उठाने का ऐलान कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदूषण नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ अब चालान नहीं, बल्कि सीधी कार्रवाई की जाएगी। आगामी गुरुवार यानी 18 दिसंबर से दिल्ली में वाहन चालकों के लिए नियम पूरी तरह बदलने जा रहे हैं।READ ALSO:-यमुना एक्सप्रेसवे पर मौत का तांडव: कोहरे के कारण आपस में भिड़ीं बसें और कारें, 13 लोगों की जलकर मौत, 70 से ज्यादा घायल
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पेट्रोल पंप पर नया नियम: 'सर्टिफिकेट दिखाओ, तेल भराओ'

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दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC - Pollution Under Control Certificate) नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा।
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    यह नियम 18 दिसंबर (गुरुवार) से पूरी दिल्ली में लागू हो जाएगा।
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    पेट्रोल पंपों पर वाहनों के पीयूसीसी की जांच की जाएगी।
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    सरकार का मकसद साफ है कि बिना जांच वाली गाड़ियां सड़कों पर दौड़कर हवा को और जहरीला न बनाएं। इसके लिए पेट्रोल पंपों और प्रमुख चौराहों पर कैमरों का इस्तेमाल भी किया जाएगा जो एक्सपायर्ड सर्टिफिकेट वाली गाड़ियों को ट्रैक करेंगे।
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BS-6 से पुरानी गाड़ियों की 'नो एंट्री' और सीलिंग 

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सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, बल्कि पुरानी गाड़ियों की एंट्री पर भी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
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    सीलिंग की कार्रवाई: सरकार की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, अगर दिल्ली के बाहर की कोई भी गाड़ी, जो BS-6 (Bharat Stage 6) मानक से कम है, दिल्ली की सीमा में प्रवेश करती है, तो उसे तुरंत सील कर दिया जाएगा। यह नियम प्राइवेट गाड़ियों पर भी समान रूप से लागू होगा।
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    कंस्ट्रक्शन ट्रकों पर रोक: धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए, निर्माण सामग्री (Construction Material) ले जाने वाले किसी भी ट्रक के दिल्ली में प्रवेश करने पर उसे भी जब्त/सील करने का आदेश दिया गया है।
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पर्यावरण मंत्री का दावा: 'हालात नियंत्रण में हैं'

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दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में प्रदूषण के हालात 'फेयर स्टेज' (Fair Stage) पर हैं और पिछले 10 सालों से स्थिति इसी स्तर पर है।
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    आंकड़े: सिरसा ने बताया, "पिछले साल इसी समय AQI 380 था, जो अभी 363 है। हमने नवंबर में पिछले साल की तुलना में AQI को 20 पॉइंट कम किया है।"
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    कूड़े के पहाड़: मंत्री ने जानकारी दी कि सरकार गाजीपुर और अन्य लैंडफिल साइट्स पर कूड़े के पहाड़ों की ऊंचाई 15 मीटर तक कम करने में सफल रही है। 202 एकड़ जमीन में से 45 एकड़ को पूरी तरह साफ कर लिया गया है।
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    ईवी बसें: प्रदूषण कम करने के लिए 5300 में से 3427 इलेक्ट्रिक बसें (EV Buses) सड़कों पर उतार दी गई हैं।
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विपक्ष पर हमला: 'प्रदूषण उन्हीं की देन है'

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मनजिंदर सिंह सिरसा ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बिना नाम लिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, "दिल्ली से भगोड़े अभी फिल्म देख रहे हैं। प्रदूषण उन्हीं की दी हुई बीमारी है और अब वही प्रोटेस्ट कर रहे हैं। पिछले साल तक इन्होंने कुछ नहीं किया।" उन्होंने बताया कि इंडस्ट्रियल एरिया में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर डीपीसीसी (DPCC) ने 2 हजार से ज्यादा नोटिस जारी किए हैं, जो 9 करोड़ रुपये से अधिक के हैं। इसके अलावा 3200 डीजल जनरेटरों पर कार्रवाई की गई है और बायोमास बर्निंग रोकने के लिए 10 हजार हीटर बांटे गए हैं।
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आम आदमी पार्टी का 'थाली बजाओ' प्रदर्शन

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दूसरी ओर, दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर राजनीति भी चरम पर है। आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ताओं ने आज सचिवालय की सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। AAP नेता सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने थाली बजाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सौरभ भारद्वाज ने कहा, "हम यहां थाली बजाकर सोई हुई दिल्ली सरकार को जगाने आए हैं। सरकार प्रदूषण कंट्रोल करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।"
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साइंटिस्ट की टीम करेगी निगरानी

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सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए एक विशेष 'साइंटिस्ट टीम' (Team of Scientists) का गठन किया है। इस टीम ने 12 तारीख को अपनी पहली बैठक भी कर ली है। यह टीम रियल टाइम डेटा के आधार पर सरकार को सुझाव देगी कि किन इलाकों में और सख्ती बरतने की जरूरत है।
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18 दिसंबर से लागू होने वाले इन नियमों से दिल्ली की जनता को थोड़ी परेशानी जरूर हो सकती है, लेकिन सांसों पर आए संकट को देखते हुए ये कदम जरूरी माने जा रहे हैं।