खबरीलाल डेस्क
भारत में नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में एक राज्य से दूसरे राज्य में शिफ्ट होने वाले लाखों लोगों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने निजी वाहनों के इस्तेमाल को आसान बनाने के लिए वाहन री-रजिस्ट्रेशन नियम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है। इस नए प्रस्ताव के तहत, अब किसी भी गाड़ी को बिना नए रजिस्ट्रेशन के दूसरे राज्य में रखने की समय सीमा को एक साल से बढ़ाकर तीन साल किया जा सकता है। यह कदम सरकार की "इज ऑफ लिविंग" (जीवनयापन में सुगमता) पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।READ ALSO:-मुज़फ्फ़रनगर में नशे के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़: 25 लाख के 76,800 नशीले कैप्सूल बरामद, 'ऑपरेशन सवेरा' के तहत 6 तस्कर गिरफ्तार
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अक्सर दूसरे राज्यों में अपनी गाड़ी ले जाने पर वाहन मालिकों को ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग और भारी भरकम चालान का सामना करना पड़ता है। नए वाहन री-रजिस्ट्रेशन नियम के लागू होने से न सिर्फ कागजी कार्रवाई का बोझ कम होगा, बल्कि आम जनता को मानसिक और आर्थिक परेशानी से भी बड़ी मुक्ति मिलेगी। 
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क्या है मौजूदा और प्रस्तावित वाहन री-रजिस्ट्रेशन नियम?

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वर्तमान में, मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा 47 के अनुसार, यदि कोई वाहन मालिक अपनी गाड़ी को उसके रजिस्टर्ड राज्य से बाहर किसी अन्य राज्य में 12 महीने (एक साल) से ज्यादा समय तक रखता है, तो उसे उस नए राज्य में अपनी गाड़ी का री-रजिस्ट्रेशन (पुन: पंजीकरण) करवाना अनिवार्य होता है।
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इस प्रक्रिया में पुराने राज्य के आरटीओ (RTO) से एनओसी (NOC) लेना, नए राज्य में दोबारा रोड टैक्स भरना और फिर नए नंबर प्लेट के लिए आवेदन करना शामिल होता है। यह एक बेहद जटिल और थकाऊ प्रक्रिया है। इसी समस्या को सुलझाने के लिए सरकार ने अनौपचारिक मंत्रियों के समूह (iGoM) के समक्ष मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन का ड्राफ्ट पेश किया है, जिसमें वाहन री-रजिस्ट्रेशन नियम के तहत इस अवधि को 1 से बढ़ाकर 3 साल करने का प्रस्ताव रखा गया है।
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किन्हें मिलेगा इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा?

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सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस नए वाहन री-रजिस्ट्रेशन नियम का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को फायदा पहुंचाना है, जिन्हें अपने करियर या पढ़ाई के कारण बार-बार शहर बदलना पड़ता है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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    ट्रांसफरेबल जॉब वाले कर्मचारी: बैंक कर्मचारी, आईटी प्रोफेशनल्स और सरकारी कर्मचारी जिनका हर 2-3 साल में तबादला होता है।
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    छात्र (Students): जो उच्च शिक्षा के लिए 2 या 3 साल के डिग्री कोर्स के लिए दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों में जाते हैं।
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    अस्थायी प्रोजेक्ट वर्कर: वे पेशेवर जो किसी विशेष प्रोजेक्ट के लिए कुछ सालों तक दूसरे राज्य में रहते हैं और फिर अपने गृह राज्य लौट आते हैं।
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अधिकारियों का कहना है कि किसी नए राज्य में मात्र एक या दो साल के लिए गाड़ी का री-रजिस्ट्रेशन कराना और फिर वापस अपने गृह राज्य आकर उसे कैंसिल कराना लोगों के लिए अनावश्यक सिरदर्द बन जाता है। नया नियम इस समस्या को जड़ से खत्म कर देगा।
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भारत (BH) सीरीज और नए नियम का कनेक्शन

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मंत्रालय का यह भी मानना है कि यह नया वाहन री-रजिस्ट्रेशन नियम मौजूदा भारत (BH) सीरीज रजिस्ट्रेशन के पूरक के रूप में काम करेगा। बीएच सीरीज पहले से ही पात्र वाहन मालिकों (जैसे रक्षा कर्मियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कर्मचारियों) को बिना नए रजिस्ट्रेशन के एक राज्य से दूसरे राज्य में बेरोकटोक जाने की इजाजत देती है। हालांकि, जो लोग बीएच सीरीज के लिए पात्र नहीं हैं, उनके लिए यह 3 साल की छूट वाली नीति किसी वरदान से कम नहीं होगी।
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विशेषज्ञों और उपभोक्ता कार्यकर्ताओं की राय: क्या यह प्रस्ताव काफी है?

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हालांकि इस कदम की चौतरफा तारीफ हो रही है, लेकिन कुछ उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं (Consumer Rights Activists) का मानना है कि इस नियम में अभी और सुधार की गुंजाइश है।
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उपभोक्ता संरक्षण वकील बेजोन कुमार मिश्रा ने बताया कि वाहन मालिकों के सामने सबसे बड़ा और असली मुद्दा 'दोहरा कराधान' (Double Taxation) है। जब एक व्यक्ति अपने गृह राज्य में 15 साल का लाइफटाइम रोड टैक्स दे चुका होता है, तो दूसरे राज्य में जाने पर उससे दोबारा टैक्स वसूलना अनुचित है।
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"हजारों लोगों को हो रही है बेवजह परेशानी"

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दिल्ली परिवहन विभाग के पूर्व डिप्टी कमिश्नर अनिल छिकारा ने सरकार के इस प्रस्ताव का खुले दिल से स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि मौजूदा एक साल के नियम के कारण दूसरे राज्यों में काम करने वाले हजारों लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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छिकारा ने कहा, "वाहनों को तीन साल तक दूसरे राज्य में रहने की अनुमति देने का प्रस्ताव एक शानदार और स्वागत योग्य कदम है। कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस एक साल के बाद फिर से पंजीकरण पर बहुत जोर देते हैं। ऐसा न करने पर वाहन मालिकों को अक्सर प्रताड़ित किया जाता है और लाखों रुपये के चालान काट दिए जाते हैं। इन वाहन मालिकों के साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है जैसे उन्होंने कोई संगीन अपराध कर दिया हो, जबकि असल में उन्होंने अपना रोड टैक्स पूरी तरह चुकाया होता है।"
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उन्होंने आगे स्पष्ट किया, "चूंकि VAHAN पोर्टल (वाहन डेटाबेस) अब पूरे भारत में आम हो चुका है, इसलिए गाड़ियों के एक राज्य से दूसरे राज्य में आने-जाने में ज्यादा लचीलापन होना चाहिए। बीएच सीरीज अच्छी है, लेकिन उसकी अपनी सीमाएं हैं।" 
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ट्रांसपोर्टर्स की मांग: री-रजिस्ट्रेशन की जरूरत ही खत्म होनी चाहिए

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जहां एक ओर निजी वाहन मालिक इस 3 साल वाले वाहन री-रजिस्ट्रेशन नियम से खुश हैं, वहीं कमर्शियल ट्रांसपोर्टर्स का मानना ​​है कि सुधार को एक कदम और आगे ले जाना चाहिए। उनका तर्क है कि री-रजिस्ट्रेशन की जरूरत को पूरी तरह से ही खत्म कर दिया जाना चाहिए।
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ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, दिल्ली के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने स्पष्ट रूप से कहा कि गाड़ियों को पूरे भारत में बिना किसी रोक-टोक के चलने की अनुमति होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "सरकार को एक ऐसी नीति लानी चाहिए जिससे गाड़ियों को देश के सभी राज्यों में बिना किसी बाधा के इस्तेमाल किया जा सके। जगह बदलने के बाद दोबारा रजिस्ट्रेशन की जरूरत ही क्यों पड़े? ट्रक हर दिन पूरे देश की सीमाएं पार करते हैं। गाड़ियां पूरे भारत में घूमने के लिए बनी हैं, न कि किसी एक राज्य की सीमा तक सीमित रहने के लिए। अगर मेरे ऑफिस दिल्ली और उत्तराखंड दोनों जगह हैं, तो जाहिर सी बात है मेरी गाड़ी दोनों जगह इस्तेमाल होगी।" 
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इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और जुर्माने के नए नियम

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इस बहुप्रतीक्षित वाहन री-रजिस्ट्रेशन नियम के अलावा, सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर वाहन कानून में एक नया नियम जोड़ने का भी प्रस्ताव दिया है। इस नए ड्राफ्ट के तहत सभी राज्य सरकारों को छह महीने के अंदर 'फैसला सुनाने वाली अथॉरिटी' (Adjudicating Authority) नियुक्त करनी होगी। साथ ही, जुर्माने पर अतिरिक्त ब्याज (compounding penalties) वसूलने के लिए एक पारदर्शी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी बनाना होगा।
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यह अहम बदलाव मोटर वाहन अधिनियम के तहत कई छोटे-मोटे अपराधों को 'अपराध की श्रेणी' (Decriminalization) से बाहर करने के बाद किया गया है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि लोगों को छोटे ट्रैफिक उल्लंघनों के लिए अब कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि कार्यकारी अधिकारी ही इसका निपटारा कर सकेंगे, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
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कुल मिलाकर, सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा लाया जा रहा यह प्रस्तावित वाहन री-रजिस्ट्रेशन नियम भारत के परिवहन क्षेत्र में एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। अगर इसे कैबिनेट और संसद की मंजूरी मिल जाती है, तो इससे कागजी कार्रवाई का झंझट लगभग खत्म हो जाएगा, अनुपालन का बोझ कम होगा और सबसे महत्वपूर्ण बात—उन लाखों पेशेवरों, छात्रों और परिवारों को एक बड़ी राहत मिलेगी, जो अपने काम या भविष्य के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन करते हैं। यह प्रस्ताव सही मायने में "एक देश, एक नियम" की दिशा में एक बहुत मजबूत कदम है।