उत्तर प्रदेश पुलिस इन दिनों राज्य भर में संगठित अपराध और नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में मुजफ्फरनगर जिले से एक बड़ी सफलता की खबर सामने आई है। नई मंडी कोतवाली पुलिस और एसओजी (SOG - Special Operations Group) की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मुजफ्फरनगर में नशीले कैप्सूल के एक विशाल और सक्रिय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने 'ऑपरेशन सवेरा' (Operation Savera) अभियान के तहत छापेमारी कर छह शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 76,800 प्रतिबंधित नशीले NRX कैप्सूल बरामद हुए हैं। बाजार में इन नशीले कैप्सूलों की कीमत लगभग 20 से 25 लाख रुपये आंकी जा रही है। READ ALSO:-यूपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार: सड़कों पर तैरने लगी कारें, वेस्ट यूपी से लेकर पूर्वांचल तक 75 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
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कैसे हुई मुजफ्फरनगर में नशीले कैप्सूल की बरामदगी?
\r\n\r\nमंगलवार दोपहर 2 बजे पुलिस कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसपी सिटी (SP City) अमृत जैन ने इस पूरे ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी मीडिया के साथ साझा की। उन्होंने बताया कि नई मंडी पुलिस की एक टीम बिलासपुर चौराहे पर नियमित वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान एसओजी और पुलिस को मुखबिर से एक बेहद गुप्त और अहम सूचना मिली। सूचना यह थी कि कूकड़ा ग्राउंड इलाके में कुछ संदिग्ध लोग बड़ी मात्रा में नशीली दवाओं की खेप लेकर पहुंचे हैं और वहां इन दवाओं के बंटवारे की तैयारी चल रही है।
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इस पक्की सूचना के आधार पर पुलिस ने बिल्कुल देरी नहीं की। नई मंडी पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने कूकड़ा ग्राउंड के पास तुरंत घेराबंदी कर ली। पुलिस की भनक लगते ही आरोपियों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन टीम की मुस्तैदी के चलते छह तस्करों को रंगे हाथों धर दबोचा गया। तलाशी लेने पर पुलिस को मौके से चार बड़े कार्टन मिले, जिनमें भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीली दवाइयां रखी हुई थीं।
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स्पासमोर और स्पासमेड: क्या हैं ये नशीले NRX कैप्सूल?
\r\n\r\nपुलिस के अनुसार, जब्त किए गए चार कार्टन में कुल 76,800 प्रतिबंधित कैप्सूल पाए गए। ये कैप्सूल मुख्य रूप से 'स्पासमोर' (Spasmor) और 'स्पासमेड' (Spasmed) ब्रांड के बताए जा रहे हैं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, इन कैप्सूलों में 'ट्रामाडोल' (Tramadol) जैसे प्रतिबंधित और अत्यधिक संवेदनशील तत्व होते हैं।
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ट्रामाडोल एक प्रकार का ओपिओइड (Opioid) दर्द निवारक है, जिसका उपयोग केवल अत्यधिक दर्द की स्थिति में पंजीकृत डॉक्टर के पर्चे (Prescription) पर ही किया जा सकता है। इसे NRX (Narcotics Prescription) श्रेणी में रखा गया है। इसका बिना चिकित्सकीय सलाह के लगातार सेवन करने से व्यक्ति को इसकी लत लग जाती है और यह सीधा नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) पर असर डालता है। लेकिन गिरोह के सदस्य इन जीवन रक्षक दवाओं को अवैध रूप से थोक में खरीदकर नशे के रूप में युवाओं को ऊंचे दामों पर बेच रहे थे।
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कौन हैं गिरफ्तार आरोपी और कैसे चल रहा था नेटवर्क?
\r\n\r\nएसपी सिटी अमृत जैन ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस अवैध कारोबार में कई लोग शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों की पहचान जावेद, नौशाद, मोहम्मद आजाद, नवीन कुमार, मोहम्मद कासिफ और सचिन गुप्ता के रूप में हुई है। पकड़े गए तस्करों के पास से पुलिस ने पांच मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनमें तस्करी के इस पूरे सिंडिकेट के कई अहम राज छिपे होने की संभावना है।
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कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सप्लायर सुमित नाम का एक व्यक्ति है, जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। सुमित ही इन प्रतिबंधित दवाओं की बड़ी खेप थोक बाजार से अवैध तरीके से उपलब्ध कराता था। इसके बाद ये तस्कर इन दवाओं को छोटी-छोटी पुड़िया और पत्तों में बांटकर स्थानीय ब्लैक मार्केट में, खासकर युवाओं और छात्रों के बीच, कई गुना अधिक कीमत पर बेचते थे। सुमित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कई विशेष टीमों का गठन कर दिया है और उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
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एसपी सिटी का कड़ा संदेश: फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक की होगी जांच
\r\n\r\nएसपी सिटी अमृत जैन ने स्पष्ट किया है कि मुजफ्फरनगर पुलिस की यह कार्रवाई केवल इन छह तस्करों की गिरफ्तारी और दवाओं की बरामदगी तक ही सीमित नहीं रहेगी। पुलिस अब इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने की तैयारी कर रही है। मुजफ्फरनगर में नशीले कैप्सूल की सप्लाई चेन को पूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि पुलिस इस गिरोह के 'फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज' (Forward and Backward Linkages) को खंगाल रही है। इसका मतलब है कि पुलिस यह पता लगा रही है कि सुमित इन दवाओं को किस दवा कंपनी, डिस्ट्रीब्यूटर या राज्य से खरीदकर ला रहा था (बैकवर्ड लिंक) और मुजफ्फरनगर के अलावा किन-किन मेडिकल स्टोरों या पैडलर्स को ये दवाइयां सप्लाई की जा रही थीं (फॉरवर्ड लिंक)। इस अवैध खरीद-फरोख्त के नेटवर्क में अन्य राज्यों के कनेक्शन की भी गहनता से जांच की जा रही है। अगर इस मामले में किसी मेडिकल स्टोर संचालक या थोक विक्रेता की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसका लाइसेंस रद्द कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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'ऑपरेशन सवेरा' का असर और पुलिस टीम को बधाई
\r\n\r\nमुजफ्फरनगर पुलिस का 'ऑपरेशन सवेरा' मुख्य रूप से भटके हुए युवाओं को अपराध और नशे की दलदल से बाहर निकालने और समाज में एक नया सवेरा लाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इस सफल ऑपरेशन ने साबित कर दिया है कि पुलिस का मुखबिर तंत्र और खुफिया विभाग पूरी तरह से सक्रिय है। एसपी सिटी अमृत जैन ने इस बेहतरीन 'गुड वर्क' के लिए सीओ नई मंडी राजू कुमार साव, प्रभारी निरीक्षक आनंद देव मिश्र और पूरी एसओजी टीम की पीठ थपथपाई और उन्हें बधाई दी।
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अंततः यह कहा जा सकता है कि नई मंडी पुलिस और एसओजी द्वारा मुजफ्फरनगर में नशीले कैप्सूल की यह भारी बरामदगी एक ऐतिहासिक और सराहनीय कदम है। 76,800 प्रतिबंधित NRX कैप्सूल का पकड़ा जाना इस बात का प्रमाण है कि ड्रग माफिया युवाओं की रगों में जहर घोलने के लिए किस हद तक जा सकते हैं। 'ऑपरेशन सवेरा' के तहत 6 आरोपियों की गिरफ्तारी से नशे के इस काले कारोबार की कमर टूट गई है। हालांकि, मास्टरमाइंड सुमित की गिरफ्तारी और सप्लाई चेन के असली स्रोत का पर्दाफाश होना अभी बाकी है। समाज और अभिभावकों को भी जागरूक रहने की जरूरत है, ताकि युवा पीढ़ी को इस घातक नशे की गिरफ्त से बचाया जा सके।
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मुजफ्फरनगर की नई मंडी पुलिस और एसओजी टीम ने 'ऑपरेशन सवेरा' के तहत कूकड़ा ग्राउंड के पास छापेमारी कर नशे के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से 6 तस्करों (जावेद, नौशाद, आजाद, नवीन, कासिफ और सचिन) को गिरफ्तार कर उनके पास से 76,800 प्रतिबंधित NRX (स्पासमोर और स्पासमेड) कैप्सूल बरामद किए हैं, जिनकी कीमत 20-25 लाख रुपये है। मुख्य सप्लायर सुमित अभी फरार है। पुलिस अब गिरोह के अंतरराज्यीय कनेक्शन और पूरी सप्लाई चेन की जांच कर रही है।
Sabse pehle comment karne wale banein.