खबरीलाल डेस्क
भारत जैसे विशाल और तेजी से विकास कर रहे देश के सामने वर्तमान में दो सबसे बड़ी चुनौतियां हैं— पहली, युवाओं के लिए रोजगार (Employment) के पर्याप्त अवसर पैदा करना, और दूसरी, देश की सड़कों को 'मौत के जाल' (Death Traps) से मुक्त करना। क्या कोई एक ऐसी योजना हो सकती है जो इन दोनों महा-संकटों का एक साथ समाधान कर सके? केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री (Union Minister of Road Transport and Highways) नितिन गडकरी ने इसका एक सटीक और दूरदर्शी खाका देश के सामने पेश कर दिया है। इसे 'मिशन एम्प्लॉयमेंट' (Mission Employment) कहा जाए या 'मिशन रोड सेफ्टी' (Mission Road Safety), यह योजना भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर और युवाओं की किस्मत बदलने वाली है।READ ALSO:-मौसम का महा-अलर्ट: आसमान से बरसेगी आफत! 27 मार्च से कई राज्यों में भारी बारिश, 70 की रफ्तार से आंधी और ओलावृष्टि की खौफनाक चेतावनी
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राजधानी दिल्ली में आयोजित एक भव्य 'सड़क सुरक्षा अभियान' (Road Safety Campaign) के दौरान, बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट यानी अभिनेता आमिर खान (Aamir Khan) के साथ एक विशेष बातचीत में नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि सरकार अब उद्योग जगत (Corporate Sector) के साथ मिलकर देश के 120 आकांक्षी जिलों और 500 पिछड़े ब्लॉकों में अत्याधुनिक 'ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर' खोलने जा रही है। इस महात्वाकांक्षी पहल का सीधा लक्ष्य अगले 5 वर्षों में देश के करीब एक करोड़ (1 Crore) युवाओं को रोजगार के सुनहरे अवसर प्रदान करना है।
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आइए, नितिन गडकरी के इस 'मास्टरस्ट्रोक', भारत में ड्राइवरों की भारी कमी, सड़क हादसों के खौफनाक आंकड़ों और इस योजना के पीछे के संपूर्ण अर्थशास्त्र (Economics) का गहराई से विश्लेषण करते हैं।
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'मिशन एम्प्लॉयमेंट' का ब्लूप्रिंट - कैसे पैदा होंगी 1 करोड़ नौकरियां? (The Roadmap to 1 Crore Jobs)

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बेरोजगारी के इस दौर में 1 करोड़ नौकरियों का आंकड़ा किसी चमत्कार से कम नहीं लगता। लेकिन नितिन गडकरी, जिन्हें उनके विजनरी आइडियाज (Visionary Ideas) और तेज क्रियान्वयन (Execution) के लिए जाना जाता है, उन्होंने इसका पूरा गणित (Mathematics) समझाया है।
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22 लाख प्रशिक्षित ड्राइवरों की तत्काल कमी 

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भारत का लॉजिस्टिक्स (Logistics) और ई-कॉमर्स (E-commerce) सेक्टर इस समय बूम (Boom) पर है। हाईवे और एक्सप्रेसवे का जाल बिछ चुका है, ट्रकों और कमर्शियल वाहनों की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर है। लेकिन, सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इन वाहनों को चलाने के लिए देश में कुशल ड्राइवरों का भारी टोटा है। नितिन गडकरी ने चौंकाने वाला आंकड़ा देते हुए बताया कि भारत में इस समय लगभग 22 लाख प्रशिक्षित कमर्शियल ड्राइवरों की कमी (Shortage) है। माल ढुलाई (Freight), कैब एग्रीगेटर्स (Ola, Uber), स्कूल बसें और टूर एंड ट्रैवल इंडस्ट्री इस कमी से जूझ रही है।
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आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) पर फोकस क्यों?

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सरकार ने इस योजना के लिए मेट्रो शहरों को नहीं, बल्कि देश के 120 आकांक्षी जिलों और 500 सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े ब्लॉकों को चुना है।
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    क्या है रणनीति? पिछड़े इलाकों के युवाओं के पास अक्सर उच्च शिक्षा या बड़ी डिग्रियां नहीं होतीं। ऐसे में ड्राइविंग एक ऐसा कौशल (Skill) है, जिसे सीखकर एक युवा तुरंत 20,000 से 40,000 रुपये महीने तक की सम्मानजनक नौकरी पा सकता है।
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    इंडस्ट्री का साथ: सरकार इन हाई-टेक ड्राइविंग स्कूलों को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड और ऑटोमोबाइल कंपनियों (Tata, Ashok Leyland, Maruti आदि) के सहयोग से खोलेगी।
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    वर्तमान स्थिति: मंत्री महोदय ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सरकार पहले ही देश में 200 अत्याधुनिक ड्राइविंग स्कूल शुरू कर चुकी है, जिनके परिणाम बेहद शानदार रहे हैं।
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एक प्रशिक्षित ड्राइवर न केवल देश की अर्थव्यवस्था के पहिए को घुमाता है, बल्कि वह सड़क पर अपनी और दूसरों की जान की भी हिफाजत करता है।
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भारत की सड़कों का खूनी सच - हर साल 1.8 लाख मौतें (The Grim Reality of Road Accidents)

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ड्राइविंग स्कूलों की जरूरत सिर्फ रोजगार के लिए नहीं, बल्कि देश को एक 'राष्ट्रीय त्रासदी' (National Tragedy) से बचाने के लिए भी है। नितिन गडकरी हमेशा से सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों को लेकर बेहद भावुक और मुखर रहे हैं। उन्होंने जो आंकड़े पेश किए, वे किसी भी युद्ध या महामारी से ज्यादा डरावने हैं।
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हादसों का डरावना अर्थशास्त्र और जनहानि:

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    5 लाख दुर्घटनाएं: भारत की सड़कों पर हर साल लगभग 5,00,000 (पांच लाख) सड़क दुर्घटनाएं होती हैं।
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    1.8 लाख मौतें: इन हादसों में हर साल लगभग 1,80,000 (एक लाख अस्सी हजार) लोगों की बेरहमी से जान चली जाती है। यानी हर दिन करीब 500 लोग अपने घर वापस नहीं लौट पाते।
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    युवाओं की मौत (The Youth Demographics): सबसे बड़ा दुख यह है कि इन सड़क हादसों में जान गंवाने वाले 66 प्रतिशत पीड़ित 18 से 44 वर्ष की आयु वर्ग के होते हैं। यह वह उम्र है जब एक युवा अपने परिवार का भरण-पोषण करता है और देश की तरक्की में योगदान देता है।
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    GDP को 3% का नुकसान: जब कोई युवा मरता है या अपाहिज होता है, तो सिर्फ एक परिवार नहीं उजड़ता, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी झटका लगता है। गडकरी ने बताया कि इन सड़क हादसों के कारण भारत की कुल जीडीपी (GDP) का करीब 3 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो जाता है। यह लाखों करोड़ रुपये का नुकसान है।
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अकुशल (Unskilled) और बिना ट्रेनिंग के ड्राइविंग लाइसेंस पा लेने वाले ड्राइवर इन हादसों का एक बहुत बड़ा कारण हैं। इसीलिए, नए ड्राइविंग स्कूल इस समस्या की जड़ पर प्रहार करेंगे।
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सड़क दुर्घटनाओं के 5 मुख्य कारण (The 5 Pillars of Road Crashes)

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नितिन गडकरी ने समस्या का सिर्फ रोना नहीं रोया, बल्कि एक इंजीनियर की तरह दुर्घटनाओं के 5 मुख्य कारणों (Root Causes) का बारीकी से विश्लेषण किया और बताया कि सरकार उन्हें सुधारने के लिए क्या कर रही है।
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1. सड़क डिजाइन और इंजीनियरिंग (Road Engineering & Black Spots)

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सड़कें सिर्फ कोलतार बिछाने से नहीं बनतीं; उनका अलाइनमेंट (Alignment) वैज्ञानिक होना चाहिए। गलत डिजाइन के कारण सड़कों पर 'ब्लैक स्पॉट' (Black Spots - वो जगहें जहां बार-बार एक्सीडेंट होते हैं) बन जाते हैं।
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    40,000 करोड़ का निवेश: गडकरी ने बताया कि सरकार ने देश भर में हजारों ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की है और उन्हें सुधारने (जैसे अंडरपास बनाना, घुमाव कम करना, साइनेज लगाना) के लिए करीब 40,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
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    पहाड़ों पर भूस्खलन (Landslides): पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन हादसों का बड़ा कारण है। सरकार ने 350 ऐसे स्थानों की पहचान की है, जिनमें से 280 को आधुनिक इंजीनियरिंग (रॉक फॉल नेटिंग आदि) से सुरक्षित किया जा चुका है।
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2. वाहन निर्माण (Automobile Engineering)

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गाड़ियों का सुरक्षित होना जरूरी है। गडकरी ने बताया कि भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग इस समय दुनिया में तीसरे स्थान (3rd Position) पर है और सरकार का टारगेट इसे अगले 5 साल में दुनिया का 'नंबर 1' उद्योग बनाना है। भारत NCAP (New Car Assessment Program) के जरिए अब देश में ही गाड़ियों की क्रैश टेस्टिंग (Crash Testing) की जा रही है, ताकि कारों में 6 एयरबैग और मजबूत ढांचा सुनिश्चित किया जा सके।
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3. कानून का सही पालन न होना (Lack of Enforcement)

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सड़क पर नियम तो हैं, लेकिन उनका पालन कराने वाली व्यवस्था कमजोर है। ओवरस्पीडिंग, रॉन्ग-साइड ड्राइविंग और रेड लाइट जंपिंग पर लगाम लगाने के लिए अब चौराहों पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) और हाई-टेक कैमरे लगाए जा रहे हैं।
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4. लोगों का व्यवहार (Human Behavior & Awareness)

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यह सबसे जटिल कारण है। भारतीय चालकों में लेन-ड्राइविंग (Lane Driving) का अनुशासन नहीं है। लोग सड़क पर धैर्य खो देते हैं। इसी मानवीय व्यवहार को सुधारने के लिए सरकार 'जागरूकता अभियानों' पर जोर दे रही है।
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5. सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी (Ignoring Safety Gears)

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गडकरी ने एक बहुत ही साधारण लेकिन चौंकाने वाला तथ्य रखा:
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    केवल हेलमेट (Helmet) न पहनने के कारण हर साल हजारों मौतें होती हैं। अगर सभी दोपहिया चालक सही मानक का हेलमेट पहनें, तो लगभग 50,000 लोगों की जान बचाई जा सकती है।
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    इसी तरह, कारों में सिर्फ सीट बेल्ट (Seat Belt) लगाने (पीछे बैठने वालों के लिए भी) से करीब 30,000 लोगों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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राहत की बात: मंत्री ने यह भी बताया कि पुलिस की सख्ती और एल्कोमीटर (Alcometer) के बढ़ते इस्तेमाल के कारण 'नशे में ड्राइविंग' (Drunk Driving) के मामलों में पिछले कुछ समय में कमी दर्ज की गई है।
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आमिर खान की अपील - "पुलिस के डर से नहीं, अपनी जिंदगी के लिए पहनें हेलमेट"

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सड़क सुरक्षा एक ऐसा विषय है जो जन-आंदोलन (Mass Movement) के बिना सफल नहीं हो सकता। इसी जन-आंदोलन को रफ्तार देने के लिए इस अभियान में बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान (Aamir Khan) ने शिरकत की। आमिर खान अपने शो 'सत्यमेव जयते' से ही सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए जाने जाते हैं।
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आमिर खान ने नितिन गडकरी के विजन की तारीफ करते हुए सड़क सुरक्षा के 'मनोवैज्ञानिक' (Psychological) पहलू पर बात की।
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डर बनाम सुरक्षा (Fear vs. Safety Mindset)

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आमिर खान ने भारतीय समाज की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करते हुए कहा, "हम अक्सर देखते हैं कि दोपहिया वाहन चालक चौराहे पर पुलिस वाले को देखकर हेलमेट पहन लेते हैं और चौराहा पार करते ही उसे उतारकर गाड़ी के हैंडल पर टांग लेते हैं। लोग हेलमेट चालान (Challan) के डर से पहनते हैं, जबकि उन्हें यह समझना चाहिए कि हेलमेट उनकी अपनी खोपड़ी और जिंदगी को बचाने के लिए है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि सड़क सुरक्षा केवल कड़े नियमों (Rules) से नहीं आएगी, बल्कि यह लोगों की 'सोच' (Mindset) और सिविक सेंस (Civic Sense) से जुड़ा मामला है। जब तक आम आदमी अपनी जान की कीमत खुद नहीं समझेगा, तब तक कोई भी सरकार हादसों को शून्य नहीं कर सकती।
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स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा (Seatbelts in School Buses)

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अभिनेता ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील सुझाव भी मंच पर रखा। उन्होंने मांग की कि स्कूल बसों में सफर करने वाले मासूम बच्चों के लिए भी 'सीट बेल्ट' अनिवार्य (Mandatory) कर दी जानी चाहिए। अक्सर स्कूल बसों के दुर्घटनाग्रस्त होने या अचानक ब्रेक लगने पर बच्चे सीटों से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। अगर बचपन से ही उन्हें सीट बेल्ट लगाने की आदत डाली जाएगी, तो बड़े होकर वे एक जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।
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'लॉजिस्टिक्स बूम' और ड्राइविंग का नया युग (The Future of the Indian Transport Sector)

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नितिन गडकरी का यह 'मिशन एम्प्लॉयमेंट' भारत के भविष्य की लॉजिस्टिक्स जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
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    ई-कॉमर्स का विस्तार: Amazon, Flipkart, Zomato, Swiggy जैसी कंपनियों के विस्तार के साथ ही 'लास्ट-माइल डिलीवरी' (Last-mile delivery) के लिए लाखों कमर्शियल चालकों की जरूरत है।
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    इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्रांति: ड्राइविंग स्कूल केवल पेट्रोल-डीजल की गाड़ियां चलाना नहीं सिखाएंगे, बल्कि युवाओं को नई पीढ़ी के इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) और अत्याधुनिक सेंसर वाली गाड़ियों को चलाने की तकनीकी ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
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    विदेशों में मांग (Global Demand): यूरोप, मध्य पूर्व (Middle East) और कनाडा जैसे देशों में कुशल भारतीय भारी-वाहन चालकों (Heavy Vehicle Drivers) की भारी मांग है। भारत सरकार के इन प्रमाणित 'ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर्स' से निकलने वाले युवाओं को विदेशों में भी लाखों रुपये के पैकेज पर आसानी से नौकरी मिल सकेगी।
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सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का विजन बिल्कुल साफ है— "सड़कें सिर्फ गाड़ियां दौड़ाने के लिए नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को दौड़ाने के लिए हैं, और यह दौड़ सुरक्षित होनी चाहिए।"
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120 आकांक्षी जिलों और 500 ब्लॉकों में हाई-टेक ड्राइविंग सेंटर खोलने की यह पहल वास्तव में एक 'मास्टरस्ट्रोक' है। यह योजना एक तीर से कई निशाने साध रही है। एक तरफ यह ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के उन युवाओं के हाथों में स्टीयरिंग व्हील थमाकर उन्हें आत्मनिर्भर (Self-reliant) बनाएगी, जो बेरोजगारी के कारण भटकाव के रास्ते पर जा सकते थे। वहीं दूसरी तरफ, जब ये कुशल और अनुशासित ड्राइवर भारत के एक्सप्रेसवे और हाईवे पर गाड़ियां लेकर उतरेंगे, तो यकीनन देश में सड़क हादसों (Road Crashes) का वह डरावना ग्राफ तेजी से नीचे गिरेगा। आमिर खान की अपील और गडकरी की इच्छाशक्ति अगर धरातल पर पूरी तरह उतर गई, तो वह दिन दूर नहीं जब भारतीय सड़कें भी दुनिया की सबसे सुरक्षित सड़कों में गिनी जाएंगी।