खबरीलाल डेस्क
लखनऊ: किसी भी इंसान के जीवन के दो सबसे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज उसका जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र होते हैं। बच्चे के स्कूल में दाखिले से लेकर, पासपोर्ट बनवाने, वसीयत के निपटारे और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने तक—हर जगह इन दस्तावेजों की अनिवार्य रूप से जरूरत पड़ती है। लेकिन, उत्तर प्रदेश में इन्हें बनवाना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं था।:-READ ALSO:-मेरठ में ड्रग माफिया के साम्राज्य पर पुलिस का हथौड़ा: नशे के सौदागर ईशु की 3 करोड़ की संपत्ति कुर्क, ढोल-नगाड़ों के साथ हुई मुनादी
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आम जनता को एक छोटे से प्रमाण पत्र के लिए हफ्तों या महीनों तक नगर निगमों (Municipal Corporations) और सरकारी दफ्तरों की खाक छाननी पड़ती थी। फाइलों में होने वाली देरी, दस्तावेजों की जटिल जांच प्रक्रिया और बिचौलियों के दखल के कारण लोगों का काफी समय और पैसा बर्बाद होता था। लेकिन अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस पूरी पुरानी और सड़ी-गली व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंकने का ऐलान कर दिया है। सरकार ने 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) को बढ़ावा देते हुए जन्म और मृत्यु पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया को हाईटेक, पारदर्शी और सुपरफास्ट बना दिया है।
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नगर निगमों में शुरू हुए हाईटेक 'गवर्नेंस सेंटर' (Governance Centers)

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आम जनता की इस बड़ी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने प्रदेश के नगर निगमों में विशेष 'गवर्नेंस सेंटर' (Governance Centers) स्थापित करने की शुरुआत कर दी है। ये सेंटर पूरी तरह से वातानुकूलित, डिजिटल और पब्लिक-फ्रेंडली होंगे।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तैयार किए गए इन सेंटर्स का एकमात्र लक्ष्य सरकारी सेवाओं को जनता के दरवाजे तक तेजी से पहुंचाना है। नई व्यवस्था के तहत, जैसे ही कोई नागरिक इन गवर्नेंस सेंटर्स में अपने दस्तावेजों के साथ आवेदन (Application) जमा करेगा, उसी दिन (Same Day) प्रक्रिया पूरी करके उसे प्रमाण पत्र सौंप दिया जाएगा। इससे लोगों को बार-बार दफ्तर आने-जाने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी।
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कैबिनेट मंत्री एके शर्मा ने दी नए 'रजिस्ट्रेशन रूल्स 2026' की जानकारी

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हाल ही में राज्य सरकार ने 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण नियम 2026' (Birth and Death Registration Rules 2026) को कैबिनेट से मंजूरी दी है। लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा (A.K. Sharma) ने इस नई व्यवस्था की विस्तृत जानकारी जनता के साथ साझा की।
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उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस सिस्टम पर आधारित होगी। एप्लीकेशन जमा करने से लेकर, उसका वेरिफिकेशन (Verification) और अंतिम प्रमाण पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ी रहेगी (Integrated Online Platform)। इससे फाइलों के एक मेज से दूसरी मेज तक जाने में लगने वाला समय शून्य हो जाएगा।
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21 दिन का नियम: फ्री में बनेगा प्रमाण पत्र, मिलेगी डाउनलोड की सुविधा

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इस नई नीति में आम जनता की जेब और सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। नई व्यवस्था के तहत जो नियम लागू किए गए हैं, वे इस प्रकार हैं:
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    मुफ्त सेवा (Free of Cost): यदि किसी बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु की सूचना घटना के 21 दिनों के भीतर नगर निगम या संबंधित विभाग को दे दी जाती है, तो उसका प्रमाण पत्र बिल्कुल मुफ्त (बिना किसी सरकारी फीस के) जारी किया जाएगा।
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    देरी पर लगेगी लेट फीस: सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि 21 दिन की समय सीमा बीत जाती है, तो उसके बाद आवेदन करने पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है और नागरिकों को सरकार द्वारा तय की गई लेट फीस (Late Fee) का भुगतान करना होगा।
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    डिजिटल डाउनलोडिंग: अब नागरिकों को प्रमाण पत्र की हार्ड कॉपी लेने के लिए दफ्तर जाने की जरूरत नहीं है। एक बार प्रमाण पत्र जारी होने के बाद, आवेदक उसे अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर डिजिटल मीडियम (Digital Medium) के जरिए सीधे डाउनलोड कर सकेंगे। यह डिजिटल कॉपी हर जगह पूरी तरह से मान्य होगी।
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बिचौलियों की होगी छुट्टी, फर्जीवाड़ा रोकने में मिलेगी बड़ी कामयाबी

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पुरानी व्यवस्था में मैनुअल काम (हाथ से लिखे गए रजिस्टर) ज्यादा होने के कारण फर्जी जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह काफी सक्रिय थे। कई बार संपत्ति हड़पने या गलत उम्र दिखाकर नौकरी पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था।
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मंत्री एके शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस नए 'गवर्नेंस सेंटर' और सेंट्रलाइज्ड डिजिटल सिस्टम (Centralized Digital System) के लागू होने से फर्जीवाड़े पर 100% लगाम लगेगी। चूंकि सारा डेटाबेस ऑनलाइन सर्वर पर सुरक्षित रहेगा और आवेदन का वेरिफिकेशन सीधे संबंधित अस्पतालों या श्मशान/कब्रिस्तानों के रिकॉर्ड से डिजिटल रूप में क्रॉस-चेक किया जाएगा, इसलिए किसी भी तरह की हेराफेरी करना अब नामुमकिन हो जाएगा।
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लखनऊ में काम शुरू, पूर्वांचल के इन शहरों की है अगली बारी

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इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरे प्रदेश में एक साथ लागू करने के बजाय, सरकार इसे चरणबद्ध (Phased Manner) तरीके से लागू कर रही है ताकि सिस्टम में आने वाली तकनीकी खामियों को समय रहते दूर किया जा सके।
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नगर विकास मंत्री ने बताया कि राजधानी लखनऊ (Lucknow) के नगर निगम में अत्याधुनिक 'गवर्नेंस सेंटर' बनकर पूरी तरह से तैयार हो चुका है और यहां लोगों को एक दिन में सेवाएं मिलनी शुरू भी हो गई हैं। लखनऊ के सफल मॉडल को देखते हुए अब सरकार इसे पूर्वांचल के प्रमुख शहरों—वाराणसी (Varanasi), गोरखपुर (Gorakhpur) और प्रयागराज (Prayagraj) के नगर निगमों में भी शुरू करने जा रही है। बहुत जल्द ही प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों और उसके बाद नगर पालिकाओं में भी इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा।
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बुजुर्गों, महिलाओं और ग्रामीणों को मिलेगी सबसे बड़ी राहत

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अक्सर देखा गया है कि जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ती थी। उन्हें फॉर्म भरने या ऑनलाइन आवेदन करने की तकनीकी जानकारी नहीं होती थी, जिसका फायदा दलाल उठाते थे।
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नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, इन नए गवर्नेंस सेंटर्स में सिर्फ कंप्यूटर ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित कर्मचारियों (Trained Staff/Helpdesk) की भी विशेष रूप से तैनाती की गई है। ये कर्मचारी अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे नागरिकों की एप्लीकेशन भरने, उनके जरूरी दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करने और प्रमाण पत्र का प्रिंट आउट निकालकर उन्हें मुहैया करवाने में पूरी मदद करेंगे। यह हेल्पडेस्क सुनिश्चित करेगा कि कोई भी नागरिक परेशान न हो और उसे इधर-उधर भटकना न पड़े।
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'ईज ऑफ लिविंग' की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम

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जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र महज कागज का एक टुकड़ा नहीं हैं। बच्चे के स्कूल एडमिशन, पासपोर्ट बनवाने, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड बनवाने, बुजुर्गों की पेंशन चालू करवाने, बैंक खातों के नॉमिनी ट्रांसफर, जीवन बीमा (Life Insurance) का क्लेम लेने और पैतृक संपत्ति के हस्तांतरण जैसे सभी जरूरी कामों में यही दस्तावेज सबसे पहले मांगे जाते हैं।
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ऐसे में प्रमाण पत्र मिलने में होने वाली देरी लोगों के जीवन के जरूरी कामों को रोक देती थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का यह कदम साबित करता है कि शासन का फोकस अब केवल नीतियां बनाने पर नहीं, बल्कि 'गुड गवर्नेंस' (Good Governance) को धरातल पर उतारने पर है। निश्चित तौर पर, एक ही दिन में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने