खबरीलाल डेस्क
विदेश यात्रा की योजना बना रहे नागरिकों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। देश में अब पासपोर्ट बनवाना हुआ महंगा है, क्योंकि केंद्र सरकार ने इसकी फीस में बढ़ोतरी करने का एक बड़ा निर्णय लिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, पूरे 14 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पासपोर्ट के शुल्क ढांचे में यह संशोधन किया गया है। सरकार के इस कदम का सीधा असर नए आवेदकों और पासपोर्ट रिन्यू कराने वाले लोगों की जेब पर पड़ने वाला है।READ ALSO:-रूढ़ियों को तोड़ता 'इश्क': मुजफ्फरनगर में दो युवतियों ने लिए सात फेरे, पायल की मांग में प्रीति ने भरा सिंदूर; परिवार के खौफ से मांगी पुलिस सुरक्षा
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14 साल के लंबे अंतराल के बाद फीस में संशोधन

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भारतीय पासपोर्ट के शुल्क में आखिरी बार वर्ष 2012 में संशोधन किया गया था। तब से लेकर अब तक, यानी पिछले 14 सालों से पासपोर्ट की फीस स्थिर बनी हुई थी।
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विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले डेढ़ दशक में पासपोर्ट निर्माण की तकनीक, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक खर्चों में काफी बढ़ोतरी हुई है।
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इन्हीं बढ़ते खर्चों और आधुनिक तकनीकों (जैसे चिप वाले ई-पासपोर्ट) को ध्यान में रखते हुए सरकार ने शुल्क बढ़ाने का यह कदम उठाया है। इस फैसले के बाद अब नए नियमों के तहत ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
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पासपोर्ट अधिनियम 1967 के तहत अधिसूचना जारी

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विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह नई व्यवस्था 'पासपोर्ट अधिनियम, 1967' की धारा 24 के तहत लागू की जा रही है।
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सरकार ने इसके लिए बीते 20 जून को एक आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी की है। इस कानूनी प्रावधान के तहत सरकार को समय-समय पर यात्रा दस्तावेजों के शुल्क की समीक्षा करने और उनमें बदलाव करने का पूरा अधिकार है।
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इस नई अधिसूचना के जारी होने के बाद से ही देश भर के सभी पासपोर्ट सेवा केंद्रों (PSK) और डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्रों (POPSK) को नए नियमों के अनुसार तैयारी करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
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अन्य यात्रा दस्तावेजों पर भी लागू होगा नया नियम

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सरकार द्वारा जारी यह अधिसूचना केवल सामान्य पासपोर्ट तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 20 जून को जारी यह नियम अन्य सभी प्रकार के यात्रा दस्तावेजों (Travel Documents) पर भी समान रूप से लागू होगा।
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आपातकालीन और कूटनीतिक दस्तावेज भी दायरे में

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इसके तहत इमरजेंसी सर्टिफिकेट (EC), कूटनीतिक (Diplomatic) व आधिकारिक (Official) पासपोर्ट और प्रवासियों के लिए जारी होने वाले विशेष यात्रा पहचान पत्रों के शुल्क में भी आनुपातिक बदलाव देखने को मिलेगा।
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जानें- कब से लागू होगा नया फीस स्ट्रक्चर?

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अधिसूचना जारी होने के बाद से ही आम जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह बढ़ा हुआ शुल्क आखिरकार किस तारीख से प्रभावी होने जा रहा है।
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हालांकि 20 जून को अधिसूचना जारी कर दी गई है, लेकिन तकनीकी अपग्रेडेशन और सॉफ्टवेयर को अपडेट करने के लिए थोड़ा समय दिया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, देश भर के सभी पोर्टल्स और केंद्रों पर इसे बहुत जल्द पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।
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जो आवेदक इस बदलाव की आधिकारिक तिथि से पहले अपना ऑनलाइन स्लॉट बुक कर चुके हैं और फीस का भुगतान कर चुके हैं, उन्हें पुरानी दरों का ही लाभ मिलने की संभावना है। लेकिन नए आवेदकों को अनिवार्य रूप से बढ़े हुए शुल्क का भुगतान करना होगा।
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तत्काल और सामान्य श्रेणियों पर पड़ेगा सीधा असर

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भारत में मुख्य रूप से दो श्रेणियों— 'सामान्य' (Normal) और 'तत्काल' (Tatkal) के तहत पासपोर्ट के आवेदन किए जाते हैं। इसके अलावा 36 पेज और 60 पेज की जंबो बुकलेट के विकल्प भी मौजूद होते हैं।
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इस नए बदलाव के बाद, सामान्य श्रेणी के तहत 36 पन्नों के पासपोर्ट के लिए दी जाने वाली वर्तमान फीस (जो कि अब तक ₹1,500 थी) में बढ़ोतरी निश्चित है।
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ठीक इसी प्रकार, तत्काल सेवा का लाभ उठाने वाले नागरिकों को भी अब पहले के मुकाबले काफी अधिक अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ेगा। मंत्रालय जल्द ही प्रत्येक श्रेणी के लिए सटीक नई दरों की विस्तृत सूची भी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर साझा करेगा।
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संक्षेप में कहें तो, पासपोर्ट बनवाना हुआ महंगा होने की यह खबर उन लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय यात्रा की तैयारी कर रहे हैं या जिनका पासपोर्ट एक्सपायर होने वाला है। 14 साल बाद हुआ यह बदलाव तकनीकी रूप से पासपोर्ट सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जरूरी बताया जा रहा है। ऐसे में किसी भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचने के लिए आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे नए फीस स्ट्रक्चर के पूरी तरह प्रभावी होने से पहले ही अपने आवेदन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा कर लें।