खबरीलाल डेस्क
भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने देश भर के करोड़ों यात्रियों को एक बड़ी और बहुप्रतीक्षित खुशखबरी दी है। त्योहारों और छुट्टियों के मौसम में ट्रेन का कंफर्म टिकट पाना अक्सर किसी जंग जीतने जैसा लगता है, लेकिन अब यह लंबी परेशानी दूर होने वाली है। भारतीय रेलवे अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) यानी रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम को पूरी तरह से आधुनिक तकनीक के साथ अपग्रेड कर रहा है। इस बड़े और ऐतिहासिक बदलाव के बाद रेलवे का नया बुकिंग सिस्टम हर मिनट 1.25 लाख टिकट बुक करने में पूरी तरह सक्षम होगा। यह आंकड़ा मौजूदा सर्वर क्षमता से पूरे पांच गुना अधिक है, जिससे ऑनलाइन यात्रियों का डिजिटल अनुभव पूरी तरह से बदल जाएगा।Read also:-वॉट्सएप यूजरनेम फीचर: सरकार की चेतावनी के बाद वॉट्सएप ने जारी किए 9 नए नियम और सुरक्षा गाइडलाइन
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रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम की नई क्षमता और इसके प्रमुख फायदे

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वर्तमान समय में भारतीय रेलवे का सर्वर सिस्टम एक मिनट में अधिकतम 25 हजार टिकट ही प्रोसेस कर पाता है। इसके कारण जब वेबसाइट पर ट्रैफिक बहुत ज्यादा होता है, तो सिस्टम अपने आप धीमा पड़ जाता है। इस बड़े सर्वर अपग्रेड के बाद, नया रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम 1.25 लाख टिकट प्रति मिनट की सुपरफास्ट रफ्तार से काम करेगा।
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क्षमता में इस 5 गुना बढ़ोतरी से वेबसाइट और ऐप की परफॉर्मेंस में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा। त्योहारी सीजन, गर्मी की छुट्टियों या दिवाली, होली और छठ जैसे बड़े मौकों पर जब करोड़ों लोग एक साथ वेबसाइट पर विजिट करते हैं, तब भी यह सिस्टम बिना रुके और बिना क्रैश हुए स्मूथ तरीके से काम करेगा। इससे भारतीय रेलवे अपने यात्रियों की रिजर्वेशन की लगातार बढ़ती मांग को तेजी से पूरा करने में सफल होगा।
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तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान वेबसाइट हैंग होने से मिलेगी निजात

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आम यात्रियों के लिए सबसे बड़ी और सुकून देने वाली राहत तत्काल टिकट (Tatkal Ticket) बुकिंग के दौरान मिलेगी। वर्तमान व्यवस्था में, सुबह 10 बजे (एसी क्लास) और 11 बजे (स्लीपर क्लास) तत्काल कोटा खुलते ही लाखों लोग एक साथ IRCTC वेबसाइट या ऐप पर लॉग इन करते हैं। अचानक आए इस भारी ट्रैफिक लोड के कारण अक्सर सिस्टम क्रैश हो जाता है या स्क्रीन हैंग होने लगती है।
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कई बार यात्रियों के बैंक खाते से पैसे कट जाते हैं, लेकिन वेबसाइट हैंग होने की वजह से टिकट कन्फर्म नहीं हो पाता। लेकिन अपग्रेड हुए रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम के पूरी तरह लागू होने के बाद, इन सभी तकनीकी खामियों से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी। हाई-कैपेसिटी सर्वर की वजह से पेमेंट गेटवे से लेकर टिकट कन्फर्मेशन तक की पूरी प्रक्रिया पलक झपकते ही पूरी हो सकेगी।
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CRIS के 41वें स्थापना दिवस पर हुई इस ऐतिहासिक घोषणा

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भारतीय रेलवे की मजबूत आईटी विंग, 'सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स' (CRIS) ने बुधवार को अपने 41वें स्थापना दिवस के खास मौके पर इस बड़ी तकनीकी छलांग की आधिकारिक जानकारी दी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि CRIS ही वह प्रमुख संस्था है जो रेलवे के सभी प्रमुख सॉफ्टवेयर, टिकट प्रणाली और डेटा मैनेजमेंट का जटिल काम संभालती है।
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CRIS के प्रबंध निदेशक (MD) जीवीएल सत्य कुमार ने इस अपग्रेडेशन के बारे में विस्तार से मीडिया से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे का मुख्य विजन तकनीकी सुधारों के जरिए आम जनता के ट्रेन सफर को तनावमुक्त, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक बनाना है। सिस्टम का यह अपग्रेड इसी विजन का एक बड़ा हिस्सा है।
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'सुपर रेलवन' (RailOne) ऐप बना भारतीय यात्रियों की पहली पसंद

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टिकट बुकिंग सिस्टम के अपग्रेडेशन के साथ-साथ रेलवे के आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन भी आज के समय में जबरदस्त प्रदर्शन कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि पिछले साल लॉन्च हुए रेलवे के बहुचर्चित सुपर ऐप 'रेलवन' (RailOne App) को आम जनता द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। इसका यूजर-फ्रेंडली इंटरफ़ेस और आसान डिजाइन यात्रियों को बेहतरीन अनुभव प्रदान करता है।
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डिजिटल आंकड़ों की बात करें तो, लॉन्च होने के बाद से अब तक इस ऐप को 4.35 करोड़ से भी अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। वर्तमान में 'रेलवन' ऐप के माध्यम से हर दिन औसतन 10 लाख से ज्यादा ट्रांजैक्शन सफलतापूर्वक हो रहे हैं। यह सुपर ऐप टिकट बुकिंग से लेकर पीएनआर स्टेटस (PNR Status), खाने का ऑर्डर और ट्रेन ट्रैकिंग जैसी अनगिनत सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है।
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रेलवे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता और क्रांतिकारी उपयोग

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सिर्फ टिकट बुकिंग को तेज करने तक ही रेलवे सीमित नहीं है। भारतीय रेलवे अब अपने पूरे कामकाज को बेहतर, आधुनिक और अत्यधिक सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। तकनीक के इस नए डिजिटल युग में AI रेलवे के लिए एक गेमचेंजर टूल साबित होने वाला है।
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AI तकनीक के आने से ट्रेनों और रेल पटरियों के मेंटेनेंस (रखरखाव) का काम अब खराबी आने से पहले ही कर लिया जाएगा। तकनीकी भाषा में इसे 'प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस' (Predictive Maintenance) कहा जाता है। पटरियों और इंजनों पर लगे स्मार्ट सेंसर और डेटा एनालिसिस के जरिए यह तकनीक पहले ही अलर्ट कर देगी कि ट्रेन के किस हिस्से में कब खराबी आ सकती है। इस सटीक पूर्वानुमान से बड़े रेल हादसों पर प्रभावी रूप से रोक लगेगी और यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था कई गुना अधिक मजबूत हो जाएगी।
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[External link placeholder: भारत सरकार के डिजिटल इंडिया इनिशिएटिव और सार्वजनिक परिवहन में AI के बढ़ते उपयोग पर विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें]
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तकनीक का सीधा फायदा आम नागरिकों तक पहुंचाना है अंतिम लक्ष्य

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रेलवे बोर्ड और CRIS द्वारा किए जा रहे इन तमाम तकनीकी बदलावों का अंतिम लक्ष्य देश के हर वर्ग के नागरिक को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है। CRIS के MD जीवीएल सत्य कुमार ने अपने विशेष संबोधन के दौरान जोर देते हुए कहा कि चाहे बाजार में नया सुपर ऐप हो, रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम का अपग्रेडेशन हो या फिर AI तकनीक का उन्नत उपयोग हो, हमारा एकमात्र मकसद सिर्फ इतना है कि इस अत्याधुनिक तकनीक का पूरा और सीधा फायदा देश के आम नागरिकों को मिले।
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रेलवे प्रशासन का मानना है कि यह तकनीक केवल महानगरों या तकनीकी जानकारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका लाभ गांव और छोटे कस्बों में बैठे उस आम यात्री को भी मिलना चाहिए जो पहली बार अपने स्मार्टफोन से ट्रेन का टिकट बुक करना चाहता है। रेलवे का यह तेज डिजिटल बदलाव 'डिजिटल इंडिया' अभियान को भी एक नई और सकारात्मक गति प्रदान कर रहा है।
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निष्कर्ष के तौर पर यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि भारतीय रेलवे अब तकनीकी विकास और डिजिटल क्रांति के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम की क्षमता का 25 हजार से बढ़कर 1.25 लाख टिकट प्रति मिनट होना, करोड़ों रेल यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी सौगात है। तत्काल बुकिंग के समय वेबसाइट हैंग होने की पुरानी समस्या का अंत, रेलवन ऐप की अभूतपूर्व सफलता और सुरक्षा के लिए AI का बढ़ता उपयोग—यह सभी कारक मिलकर भारतीय रेलवे को अधिक सक्षम, सुरक्षित और यात्री-अनुकूल बना रहे हैं। उम्मीद है कि बहुत जल्द यात्रियों को टिकट बुकिंग के दौरान होने वाली हर तरह की परेशानी से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी।
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भारतीय रेलवे ने आम यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को अपग्रेड करने का बड़ा ऐलान किया है। अपग्रेडेशन के बाद नया बुकिंग सिस्टम हर मिनट 1.25 लाख टिकट प्रोसेस कर सकेगा, जो पुरानी 25 हजार की क्षमता से 5 गुना अधिक है। इससे तत्काल बुकिंग के दौरान वेबसाइट हैंग होने की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) के स्थापना दिवस पर बताया गया कि 'रेलवन' ऐप के अब तक 4.35 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, रेलवे अब AI तकनीक की मदद से ट्रेनों के रखरखाव और यात्री सुरक्षा को और भी मजबूत बना रहा है।