नई दिल्ली। यदि आप रोजाना दफ्तर जाने, बाजार जाने या ट्रैवल करने के लिए ओला, उबर, रेपिडो या इनड्राइव जैसी कैब सर्विसेज का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आई है। अब कैब बुक करते समय आपको गाड़ी जल्दी पाने या ड्राइवर द्वारा राइड स्वीकार कराने के नाम पर जबरन या दबाव में आकर 'एडवांस टिप' (Advance Tip) देने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।READ ALSO:-Independence Day Security Alert: कांवड़ यात्रा के बाद अब 15 अगस्त की बारी! मेरठ रेंज में एक्टिव हुए 4 स्पेशल 'ऑपरेशन्स', बॉर्डर से लेकर बाजारों तक खाकी का पहरा
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भारत सरकार के केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए सभी प्रमुख राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने मोबाइल एप्स में मौजूद 'एडवांस टिप' फीचर की तुरंत समीक्षा करें और इसे अविलंब बंद करें। सरकार के इस जनहितैषी फैसले से देश भर के करोड़ों कैब यात्रियों को बहुत बड़ी वित्तीय और मानसिक राहत मिलने वाली है।
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\r\n\r\nक्या था 'एडवांस टिप' का पूरा खेल? कैसे ढीली होती थी आम जनता की जेब?
\r\n\r\nपिछले कुछ समय से ओला, उबर, रेपिडो और इनड्राइव जैसे एप्स ने अपने यूजर्स इंटरफेस (UI) में एक नया फीचर जोड़ा था। इसके तहत जब कोई यात्री अपनी राइड बुक करता था, तो ऐप पर ही किराए के साथ ₹10, ₹20, ₹50 या उससे अधिक की 'एडवांस टिप' जोड़ने का विकल्प दिखाई देता था।
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कागजों पर तो इसे यात्रियों की स्वेच्छा पर आधारित बताया गया था, लेकिन धरातल पर यह एक मजबूरी और छिपे हुए सरचार्ज (Surge Charge) का रूप ले चुका था:
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- \r\n पीक आवर्स में मजबूरी: सुबह दफ्तर जाने के समय या शाम को भारी बारिश और ट्रैफिक के दौरान जब ड्राइवर्स राइड स्वीकार (Accept) नहीं करते थे, तो ऐप खुद यात्रियों को सलाह देता था कि वे 'टिप बढ़ाएं' ताकि ड्राइवर उनकी राइड जल्दी ले ले।\r\n \r\n
- \r\n बोली लगाने जैसा माहौल: यह व्यवस्था एक तरह से 'बोली लगाने' (Bidding System) जैसी बन गई थी। जो यात्री ज्यादा एडवांस टिप जोड़ता, ड्राइवर उसी की बुकिंग स्वीकार करता था और सामान्य किराया देने वाले यात्रियों को घंटों राइड कैंसिल होने या सर्चिंग का सामना करना पड़ता था।\r\n \r\n
परिवहन मंत्रालय का सख्त संदेश: "बुकिंग के समय ही टिप वसूलना पूरी तरह गलत"
\r\n\r\nबुधवार को जारी अपने आधिकारिक आदेश में परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राइड बुकिंग की प्रक्रिया के दौरान ही ग्राहकों से एडवांस में टिप वसूलना या उन्हें इसके लिए उकसाना व्यावसायिक नैतिकता और उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है।
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मंत्रालय ने कहा कि 'टिप' (Tip) का मूल विचार सेवा से संतुष्ट होने के बाद दिया जाने वाला एक ऐच्छिक उपहार या इनाम है। जब तक कोई यात्रा पूरी ही नहीं हुई है, ड्राइवर का व्यवहार कैसा है, गाड़ी की स्थिति कैसी है—यह जाने बिना यात्री से पहले ही पैसे मांगना पूरी तरह से अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) के दायरे में आता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n정부 अधिकारियों के अनुसार, राइड-हेलिंग एग्रीगेटर्स अपने मूल प्लेटफ़ॉर्म शुल्क और डायनेमिक प्राइसिंग (सरज प्राइस) से पहले ही काफी मुनाफा कमाते हैं। ऐसे में 'एडवांस टिप' के नाम पर ग्राहकों से अतिरिक्त राशि वसूलने का माध्यम बनना गलत है।
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यात्रियों को मिलता था दोहरा झटका: सरचार्ज + एडवांस टिप
\r\n\r\nकैब बुकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को अक्सर पीक आवर्स के दौरान दोहरी मार झेलनी पड़ती थी।
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- \r\n पहले से बढ़ा हुआ सरज किराया: बारिश, त्योहार या ऑफिस टाइमिंग्स के दौरान ऐप खुद-ब-खुद सामान्य से 1.5x से 2x तक किराया बढ़ा देते हैं।\r\n \r\n
- \r\n ऊपर से टिप का दबाव: सरज प्राइस चुकाने के बाद भी जब ड्राइवर राइड लेने से मना कर देते थे, तो ग्राहक मजबूरी में ₹30 से ₹100 तक की अतिरिक्त टिप जोड़ने पर मजबूर हो जाते थे।\r\n \r\n
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कई बार तो स्थिति यह हो जाती थी कि 5 किलोमीटर की छोटी सी दूरी के लिए भी यात्री को वास्तविक किराए से दोगुना भुगतान करना पड़ता था। सरकार के इस नए आदेश के बाद अब इस व्यवस्था पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी।
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किन-किन प्लेटफॉर्म्स पर पड़ेगा इस आदेश का असर?
\r\n\r\nसरकार के इस आदेश के दायरे में देश में काम कर रहे सभी छोटे-बड़े राइड एग्रीगेटर्स और लॉजिस्टिक्स एप्स आएंगे। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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- \r\n ओला (Ola): देश की सबसे बड़ी देसी कैब कंपनियों में से एक।\r\n \r\n
- \r\n उबर (Uber): बहुराष्ट्रीय कैब सर्विस प्रोवाइडर।\r\n \r\n
- \r\n रेपिडो (Rapido): बाइक-टैक्सी और ऑटो बुकिंग के लिए तेजी से उभरता प्लेटफॉर्म।\r\n \r\n
- \r\n इनड्राइव (InDrive): जहाँ पहले से ही किराए को लेकर नेगोशिएशन और टिपिंग का विकल्प प्रमुखता से दिया जाता है।\r\n \r\n
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मंत्रालय ने इन सभी टेक कंपनियों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने मोबाइल एप्लीकेशन के एल्गोरिदम और यूजर इंटरफेस में तुरंत बदलाव करें और एडवांस टिप का ऑप्शन हटाएं।
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कंज्यूमर राइट्स और आगे क्या बदलेगा?
\r\n\r\nउपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम का पुरजोर स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल एग्रीगेटर्स अक्सर 'डार्क पैटर्न' (Dark Patterns) का इस्तेमाल करके उपभोक्ताओं से अतिरिक्त पैसे ऐंठते हैं। एडवांस टिप का विकल्प भी इसी डार्क पैटर्न का एक हिस्सा बन चुका था, जहाँ यूजर को मानसिक रूप से यह अहसास कराया जाता था कि बिना टिप दिए उसे गाड़ी नहीं मिलेगी।
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अब आपकी अगली कैब राइड में क्या बदलेगा?
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- \r\n बुकिंग के समय पारदर्शी किराया: जब आप ऐप खोलकर पिकअप और ड्रॉप लोकेशन डालेंगे, तो आपको केवल वास्तविक निर्धारित किराया ही दिखाई देगा।\r\n \r\n
- \r\n समान प्राथमिकता: सभी यात्रियों की बुकिंग रिक्वेस्ट को ड्राइवर के पास निष्पक्ष रूप से भेजा जाएगा, बिना इस बात के कि कौन ज्यादा पैसे दे रहा है।\r\n \r\n
- \r\n राइड के बाद टिप का विकल्प कायम: यात्रा पूरी होने के बाद, यदि आपको ड्राइवर का व्यवहार और सर्विस पसंद आती है, तो आप अपनी मर्जी से राइड खत्म होने के बाद टिप दे सकेंगे (जैसा कि पारंपरिक नियम है)।\r\n \r\n
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सरकार द्वारा राइड-हेलिंग एप्स को दिया गया यह निर्देश भारत में डिजिटल कंज्यूमर राइट्स (Consumer Rights) को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। ओला, उबर, रेपिडो और इनड्राइव जैसे एप्स पर 'एडवांस टिप' का खेल बंद होने से न केवल आम यात्रियों के पैसे बचेंगे, बल्कि कैब बुकिंग की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता भी वापस आएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले कुछ ही दिनों में सभी एग्रीगेटर एप्स अपने प्लेटफॉर्म को अपडेट करके इस फीचर को पूरी तरह से हटा देंगे।


