खबरीलाल डेस्क
नवरात्रि का सातवां दिन, जिसे महासप्तमी कहा जाता है, मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित होता है। मां कालरात्रि का स्वरूप भले ही उग्र और भयानक दिखता हो, लेकिन भक्तों के लिए यह शुभंकरी और कल्याणकारी मानी जाती हैं। मान्यता है कि इस दिन उनकी पूजा करने से भय, शत्रु, नकारात्मक ऊर्जा और शनि दोष से मुक्ति मिलती है।
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मां कालरात्रि का स्वरूप और महत्व

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मां कालरात्रि का रंग गहन अंधकार के समान काला है। उनके केश बिखरे हुए हैं और हाथों में खड्ग (तलवार) धारण है।
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भक्तों के लिए वे सुख, समृद्धि और सुरक्षा की देवी हैं।
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ज्योतिष शास्त्र में मां कालरात्रि को शनि ग्रह की अधिष्ठात्री देवी माना गया है, इसलिए उनकी आराधना से शनि दोष का निवारण होता है।
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महासप्तमी 2025: शुभ मुहूर्त

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  • मां कालरात्रि की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त सबसे शुभ माने गए हैं।
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  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:30 AM से 05:30 AM तक
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  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:45 AM से 12:35 PM तक
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इस समय मां की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
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मां कालरात्रि की पूजा विधि (Puja Vidhi)

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महासप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा सात्विकता और पूर्ण श्रद्धा से की जानी चाहिए।
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शुद्धि और संकल्प:

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सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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इस दिन ग्रे या रॉयल ब्लू रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
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पूजा का संकल्प लेकर एक चौकी पर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
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सामग्री अर्पण:

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  • मां को रोली, कुमकुम, अक्षत, धूप-दीप और विशेष रूप से गुड़हल के लाल फूल अर्पित करें।
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  • सात्विक भोग लगाएं, जिसमें प्याज और लहसुन का प्रयोग न हो
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  • मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बने पकवान विशेष प्रिय हैं।
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कालरात्रि के मंत्र जाप और पाठ:

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  • पूजा के दौरान विशेष मंत्रों का जाप करें।
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  • अंत में कपूर जलाकर परिवार सहित मां की आरती करें।
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  • दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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कालरात्रि के विशेष मंत्र (Mantra)

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मां कालरात्रि की आराधना के समय इन मंत्रों का जाप करने से भक्त को भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है।
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मूल बीज मंत्र:

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ॐ कालरात्र्यै नमः॥
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स्तुति मंत्र:

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या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
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नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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कम से कम 108 बार मंत्र जाप करने का विशेष महत्व है।
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मां कालरात्रि की पूजा के लाभ

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  • भय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश – मृत्यु का भय, दुर्घटनाएं और अनजाने डर समाप्त होते हैं।
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  • शनि दोष निवारण – मां कालरात्रि की पूजा से साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है।
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  • शत्रु बाधा और तंत्र-मंत्र से सुरक्षा – पूजा करने से शत्रु और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।
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  • सुख और समृद्धि – मां अपने भक्तों को कल्याणकारी और शुभ फल प्रदान करती हैं।
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महासप्तमी के दिन मां कालरात्रि की सच्चे मन से पूजा करने पर व्यक्ति के जीवन से हर प्रकार की नकारात्मकता दूर होती है।
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भक्त को साहस, शक्ति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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इस दिन का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।