खबरीलाल डेस्क
मुंबई (विशेष आध्यात्मिक संवाददाता - अनिल बेदाग)। आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में इंसान लगातार शांति की तलाश में भटक रहा है। ऐसे में जब संगीत को भक्ति और अध्यात्म का साथ मिल जाए, तो वह आत्मा को सुकून देने वाली सबसे बड़ी औषधि बन जाता है। मुंबई में हाल ही में एक ऐसी ही शाम सजाई गई, जहां हर धड़कन के साथ ईश्वर का नाम गूंज रहा था और हर सुर परम सत्ता के प्रति समर्पण की गवाही दे रहा था।READ ALSO:-हार्डी संधू की इस एक सलाह ने बदल दी रेवती महुरकर की जिंदगी! 'तेवर' के सेट पर मिला करियर का सबसे बड़ा 'गुरुमंत्र'
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यह पावन अवसर था पूज्य दादा जे.पी. वासवानी (Dada J.P. Vaswani) की 108वीं जयंती का। इस खास मौके पर जाने-माने युवा आध्यात्मिक साधक और गायक निर्वाण बिरला (Nirvaan Birla) ने अपनी भावपूर्ण 'कीर्तन जैमिंग' (Kirtan Jamming) के जरिए एक ऐसा आध्यात्मिक रंग जमाया, जिसमें वहां मौजूद हर श्रद्धालु और संगीत प्रेमी पूरी तरह से रंग गया।
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पूज्य दादा जे.पी. वासवानी: प्रेम और करुणा के प्रणेता

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इस भव्य आयोजन के केंद्र में भारत के महान आध्यात्मिक संत, दार्शनिक और साधु वासवानी मिशन (Sadhu Vaswani Mission) के पूर्व प्रमुख पूज्य दादा जे.पी. वासवानी की शिक्षाएं थीं। उनकी 108वीं जयंती सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि सनातन धर्म और अध्यात्म में '108' के अंक का विशेष महत्व है। दादा वासवानी ने अपना पूरा जीवन प्रेम, करुणा, शाकाहार, विश्व शांति और क्षमा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में समर्पित कर दिया।
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इस शाम का उद्देश्य केवल उनकी याद में इकट्ठा होना नहीं था, बल्कि उनके उन महान विचारों को संगीत के माध्यम से नई पीढ़ी के दिलों तक पहुंचाना था। और इस जिम्मेदारी को निर्वाण बिरला ने बेहद खूबसूरती और गहराई के साथ निभाया।
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'कीर्तन जैमिंग': भक्ति और आधुनिकता का एक अद्भुत संगम

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अक्सर युवाओं को लगता है कि 'कीर्तन' केवल बुजुर्गों के लिए है, लेकिन निर्वाण बिरला ने इस धारणा को अपनी 'कीर्तन जैमिंग' के जरिए पूरी तरह से बदल दिया है। उन्होंने पारंपरिक भजनों और मंत्रों को आधुनिक संगीत के वाद्ययंत्रों (Instruments) और एक नई लय के साथ पिरोकर पेश किया, जिसे 'कीर्तन जैमिंग' का नाम दिया गया।
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    माहौल में घुली अलौकिक शांति: कार्यक्रम की शुरुआत होते ही जैसे-जैसे वाद्ययंत्रों की धुन पर निर्वाण की आवाज गूंजने लगी, पूरे हॉल का माहौल ही बदल गया। आंखें बंद किए हुए सैकड़ों श्रद्धालु एक ही लय में तालियां बजा रहे थे और ईश्वर के नाम का सुमिरन कर रहे थे।
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    भावपूर्ण प्रस्तुति: इस शाम में संगीत का कोई दिखावा नहीं था, बल्कि एक गहरा ठहराव था। भक्ति गीतों और मधुर सुरों से सजी इस शाम में हर किसी ने शांति, प्रेम और एक ऐसे आध्यात्मिक जुड़ाव को महसूस किया, जिसे शब्दों में पिरोना कठिन है।
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साधु वासवानी मिशन के साथ निर्वाण बिरला का गहरा नाता

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निर्वाण बिरला का अध्यात्म की तरफ झुकाव कोई नई बात नहीं है। वे लंबे समय से आत्म-मंथन और भक्ति के मार्ग पर चल रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि साधु वासवानी मिशन के साथ यह उनका पहला नहीं, बल्कि तीसरा कीर्तन आयोजन है।
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इस अवसर पर बात करते हुए निर्वाण ने भावुक होते हुए कहा:

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"पूज्य दादा जे.पी. वासवानी की इस पवित्र 108वीं जयंती का हिस्सा बनना मेरे लिए महज एक अवसर नहीं, बल्कि एक परम सौभाग्य है। दादा के जीवन का हर क्षण हमें प्रेम करना और क्षमा करना सिखाता है।"
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निर्वाण का मानना है कि मिशन के साथ उनका जुड़ाव सिर्फ आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी अपनी आध्यात्मिक यात्रा का एक अहम पड़ाव है। उन्होंने बताया कि इस मंच से कीर्तन करते हुए उन्हें जिस सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है, वह उन्हें भीतर तक शुद्ध कर देती है।
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"कुछ पल ठहरें, खुद से जुड़ें" - निर्वाण का संदेश

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मंच से केवल गीत ही नहीं गाए गए, बल्कि जीवन जीने की एक गहरी फिलॉसफी भी साझा की गई। निर्वाण बिरला ने उपस्थित जनसमूह और खासकर युवाओं को संबोधित करते हुए एक बेहद अहम बात कही। उन्होंने कहा,
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"हम सब अपनी जिंदगी में इतनी तेजी से दौड़ रहे हैं कि हमने खुद से बात करना ही छोड़ दिया है। मेरी हमेशा से यही इच्छा रही है कि मैं संगीत को सिर्फ मनोरंजन का नहीं, बल्कि मेडिटेशन (ध्यान) का जरिया बनाऊं। मैं चाहता हूं कि मेरे कीर्तन के जरिए लोग अपनी जिंदगी की रेस से कुछ पल के लिए ही सही, लेकिन ठहरें। वे अपनी आंखें बंद करें, अपने भीतर की आवाज सुनें, खुद से जुड़ें और उस परमपिता परमेश्वर को महसूस करें जो हम सबके भीतर वास करता है।"
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उनकी इस बात ने वहां मौजूद हर शख्स के दिल को छुआ। सचमुच, जब उन्होंने अपने साथियों के साथ 'हरे राम, हरे कृष्ण' और अन्य भजन छेड़े, तो लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए।
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प्रेम, दया और क्षमा का संदेश: दादा के विचारों का जीवंत रूप

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यह पूरी संगीतमय शाम दादा जे.पी. वासवानी की कोर फिलॉसफी— प्रेम (Love), दया (Compassion) और क्षमा (Forgiveness) पर केंद्रित थी। कार्यक्रम में गाए गए भजनों के बोल भी इसी तरह चुने गए थे जो लोगों को द्वेष मिटाकर एक-दूसरे को गले लगाने की प्रेरणा दें।
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संगीत के जानकारों का मानना है कि ध्वनि तरंगें (Sound Vibrations) इंसान के अवचेतन मन (Subconscious Mind) पर सीधा असर करती हैं। निर्वाण की कीर्तन जैमिंग ने वहां एक ऐसी ऊर्जा का संचार किया, जिससे लोगों ने अपने मन के भीतर दबे तनाव और नकारात्मकता को बाहर निकलते हुए महसूस किया।
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लंगर प्रसाद: आध्यात्मिक एकता का शानदार समापन

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भारतीय सनातन परंपरा में कोई भी आध्यात्मिक आयोजन तब तक पूरा नहीं माना जाता, जब तक उसमें प्रसाद ग्रहण न किया जाए। इस भावपूर्ण शाम का समापन भी बेहद पारंपरिक और सुंदर तरीके से 'लंगर प्रसाद' के साथ हुआ।
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लंगर समानता और विनम्रता का प्रतीक है। अमीर-गरीब, छोटे-बड़े का भेद मिटाकर सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों और कलाकारों ने एक साथ पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इस दृश्य ने भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक एकता के इस यादगार उत्सव में चार चांद लगा दिए।
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दादा जे.पी. वासवानी की 108वीं जयंती पर आयोजित यह कीर्तन जैमिंग सिर्फ एक संगीतमय कार्यक्रम नहीं था, बल्कि मुंबई वासियों के लिए एक 'स्पिरिचुअल रिट्रीट' (Spiritual Retreat) था। निर्वाण बिरला ने अपनी आवाज और अपनी सादगी से यह साबित कर दिया है कि संगीत अगर रूह से गाया जाए, तो वह सीधे परमात्मा तक पहुंचता है। आने वाले समय में ऐसे और आयोजनों की उम्मीद की जा रही है, जो समाज को जोड़ने और आत्मा को शांति प्रदान करने का काम करेंगे।