नई दिल्ली/खबरीलाल डेस्क: मार्च का महीना खत्म होने की कगार पर है और आम तौर पर इस समय तक उत्तर और मध्य भारत में चिलचिलाती गर्मी और लू (Heatwave) का अहसास होने लगता है। लेकिन, इस बार कुदरत ने कुछ और ही तय कर रखा है। भारत में मौसम ने एक बार फिर से एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित 'यू-टर्न' ले लिया है।READ ALSO:-बिजनौर पुलिस का अंतर-जनपदीय वाहन चोर गिरोह पर बड़ा प्रहार: नूरपुर में मुरादाबाद के 2 कुख्यात अपराधी गिरफ्तार, मास्टर-की से मिनटों में उड़ाते थे बाइक
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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मौसम के इस बड़े बदलाव को लेकर एक गंभीर अलर्ट जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 24 से 48 घंटों के दौरान देश के करीब 20 राज्यों में मौसम का उग्र रूप देखने को मिलेगा। आंधी, तेज बारिश, ओलावृष्टि (Hailstorm) और पहाड़ों पर भारी बर्फबारी (Snowfall) की प्रबल संभावना जताई गई है। अचानक आए इस बदलाव से जहां एक तरफ लोगों को बढ़ती गर्मी से फौरी राहत मिलेगी और मौसम सुहावना हो जाएगा, वहीं दूसरी तरफ तेज आंधी और ओलों से किसानों की तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की भी आशंका है।
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आइए, खबरीलाल की इस विस्तृत मौसम रिपोर्ट में समझते हैं कि आखिर इस मौसमी उथल-पुथल की वैज्ञानिक वजह क्या है और आपके राज्य व शहर में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज कैसा रहने वाला है।
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मौसम में इस भयानक बदलाव की असल वजह क्या है?
\r\n\r\nमार्च के अंत में सर्दियों जैसी बारिश और बर्फबारी का होना कोई सामान्य मौसमी घटना नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस पूरे बदलाव के पीछे एक मजबूत 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) का सक्रिय होना है।
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क्या है पश्चिमी विक्षोभ?
\r\n\r\nपश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) और कैस्पियन सागर से उठने वाले अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय तूफान (Extra-tropical storms) होते हैं। ये तूफान अपने साथ भारी नमी लेकर आते हैं और पश्चिमी हवाओं (Westerly winds) के सहारे पाकिस्तान होते हुए उत्तर भारत में प्रवेश करते हैं।
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जब यह नमी भरी ठंडी हवा भारत के गर्म मैदानी इलाकों की हवा से टकराती है, तो सघन बादल बनते हैं। वर्तमान में जो पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के ऊपर से गुजर रहा है, वह बेहद ताकतवर है। इसी के चलते हिमालयी क्षेत्रों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड) में भारी बर्फबारी हो रही है और इसी का असर है कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के मैदानी इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश का चक्र बन गया है।
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उत्तर प्रदेश (UP) पर मौसम की दोहरी मार, 38 जिलों में अलर्ट
\r\n\r\nइस पश्चिमी विक्षोभ का सबसे व्यापक और खतरनाक असर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश पर देखने को मिल रहा है। यूपी में मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए कड़ी चेतावनी (Warning) जारी की है।
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38 जिलों में आंधी और ओलावृष्टि का खौफ
\r\n\r\nIMD के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के करीब 30 जिलों में पहले से ही तेज हवाएं चल रही हैं और आसमान में काले बादलों का डेरा है। मौसम विभाग ने शनिवार तक यूपी के करीब 38 जिलों में आंधी-बारिश और ओले गिरने का अलर्ट जारी किया है।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मेरठ, बिजनौर, गाजियाबाद, सहारनपुर आदि) से लेकर मध्य यूपी और बुंदेलखंड तक मौसम बिगड़ा हुआ है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि कई खुले इलाकों में आकाशीय बिजली (Lightning) गिरने का भारी खतरा बना रहेगा, इसलिए लोगों को घरों के अंदर सुरक्षित रहने की हिदायत दी गई है।
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पिछले 24 घंटों का हाल
\r\n\r\nबीते 24 घंटों की बात करें तो यूपी के करीब 10 प्रमुख जिलों में झमाझम बारिश दर्ज की गई है। कानपुर, सीतापुर, लखनऊ और हरदोई में अचानक हुई बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। हरदोई और आसपास के कुछ ग्रामीण इलाकों में तेज आंधी से कच्चे मकानों और पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा है।
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दिल्ली-NCR और पड़ोसी राज्यों का हाल
\r\n\r\nराष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों (NCR) में भी मौसम ने करवट ली है।
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दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR): सुहावना लेकिन तूफानी मौसम
\r\n\r\nदिल्ली-एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम) में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने का सटीक अनुमान है। हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इस बारिश के कारण दिल्ली के तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी, जिससे लोगों को समय से पहले आ रही गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, अचानक बदलते मौसम के कारण वायरल बुखार और सर्दी-जुकाम का खतरा भी बढ़ गया है।
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राजस्थान और मध्य प्रदेश: धूल भरी आंधी और ओले
\r\n\r\nराजस्थान और मध्य प्रदेश, जहां आमतौर पर इस समय तक गर्मी अपने चरम की ओर बढ़ने लगती है, वहां भी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ है।
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- \r\n राजस्थान: यहां के पूर्वी और उत्तरी जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी तेज हवाएं चल सकती हैं। हल्की से मध्यम बारिश के साथ ओले गिरने की भी आशंका है।\r\n \r\n
- \r\n मध्य प्रदेश: भोपाल, ग्वालियर और चंबल संभाग में पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखाई दे रहा है। गरज-चमक के साथ अचानक बारिश होने की संभावना है।\r\n \r\n
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पहाड़ों पर 'सफेद आफत' और पूर्वोत्तर में 'तूफान'
\r\n\r\nमैदानी इलाकों के अलावा, भारत के पहाड़ी राज्यों और पूर्वोत्तर हिस्सों में भी मौसम उग्र रूप दिखा रहा है।
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- \r\n पहाड़ी राज्य (Snowfall Alert): जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी का दौर जारी है। पर्यटकों के लिए यह मौसम सुहावना जरूर है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए रास्तों का बंद होना और भूस्खलन (Landslide) एक बड़ी समस्या बन गया है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और रोहतांग पास जैसे इलाकों में तापमान शून्य से नीचे जा चुका है।\r\n \r\n
- \r\n पूर्वोत्तर भारत (Northeast India): असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में तेज बारिश और तूफानी हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। यहां ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में भी वृद्धि देखी जा सकती है।\r\n \r\n
- \r\n दक्षिण और पूर्वी भारत: दक्षिण भारत के कुछ तटीय हिस्सों में एक चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) की वजह से बारिश और आंधी का असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, देश के बाकी हिस्सों (जैसे महाराष्ट्र, गुजरात और ओडिशा के कुछ भाग) में गर्मी और हीटवेव (Heatwave) की स्थिति बनी रह सकती है।\r\n \r\n
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किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट (कृषि पर प्रभाव)
\r\n\r\nमौसम का यह अचानक बदलना आम आदमी के लिए सुहावना हो सकता है, लेकिन देश के किसानों के लिए यह किसी 'आपदा' से कम नहीं है। मार्च के अंतिम सप्ताह में खेतों में रबी की फसलें (Rabi Crops) पूरी तरह पककर तैयार खड़ी हैं।
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- \r\n गेहूं और सरसों पर मार: उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार है। तेज आंधी से गेहूं की फसलें खेतों में बिछ सकती हैं, जिससे दानों की गुणवत्ता खराब होगी और पैदावार घटेगी।\r\n \r\n
- \r\n ओलावृष्टि का खौफ: ओले गिरना फसलों के लिए सबसे विनाशकारी होता है। चना, मटर, सरसों और आम के बौर (फूल) ओलों की मार नहीं झेल सकते।\r\n \r\n
- \r\n कृषि विभाग की सलाह: कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि जो फसलें कट चुकी हैं, उन्हें तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं या तिरपाल से ढक दें। खेतों में जलभराव न होने दें।\r\n \r\n
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बचाव और सावधानियां (Safety Guidelines)
\r\n\r\nमौसम विभाग (IMD) का कहना है कि इस तरह का मौसम अगले 2 से 3 दिनों तक बना रह सकता है। ऐसे में प्रशासन ने आम जनता के लिए कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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- \r\n आकाशीय बिजली से बचें: जब आसमान में बादल गरज रहे हों या बिजली चमक रही हो, तो पेड़ों के नीचे, बिजली के खंभों के पास या टिन शेड के नीचे बिल्कुल खड़े न हों। पक्के मकानों के अंदर ही रहें।\r\n \r\n
- \r\n यात्रा से बचें: अगले 48 घंटों तक बेवजह की लंबी यात्राओं (विशेषकर पहाड़ी इलाकों की) को टाल दें। खराब मौसम के कारण दृश्यता (Visibility) कम हो सकती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।\r\n \r\n
- \r\n स्वास्थ्य का ध्यान: दिन में गर्मी और बारिश के बाद अचानक ठंडक होने से 'कोल्ड एंड कफ' (सर्दी-जुकाम) का खतरा है। बदलते मौसम में खान-पान का विशेष ध्यान रखें।\r\n \r\n
- \r\n किसानों के लिए: अपनी कटी हुई फसलों का तुरंत सुरक्षित भंडारण करें।\r\n \r\n
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प्रकृति के सामने इंसान की बेबसी
\r\n\r\nमौसम का यह अप्रत्याशित बदलाव एक बार फिर से क्लाइमेट चेंज (Climate Change) और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के गंभीर प्रभावों की ओर इशारा कर रहा है। कभी मार्च में लू चलने लगती है, तो कभी दिसंबर जैसी ठंड और बर्फबारी लौट आती है। मौसम की यह अनिश्चितता हमारी कृषि अर्थव्यवस्था और जनजीवन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
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प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और एनडीआरएफ (NDRF) तथा एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। खबरीलाल की टीम आपसे अपील करती है कि मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और सुरक्षित रहें। हम देश और प्रदेश के मौसम से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट आप तक सबसे पहले पहुंचाते रहेंगे।