खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली (खबरीलाल नेशनल डेस्क):
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देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर फर्राटा भरते समय टोल चुकाने का माध्यम बन चुका FASTag अब राष्ट्रीय सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का एक अहम हथियार बनने जा रहा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने हाल ही में नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत अब फास्टैग और टोल प्लाजा पर लगे ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) कैमरों का डेटा अधिकृत जांच व सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा।
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​इस कदम का सीधा उद्देश्य वाहन चोरी, संगठित अपराध, आतंकी गतिविधियों और हिट-एंड-रन जैसे मामलों पर लगाम लगाना है।
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एजेंसियों को मिलेगा 'रियल-टाइम अलर्ट' (Real-Time Tracking)

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​नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, हाईवे से गुजरने वाले किसी भी संदिग्ध वाहन की जानकारी तुरंत सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच जाएगी।
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    किन एजेंसियों को मिलेगा एक्सेस? राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय (ED), पुलिस और परिवहन विभाग जैसी अधिकृत जांच एजेंसियों को यह डेटा नियंत्रित तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा।
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    कैसे करेगा काम? जैसे ही कोई ब्लैकलिस्टेड या चोरी का वाहन किसी भी टोल प्लाजा से गुजरेगा, सिस्टम तुरंत स्कैन करके संबंधित जांच एजेंसी को 'रियल-टाइम अलर्ट' (Real-time Alert) भेज देगा। इससे किसी भी वारदात के बाद अपराधियों के भागने के रूट (Escape Route) को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।
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वाहन चोरी पर लगेगी लगाम: हर साल चोरी होते हैं 2 लाख वाहन

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​सरकार की इस हाई-टेक योजना का सबसे बड़ा फायदा वाहन मालिकों को होगा।
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    खौफनाक आंकड़े: भारत में हर साल करीब 1.5 लाख से 2 लाख वाहन चोरी होते हैं। इनमें से आधे से अधिक मामले सिर्फ दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) क्षेत्र से जुड़े होते हैं।
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    चोरों का पैंतरा: चोरी के बाद अपराधी चंद घंटों में ही वाहनों को दूसरे राज्यों या नेपाल जैसे सीमावर्ती इलाकों में ले जाने की फिराक में रहते हैं। अक्सर वे फर्जी नंबर प्लेट या क्लोन किए गए FASTag का इस्तेमाल करते हैं।
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    ANPR करेगा 'गेम ओवर': अब ANPR कैमरे सिर्फ नंबर प्लेट ही नहीं पढ़ेंगे, बल्कि वाहन के रंग, कंपनी और मॉडल का भी सरकारी डेटाबेस से मिलान करेंगे। अगर FASTag में दर्ज जानकारी और असल गाड़ी में कोई भी अंतर पाया गया, तो सिस्टम तुरंत उसे 'संदिग्ध' घोषित कर देगा।
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हिट-एंड-रन और डकैती के मामलों में मिलेगी संजीवनी

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​टोल प्लाजा का यह डेटा दुर्घटनाओं और जघन्य अपराधों की जांच में भी गेम-चेंजर साबित होगा:
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    हिट-एंड-रन (Hit and Run): किसी हादसे के आस-पास मौजूद टोल प्लाजा के 'टाइम-स्टैम्प' और वाहन की आवाजाही के रिकॉर्ड से पुलिस आरोपी गाड़ी को आसानी से खोज निकालेगी।
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    गंभीर अपराध: लूट, डकैती, अपहरण और हथियारों की तस्करी जैसी वारदातों को अंजाम देकर हाईवे के रास्ते भागने वाले अपराधी अब इस 'तीसरी आंख' से नहीं बच पाएंगे।
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क्या आम लोगों का डेटा सुरक्षित रहेगा? (Privacy Concern)

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​इस नई तकनीक को लेकर लोगों के मन में प्राइवेसी (Privacy) का सवाल उठना लाजिमी है। 'खबरीलाल' को मिली जानकारी के अनुसार:
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    ​यह डेटा आम लोगों के लिए सार्वजनिक (Public) नहीं किया जाएगा।
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    ​डेटा साझा करने के लिए सरकार ने एक सख्त 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) तय की है।
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    ​किसी भी वाहन की जानकारी केवल वरिष्ठ अधिकारियों के आधिकारिक अनुरोध पर ही संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे इसका दुरुपयोग न हो सके।
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