हेल्थ डेस्क/राष्ट्रीय समाचार:
\r\n\r\nजिस अदृश्य दुश्मन (कोरोना वायरस) ने पूरी दुनिया में तबाही मचाई थी और जिसे हम इतिहास का पन्ना मानकर भूलने की कोशिश कर रहे थे, उसने भारत में एक बार फिर से अपनी खौफनाक दस्तक दे दी है। स्वास्थ्य विभाग और आम जनता के लिए यह एक बेहद गंभीर अलर्ट है। दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के कडप्पा (Kadapa) जिले में कोविड-19 के नए और खतरनाक मामले सामने आए हैं।
\r\n\r\nहालात सिर्फ संक्रमण तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इस बार इस जानलेवा वायरस ने दो लोगों की जान भी ले ली है। इस ताजा घटनाक्रम ने न केवल राज्य सरकार बल्कि केंद्र सरकार के स्वास्थ्य महकमे की नींद भी उड़ा दी है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन ने युद्ध स्तर पर आइसोलेशन और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग (Contact Tracing) का काम शुरू कर दिया है। आइए, इस पूरी खबर को विस्तार से जानते हैं और समझते हैं कि क्या हमें फिर से कोरोना की नई लहर का सामना करना पड़ सकता है।
\r\n\r\nकडप्पा जिले में फूटा 'कोरोना बम': 4 साल बाद लौटी दहशत
\r\n\r\nआंध्र प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कोरोना वायरस से मौत का आखिरी मामला लगभग 4 साल पहले दर्ज किया गया था। इतने लंबे अंतराल के बाद अचानक जुलाई के महीने में इस वायरस का दोबारा सक्रिय होना कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
\r\n\r\nहाल ही में कडप्पा जिले में कोरोना के संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए गए थे। जब इन सैंपल्स की जांच कडप्पा की स्थानीय वायरोलॉजी लैब (Virology Lab) में RT-PCR तकनीक से की गई, तो रिपोर्ट ने सबके होश उड़ा दिए। लैब रिपोर्ट के मुताबिक, एक साथ 4 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही, कोरोना के कारण 2 मरीजों की दुखद मौत की भी आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। इन आंकड़ों के सामने आते ही जिले में हड़कंप मच गया है और लोगों में एक बार फिर से मास्क और सैनिटाइजर की यादें ताजा हो गई हैं।
\r\n\r\nकैसे हुई मरीजों की मौत? जानें मृतकों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री
\r\n\r\nकोरोना से हुई इन दो मौतों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को गहरी चिंता में डाल दिया है। आइए जानते हैं कि आखिर इन मरीजों की मौत कैसे हुई और उनकी मेडिकल हिस्ट्री क्या थी:
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\r\n\r\nपहली मौत (60 वर्षीय बुजुर्ग):
\r\n\r\nकोरोना से ताजा और पहली मौत का मामला गत 28 जून को सामने आया। यह मौत तमिलनाडु के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC), वेल्लोर में इलाज के दौरान हुई।
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- \r\n मेडिकल सफर: 60 वर्षीय इस बुजुर्ग मरीज की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सबसे पहले आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित प्रसिद्ध SVIMS (Sri Venkateswara Institute of Medical Sciences) अस्पताल में भर्ती कराया गया था।\r\n \r\n
- \r\n गंभीर बीमारियां (Comorbidities): सूत्रों के अनुसार, यह बुजुर्ग मरीज पहले से ही कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहा था। उन्हें क्रॉनिक शुगर (Diabetes) और किडनी की गंभीर बीमारी थी।\r\n \r\n
- \r\n रेफर और मौत: जब SVIMS में उनकी हालत लगातार नाजुक होने लगी, तो डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए CMC वेल्लोर रेफर कर दिया। वहां पहुंचने पर एहतियात के तौर पर उनका RT-PCR टेस्ट किया गया, जिसमें वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए। तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।\r\n \r\n
दूसरी मौत (43 वर्षीय युवक):
\r\n\r\nदूसरी दुखद मौत एक अपेक्षाकृत युवा, 43 वर्षीय शख्स की हुई है। इस मामले में हैरान करने वाली बात यह रही कि संक्रमण का पता शुरुआती टेस्ट में नहीं चल पाया। जब मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ हुई और डॉक्टरों ने उनकी छाती का हाई-रेजोल्यूशन सीटी स्कैन (HRCT Chest Scan) करवाया, तब जाकर फेफड़ों में कोरोना संक्रमण के विशिष्ट निशानों (Ground Glass Opacities) की पुष्टि हुई। इलाज के दौरान इस मरीज ने भी दम तोड़ दिया।
\r\n\r\nवैक्सीन की दोनों डोज और बूस्टर भी हुए बेअसर! (Vaccine Effectiveness)
\r\n\r\nइस पूरी घटना में जो तथ्य सबसे ज्यादा डरावना है, वह है वैक्सीन को चकमा देने की वायरस की क्षमता। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 4 नए लोगों की RT-PCR रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, उन सभी ने अतीत में कोविड-19 वैक्सीन की डबल डोज (Double Dose) ले रखी थी। इतना ही नहीं, इनमें से एक संक्रमित मरीज ने तो सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए बूस्टर डोज (Booster Dose) भी लगवाई हुई थी।
\r\n\r\nबावजूद इसके, यह वायरस उनके शरीर की इम्युनिटी को भेदने में कामयाब रहा। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि समय के साथ वैक्सीन से मिलने वाली एंटीबॉडीज (Antibodies) का प्रभाव कम हो रहा है, या फिर वायरस ने अपने रूप (म्यूटेशन) में कोई ऐसा बदलाव कर लिया है जो पुरानी वैक्सीन के सुरक्षा चक्र को आसानी से तोड़ रहा है।
\r\n\r\nओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) का खौफ: पुणे NIV भेजे गए सैंपल
\r\n\r\nमरीजों में दिख रहे तेजी से फैलने वाले लक्षणों और फुली वैक्सीनेटेड लोगों के संक्रमित होने के पैटर्न को देखकर डॉक्टरों और वायरोलॉजिस्ट्स का शक गहरा गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों को अंदेशा है कि यह संक्रमण कोरोना के बेहद संक्रामक ओमिक्रॉन (Omicron) वेरिएंट या उसके किसी नए सब-वेरिएंट (Sub-variant) के कारण फैल रहा है।
\r\n\r\nइस शक को पुख्ता करने और वायरस के सटीक डीएनए (DNA) की पहचान करने के लिए, मृतकों और पॉजिटिव पाए गए सभी मरीजों के थ्रोट और नेजल स्वैब सैंपल्स को जीनोम सीक्वेंसिंग (Genome Sequencing) के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे भेज दिया गया है। NIV पुणे की रिपोर्ट आने के बाद ही यह पूरी तरह से साफ हो पाएगा कि यह वायरस का कौन सा स्ट्रेन है और यह कितना घातक है।
\r\n\r\nस्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर: कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और आइसोलेशन तेज
\r\n\r\nकोरोना के इन मामलों के सामने आते ही आंध्र प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड (High Alert Mode) में आ गया है। महामारी को एक सीमित दायरे में रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए जा रहे हैं:
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- \r\n आइसोलेशन प्रोटोकॉल: जो 4 नए मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं, उनमें से 3 मरीजों में संक्रमण के हल्के लक्षण हैं, इसलिए उन्हें उनके घर पर ही सख्त मेडिकल निगरानी में होम आइसोलेट (Home Isolate) कर दिया गया है। वहीं, एक मरीज की हालत को देखते हुए उसे अस्पताल के विशेष रूप से तैयार किए गए कोविड-19 वार्ड (Covid-19 Special Ward) में भर्ती किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n सघन कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग: मृतकों और संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए सभी परिजनों, दोस्तों, अस्पताल के कर्मचारियों और पड़ोसियों की पहचान करने के लिए बड़े पैमाने पर 'कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग' अभियान चलाया जा रहा है। इन्हीं ट्रेस किए गए लोगों में से 4 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।\r\n \r\n
- \r\n इलाके में निगरानी: जिन इलाकों (कंटेनमेंट जोन) में यह केस मिले हैं, वहां स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। किसी भी व्यक्ति में बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत उनका सैंपल लिया जा रहा है।\r\n \r\n
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आम जनता के लिए बचाव के उपाय और अपील (Prevention and Precautions)
\r\n\r\nभले ही मामले अभी एक जिले तक सीमित हों, लेकिन कोरोना के इतिहास को देखते हुए किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता से पैनिक न करने (घबराने की जरूरत नहीं) की अपील की है, लेकिन साथ ही कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर (Covid Appropriate Behavior) का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है:
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- \r\n मास्क पहनें: भीड़भाड़ वाले इलाकों, अस्पतालों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में अच्छी क्वालिटी का मास्क (N95 या सर्जिकल) जरूर पहनें।\r\n \r\n
- \r\n हैंड हाइजीन: अपने हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं या अल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइजर का उपयोग करें।\r\n \r\n
- \r\n लक्षणों को नजरअंदाज न करें: यदि आपको लगातार बुखार, सूखी खांसी, स्वाद या गंध का जाना, या अत्यधिक थकान महसूस हो रही है, तो तुरंत खुद को आइसोलेट करें और अपना कोविड टेस्ट करवाएं।\r\n \r\n
- \r\n कमजोर लोगों का रखें खास खयाल: घर में मौजूद बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी (शुगर, बीपी, अस्थमा) से पीड़ित लोगों का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि यह वायरस उन पर सबसे ज्यादा घातक असर करता है।\r\n \r\n
कोरोना वायरस का यह नया हमला इस बात की याद दिलाता है कि महामारी अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। यह हमारे बीच अभी भी मौजूद है और हमारी एक छोटी सी लापरवाही इसे दोबारा विकराल रूप लेने का मौका दे सकती है। स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है, लेकिन एक जागरूक नागरिक के तौर पर अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी एहतियात बरतें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!