खबरीलाल डेस्क
जयपुर (Jaipur News): क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तरह आप एटीएम (ATM) मशीन से जब चाहे पैसे निकालते हैं, उसी तरह अपना राशन भी निकाल सकें? यह कल्पना अब हकीकत बनने जा रही है। राजस्थान सरकार ने खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) के तहत राशन वितरण प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव करने का फैसला किया है। अब आपको राशन की दुकान के खुलने का इंतजार करने या घंटों लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी।READ ALSO:-8th Pay Commission: अगर फिटमेंट फैक्टर हुआ 3.25, तो क‍ितनी होगी सैलरी? 60 पन्नों के ज्ञापन में छिपा है आपकी तरक्की का पूरा रोडमैप
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राज्य सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रदेश के तीन प्रमुख जिलों—जयपुर, बीकानेर और भरतपुर—में 'अनाज एटीएम' (Grain ATM) स्थापित करने की घोषणा की है। इन हाई-टेक मशीनों के जरिए लाभार्थी दिन या रात, किसी भी समय अपना निर्धारित गेहूं प्राप्त कर सकेंगे।
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कहां होगी शुरुआत और क्या है योजना?

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राजस्थान के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा (Sumit Godara) ने हाल ही में जानकारी दी कि राशन व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
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    पायलट प्रोजेक्ट: शुरुआती चरण में ये मशीनें जयपुर, भरतपुर और बीकानेर जिलों में लगाई जाएंगी।
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    सफलता के बाद विस्तार: यदि इन तीन जिलों में यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे पूरे राजस्थान में लागू किया जाएगा।
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    73 लाख नए लाभार्थी: सरकार के 'गिव अप' (Give Up) अभियान के तहत 54 लाख से अधिक संपन्न लोगों ने अपनी सब्सिडी छोड़ी है, जिससे करीब 73 लाख नए जरूरतमंदों को खाद्य सुरक्षा सूची में जोड़ा गया है। इन नए लाभार्थियों को भी अनाज एटीएम का सीधा लाभ मिलेगा।
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अनाज एटीएम (Grain ATM): कैसे काम करती है यह मशीन?

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यह मशीन बिल्कुल आपके बैंक के एटीएम की तरह दिखती और काम करती है, बस फर्क इतना है कि इससे नोट नहीं, बल्कि अनाज निकलता है। इसे 'अन्नपूर्ति' (Annapurti) मशीन भी कहा जाता है। इसकी कार्यप्रणाली बेहद सरल और सुरक्षित है:
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    टच स्क्रीन और पहचान: लाभार्थी को मशीन की टच स्क्रीन पर अपना राशन कार्ड नंबर या आधार नंबर दर्ज करना होता है।
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    बायोमेट्रिक सत्यापन (Biometric Verification): सुरक्षा के लिए मशीन में फिंगरप्रिंट स्कैनर लगा होता है। जैसे ही आप अपना अंगूठा लगाते हैं, मशीन आपकी पहचान सत्यापित करती है कि आप सही लाभार्थी हैं या नहीं।
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    अनाज का वितरण: पहचान होते ही स्क्रीन पर आपके कोटे का अनाज (जैसे 5 किलो, 10 किलो) दिखाई देगा। मशीन के नीचे बोरी या थैला लगाते ही निर्धारित मात्रा में गेहूं अपने आप निकलकर थैले में भर जाएगा।
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    रफ्तार और सटीकता: यह मशीन 5 से 7 मिनट के भीतर 50 से 70 किलो तक अनाज निकाल सकती है। सबसे खास बात यह है कि इसमें तौल की गड़बड़ी (घटतौली) की कोई गुंजाइश नहीं होती, मशीन उतना ही अनाज देगी जितना आपका हक है।
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ओडिशा और गुरुग्राम में पहले से सफल है मॉडल

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राजस्थान कोई पहला राज्य नहीं है जो इस तकनीक को अपना रहा है। 'अनाज एटीएम' की सफलता की कहानी अन्य राज्यों में पहले ही लिखी जा चुकी है।
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    ओडिशा मॉडल: ओडिशा के भुवनेश्वर में यह सिस्टम पहले से चल रहा है। वहां चावल वितरण के लिए इन एटीएम का इस्तेमाल किया जाता है। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) के सहयोग से वहां इसे 'अन्नपूर्ति' नाम से चलाया जा रहा है, जिसने वहां की राशन व्यवस्था को काफी सुगम बना दिया है।
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    देश का पहला अनाज एटीएम: भारत का पहला 'ग्रेन एटीएम' हरियाणा के गुरुग्राम (फर्रुखनगर) में स्थापित किया गया था, जहां से इस तकनीक की शुरुआत हुई थी।
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आम जनता को क्या होगा फायदा?

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इस नई व्यवस्था से राशन कार्ड धारकों को कई बड़ी राहतें मिलेंगी:
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    24x7 उपलब्धता: राशन की दुकान खुलने या डीलर के आने का इंतजार खत्म। आप अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी अनाज ले सकेंगे।
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    पूरा तौल: अक्सर राशन डीलरों पर कम तोलने के आरोप लगते हैं। अनाज एटीएम में इलेक्ट्रॉनिक कांटा लगा होता है, जो 100% सटीक वजन देता है।
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    लाइन से मुक्ति: घंटों लाइन में लगने की झंझट खत्म होगी, जिससे दिहाड़ी मजदूरों का समय और पैसा दोनों बचेगा।
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    पारदर्शिता: बायोमेट्रिक सिस्टम होने से फर्जी राशन कार्डों पर लगाम लगेगी और अनाज सही व्यक्ति तक पहुंचेगा।
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राजस्थान सरकार का अनाज एटीएम प्रोजेक्ट 'डिजिटल इंडिया' और खाद्य सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। जयपुर, बीकानेर और भरतपुर के लाभार्थियों को जल्द ही लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी। यह तकनीक न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि गरीब के हक का एक-एक दाना उसे सम्मान के साथ मिले। अब देखना यह है कि पायलट प्रोजेक्ट के बाद यह सुविधा आपके शहर तक कब पहुंचती है।
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संक्षिप्त सारांश: राजस्थान सरकार जयपुर, बीकानेर और भरतपुर में 'अनाज एटीएम' शुरू करने जा रही है। इस ऑटोमेटेड मशीन से राशन कार्ड धारक बायोमेट्रिक पहचान के जरिए 24 घंटे कभी भी अपना गेहूं प्राप्त कर सकेंगे। यह मशीन 5 मिनट में 50 किलो तक अनाज डिस्पेंस कर सकती है। ओडिशा और हरियाणा के बाद राजस्थान इस तकनीक को अपनाने वाला प्रमुख राज्य बनने जा रहा है।