नई दिल्ली / बिजनेस डेस्क
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देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी जिस घड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वह है 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का गठन और उसकी सिफारिशें। महंगाई के इस दौर में, जहां घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है, वहीं कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगों का एक विस्तृत खाका पेश कर दिया है।READ ALSO:-भारत की अब तक की सबसे 'हाई-टेक' जनगणना का शंखनाद: 2027 में गिना जाएगा हर सिर और हर घर; पहली बार जातियों का भी होगा डेटाबेस, 33 सवालों में कैद होगी देश की तस्वीर
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फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन (FNPO) सहित कई प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने सरकार को 60 पन्नों का एक ज्ञापन (Memorandum) सौंपा है। इस ज्ञापन में वेतन विसंगतियों को दूर करने, पुरानी पेंशन बहाली के साथ-साथ जो सबसे बड़ी मांग है, वह है—फिटमेंट फैक्टर को 3.25 करना और सालाना इंक्रीमेंट को 5% तक बढ़ाना।
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अगर सरकार इन मांगों पर अपनी मुहर लगा देती है, तो सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में जो उछाल आएगा, वह पिछले कई वेतन आयोगों के मुकाबले अभूतपूर्व होगा। आज हम आपको विस्तार से समझाएंगे कि आखिर यह 3.25 फिटमेंट फैक्टर का गणित क्या है, इससे आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा और लेवल-वार सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी।
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फिटमेंट फैक्टर: सैलरी गणना की रीढ़ (The Backbone of Salary Calculation)

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सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) आखिर होता क्या है। सरल शब्दों में कहें तो यह वहmultiplier (गुणक) है, जिसका उपयोग एक वेतन आयोग से दूसरे वेतन आयोग में जाते समय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी (Basic Pay) को रिवाइज करने के लिए किया जाता है।
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    7वें वेतन आयोग में: सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। यानी अगर किसी की बेसिक सैलरी 6वें वेतन आयोग में 7,000 रुपये थी, तो उसे 2.57 से गुणा करके 18,000 रुपये (न्यूनतम बेसिक पे) कर दिया गया।
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    8वें वेतन आयोग की मांग: कर्मचारी संगठन अब 3.25 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि महंगाई और जीडीपी की वृद्धि दर को देखते हुए 2.57 का फैक्टर अब पुराना और नाकाफी हो चुका है।
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3.25 फिटमेंट फैक्टर का जादुई गुणा-गणित

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यदि सरकार 3.25 के फार्मूले को स्वीकार करती है, तो सैलरी का स्ट्रक्चर पूरी तरह बदल जाएगा। आइए, अलग-अलग पे-लेवल (Pay Level) के हिसाब से देखते हैं कि सैलरी में कितना अंतर आएगा।
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लेवल-वार सैलरी विश्लेषण: किसकी जेब में आएंगे कितने पैसे?

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फेडरेशन के प्रस्ताव के अनुसार, हर स्तर के कर्मचारी को बड़ा लाभ होने की उम्मीद है। यहां हमने लेवल 1 (न्यूनतम) से लेकर लेवल 18 (अधिकतम/कैबिनेट सचिव स्तर) तक का विवरण तैयार किया है:
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(A) Level 1: ग्रुप डी और एंट्री लेवल कर्मचारी

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यह वह स्तर है जहां सबसे ज्यादा संख्या में कर्मचारी आते हैं।
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    वर्तमान बेसिक पे (7th CPC): ₹18,000
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    प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर: 3.25
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    नई अनुमानित बेसिक पे: ₹18,000 × 3.25 = ₹58,500
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    कुल बढ़ोतरी: ₹40,500
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विश्लेषण: यह एक विशाल छलांग है। अभी 18,000 की बेसिक सैलरी पर भत्ते मिलाकर हाथ में 30-35 हजार आते हैं, लेकिन 58,500 बेसिक होने पर यह सैलरी 80-90 हजार के पार जा सकती है।
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(B) Level 6: ग्रुप बी (गैर-राजपत्रित) कर्मचारी

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इस श्रेणी में ऑफिस सुपरिटेंडेंट, इंस्पेक्टर आदि आते हैं।
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    वर्तमान बेसिक पे: ₹35,400
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    प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर: 3.25
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    नई अनुमानित बेसिक पे: ₹35,400 × 3.25 = ₹1,15,050
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    कुल बढ़ोतरी: ₹79,650
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विश्लेषण: लेवल 6 के कर्मचारियों के लिए यह एक लाइफस्टाइल बदलने वाला इंक्रीमेंट होगा। बेसिक सैलरी का 1 लाख के पार जाना एक बड़ी उपलब्धि होगी।
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(C) Level 10: ग्रुप ए (एंट्री लेवल अधिकारी)

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यहां से क्लास-1 अधिकारियों की शुरुआत होती है (जैसे असिस्टेंट कमिश्नर, आदि)।
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    वर्तमान बेसिक पे: ₹56,100
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    प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर: 3.25
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    नई अनुमानित बेसिक पे: ₹56,100 × 3.25 = ₹1,82,325
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    कुल बढ़ोतरी: ₹1,26,225
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विश्लेषण: अधिकारियों के वेतन में यह वृद्धि निजी क्षेत्र (Private Sector) के मैनेजरों के वेतन को टक्कर देने वाली साबित होगी।
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(D) Level 18: शीर्ष नौकरशाह (कैबिनेट सचिव स्तर)

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यह सरकारी नौकरी का सर्वोच्च वेतन स्तर है।
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    वर्तमान बेसिक पे: ₹2,50,000
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    प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर: 3.25
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    नई अनुमानित बेसिक पे: ₹2,50,000 × 3.25 = ₹8,12,500
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    कुल बढ़ोतरी: ₹5,62,500
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विश्लेषण: यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। 8 लाख रुपये प्रति माह का बेसिक वेतन भारतीय प्रशासनिक सेवा के आकर्षण को और बढ़ा देगा।
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सालाना इंक्रीमेंट: 3% बनाम 5% की लड़ाई

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फिटमेंट फैक्टर के अलावा, 60 पन्नों के ज्ञापन में एक और महत्वपूर्ण मांग छिपी है—सालाना वेतन वृद्धि (Annual Increment) की दर को बढ़ाना।
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वर्तमान व्यवस्था (3%)

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अभी केंद्रीय कर्मचारियों को साल में दो बार महंगाई भत्ता (DA) और साल में एक बार (जुलाई या जनवरी में) 3% का बेसिक इंक्रीमेंट मिलता है।
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प्रस्तावित व्यवस्था (5%)

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फेडरेशन की मांग है कि महंगाई की दर को देखते हुए सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 5% किया जाए। यह सुनने में महज 2% का अंतर लगता है, लेकिन 'कंपाउंडिंग' (Compounding) के जरिए यह बहुत बड़ा अंतर पैदा करता है।
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उदाहरण से समझें (केस स्टडी)

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मान लीजिए एक कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹60,000 है।
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    परिदृश्य 1: (3% इंक्रीमेंट पर)
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      अगले साल सैलरी बढ़ेगी: ₹60,000 × 3% = ₹1,800
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      नई सैलरी: ₹61,800
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    परिदृश्य 2: (5% इंक्रीमेंट - प्रस्तावित)
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      अगले साल सैलरी बढ़ेगी: ₹60,000 × 5% = ₹3,000
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      नई सैलरी: ₹63,000
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अंतर: एक साल में ही ₹1,200 प्रति माह का अंतर आ गया। 10-20 साल की सर्विस में यह अंतर लाखों रुपये में बदल जाएगा, जिससे रिटायरमेंट के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट पर भारी असर पड़ेगा।
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पेंशनभोगियों के लिए क्या है खास?

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8वें वेतन आयोग का लाभ सिर्फ वर्तमान कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि रिटायर हो चुके लाखों पेंशनभोगियों को भी मिलेगा।
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    पेंशन का रिवीजन: पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन भी उसी 3.25 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर रिवाइज की जाएगी।
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    न्यूनतम पेंशन: अगर न्यूनतम वेतन ₹58,500 होता है, तो नियमानुसार न्यूनतम पेंशन (जो वेतन का 50% होती है) ₹29,250 हो जाएगी, जो अभी ₹9,000 है।
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    बुजुर्गों को राहत: बढ़ती उम्र में चिकित्सा और देखभाल के खर्चों को देखते हुए पेंशन में यह बढ़ोतरी एक संजीवनी बूटी का काम करेगी।
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मांग के पीछे का तर्क: आखिर 3.25 ही क्यों?

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फेडरेशन ने जो 60 पन्नों का दस्तावेज सौंपा है, उसमें इस मांग के पीछे ठोस तर्क दिए गए हैं। यह मांग हवा-हवाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और आर्थिक सिद्धांतों का हवाला दिया गया है।
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(A) 1957 ILC (Indian Labour Conference) फॉर्मूला

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वेतन निर्धारण का आधार डॉ. एक्रोयड (Dr. Aykroyd) द्वारा दिया गया फार्मूला है, जिसे 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (1957) में स्वीकार किया गया था। इसके तहत एक कर्मचारी की न्यूनतम जरूरतों (भोजन, कपड़ा, आवास) की लागत निकाली जाती है।
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    फेडरेशन का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में दाल, दूध, सब्जियां और मकान के किराए में भारी उछाल आया है।
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    बाजार की मौजूदा कीमतों के हिसाब से 18,000 रुपये में एक परिवार का सम्मानजनक जीवनयापन (Decent Standard of Living) असंभव है।
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(B) सुप्रीम कोर्ट का 'लिविंग वेज' सिद्धांत

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माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई फैसलों में कहा है कि सरकार को अपने कर्मचारियों को केवल 'न्यूनतम वेतन' (Minimum Wage) नहीं, बल्कि 'जीवन निर्वाह वेतन' (Living Wage) देना चाहिए।
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    लिविंग वेज का मतलब है—रोटी, कपड़ा और मकान के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक दायित्वों के लिए पर्याप्त पैसा।
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    फेडरेशन का तर्क है कि 3.25 का फैक्टर ही कर्मचारियों को 'लिविंग वेज' के करीब ले जा सकता है।
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(C) पे-गैप (Pay Gap) को कम करना

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अभी निचले स्तर के कर्मचारियों और शीर्ष अधिकारियों के वेतन में जमीन-आसमान का अंतर है (अनुपात 1:14 के आसपास है)। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि फिटमेंट फैक्टर बढ़ाकर निचले स्तर के कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को सुधारा जाए ताकि यह असमानता कम हो सके।
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सरकार का रुख और चुनौतियां

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हालांकि ये मांगे कर्मचारियों के पक्ष में बहुत मजबूत दिखती हैं, लेकिन सरकार के लिए इसे लागू करना आसान नहीं होगा।
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    राजकोषीय बोझ (Fiscal Burden): 3.25 फिटमेंट फैक्टर लागू करने से सरकारी खजाने पर लाखों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। भारत सरकार पहले ही राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने की कोशिश कर रही है।
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    राज्यों पर दबाव: केंद्र सरकार द्वारा वेतन आयोग लागू करते ही राज्य सरकारों पर भी अपने कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने का दबाव आ जाता है, जिससे कई राज्यों की आर्थिक स्थिति चरमरा सकती है।
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हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि वेतन बढ़ने से बाजार में मांग (Demand) बढ़ेगी, खपत (Consumption) बढ़ेगी और अंततः इससे अर्थव्यवस्था को ही फायदा होगा।
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कब तक लागू हो सकता है 8वां वेतन आयोग?

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परंपरागत रूप से, हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग गठित किया जाता है।
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    7वां वेतन आयोग: 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ था।
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    8वां वेतन आयोग: इसे 1 जनवरी 2026 से लागू होना चाहिए।
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इसके लिए सरकार को 2024-25 में ही आयोग का गठन (Constitution of Commission) करना होगा, ताकि आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 1-2 साल का समय मिल सके। वर्तमान में चल रही चर्चाओं और ज्ञापनों को देखते हुए उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में कोई बड़ा ऐलान कर सकती है।
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उम्मीद की किरण

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फेडरेशन का 60 पन्नों का ज्ञापन और 3.25 फिटमेंट फैक्टर की मांग ने कर्मचारियों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है। यदि यह लागू होता है, तो यह न केवल सरकारी नौकरी को आर्थिक रूप से और अधिक आकर्षक बनाएगा, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन स्तर में भी सुधार लाएगा। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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प्रमुख बिंदु एक नजर में (Key Highlights)

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विवरण
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वर्तमान (7th CPC)
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मांग (8th CPC प्रस्ताव)
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फिटमेंट फैक्टर
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2.57
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3.25
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सालाना इंक्रीमेंट
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3%
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5%
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न्यूनतम बेसिक पे
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₹18,000
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₹58,500 (अनुमानित)
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न्यूनतम पेंशन
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₹9,000
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₹29,250 (अनुमानित)
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लागू होने की संभावित तिथि
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-
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01 जनवरी 2026
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नोट: यह गणनाएं कर्मचारी फेडरेशन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन और मांगों पर आधारित हैं। अंतिम निर्णय सरकार और वेतन आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगा। आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें।
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