खबरीलाल डेस्क
ओस्लो/काराकास: नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा नोबेल शांति पुरस्कार 2025 की घोषणा के बाद, पूरा विश्व वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो (María Corina Machado) के बारे में जानने को उत्सुक है। 58 वर्षीय इस जुझारू नेता को यह प्रतिष्ठित सम्मान वेनेजुएला में मानवाधिकारों, स्वतंत्रता और लोकतंत्र की बहाली के लिए उनके दशकों लंबे संघर्ष के लिए दिया गया है।READ ALSO:-ब्रेकिंग न्यूज़: नोबेल शांति पुरस्कार 2025 का ऐलान, वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो ने मारी बाजी; डोनाल्ड ट्रंप का सपना टूटा
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आइए जानते हैं वेनेजुएला की इस 'आयरन लेडी' के बारे में, जिन्होंने तानाशाही का डटकर मुकाबला किया और लाखों लोगों के लिए उम्मीद की प्रतीक बनीं।
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मारिया कोरिना मचाडो का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
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मारिया कोरिना मचाडो का जन्म 7 अक्टूबर 1967 को वेनेजुएला के काराकास में हुआ था। वह एक प्रतिष्ठित और समृद्ध परिवार से ताल्लुक रखती हैं।
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विवरण
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तथ्य
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जन्म
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7 अक्टूबर 1967 (काराकास, वेनेजुएला)
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शिक्षा
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औद्योगिक इंजीनियरिंग (कैथोलिक यूनिवर्सिटी एंड्रेस बेल्लो)
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उच्च शिक्षा
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फ़ाइनेंस में मास्टर डिग्री (इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़ ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन)
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अन्य
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येल विश्वविद्यालय के वर्ल्ड फेलो प्रोग्राम की सदस्य (2009)
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पेशेवर जीवन
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राजनीति में आने से पहले औद्योगिक इंजीनियर और फ़ाइनेंस विशेषज्ञ।
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राजनीति में आने से पहले, उन्होंने काराकास में अनाथ और अपराधी बच्चों की देखभाल के लिए एक फाउंडेशन (फंडासियन एथेना) की स्थापना की थी।
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राजनीतिक करियर और लोकतंत्र के लिए संघर्ष
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मचाडो ने वेनेजुएला में सत्तावाद के उदय के साथ ही राजनीति में प्रवेश किया और जल्द ही दिवंगत राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ और वर्तमान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकारों के खिलाफ सबसे प्रमुख आवाजों में से एक बन गईं।
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1. 'सुमाते' से शुरुआत (2001)
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मचाडो ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत नागरिक संगठन 'सुमाते' (Súmate) की सह-संस्थापक और नेता के रूप में की। यह संगठन चुनावों की निगरानी और नागरिकों के अधिकारों के लिए काम करता था।
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2. नेशनल असेंबली की सदस्य (2011-2014)
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2010 के संसदीय चुनावों में, मचाडो ने नेशनल असेंबली की सदस्य के रूप में चुनाव लड़ा और सभी उम्मीदवारों में सबसे अधिक वोटों के साथ जीत हासिल की। संसद में उन्होंने सत्ताधारी शासन के संस्थागत दुर्व्यवहार, दमन और गंभीर आर्थिक समस्याओं का खुलकर विरोध किया। उन्हें 2014 में पद से मनमाने ढंग से हटा दिया गया था।
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3. 'वेंटे वेनेजुएला' पार्टी की स्थापना
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2012 में, उन्होंने एक मध्य-दक्षिणपंथी राजनीतिक संगठन 'वेंटे वेनेजुएला' (Vente Venezuela) की स्थापना की और उसकी राष्ट्रीय संयोजक बनीं।
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4. तानाशाही के खिलाफ़ दृढ़ संकल्प
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मचाडो ने लगातार सैन्यीकरण और सत्तावादी शासन के खिलाफ आवाज उठाई। नोबेल समिति ने उनके संघर्ष को 'तात्कालिक और प्रेरणादायक' बताया है। उन्हें जान से मारने की गंभीर धमकियाँ मिलने और अपने राजनीतिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद, वह देश में बनी रहीं।
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5. अयोग्य घोषित होने का संघर्ष
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2023 में, मचाडो ने विपक्षी प्राथमिक चुनावों में 90% से अधिक वोटों से ऐतिहासिक जीत हासिल की, जिससे वह 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में मादुरो की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बन गईं। हालाँकि, मादुरो सरकार ने उन्हें 15 साल के लिए सार्वजनिक पद धारण करने से अवैध रूप से अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी राजनीतिक गतिविधियों को जारी रखा और विपक्षी उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज उरुटिया के अभियान का नेतृत्व किया, जिन्होंने जुलाई 2024 के चुनाव में जीत हासिल की।
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अंतरराष्ट्रीय मान्यता और सम्मान
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नोबेल शांति पुरस्कार से पहले भी, मारिया कोरिना मचाडो को उनके साहस के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है:
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    बीबीसी की 100 सबसे प्रभावशाली महिलाएँ (2018)
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    सैखारोव पुरस्कार (Sakharov Prize, 2024) (यूरोपीय संघ द्वारा दिया जाने वाला मानवाधिकार सम्मान)
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    वाक्लाव हावेल मानवाधिकार पुरस्कार (Václav Havel Human Rights Prize, 2024)
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नोबेल शांति पुरस्कार 2025 जीतना, वेनेजुएला के लोकतंत्र आंदोलन के लिए एक बड़ी जीत है और यह दुनिया भर के उन लाखों लोगों के लिए एक संदेश है, जो तानाशाही के सामने खड़े होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।