खबरीलाल डेस्क
तेहरान/वाशिंगटन/तेल अवीव/जिनेवा: मध्य पूर्व (Middle East) की धरती एक बार फिर बारूद की गंध, मिसाइलों के धुएं और बेगुनाहों के खून से लाल हो गई है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी यह विनाशकारी जंग आज अपने पांचवें दिन में प्रवेश कर गई है, लेकिन इसकी विभीषिका किसी विश्व युद्ध (World War) से कम नजर नहीं आ रही है। यह महज दो-तीन देशों के बीच सीमा का विवाद नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्तियों (Global Powers) के वर्चस्व, अत्याधुनिक सैन्य तकनीक और खुफिया एजेंसियों के उस खूनी खेल का अखाड़ा बन गया है, जिसने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं।READ ALSO:-बिजनौर में साइबर ठगों का बिछा है जाल: पुलिस ने जारी किया 'महा-अलर्ट', जानें आपकी एक गलती कैसे खाली कर सकती है बैंक खाता
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एक तरफ जहां आसमान से अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट्स और इजराइली गाइडेड मिसाइलें मौत बनकर बरस रही हैं, वहीं जमीन पर ईरान समर्थित गुटों (प्रॉक्सी नेटवर्क) और पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के बीच शह-मात का ऐसा खेल चल रहा है, जिसकी कल्पना हॉलीवुड की किसी थ्रिलर फिल्म में ही की जा सकती है। दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं, लेकिन इन दावों के बीच जो सबसे बड़ी सच्चाई उभर कर आ रही है, वह है— भीषण तबाही। आइए, इस महायुद्ध के पांचवें दिन की हर एक घटना, उसके पीछे की रणनीति और भविष्य के खौफनाक परिणामों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
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1. 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी': अमेरिका का भयंकर और विनाशकारी गुस्सा

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अमेरिकी सैन्य इतिहास में 'ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म' (इराक युद्ध) के बाद यह संभवतः सबसे बड़ा और आक्रामक सैन्य अभियान है। पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग का मुख्यालय) ने ईरान के खिलाफ छेड़े गए इस महा-अभियान को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) नाम दिया है। अंग्रेजी के इस शब्द 'एपिक फ्यूरी' का शाब्दिक अर्थ है 'भयंकर गुस्सा' या 'महा-प्रकोप'। यह नाम सिर्फ एक कूटशब्द नहीं है, बल्कि यह वाशिंगटन के उस स्पष्ट और क्रूर इरादे को दर्शाता है कि वह ईरान के सैन्य ढांचे को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरा है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ऐलान: इस युद्ध की रूपरेखा और इसके पीछे के अमेरिकी तर्कों को स्पष्ट करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार रात राष्ट्र के नाम एक अहम और आक्रामक संबोधन दिया। उन्होंने व्हाइट हाउस से पूरी दुनिया को बताया कि उन्होंने अमेरिकी सेना को इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर सीधे हमले करने का आदेश क्यों दिया। ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी और इजराइली खुफिया एजेंसियों के पास इस बात के पुख्ता इनपुट थे कि ईरान इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर एक बड़े हमले की अंतिम तैयारी कर चुका था। ट्रम्प के अनुसार, यह हमला 'एहतियाती' (Pre-emptive Strike) था, ताकि दुश्मन को वार करने से पहले ही खत्म किया जा सके।
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सैन्य जमावड़ा और 'एपिक फ्यूरी' की ताकत: इस ऑपरेशन का पैमाना इतना विशाल है कि यह ईरान की कल्पना से भी परे है। अमेरिका ने अपनी पूरी सैन्य ताकत का एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व में झोंक दिया है:
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    50,000 सैनिकों की फौज: इस ऑपरेशन में 50 हजार से अधिक अमेरिकी मरीन, नेवी सील कमांडो और सैन्यकर्मी शामिल हैं, जो मध्य पूर्व के विभिन्न अड्डों और समुद्र में तैनात युद्धपोतों से इस युद्ध का संचालन कर रहे हैं।
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    200 फाइटर जेट्स का बेड़ा: आसमान में अमेरिका के सबसे आधुनिक और रडार की पकड़ में न आने वाले F-35 लाइटनिंग II, F-22 रैप्टर और भारी बमबारी करने वाले B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स शामिल हैं।
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    दो एयरक्राफ्ट कैरियर: समुद्र से मोर्चा संभालने के लिए दो विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर (विमानवाहक पोत) तैनात हैं, जो अपने आप में एक तैरते हुए सैन्य शहर के समान हैं।
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ईरान को हुआ भारी नुकसान: अमेरिकी रक्षा विभाग के दावों के अनुसार, 'एपिक फ्यूरी' ने ईरान की कमर तोड़ कर रख दी है। अब तक ईरान के 17 प्रमुख नौसैन्य जहाजों को तबाह किया जा चुका है। इनमें सबसे बड़ा झटका ईरान की एक उन्नत पनडुब्बी (Submarine) का नष्ट होना है, जो फारस की खाड़ी में एक बड़ा रणनीतिक खतरा मानी जा रही थी। इसके अलावा, ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम (हवाई सुरक्षा प्रणाली), मिसाइल लॉन्च पैड्स, और ड्रोन बनाने वाली अंडरग्राउंड फैक्ट्रियों को भारी बमबारी कर मलबे में तब्दील कर दिया गया है।
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2. साइबर वारफेयर का मास्टरक्लास: कैसे हुई आयतुल्लाह खामेनेई की मौत?
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इस पांच दिन के युद्ध की सबसे बड़ी, चौंकाने वाली और ईरान के मनोबल को तोड़ने वाली घटना है— ईरान के सर्वोच्च आध्यात्मिक और राजनीतिक नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत। शनिवार को तेहरान के अति-सुरक्षित माने जाने वाले पास्चर स्ट्रीट के पास उनके गुप्त कार्यालय पर हुए अचूक इजराइली हवाई हमले में उनकी जान चली गई।
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यह हमला कोई सामान्य एयरस्ट्राइक नहीं था। यह साइबर जासूसी (Cyber Espionage), हैकिंग और तकनीकी युद्ध का एक ऐसा खौफनाक उदाहरण है, जिस पर दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां दशकों तक रिसर्च करेंगी।
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मोसाद और 'यूनिट 8200' का खूनी गठजोड़: इजराइल ने इस एक पल के लिए वर्षों तक खामोशी से तैयारी की थी। इजराइल की खूंखार विदेशी खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) और साइबर वारफेयर के लिए दुनिया भर में मशहूर इजराइली मिलिट्री इंटेलिजेंस की 'यूनिट 8200' (Unit 8200) ने मिलकर एक ऐसा चक्रव्यूह रचा था, जिसे ईरान का कोई रडार नहीं पकड़ सका।
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यूनिट 8200 के हैकर्स ने तेहरान शहर के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरों, सरकारी इमारतों के बाहर लगे सर्विलांस सिस्टम और यहाँ तक कि सड़कों पर लगे स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम को भी हैक कर लिया था। यह हैकिंग इतनी बारीकी से की गई थी कि ईरान के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इन कैमरों के जरिए प्राप्त होने वाली हाई-रेजोल्यूशन लाइव फीड (Live Feed) को एन्क्रिप्ट (Encrypt) करके सीधे तेल अवीव और दक्षिणी इजराइल में बैठे खुफिया सर्वरों पर भेजा जा रहा था। यानी, तेहरान की सड़कों पर कौन आ-जा रहा है, यह ईरान सरकार से ज्यादा इजराइल देख रहा था।
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CIA का 'कैमरा' सुराग और मौत का वार: इस जटिल मिशन में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA (सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी) ने मोसाद को क्रिटिकल सपोर्ट (Critical Support) दिया। सीआईए ने तेहरान के हजारों कैमरों में से एक विशेष सर्विलांस कैमरे की पहचान की थी। यह कैमरा उस वीआईपी पार्किंग एरिया को कवर करता था, जहां ईरानी सीनियर अधिकारियों, कमांडरों के बॉडीगार्ड और ड्राइवर अपनी गाड़ियां पार्क करते थे।
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शनिवार को इसी कैमरे की लाइव फीड से मोसाद और CIA को पता चला कि पास्चर स्ट्रीट के उस गुप्त ऑफिस में आयतुल्लाह खामेनेई और ईरान के शीर्ष 40 सैन्य अधिकारी एक 'वॉर रूम मीटिंग' कर रहे हैं। लोकेशन और मौजूदगी 100% पुख्ता होते ही, इजराइली वायुसेना के फाइटर जेट्स ने लेबनान और सीरियाई एयरस्पेस को पार करते हुए उड़ान भरी। पलक झपकते ही उस इमारत पर 30 प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलें (Precision-guided missiles) दाग दी गईं। इमारत चंद सेकंडों में धुएं और मलबे के ढेर में बदल गई, और खामेनेई के साथ ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व का खात्मा हो गया।
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3. ईरान का पलटवार: दुबई दूतावास पर हमला और 650 मौतों का दावा

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इजराइल और अमेरिका के इस विनाशकारी प्रहार के बाद ईरान भी शांत नहीं बैठा है। हालांकि उसका शीर्ष नेतृत्व तबाह हो चुका है, लेकिन ईरान की सबसे ताकतवर और कट्टर सैन्य विंग, इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पलटवार की कमान संभाल ली है।
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दुबई में अमेरिकी दूतावास को बनाया निशाना: ईरान ने दावा किया है कि उसने युद्ध का दायरा बढ़ाते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई में स्थित अमेरिकी दूतावास (US Embassy) को अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स का निशाना बनाया है। यह दावा इस बात का संकेत है कि ईरान पूरे मध्य पूर्व में फैले अमेरिकी ठिकानों को असुरक्षित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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650 अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने का दावा: IRGC के प्रवक्ताओं ने सरकारी मीडिया के जरिए दावा किया है कि उनके 'जवाबी हमलों' (Retaliatory Strikes) में पहले दो दिनों के अंदर ही करीब 650 अमेरिकी सैनिक या तो मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ईरान का कहना है कि यह नुकसान इराक, सीरिया और खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर किए गए मिसाइल प्रहारों का नतीजा है।
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हालांकि, अमेरिका (पेंटागन) ने ईरान के इन भारी-भरकम आंकड़ों और दुबई दूतावास पर हुए हमले के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। वाशिंगटन का कहना है कि ईरान यह झूठा प्रोपेगेंडा अपने नागरिकों के सामने अपनी 'ताकत' साबित करने और गिरते हुए मनोबल को बचाने के लिए कर रहा है।
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4. युद्ध की सबसे डरावनी तस्वीर: ईरानी गर्ल्स स्कूल पर हमला और 180 छात्राओं की मौत

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युद्ध हमेशा अपने पीछे खंडहर और लाशें छोड़ जाता है, लेकिन इस युद्ध में मासूमों की जो कीमत चुकाई जा रही है, उसने पूरी दुनिया की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। दक्षिणी ईरान में स्थित एक लड़कियों के स्कूल (Girls School) पर हुए भयानक हमले में 180 से ज्यादा छात्राओं की दर्दनाक मौत हो गई है। यह घटना शनिवार को उसी दिन हुई, जब अमेरिका और इजराइल ने 'एपिक फ्यूरी' के तहत अपना सैन्य अभियान शुरू किया था।
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संयुक्त राष्ट्र (UN) में मचा हाहाकार: इस क्रूर नरसंहार पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार कार्यालय ने बेहद कड़ी और भावुक प्रतिक्रिया दी है। मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने इस हमले की तत्काल, निष्पक्ष और पारदर्शी अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है।
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जिनेवा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यूएन प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने अत्यंत व्यथित स्वर में कहा, "यह घटना बेहद डरावनी और अमानवीय है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही स्कूल की जली हुई किताबें, खून से सने बैग और मासूम बच्चियों के क्षत-विक्षत शवों की तस्वीरें इस संघर्ष की भयानक तबाही और दर्द को बयान कर रही हैं। जिस भी पक्ष ने यह हमला किया है, उसी की यह जिम्मेदारी है कि वह इसकी निष्पक्ष जांच करे और दुनिया के सामने सच लाए।"
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आरोपों का दौर: कौन है कातिल? जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अली बहरेनी ने इसे सीधा 'युद्ध अपराध' (War Crime) करार देते हुए अमेरिका और इजराइल को इन 180 छात्राओं का हत्यारा बताया है।
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दूसरी ओर, इस चौतरफा निंदा के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सामने आकर इन आरोपों को खारिज किया है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि, "अमेरिकी सेना के 'रूल ऑफ एंगेजमेंट' (युद्ध के नियम) बेहद कड़े हैं और वे जानबूझकर कभी स्कूलों, अस्पतालों या नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बनाते।" वहीं इजराइल ने कूटनीतिक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि वह इस घटना की जांच कर रहा है कि कहीं यह ईरान के ही किसी एयर-डिफेंस सिस्टम की मिसफायरिंग का नतीजा तो नहीं है, या फिर कोई इजराइली मिसाइल तकनीकी खराबी के कारण रास्ता भटक गई थी।
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5. लेबनान बना युद्ध का दूसरा मोर्चा: हिजबुल्लाह और इजराइल आमने-सामने

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यह युद्ध केवल ईरान की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। ईरान के सबसे मजबूत 'प्रॉक्सी' (Proxy) और लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह (Hezbollah) ने इजराइल के खिलाफ मोर्चा खोलकर इस जंग को 'टू-फ्रंट वॉर' (Two-Front War) में बदल दिया है।
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    बेरूत के होटल पर इजराइली एयरस्ट्राइक: लेबनान की राजधानी बेरूत के बाहर एक होटल पर इजराइल ने भारी हवाई हमला किया है। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी (नेशनल न्यूज एजेंसी) के मुताबिक, यह हमला हजमियेह (Hazmieh) इलाके में हुआ, जो बेरूत के डाउनटाउन से करीब 5 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। माना जा रहा है कि इस होटल में हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर छुपे हुए थे। हमले के तुरंत बाद इमारत ढह गई और एंबुलेंस की कतारें लग गईं।
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    हिजबुल्लाह के रॉकेट और मिसाइल प्रहार: हिजबुल्लाह ने चुपचाप मार नहीं सही है। उसने दावा किया है कि उसने उत्तरी इजराइल के मेतुला (Metula) शहर में इजराइली सैन्य टुकड़ियों पर भारी संख्या में रॉकेट दागे हैं। इससे पहले हिजबुल्लाह ने इजराइल के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हाइफा (Haifa) नौसैनिक अड्डे पर भी लंबी दूरी की मिसाइलों से हमला करने की बात स्वीकार की थी। इसके चलते उत्तरी इजराइल में सायरन लगातार बज रहे हैं और लोगों को बंकरों में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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6. वैश्विक कूटनीति का अखाड़ा: रूस और चीन की कड़ी चेतावनी

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मध्य पूर्व के इस दावानल ने दुनिया की महाशक्तियों को दो स्पष्ट गुटों में बांट दिया है। अमेरिका के धुर विरोधी माने जाने वाले रूस (Russia) और चीन (China) ने इजराइल और अमेरिका के इस आक्रामक कदम की कड़ी निंदा की है और इसे वैश्विक शांति के लिए खतरा बताया है।
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चीन की प्रतिक्रिया: चीन के विदेश मंत्री और शीर्ष राजनयिक वांग यी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इजराइल से तत्काल हमले रोकने और युद्धविराम (Ceasefire) की मांग की है। चीन को डर है कि इस युद्ध से फारस की खाड़ी (पर्शियन गल्फ) में तेल की आपूर्ति बाधित होगी, जो पूरी दुनिया, विशेषकर चीन की अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित होगा।
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रूस का स्पष्ट रुख: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका के उन दावों की हवा निकालने की कोशिश की है, जिनमें कहा गया था कि ईरान परमाणु बम (Nuclear Bomb) बनाने के करीब था। लावरोव ने मॉस्को में कहा, "हमें और हमारी खुफिया एजेंसियों को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि ईरान परमाणु बम हासिल करने या बनाने की कोशिश कर रहा था। यह हमला बिना उकसावे के किया गया है।" यदि रूस ने ईरान को आधुनिक हथियार या एयर-डिफेंस सिस्टम (जैसे S-400) देने का फैसला कर लिया, तो यह युद्ध सीधे तौर पर 'तीसरे विश्व युद्ध' (WW3) का रूप ले सकता है।
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दुनिया विनाश के मुहाने पर

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अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग के पांचवें दिन के घटनाक्रमों ने यह साबित कर दिया है कि यह युद्ध रुकने वाला नहीं है। आयतुल्लाह खामेनेई की मौत से ईरान के अंदर सत्ता का जो शून्य (Power Vacuum) पैदा हुआ है, वह देश को एक हिंसक गृहयुद्ध की ओर धकेल सकता है। वहीं 180 छात्राओं की मौत ने इस युद्ध का एक ऐसा घिनौना चेहरा पेश किया है, जिसे इतिहास कभी माफ नहीं कर पाएगा।
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क्या 'एपिक फ्यूरी' ईरान को पूरी तरह घुटनों पर ले आएगा? क्या हिजबुल्लाह लेबनान को श्मशान में बदल देगा? या क्या रूस और चीन इस युद्ध में सीधे कूद पड़ेंगे? ये वो सवाल हैं जिनके जवाब आने वाले कुछ दिनों में तय करेंगे कि दुनिया का नक्शा कैसा दिखेगा। फिलहाल, संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पूरी तरह से बेबस नजर आ रही है, और मध्य पूर्व में सिर्फ मिसाइलों और मातम का शोर गूंज रहा है।