खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ सकती है। यूपी में बिजली बिल (Electricity Bill in UP) जल्द ही कम होने की संभावना बन रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश सरकार से बिजली दरों में भारी कमी करने की जोरदार मांग उठाई है। परिषद का तर्क है कि बिजली कंपनियों के पास उपभोक्ताओं का भारी-भरकम सरप्लस (अधिशेष) पैसा जमा है, जिसके आधार पर दरों को तत्काल प्रभाव से कम किया जाना चाहिए।READ ALSO:-‘नमो भारत बीट्स’ अब मेरठ में; बेगमपुल स्टेशन पर सुरों से सजा पहला शो, यात्रियों ने किया गर्मजोशी से स्वागत
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इस बीच, बिजली (संशोधन) बिल 2025 को लेकर भी बिजली कर्मियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि बिजली दरों को लेकर क्या पेंच फंसा है और उपभोक्ताओं को कब तक राहत मिल सकती है।
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51 हजार करोड़ का सरप्लस: उपभोक्ता परिषद की बड़ी मांग

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राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बिजली दरों के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बिजली कंपनियों पर राज्य के उपभोक्ताओं का करीब 51 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का सरप्लस निकल रहा है।
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इस भारी सरप्लस को आधार बनाते हुए उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह विद्युत अधिनियम 2003 के तहत प्राप्त अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करे। परिषद की मांग है कि सरकार राज्य विद्युत नियामक आयोग (State Electricity Regulatory Commission) को सीधे निर्देश दे कि वह प्रदेश में बिजली की दरों को कम करे। 
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3.72 करोड़ उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा
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अगर सरकार उपभोक्ता परिषद की इस मांग को मान लेती है और नियामक आयोग दरें घटाने का फैसला करता है, तो इसका सीधा और बहुत बड़ा फायदा प्रदेश के करीब 3.72 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा। इससे आम आदमी के घर का बजट सुधरेगा और महंगाई के इस दौर में उन्हें यूपी में बिजली बिल (Electricity Bill in UP) के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलेगी।
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डिस्कॉम का घाटे का दावा और उपभोक्ता परिषद का पलटवार

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एक तरफ जहां उपभोक्ता परिषद सरप्लस के आधार पर दरें कम करने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की सभी विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) ने एक अलग ही राग अलापा है।
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डिस्कॉम्स ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों का प्रस्ताव नियामक आयोग को सौंपा है। इस प्रस्ताव पर सुनवाई की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसी क्रम में 9 मार्च को नोएडा में एक महत्वपूर्ण जनसुनवाई का आयोजन किया जा रहा है।
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    कंपनियों का दावा: उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि बिजली कंपनियां वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 12 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम घाटा दिखा रही हैं और इसी घाटे की आड़ में वे बिजली की दरें और बढ़ाने की कोशिश (Tariff Hike) कर रही हैं।
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    परिषद का तर्क: इसके उलट, अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि जब कंपनियों के पास उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये का सरप्लस पहले से ही मौजूद है, तो फिर घाटे का रोना रोकर दरें बढ़ाना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है।
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पूरा बिल, लेकिन पूरी बिजली नहीं: ग्रामीण उपभोक्ताओं की पीड़ा

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उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के उपभोक्ता हर महीने अपना पूरा बिजली बिल ईमानदारी से जमा करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें निर्बाध बिजली नहीं मिल रही है।
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विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों (Rural Areas) का हाल बुरा है, जहां उपभोक्ताओं को 24 घंटे के बजाय औसतन करीब 18 घंटे ही बिजली मिल पाती है। वर्मा ने याद दिलाया कि कानून के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी उपभोक्ताओं को 24 घंटे सातों दिन (24x7) निर्बाध बिजली की आपूर्ति मिलनी चाहिए, जो फिलहाल नहीं हो रहा है। (External link: source URL)
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बिजली (संशोधन) बिल 2025: कर्मियों की देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

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दरों के विवाद के अलावा, बिजली विभाग के कर्मचारी केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिजली (संशोधन) बिल 2025 (Electricity Amendment Bill 2025) के खिलाफ भी लामबंद हो गए हैं। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) की शुक्रवार को एक अहम ऑनलाइन बैठक आयोजित हुई, जिसमें आरपार की लड़ाई का ऐलान किया गया।
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    संसद में पेश होते ही आंदोलन: बैठक में सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि जैसे ही केंद्र सरकार संसद में बिजली (संशोधन) बिल 2025 पेश करेगी, उसी समय से देशभर के बिजली कर्मी और इंजीनियर एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन और कार्य बहिष्कार (Boycott) शुरू कर देंगे।
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    10 मार्च को पेश हो सकता है बिल: बैठक की अध्यक्षता करते हुए NCCOEEE के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार इस विवादास्पद बिल को 10 मार्च को संसद के पटल पर रख सकती है। उन्होंने देश भर के सभी अभियंताओं (Engineers) और बिजली कर्मियों से इस संभावित आंदोलन के लिए पूरी तरह तैयार रहने का आह्वान किया है।
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    पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया का आरोप: शैलेन्द्र दुबे ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस संगठन ने पहले ही इस बिल का खुला समर्थन कर दिया था, उसी संगठन को इस कानून को अंतिम रूप देने वाले 'वर्किंग ग्रुप' में शामिल कर लिया गया है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को असंवैधानिक और पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण करार दिया है।
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इस महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक में पी. रत्नाकर राव, आरके त्रिवेदी, मोहन शर्मा, कृष्णा जैसे प्रमुख श्रमिक नेताओं ने भी हिस्सा लिया और आंदोलन की रूपरेखा पर चर्चा की।
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उत्तर प्रदेश का बिजली सेक्टर इस समय दो बड़े मोर्चों पर सुलग रहा है। एक तरफ यूपी में बिजली बिल (Electricity Bill in UP) को लेकर उपभोक्ता परिषद ने 51 हजार करोड़ के सरप्लस का हवाला देते हुए दरें घटाने की पुरजोर मांग की है, जिससे 3.72 करोड़ उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद जगी है। वहीं दूसरी तरफ, बिजली कंपनियां घाटे का हवाला देकर दरें बढ़ाने की जुगत में हैं। इसके साथ ही, केंद्र के प्रस्तावित बिजली (संशोधन) बिल 2025 के विरोध में बिजली कर्मियों के देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना यह होगा कि 9 मार्च को नोएडा में होने वाली जनसुनवाई और 10 मार्च को संसद की कार्यवाही के बाद ऊंट किस करवट बैठता है और क्या वास्तव में आम जनता को बिजली बिल में कोई राहत मिल पाती है या नहीं।