लखनऊ (मौसम डेस्क):
\r\n\r\nलंबे समय से चिलचिलाती धूप और जानलेवा उमस का सामना कर रहे उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए मौसम ने एक बड़ी और राहत भरी करवट ली है। लेकिन, यह राहत अब कई जिलों के लिए आफत बनती जा रही है। प्रदेश भर में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून (South-West Monsoon) न केवल सक्रिय हो गया है, बल्कि उसने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है।
\r\n\r\nपिछले 48 घंटों से उत्तर प्रदेश के आसमान पर काले-घने बादलों का डेरा है। तेज तूफानी हवाओं और झमाझम बारिश ने पूरे प्रदेश के अधिकतम और न्यूनतम तापमान को धड़ाम से नीचे गिरा दिया है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हालात की गंभीरता को देखते हुए रविवार और आने वाले कुछ दिनों के लिए प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rain) और वज्रपात (Lightning) का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है।
\r\n\r\nआइए, विस्तार से जानते हैं कि बादलों का यह तांडव किन जिलों में बरपा है, आगे कहाँ-कहाँ भयंकर बारिश होने वाली है, और मौसम विभाग का पूरा वैज्ञानिक विश्लेषण क्या कहता है।
\r\n\r\n1. बांदा, गाजीपुर और हमीरपुर में बरसी आफत: सड़कें बनीं नदियां
\r\n\r\nशनिवार का दिन बुंदेलखंड और पूर्वांचल के कुछ जिलों के लिए भारी जलभराव लेकर आया। मूसलाधार बारिश के चलते इन जिलों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया। निचले इलाकों में पानी भर गया और कई जगह ट्रैफिक जाम की भीषण समस्या पैदा हो गई।
\r\n\r\nबारिश का डरावना मीटर (शनिवार सुबह 8 से शाम 5 बजे तक):
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- \r\n बांदा (Banda): यहाँ आसमान से मानो पानी नहीं, आफत बरसी हो। बांदा में सबसे अधिक 70.8 मिलीमीटर (mm) की रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई।\r\n \r\n
- \r\n हमीरपुर (Hamirpur): बुंदेलखंड के इस जिले में 45 मिलीमीटर की मूसलाधार बारिश हुई, जिससे खेत-खलिहान और सड़कें पानी-पानी हो गईं।\r\n \r\n
- \r\n गाजीपुर (Ghazipur): पूर्वांचल के इस अहम जिले में 41.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।\r\n \r\n
इन जिलों के अलावा, प्रदेश के बाकी हिस्सों में दिन भर हल्की से मध्यम रिमझिम बारिश होती रही, जिससे लोगों ने गर्मी से राहत की सांस ली।
\r\n\r\n2. डेंजर जोन: इन जिलों में जारी है मूसलाधार बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट'
\r\n\r\nअगर आप रविवार या सोमवार को घर से बाहर किसी सफर पर निकलने की योजना बना रहे हैं, तो जरा ठहरिए! मौसम विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अचानक भारी बारिश हो सकती है।
\r\n\r\nइन जिलों के लोग रहें सबसे ज्यादा सावधान:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\nगोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, अयोध्या, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल, बदायूं, कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही (संत रवि दास नगर), जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, कुशीनगर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर, शामली, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, और कासगंज।\r\n
3. मौत बनकर गिर सकती है बिजली (Lightning & Thunderstorm Alert)
\r\n\r\nबारिश से भी ज्यादा बड़ा खतरा आकाशीय बिजली का है। यूपी में हर साल बिजली गिरने से सैकड़ों मौतें होती हैं। मौसम विभाग ने गरज-चमक और वज्रपात का विशेष अलर्ट जारी किया है।
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\r\n\r\nबिजली गिरने का खतरा कहाँ है?
\r\n\r\nऊपर बताए गए भारी बारिश वाले लगभग सभी 50+ जिलों के साथ-साथ चित्रकूट, कानपुर देहात, बागपत, जालौन, महोबा, झांसी, और ललितपुर में भी आसमान से बिजली गिरने की प्रबल आशंका जताई गई है। किसानों और खुले में काम करने वाले मजदूरों को विशेष रूप से सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
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\r\n\r\n4. राजधानी लखनऊ का हाल: 2 डिग्री गिरा पारा, मौसम हुआ 'रोमांटिक'
\r\n\r\nनवाबों के शहर लखनऊ में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। राजधानीवासियों को चिलचिलाती धूप से छुटकारा मिल गया है।
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- \r\n पूर्वानुमान: मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, लखनऊ में आसमान काले बादलों से ढका रहेगा। दिन भर रुक-रुक कर रिमझिम फुहारें पड़ेंगी और शहर के कुछ चुनिंदा (Isolated) स्थानों पर तेज गरज-चमक के साथ भारी बारिश हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n तापमान: शनिवार के मुकाबले तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट आई है। अब अधिकतम तापमान 29°C और न्यूनतम तापमान 26°C के आसपास रहने का अनुमान है, जिससे उमस गायब हो गई है।\r\n \r\n
\r\n\r\n5. मौसम के इस भयानक बदलाव के पीछे का विज्ञान क्या है?
\r\n\r\nअचानक यूपी में इतनी भीषण बारिश क्यों हो रही है? इसका जवाब दिया है वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर अतुल सिंह ने।
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\r\n\r\nडॉ. सिंह के अनुसार, मौसम में आए इस बड़े बदलाव के दो मुख्य कारण हैं:
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- \r\n लो-प्रेशर एरिया (Low Pressure Area): उत्तरी-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी पर एक सुस्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र बन गया है, जो एक बड़े चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) में बदल गया है।\r\n \r\n
- \r\n मानसूनी द्रोणी (Monsoon Trough) का खिसकना: मानसून की ट्रफ लाइन, जो पहले तराई इलाकों में थी, अब दक्षिण की ओर खिसक गई है। यह लाइन अब अमृतसर, करनाल, हरदोई, रांची और दीघा होते हुए सीधे बंगाल की खाड़ी तक जा रही है।\r\n \r\n
इन्हीं दो सिस्टम के आपस में टकराने के कारण यूपी में भारी बारिश का यह सिस्टम तैयार हुआ है। डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया है कि 21 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश का यह सिलसिला जारी रहेगा, और दक्षिणी यूपी में 24 जुलाई तक झमाझम बारिश होती रहेगी।
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\r\n\r\n6. चौंकाने वाले आंकड़े: इतनी बारिश के बाद भी यूपी सूखा क्यों?
\r\n\r\nबांदा और गाजीपुर के डूबने की तस्वीरें देखकर भले ही लगे कि यूपी में बाढ़ आ गई है, लेकिन मौसम विभाग के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। सच तो यह है कि प्रदेश में अभी भी बारिश का भारी सूखा (Deficit) चल रहा है।
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- \r\n कुल राज्य का हाल: 1 जून से 18 जुलाई तक यूपी में 247.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन हुई सिर्फ 176.4 मिमी। यानी अभी भी 29% की भयंकर कमी है।\r\n \r\n
- \r\n पूर्वांचल में सबसे ज्यादा सूखा: पूर्वी यूपी में स्थिति ज्यादा खराब है। यहाँ सामान्य (274 मिमी) के मुकाबले सिर्फ 164 मिमी बारिश हुई है। यानी सीधे-सीधे 40% कम बारिश।\r\n \r\n
- \r\n पश्चिमी यूपी की राहत: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की स्थिति थोड़ी बेहतर है, जहाँ सामान्य (210 मिमी) के मुकाबले 194 मिमी बारिश हुई है (केवल 8% की कमी)।\r\n \r\n
\r\n\r\nतापमान का खेल: बारिश के बीच भी गर्मी का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। झांसी अभी भी 38.5°C (सामान्य से 5°C अधिक) के साथ प्रदेश का सबसे गर्म जिला बना हुआ है। वहीं, हरदोई सबसे ठंडा रहा, जहाँ न्यूनतम तापमान 23°C (सामान्य से 3°C कम) दर्ज किया गया।
\r\n\r\nमौसम विभाग की एडवाइजरी (Public Safety Guidelines)
\r\n\r\nबारिश का यह दौर किसानों के लिए, खासकर धान की रोपाई कर रहे किसानों के लिए एक वरदान है। लेकिन आम शहरी जनता और यात्रियों के लिए यह खतरे की घंटी भी है।
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\r\n\r\nसुरक्षा के 3 मूल मंत्र:
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- \r\n पेड़ों से दूर रहें: बारिश या आंधी के समय कभी भी पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे आश्रय न लें। वज्रपात का सबसे ज्यादा खतरा यहीं होता है।\r\n \r\n
- \r\n जलभराव से बचें: खुले सीवर, गड्ढों और जलभराव वाले रास्तों से वाहन निकालने का जोखिम न लें।\r\n \r\n
- \r\n अपडेट रहें: घर से निकलने से पहले मौसम विभाग के स्थानीय अलर्ट (Nowcast) को जरूर चेक करें।\r\n \r\n
\r\n\r\nयह मानसून अब अपने चरम पर है। प्रकृति के इस बदलते मिजाज का आनंद लें, लेकिन पूरी सावधानी के साथ!