उत्तर प्रदेश में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और हर बच्चे के हाथ में किताब सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए पूरे प्रदेश में यूपी स्कूल चलो अभियान 2026 (UP School Chalo Abhiyan 2026) का व्यापक स्तर पर शंखनाद कर दिया गया है। इस महत्वाकांक्षी अभियान का मुख्य उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा के अधिकार (RTE) की मुख्यधारा से जोड़ना है।READ ALSO:-मेरठ में गैस आपूर्ति को लेकर प्रशासन सख्त: डीएम डॉ. वी.के. सिंह ने जारी की एडवाइजरी, कालाबाजारी पर एक्शन और 24 घंटे खुला रहेगा कंट्रोल रूम
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उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DMs), बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSAs) और संबंधित विभागों को पत्र जारी कर इस अभियान को युद्धस्तर पर और बेहद सुनियोजित ढंग से संचालित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार का सीधा फोकस उन 'ड्रॉपआउट' (Dropout) बच्चों पर है जो किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुके हैं या जो आज तक स्कूल के दरवाजे तक नहीं पहुंच पाए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि यूपी स्कूल चलो अभियान 2026 की रूपरेखा क्या है, अभिभावकों को क्या सहूलियतें दी गई हैं और यह महाभियान किन चरणों में पूरा किया जाएगा।
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शिक्षा से वंचित बच्चों की तलाश: क्या है सरकार का मुख्य उद्देश्य?
\r\n\r\nपिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा चलाए गए अभियानों के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जन-जागरूकता में भारी वृद्धि हुई है। सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदली है; वहां अब स्मार्ट क्लास, मुफ्त किताबें, जूते-मोजे और मिड-डे मील जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके बावजूद, मुख्य सचिव ने अपने आदेश में इस बात को स्वीकार किया है कि लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है।
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आज भी समाज के कई वर्गों के बच्चे स्कूल से बाहर हैं। सरकार ने इस अभियान के तहत विशेष रूप से निम्नलिखित श्रेणियों के बच्चों की पहचान करने का निर्देश दिया है:
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- \r\n वंचित और अति पिछड़े वर्ग के बच्चे\r\n \r\n
- \r\n बालिकाएं (लड़कियां) जिन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण स्कूल से हटा लिया जाता है।\r\n \r\n
- \r\n दिव्यांग (विशेष आवश्यकता वाले) बच्चे जिन्हें सामान्य स्कूलों तक पहुंचने में कठिनाई होती है।\r\n \r\n
- \r\n कामकाजी बच्चे जो बाल मजदूरी के दलदल में फंसे हैं।\r\n \r\n
- \r\n दूरदराज और ईंट-भट्ठों (Migrant Workers) पर काम करने वाले परिवारों के बच्चे।\r\n \r\n
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प्रशासन को निर्देश है कि हर ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर सघन सर्वे कराकर ऐसे बच्चों का चिन्हांकन किया जाए और उनका शत-प्रतिशत नामांकन (100% Enrollment) सुनिश्चित किया जाए।
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यूपी स्कूल चलो अभियान 2026 के दूरगामी लक्ष्य और ट्रांजिशन दर
\r\n\r\nनई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप, राज्य सरकार ने इस अभियान को केवल प्राथमिक स्तर तक सीमित न रखकर प्री-प्राइमरी और माध्यमिक स्तर तक के लिए विस्तृत लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
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- \r\n आंगनवाड़ी और बालवाटिका में प्रवेश: 3 वर्ष की आयु पूरी कर चुके सभी बच्चों का अनिवार्य रूप से आंगनवाड़ी केंद्रों या बालवाटिका में नामांकन कराना, ताकि उनके मस्तिष्क का प्रारंभिक विकास सही दिशा में हो सके।\r\n \r\n
- \r\n कक्षा-1 में शत-प्रतिशत प्रवेश: 6 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हर एक बच्चे का पास के परिषदीय प्राथमिक विद्यालय की कक्षा-1 में दाखिला कराना।\r\n \r\n
- \r\n ड्रॉपआउट बच्चों की घर-वापसी: 7 से 14 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चे, जिन्होंने स्कूल जाना बंद कर दिया है, उनकी पहचान कर आयु के अनुसार उपयुक्त कक्षा में उनका पुनः नामांकन कराना।\r\n \r\n
- \r\n शत-प्रतिशत ट्रांजिशन (Transition): अक्सर देखा जाता है कि बच्चे एक स्कूलिंग स्तर को पूरा करने के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। इसलिए सरकार ने आंगनवाड़ी से कक्षा-1, कक्षा-5 से कक्षा-6 (उच्च प्राथमिक), कक्षा-8 से कक्षा-9 (माध्यमिक) और कक्षा-10 से कक्षा-11 तक 100% ट्रांजिशन सुनिश्चित करने का सख्त लक्ष्य रखा है।\r\n \r\n
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दो महत्वपूर्ण चरणों में संचालित होगा 'स्कूल चलो अभियान'
\r\n\r\nमौसम की परिस्थितियों और शैक्षिक कैलेंडर को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने यूपी स्कूल चलो अभियान 2026 को दो अलग-अलग और रणनीतिक चरणों में संचालित करने का निर्णय लिया है:
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- \r\n पहला चरण (1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026): शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही यह चरण शुरू होगा। इन 15 दिनों में शिक्षक, शिक्षा मित्र, और आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां घर-घर जाकर सर्वे करेंगी और नए बच्चों का प्रवेश विद्यालय के रजिस्टर में दर्ज करेंगी। प्रवेश के समय स्कूलों में उत्सव का माहौल (प्रवेश उत्सव) बनाया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n दूसरा चरण (1 जुलाई से 15 जुलाई 2026): ग्रीष्मावकाश (गर्मियों की छुट्टियों) के बाद जब स्कूल दोबारा खुलेंगे, तब इस दूसरे चरण की शुरुआत होगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह जाँचना होगा कि पहले चरण में नामांकित बच्चे नियमित स्कूल आ रहे हैं या नहीं। साथ ही, जो बच्चे छुट्टियों के दौरान अपने पैतृक गांव लौट आए हैं या पहले चरण में छूट गए थे, उनका भी नामांकन किया जाएगा।\r\n \r\n
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सबसे बड़ी राहत: बिना आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र के भी मिलेगा दाखिला
\r\n\r\nसरकारी स्कूलों में प्रवेश के दौरान सबसे बड़ी बाधा अक्सर कागजी दस्तावेजों की होती है। कई गरीब और अशिक्षित माता-पिता अपने बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) या आधार कार्ड (Aadhaar Card) नहीं बनवा पाते हैं। दस्तावेजों की इसी कमी के डर से वे बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते हैं।
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इस अड़चन को पूरी तरह से खत्म करते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। यूपी स्कूल चलो अभियान 2026 के तहत यदि किसी बच्चे के पास जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड या कोई अन्य सरकारी पहचान पत्र नहीं है, तो भी उसे किसी भी सूरत में स्कूल में प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा। अभिभावकों द्वारा बताई गई जन्मतिथि और दी गई सामान्य जानकारी के आधार पर ही बच्चे का तुरंत दाखिला लिया जाएगा। प्रवेश के उपरांत, स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की यह जिम्मेदारी होगी कि वे बच्चे का आधार कार्ड बनवाने में परिवार की मदद करें।
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बालिकाओं और दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर विशेष फोकस
\r\n\r\nबालिकाओं और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए सरकार ने एक अलग और संवेदनशील रणनीति तैयार की है।
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- \r\n कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV): जो बालिकाएं घरेलू या सामाजिक कारणों से उच्च प्राथमिक शिक्षा (कक्षा 6 से 8) से दूर हो गई हैं, उन्हें ब्लॉक स्तर पर संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में प्रवेश दिलाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। वहां उन्हें मुफ्त शिक्षा, सुरक्षित आवास और भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n दिव्यांग बच्चों के लिए मेडिकल कैंप: दिव्यांग बच्चों की पहचान कर ब्लॉक स्तर पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण (Medical Checkup) कराया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार उन्हें व्हीलचेयर, ट्राई-साइकिल, सुनने की मशीन (Hearing Aids), ब्रेल किताबें और अन्य शिक्षण उपकरण बिल्कुल मुफ्त प्रदान किए जाएंगे ताकि वे सामान्य बच्चों के साथ बैठकर पढ़ सकें।\r\n \r\n
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जन-भागीदारी और व्यापक प्रचार-प्रसार की रणनीति
\r\n\r\nयूपी स्कूल चलो अभियान 2026 को सफल बनाने के लिए मुख्य सचिव ने इसे एक 'जन-आंदोलन' का रूप देने का आह्वान किया है। अभियान शुरू होने से पहले जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिले भर के शिक्षा अधिकारियों की बैठक होगी जिसमें सूक्ष्म रणनीति (Micro-planning) तय की जाएगी।
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इस अभियान में समाज के हर तबके को जोड़ा जाएगा। स्थानीय सांसद, विधायक, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, और ग्राम प्रधानों को अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा। गांव-गांव में प्रभात फेरियां निकाली जाएंगी, स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC) की बैठकें होंगी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा समाचार पत्रों, स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया, दीवार लेखन (Wall writing), बैनर, पोस्टर और एलईडी वैन (LED Vans) के माध्यम से शिक्षा के महत्व का भारी प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
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करोड़ों का बजट आवंटित: 31 मार्च तक पूरी करनी होंगी तैयारियां
\r\n\r\nइस महाभियान के संचालन में धन की कोई कमी आड़े न आए, इसके लिए 'समग्र शिक्षा अभियान, उत्तर प्रदेश' के तहत भारी-भरकम बजट जारी किया गया है:
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- \r\n प्रत्येक जिले को: 5 लाख रुपये की धनराशि (जिला स्तर पर निगरानी और बड़े आयोजनों के लिए)।\r\n \r\n
- \r\n प्रत्येक ब्लॉक को: 10,000 रुपये की धनराशि (ब्लॉक स्तर की रैलियों और जागरूकता के लिए)।\r\n \r\n
- \r\n प्रत्येक विद्यालय को: 2,500 रुपये की धनराशि (प्रवेश उत्सव मनाने, बच्चों का स्वागत करने और बैनर-पोस्टर के लिए)।\r\n \r\n
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सरकार ने सख्त निर्देश दिया है कि अभियान से जुड़ी सभी प्रारंभिक तैयारियां 31 मार्च 2026 तक हर हाल में पूरी कर ली जाएं। जिलाधिकारी स्वयं डैशबोर्ड के माध्यम से प्रतिदिन नामांकित होने वाले बच्चों की प्रगति की समीक्षा (Monitoring) करेंगे और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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शिक्षा से संवरेगा उत्तर प्रदेश का भविष्य
\r\n\r\nसंक्षेप में कहा जाए तो यूपी स्कूल चलो अभियान 2026 केवल बच्चों का स्कूलों में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लाखों गरीब, वंचित और मजदूर परिवारों के बच्चों के सपनों को उड़ान देने का एक मजबूत आधार है। बिना दस्तावेज के प्रवेश की अनुमति, ड्रॉपआउट बच्चों की वापसी और बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान देकर योगी सरकार ने यह साबित किया है कि शिक्षा हर बच्चे का बुनियादी अधिकार है। अब यह प्रदेश के हर नागरिक, अभिभावक और पंचायत प्रतिनिधि का कर्तव्य है कि वे अपने आस-पास के किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित न रहने दें। इस अभियान की सफलता ही एक साक्षर, सशक्त और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नींव रखेगी।
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उत्तर प्रदेश सरकार ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए 'यूपी स्कूल चलो अभियान 2026' के व्यापक संचालन के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के आदेशानुसार यह अभियान 1 से 15 अप्रैल और 1 से 15 जुलाई 2026 तक दो चरणों में चलेगा। इसका मुख्य लक्ष्य 6 से 14 वर्ष के बच्चों, विशेषकर ड्रॉपआउट, बालिकाओं, और दिव्यांग बच्चों को मुफ्त शिक्षा से जोड़ना है। सबसे बड़ी राहत यह है कि बिना आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र के भी बच्चों को प्रवेश मिलेगा। अभियान की सफलता के लिए जिले (5 लाख), ब्लॉक (10 हजार) और विद्यालय स्तर (2,500 रुपये) पर विशेष धनराशि भी आवंटित की गई है।