खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और सुधार लाने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। 'निपुण भारत मिशन' (Nipun Bharat Mission) के तहत बच्चों में आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy) को मजबूत करने के बाद, अब राज्य सरकार का पूरा फोकस उन बच्चों पर है जो किसी कारणवश अपनी कक्षा के अनुरूप सीखने के स्तर (Learning Level) में पीछे रह गए हैं।READ ALSO:-Meerut News: यूपी सरकार की नई 'ई-रजिस्ट्री' व्यवस्था के खिलाफ मेरठ में भड़का आक्रोश! बैनामा लेखकों और अधिवक्ताओं की हड़ताल, ठप हुआ निबंधन का काम
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इस महत्वपूर्ण समस्या को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में एक मेगा 'कैच-अप शिक्षण अभियान' (Catch-Up Shikshan Abhiyan) शुरू करने का फैसला किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों के 'लर्निंग गैप' (सीखने के अंतराल) को पहचानना और उसे पूरी तरह से खत्म करना है ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा की दौड़ में पीछे न छूटे।
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क्या है 15 दिवसीय कैच-अप शिक्षण अभियान?

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स्कूली शिक्षा महानिदेशालय और बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार, नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों की नींव मजबूत करने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस कार्यक्रम की समय-सीमा को दो मुख्य चरणों में बांटा गया है:
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    जुलाई 2026 में 15 दिवसीय कार्यक्रम: जुलाई के महीने में प्रदेश के सभी सरकारी और परिषदीय विद्यालयों में सभी विद्यार्थियों के लिए 15 दिनों का एक सघन 'पुनरावृत्ति शिक्षण कार्यक्रम' (Revision Teaching Program) आयोजित किया जाएगा। इसमें पिछली कक्षाओं के महत्वपूर्ण विषयों को दोहराया जाएगा।
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    अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक नियमित सत्र: 15 दिन के इस सघन अभियान के बाद, अगस्त 2026 से लेकर जनवरी 2027 तक, हर स्कूल में प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का एक विशेष 'कैच-अप शिक्षण सत्र' (Catch-Up Teaching Session) आयोजित किया जाएगा।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप कार्ययोजना

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इस कैच-अप शिक्षण अभियान को पूरी तरह से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCFSE-2023) की भावना के अनुरूप तैयार किया गया है। योगी सरकार का स्पष्ट मानना है कि अगर समय रहते बच्चों के अधिगम अंतराल (Learning Gap) को दूर नहीं किया गया, तो उनकी आगे की शैक्षणिक प्रगति बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है।
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इस अभियान के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी व्यक्तिगत सीखने की गति और आवश्यकता के अनुसार शैक्षणिक सहयोग (Academic Support) उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए विद्यालय स्तर पर एक सुनियोजित, व्यवस्थित और परिणामोन्मुखी रणनीति लागू की जा रही है।
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कैसे रुचिकर बनेगी पढ़ाई? (अनुभव आधारित शिक्षण)

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यह कैच-अप शिक्षण पारंपरिक और उबाऊ रटंत विद्या तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि पढ़ाई को पाठ्यपुस्तकों से बाहर निकालकर स्थानीय परिवेश और बच्चों के दैनिक जीवन के अनुभवों से जोड़ा जाए।
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    खेल और गतिविधि आधारित शिक्षण: कक्षाओं में शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM), गणित किट (Math Kit), पुस्तकालय की आकर्षक पुस्तकों, चार्ट, और स्थानीय संसाधनों का भरपूर उपयोग किया जाएगा।
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    सहभागितापूर्ण शिक्षण: खेल-कूद, कहानी सुनाना, चित्र बनाना, समूह कार्य (Group Work) और लेखन के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ाई जाएगी।
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पीयर लर्निंग और त्रुटि विश्लेषण पर रहेगा जोर

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कक्षा में बच्चों की झिझक दूर करने और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए विशेष रणनीतियां अपनाई जाएंगी।
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    त्रुटि विश्लेषण (Error Analysis): शिक्षक इस बात पर जोर देंगे कि बच्चे कहां गलती कर रहे हैं और क्यों पिछड़ रहे हैं। कठिनाइयों की पहचान कर उनका मौके पर ही समाधान किया जाएगा।
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    मैं करूं-हम करें-तुम करो रणनीति: इस व्यावहारिक रणनीति के साथ-साथ 'पीयर लर्निंग' (Peer Learning - साथियों के साथ सीखना) और 'कोऑपरेटिव लर्निंग' (सहयोगात्मक शिक्षण) पद्धतियों का उपयोग किया जाएगा। इससे बच्चों में आपसी सहयोग और समस्या समाधान की क्षमता विकसित होगी और कोई भी कमजोर विद्यार्थी खुद को उपेक्षित महसूस नहीं करेगा।
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आकलन और अभिभावकों की सहभागिता (Monitoring & Assessment)

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इस पूरे कैच-अप शिक्षण अभियान को परिणाममुखी और जवाबदेह बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने अनुश्रवण (Monitoring) का एक मजबूत ढांचा तैयार किया है।
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    बेसलाइन और एंडलाइन आकलन: अभियान शुरू होने से पहले बच्चों के वर्तमान स्तर को जांचने के लिए 'बेसलाइन आकलन' (Baseline Assessment) होगा। अभियान के अंत में 'एंडलाइन आकलन' किया जाएगा ताकि प्रगति का सही मूल्यांकन और अभिलेखीकरण (Documentation) हो सके।
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    सख्त अनुश्रवण: अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG), डायट मेंटर (DIET Mentor) और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण कर कार्यक्रम की समीक्षा करेंगे।
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    अभिभावकों की भूमिका: विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) और बच्चों के अभिभावकों को भी इस अभियान से सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा। बैठकों के जरिए अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा ताकि बच्चों को विद्यालय के साथ-साथ घर पर भी सीखने के लिए एक अनुकूल और पढ़ाई वाला वातावरण मिल सके।
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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा सुधार का यह नया चरण केवल स्कूलों में नामांकन बढ़ाने या मिड-डे मील जैसी सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह बच्चों के वास्तविक अधिगम परिणामों (Learning Outcomes) पर केंद्रित हो चुका है। निपुण भारत मिशन और डिजिटल मॉनिटरिंग के बाद अब कैच-अप शिक्षण अभियान यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी बच्चा कक्षा में पीछे न बैठे। त्रुटि विश्लेषण, पीयर लर्निंग और शिक्षकों की मेहनत के दम पर यह पहल प्रदेश में एक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और परिणामोन्मुखी शिक्षा व्यवस्था के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी।
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उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूलों में बच्चों के सीखने के अंतराल (Learning Gap) को खत्म करने के लिए पूरे राज्य में एक मेगा 'कैच-अप शिक्षण अभियान' शुरू करने का फैसला किया है। जुलाई में सभी बच्चों के लिए 15 दिनों का सघन पुनरावृत्ति (Revision) कार्यक्रम चलेगा। इसके बाद अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक हर दिन 20 से 30 मिनट की विशेष कैच-अप क्लास होगी। इस अभियान में पाठ्यपुस्तकों के बजाय खेल, गतिविधि (TLM), और 'पीयर लर्निंग' पर जोर दिया जाएगा, ताकि हर बच्चा अपनी कक्षा के स्तर के अनुसार पढ़ाई सीख सके।