खबरीलाल डेस्क
सहारनपुर (उत्तर प्रदेश): इंसानी मन की गहराई और उसमें छिपे दर्द का अंदाजा लगाना कभी-कभी नामुमकिन हो जाता है। बाहर से लोहे की तरह मजबूत दिखने वाला इंसान अंदर से किस कदर टूटा हुआ हो सकता है, इसका एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाला उदाहरण उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से सामने आया है। यहां एक 52 वर्षीय बॉडीबिल्डर और डिग्री कॉलेज के क्लर्क ने खुद को गोली मारकर अपनी जान दे दी। यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं है, बल्कि एक इंसान के उस चरम मानसिक तनाव और पीड़ा की कहानी है, जिसने उसे मौत को गले लगाने पर मजबूर कर दिया। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात वह सुसाइड नोट है, जो उन्होंने मरने से ठीक पहले अपनी भांजी को भेजा था।Read also:-हरिद्वार से 25 लाख कांवड़ियों ने उठाया जल, दिल्ली-रुड़की हाईवे वन-वे; मेरठ में लागू हुआ नया ट्रैफिक डायवर्जन, घर से निकलने से पहले पढ़ें पूरा रूट चार्ट
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इस सुसाइड नोट में उन्होंने जो लिखा है, वह किसी की भी रूह कंपा देने के लिए काफी है। उन्होंने अपनी मौत के बाद अपनी पत्नी को अपनी लाश छूने तक की मनाही कर दी और इच्छा जताई कि उनकी 'आत्मा हमेशा भटकती रहे।'
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आइए, इस पूरी घटना, उस दर्दनाक सुसाइड नोट और एक हंसते-खेलते परिवार के उजड़ने की इस कहानी को विस्तार से समझते हैं।
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घटना का खौफनाक मंजर: शनिवार शाम 7 बजे आखिर क्या हुआ?

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घटना सहारनपुर शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर सरसावा थाना क्षेत्र की है। 52 वर्षीय देवदत्त शर्मा रेलवे रोड के निवासी थे। शनिवार की शाम उनके और उनके परिवार के लिए एक सामान्य शाम की तरह ही शुरू हुई थी। पड़ोसियों के मुताबिक, देवदत्त रोज की तरह शाम को अपने घर के पीछे स्थित 'रॉक जिम' गए थे।
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पत्नी सीमा रानी के अनुसार, शाम करीब 7 बजे वह जिम से वापस घर पहुंचे। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, देवदत्त ने घर के अंदर ही अपने सिर में तमंचा सटाकर गोली मार ली। गोली की तेज आवाज से पूरे घर में सन्नाटा पसर गया। आवाज सुनकर पत्नी सीमा बदहवास हालत में दौड़कर उस कमरे में पहुंचीं। सामने का नजारा ऐसा था, जिसने उनके होश उड़ा दिए। उनके पति देवदत्त शर्मा खून से लथपथ फर्श पर गिरे पड़े थे और पास ही वह तमंचा पड़ा था, जिससे उन्होंने खुद की जान ली थी।
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चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी सुशील भी दौड़कर अंदर आए। उन्होंने तुरंत देवदत्त को कार में डाला और उन्हें लेकर पास के मेडिकल कॉलेज की तरफ भागे। लेकिन अफसोस, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने देवदत्त को मृत घोषित कर दिया।
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वह दर्दनाक सुसाइड नोट: 'अपमान ने आत्मा को अंदर से मार दिया है'

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इस पूरी घटना का सबसे दुखद और रहस्यमयी पहलू वह सुसाइड नोट है, जो देवदत्त ने मौत को गले लगाने से कुछ ही मिनट पहले अपनी 21 वर्षीय भांजी नेहा शर्मा को वॉट्सऐप पर भेजा था। इस मैसेज का एक-एक शब्द उस गहरी निराशा, क्रोध और अपमान की गवाही देता है, जिसे वह अंदर ही अंदर झेल रहे थे।
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देवदत्त ने अपने मैसेज में लिखा:

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"अब अपमान सहन नहीं होता। बार-बार मरने से बेहतर है कि एक ही बार मर जाऊं। कायर नहीं हूं, लेकिन अपमान ने आत्मा को अंदर से मार दिया है। मेरी लाश को पत्नी को छूने न दिया जाए।"
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बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने अपने अंतिम संस्कार को लेकर भी ऐसी खौफनाक और अजीबोगरीब इच्छाएं जाहिर कीं, जो आमतौर पर कोई इंसान नहीं करता। उन्होंने आगे लिखा:
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"मेरे अंतिम संस्कार में उपलों का इस्तेमाल न किया जाए। इसमें ज्यादा पैसे भी खर्च नहीं करना। आत्मा की शांति के लिए कोई धार्मिक कार्यक्रम न किया जाए। मैं चाहता हूं कि मेरी आत्मा भटकती रहे। तुम अपनी मां का ख्याल रखना।"
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एक व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद अपनी आत्मा की शांति की कामना करता है, लेकिन देवदत्त का यह लिखना कि वह चाहते हैं कि उनकी आत्मा भटकती रहे, यह दर्शाता है कि उनके मन में अपने परिवेश और शायद अपने वैवाहिक जीवन को लेकर कितनी गहरी नफरत या ठेस बैठ चुकी थी।
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शारीरिक रूप से मजबूत, पर अंदर से अकेला: कौन थे देवदत्त शर्मा?

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देवदत्त शर्मा की पहचान इलाके में एक फिट और मजबूत इंसान के रूप में थी। वह खुद बॉडी बिल्डिंग करते थे और युवाओं को भी इसके लिए प्रेरित करते थे। साल 2000 से वह अपने घर के पिछले हिस्से में 'रॉक जिम' के नाम से एक जिम का संचालन कर रहे थे। पिछले 26 सालों से इलाके के लोग उन्हें एक जिम ट्रेनर और फिटनेस उत्साही के रूप में जानते थे।
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इसके अलावा, वह एक मेहनती इंसान भी थे। पिछले 2 सालों से वह शहर के बालाजी ग्रुप ऑफ कॉलेज में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे, जहां से उन्हें 17 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था। कॉलेज की ड्यूटी खत्म करने के बाद वह अपना जिम संभालते थे। इससे पहले उन्होंने तिलक राम सैनी गर्ल्स कॉलेज और इलामचंद सनी गर्ल्स कॉलेज में भी अपनी सेवाएं दी थीं। दिन-रात मेहनत करने वाले इस इंसान के मन में कौन सा 'अपमान' पल रहा था, यह अब पुलिस की जांच का मुख्य विषय बन गया है।
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भरा-पूरा परिवार और होनहार बच्चे

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देवदत्त शर्मा के परिवार की पृष्ठभूमि देखें तो बाहर से सब कुछ सामान्य और सफल नजर आता है। देवदत्त के माता-पिता का देहांत कई साल पहले हो चुका था। दो भाई-बहनों में वह बड़े थे। उनकी 45 वर्षीय बहन रजनी की शादी सचिन शर्मा से हुई थी, जिनका 3 साल पहले निधन हो चुका है। देवदत्त ने सुसाइड नोट अपनी उसी विधवा बहन की 21 साल की बेटी नेहा को भेजा था।
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देवदत्त की शादी 33 साल पहले सीमा रानी (49) से हुई थी। उनके दो बेटे हैं और दोनों ही अपने करियर में काफी अच्छा कर रहे हैं:
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    बड़ा बेटा (अभिषेक): दुबई में नौकरी करता है और अच्छी तरह से सेटल है।
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    छोटा बेटा (आदित्य): चंडीगढ़ में फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई कर रहा है। वह अपने पिता की तरह ही फिटनेस का शौकीन है और एक पावरलिफ्टर है। हाल ही में आदित्य ने देहरादून में आयोजित एक प्रतियोगिता के 74 किलो वर्ग में 135 किलो का वजन उठाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।
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इतने होनहार और सफल बच्चों के बावजूद, एक पिता का इस तरह का खौफनाक कदम उठाना कई सवाल खड़े करता है।
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पुलिस जांच और फोरेंसिक टीम की कार्रवाई

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गोली चलने और मौत की सूचना मिलते ही सरसावा थाना पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। थानाध्यक्ष प्रवेश कुमार शर्मा अपनी पुलिस टीम और फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने उस कमरे की बारीकी से जांच की जहां घटना हुई थी। मौके से खून के नमूने, इस्तेमाल किया गया तमंचा और अन्य जरूरी सबूत इकट्ठा किए गए। पुलिस ने आसपास के लोगों और पड़ोसियों से भी प्रारंभिक पूछताछ की है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ (सर्किल ऑफिसर) पवन कुमार ने भी घटना का संज्ञान लिया। उन्होंने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया:
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"शुरुआती जांच में यह पूरी तरह से सुसाइड का मामला लग रहा है। पुलिस की छानबीन में एक सुसाइड नोट (वॉट्सऐप मैसेज) का पता चला है, जिसे मृतक ने अपनी भांजी को भेजा था। हम सुसाइड नोट के हर पहलू की गहराई से जांच कर रहे हैं। पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि मृतक किस बात से आहत था और 'अपमान' का जो जिक्र किया गया है, उसकी असली वजह क्या है। जांच पूरी होने के बाद कानूनी रूप से आगे की कार्रवाई की जाएगी।"
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सहारनपुर का यह मामला सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। एक व्यक्ति जो शारीरिक रूप से इतना मजबूत था, जो दो जवान और सफल बेटों का पिता था, आखिर वह घर की चारदीवारी के भीतर किस मानसिक प्रताड़ना और घुटन से गुजर रहा था? पत्नी को लाश न छूने देने की बात पति-पत्नी के रिश्ते के बीच आई उस भयानक खाई की ओर इशारा करती है, जिसे समय रहते नहीं भरा जा सका। पुलिस की जांच अब इस बात से पर्दा उठाएगी कि देवदत्त की मौत का असली जिम्मेदार वह तमंचा है, या वह 'अपमान' जिसने उनकी आत्मा को बहुत पहले ही मार दिया था।