खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज-कौशांबी बॉर्डर पर सोमवार की सुबह एक ऐसा धमाका हुआ, जिसकी गूंज और खौफ ने पूरे सूबे को हिला कर रख दिया। मनौरी एयरफोर्स स्टेशन से महज दो किलोमीटर की दूरी पर बेखौफ चल रही एक अवैध पटाखा फैक्ट्री मौत का ऐसा केंद्र बनी, जिसने हंसते-खेलते कई परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। सोमवार दोपहर 11:30 बजे हुए इस भीषण विस्फोट में अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। प्रशासन ने इस भयावह त्रासदी के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसमें बुलडोजर एक्शन से लेकर पुलिस एनकाउंटर और निलंबन तक शामिल है।READ ALSO:-ट्रेन में सफर करने वाले सावधान! बिना TTE से पूछे बदली सीट तो लगेगा भारी जुर्माना, रेलवे ने बनाए सख्त नियम
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अवैध साम्राज्य का अंत: गरजता बुलडोजर और ढहता मकान

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हादसे के बाद प्रशासन पूरे एक्शन मोड में आ गया है। मुख्य आरोपी आदिल के बेटे नौशाद के रसूख और उसके द्वारा खड़े किए गए अवैध साम्राज्य को नेस्तनाबूद करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
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    तीन मंजिला इमारत जमींदोज: मंगलवार शाम को प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) की टीम भारी पुलिस बल, डीएम, एसपी और एसडीएम सहित राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंची। शाम 7 बजे से बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हुई और नौशाद के तीन मंजिला मकान को ढहा दिया गया।
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    नक्शा और नियम ताक पर: पीडीए के जोनल अधिकारी गंगेश कुमार सिंह ने बताया कि यह मकान 72 वर्गगज (10 बाई 60 वर्गफीट) में बना था, जिसमें बेसमेंट के साथ तीन फ्लोर थे। बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों (पटाखा निर्माण और भंडारण) के लिए किया जा रहा था, जबकि ऊपर के दो फ्लोर पर लोग निवास कर रहे थे। इस बिल्डिंग का प्रयागराज विकास प्राधिकरण से कोई नक्शा पास नहीं कराया गया था।
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    गोदाम भी मिट्टी में मिला: इससे पहले, हादसे वाले दिन (सोमवार) की रात करीब 7:30 बजे प्रशासन ने फैक्ट्री से 400 मीटर की दूरी पर स्थित नौशाद के एक अन्य बड़े पटाखा गोदाम को भी बुलडोजर से ढहा दिया था।
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 आज भी फैक्ट्री का मलबा बुलडोजर से हटाया जा रहा है। पुलिस देख रही है कि कोई मलबे में दबा तो नहीं है।

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एक्शन में पुलिस: एनकाउंटर में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, 9 पुलिसकर्मी सस्पेंड

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इतने बड़े पैमाने पर बारूद का खेल बिना स्थानीय पुलिस की मिलीभगत या घोर लापरवाही के संभव नहीं था। इस बात को गंभीरता से लेते हुए पुलिस महकमे में भी बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की गई है।
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    नौशाद का एनकाउंटर: इस पूरे खूनी खेल का मुख्य मास्टरमाइंड और फैक्ट्री मालिक नौशाद (50 वर्ष) हादसे के बाद से ही शहर छोड़कर भागने की फिराक में था। मंगलवार तड़के पुलिस ने जाल बिछाकर उसे घेर लिया। पुलिस टीम के साथ हुई मुठभेड़ में नौशाद के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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    खाकी पर गिरी गाज: अवैध फैक्ट्री के संचालन में घोर लापरवाही बरतने और खुफिया तंत्र के पूरी तरह फेल होने के आरोप में स्थानीय थाने के एक इंस्पेक्टर, 6 दरोगा समेत कुल 9 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
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    संपत्ति कुर्की की तैयारी: कौशांबी के पुलिस अधीक्षक (SP) सत्यनारायण प्रजापत ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया है कि आरोपी नौशाद की आय से अधिक संपत्ति की जांच शुरू कर दी गई है। इसके लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं जो जल्द ही उसकी संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई करेंगी।
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चीख-पुकार और दर्दनाक मंजर: एक परिवार के 4 बच्चों की चिता एक साथ जली

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इस ब्लास्ट की तीव्रता इतनी भयानक थी कि आसपास के 3 पक्के मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए और 5 अन्य मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। सबसे ज्यादा दर्दनाक स्थिति गया प्रसाद साहू के परिवार की है।
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    उजड़ गया साहू परिवार: धमाके के कारण गया प्रसाद साहू का मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गया। मलबे के नीचे दबने से उनके चार मासूम बच्चों—जान्ह्वी (15 वर्ष), आदित्य (10 वर्ष), रवि (7 वर्ष) और सबसे छोटे बेटे अमित (महज 2 वर्ष) की दर्दनाक मौत हो गई।
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    सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन: मंगलवार शाम करीब 6 बजे जब इन चारों बच्चों के शव एक साथ गांव पहुंचे, तो कोहराम मच गया। परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। उन्होंने शवों को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों की तीखी नोकझोंक भी हुई। ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों को फांसी दी जाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा मिले।
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    जिंदगी और मौत से जूझती मां: इन मृत बच्चों की मां खुद मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हैं। उन्हें प्रयागराज के एसआरएन (SRN) अस्पताल में लाइफ सपोर्ट सिस्टम (Life Support System) पर रखा गया है, जहां वह जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं।
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    सदमे में मासूम बच्ची: मलबे से रेस्क्यू टीम ने एक छोटी बच्ची को जिंदा निकाला था। वह अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर तो पहुंच गई है, लेकिन ब्लास्ट की दहशत उसके चेहरे पर साफ देखी जा सकती है। वह इस कदर गहरे सदमे में है कि किसी के कुछ भी पूछने पर सिर्फ शून्य में निहारती है और कोई जवाब नहीं दे पा रही है।
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    पिता को मिला सिर्फ बेटे का पैर: एक अन्य रुला देने वाली घटना में, बुजुर्ग पिता सरजू दास मलबे में पागलों की तरह अपने बेटे सुनील की तलाश करते दिखे। सोमवार को सुनील का सिर्फ एक पैर मिला था। पुलिस ने उन्हें पोस्टमॉर्टम हाउस भेजा, जहां पिता ने भारी मन से उस पैर के आधार पर अपने बेटे की शिनाख्त की।
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विपक्ष के तीखे सवाल: लाइसेंस रद्द था तो कैसे चल रही थी फैक्ट्री?

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इस भीषण त्रासदी ने सत्ता पक्ष और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है।
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उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय मंगलवार को घायलों का हालचाल जानने अस्पताल पहुंचे। उन्होंने एसआरएन अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों से मुलाकात की। अजय राय ने प्रशासन को घेरते हुए कहा, "यहां जो लोग एडमिट हैं, उनमें एक महिला बहुत सीरियस हैं, उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। बाकी लोग भी जीवन-मौत से जूझ रहे हैं। सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह है कि जिस व्यक्ति (नौशाद) के कारखाने का लाइसेंस प्रशासन ने 2 साल पहले ही निरस्त कर दिया था, वह दोबारा इतनी बड़ी पटाखा फैक्ट्री कैसे चला रहा था? उसने इतना बड़ा बारूद का गोदाम कैसे बना लिया? यह साफ साबित करता है कि स्थानीय प्रशासन और सत्ताधारी लोगों के संरक्षण के बिना मौत का यह व्यापार संभव नहीं था।"
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हादसे की असल वजह क्या? 13 शवों का पोस्टमॉर्टम जारी

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विस्फोट की असल वजह की अभी फोरेंसिक जांच चल रही है। हालांकि, मौके पर मौजूद एक चश्मदीद महिला ने पुलिस को बताया कि फैक्ट्री के पास मौजूद बिजली का एक भारी खंभा अचानक गिर गया। खंभा सीधे फैक्ट्री में रखे बारूद के ढेर पर गिरा, जिससे उठी चिंगारी ने एक भयंकर धमाके का रूप ले लिया।
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प्रशासन के मुताबिक, हादसे में जान गंवाने वाले 8 बच्चों समेत सभी 13 शवों के पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। भौगोलिक सीमा विवाद के चलते 3 शवों का पोस्टमॉर्टम प्रयागराज में और 8 अन्य शवों का पोस्टमॉर्टम कौशांबी में किया जा रहा है।
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इस घटना ने एक बार फिर रिहायशी इलाकों में चल रहे अवैध पटाखा कारखानों के खतरे को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि क्या इस खौफनाक मंजर के बाद प्रशासन हमेशा के लिए जागेगा, या कुछ दिनों की कार्रवाई के बाद फिर से मौत के ऐसे सौदागरों को पनपने का मौका मिल जाएगा?