मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद से एक बेहद स्तब्ध कर देने वाली और हृदय विदारक घटना सामने आई है। कानून व्यवस्था की रक्षा करने और आम जनता को सुरक्षा का अहसास दिलाने वाली खाकी वर्दी एक बार फिर गहरे अवसाद और मानसिक तनाव का शिकार हो गई। मंगलवार की शाम मुरादाबाद पुलिस महकमे के लिए एक बुरी खबर लेकर आई, जब एक सेवारत सिपाही ने अपनी ही सरकारी रायफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस आत्मघाती कदम से न सिर्फ पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई है, बल्कि यह घटना कई गंभीर सवाल भी खड़े कर रही है। घटना के बाद से पुलिस के आला अधिकारी मौके पर कैंप किए हुए हैं और मामले की तह तक जाने की कोशिश की जा रही है।READ ALSO:-अयोध्या में नया अध्याय: एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO, सुरक्षा और प्रशासन की संभालेंगे कमान
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मंगलवार शाम 5 बजे का वह खौफनाक मंजर जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार शाम लगभग 5 बजे की है। शहर का माहौल आम दिनों की तरह ही था। सिपाही अपने कमरे में अकेला मौजूद था। बाहर से सब कुछ सामान्य लग रहा था, तभी अचानक कमरे के भीतर से एक कानफोड़ू धमाके की आवाज आई। यह कोई आम आवाज नहीं थी, बल्कि पुलिस विभाग में इस्तेमाल होने वाली भारी-भरकम सरकारी रायफल से चली गोली की आवाज थी।
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गोली की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास रहने वाले लोगों और पड़ोसियों के होश उड़ गए। शुरुआत में लोगों को समझ ही नहीं आया कि यह धमाका किस चीज का था। लेकिन जब आवाज की दिशा का अंदाजा लगाकर लोग सिपाही के कमरे की तरफ भागे, तो वहां का नजारा देखकर उनकी रूह कांप गई।
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सीने के आर-पार हुई गोली, खून से लाल हुआ फर्श पड़ोसियों ने जैसे ही कमरे का दरवाजा खोला या अंदर झांका, उन्होंने देखा कि खाकी वर्दीधारी वह जवान जमीन पर लहूलुहान हालत में तड़प रहा था। उसके पास ही वह सरकारी रायफल पड़ी थी, जिससे उसने अपनी जान लेने की कोशिश की थी। गोली सिपाही के सीने में बिल्कुल करीब से मारी गई थी, जिस वजह से वह सीने को चीरती हुई आर-पार निकल गई थी। फर्श पर हर तरफ खून ही खून फैल गया था।
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यह दृश्य इतना भयानक था कि देखने वालों के कदम ठिठक गए। हालांकि, पड़ोसियों ने बिना समय गंवाए हिम्मत जुटाई और तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम (112) को घटना की सूचना दी।
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अस्पताल तक की दौड़ और डॉक्टरों का जवाब मानवीय संवेदना दिखाते हुए, स्थानीय लोगों और आनन-फानन में पहुंचे कुछ पुलिसकर्मियों ने खून से लथपथ सिपाही को उठाया और तुरंत मुरादाबाद के नजदीकी बड़े अस्पताल की तरफ दौड़ पड़े। रास्ते भर सभी यही दुआ कर रहे थे कि किसी भी तरह इस जवान की जान बच जाए।
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लेकिन, सरकारी रायफल की गोली का घाव इतना गहरा था और शरीर से इतना ज्यादा खून बह चुका था कि बचने की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई थी। अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम ने सिपाही की नब्ज और धड़कन चेक की। गहन जांच के बाद डॉक्टरों ने भारी मन से सिपाही को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि अस्पताल पहुंचने से काफी पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी, क्योंकि गोली ने शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था।
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पुलिस के आला अधिकारियों में हड़कंप, मौके पर पहुंची फोर्स एक सिपाही द्वारा सरकारी हथियार से आत्महत्या किए जाने की खबर जैसे ही वायरलेस सेट पर गूंजी, पूरे मुरादाबाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), एसपी सिटी, सीओ (CO) और संबंधित थाने के एसएचओ भारी पुलिस बल के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए।
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अधिकारियों ने सबसे पहले घटनास्थल यानी सिपाही के कमरे को चारों तरफ से सील कर दिया, ताकि किसी भी तरह के अहम सुबूतों से कोई छेड़छाड़ न हो सके। जिस सरकारी रायफल से सिपाही ने खुद को उड़ाया था, उसे कब्जे में लेकर सुरक्षित रख लिया गया है और उसे बैलिस्टिक जांच (Ballistics Test) के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा जाएगा।
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फोरेंसिक टीम की सघन जांच और सुबूतों का संकलन इस तरह के मामलों में तकनीकी जांच बहुत अहम होती है। मुरादाबाद पुलिस की फील्ड यूनिट और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम ने कमरे का चप्पा-चप्पा छान मारा। टीम ने मौके से खून के नमूने, फिंगरप्रिंट्स, रायफल की स्थिति, और गोली का खोखा (Empty Cartridge) बरामद किया है।
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अधिकारियों के निर्देश पर कमरे में यह भी तलाश की गई कि क्या मरने से पहले सिपाही ने कोई सुसाइड नोट (Suicide Note) लिखा है। फिलहाल पुलिस की तरफ से किसी सुसाइड नोट के मिलने की पुष्टि नहीं की गई है। इसके अलावा, मृतक सिपाही का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है। साइबर सेल इस फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सोशल मीडिया चैट्स की जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि मौत से ठीक पहले उसकी किससे और क्या बात हुई थी।
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तनाव, ड्यूटी या पारिवारिक कलह? क्या है आत्महत्या की असल वजह? इस दुखद घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर एक ऐसा जवान, जो दूसरों की सुरक्षा के लिए तैनात था, वह खुद अपनी जान का दुश्मन क्यों बन गया? पुलिस विभाग के जानकारों और सूत्रों के अनुसार, ऐसी घटनाओं के पीछे अक्सर दो ही मुख्य कारण होते हैं:
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- \r\n अत्यधिक मानसिक तनाव और वर्क प्रेशर: पुलिस की नौकरी बेहद सख्त और तनावपूर्ण होती है। अनिश्चित कार्य अवधि, त्योहारों पर छुट्टियों की कमी, और लगातार काम का दबाव अक्सर जवानों को गहरे डिप्रेशन में धकेल देता है।\r\n \r\n
- \r\n पारिवारिक या व्यक्तिगत समस्याएं: कई बार पुलिसकर्मी अपने परिवार से दूर रहते हैं और घर की समस्याओं को समय नहीं दे पाते। पारिवारिक कलह, आर्थिक परेशानियां या कोई निजी विवाद भी ऐसे आत्मघाती कदमों का कारण बन जाता है।\r\n \r\n
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मुरादाबाद पुलिस अब मृतक सिपाही के सहकर्मियों, दोस्तों और रूममेट्स से गहन पूछताछ कर रही है कि क्या हाल के दिनों में उसने किसी परेशानी का जिक्र किया था या उसके व्यवहार में कोई असामान्य बदलाव आया था।
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परिजनों में कोहराम, विभागीय जांच के आदेश मुरादाबाद पुलिस ने मृतक सिपाही के परिजनों को इस मनहूस घटना की जानकारी दे दी है। खबर सुनते ही सिपाही के पैतृक गांव और परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम (Postmortem) के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का तकनीकी कारण फाइलों में दर्ज होगा। वहीं, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने विभागीय जांच के भी आदेश दे दिए हैं। यह घटना एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है कि हमारे सुरक्षाबलों और पुलिस जवानों के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर विशेष ध्यान देने और उनकी काउंसलिंग के लिए बेहतर व्यवस्था करने की सख्त जरूरत है, ताकि भविष्य में कोई और जवान इस तरह अपनी जिंदगी खत्म करने को मजबूर न हो।