खबरीलाल डेस्क
शराब के शौकीनों के लिए यह खबर किसी बड़े अलर्ट से कम नहीं है। सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त और लाइसेंसी ठेकों से खरीदी गई शराब भी अगर जानलेवा साबित होने लगे, तो यह पूरी व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। मेरठ (Meerut) के दौराला (Daurala) कस्बे में शुक्रवार की शाम एक आम शाम की तरह ही शुरू हुई थी, लेकिन देखते ही देखते यह तीन परिवारों के लिए मातम की सबसे काली रात में तब्दील हो गई।READ ALSO:-यूपी एटीएस का बड़ा एक्शन: लखनऊ को दहलाने की पाकिस्तानी साजिश नाकाम, मेरठ के मास्टरमाइंड का 'डेविल' नेटवर्क ध्वस्त
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एक साथ बैठकर शराब पीने वाले तीन लोगों के शरीर में अचानक जहर फैलने के लक्षण दिखाई दिए और कुछ ही घंटों के भीतर तीनों ने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि पूरे इलाके में 'जहरीली शराब' (Poisonous Liquor) के खौफ को भी जन्म दे दिया है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं कि आखिर मौत की यह पूरी दास्तां कैसे लिखी गई।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

कौन थे वो तीन अभागे, जिनकी गई जान?

\r\n\r\n
इस दुखद घटना का शिकार हुए तीनों लोग एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह से जानते थे और अक्सर काम के बाद एक साथ समय बिताते थे। मृतकों का पूरा विवरण इस प्रकार है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    बाबूराम (उम्र 62 वर्ष): बाबूराम स्थानीय सरस्वती कॉलोनी के निवासी थे। वे मूल रूप से सरसों के तेल के स्पेलर (मशीन) पर मेहनत-मजदूरी का काम करते थे। बाबूराम का बेटा सचिन इलाके का एक जाना-माना किराना व्यापारी है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    जितेंद्र (उम्र 45 वर्ष): जितेंद्र वार्ड संख्या 12, दयानंदपुरी का रहने वाला था। वह बाबूराम के बेटे सचिन की किराना दुकान पर पिछले कई सालों से वफादारी के साथ कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    अंकित उर्फ दौलत (उम्र 32 वर्ष): अंकित भी सरस्वती कॉलोनी का ही निवासी था और वह भी सचिन की ही किराना दुकान पर जितेंद्र के साथ काम करता था।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कैसे घटी घटना: 7:30 बजे छलके जाम, फिर शुरू हुआ मौत का तांडव

\r\n\r\n
परिजनों और चश्मदीदों से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को दिन भर का कामकाज निपटाने के बाद बाबूराम, जितेंद्र और अंकित उर्फ दौलत एक साथ इकट्ठा हुए। शाम करीब साढ़े सात बजे (7:30 PM) तीनों कस्बे के ही एक सरकारी देसी शराब के ठेके पर पहुंचे।
\r\n\r\n

 यहीं शराब का पैकेट मौके से मिला है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

\r\n\r\n
उन्होंने वहां से देसी शराब के टेट्रा पैक (Tetra Pack) खरीदे और ठेके के ही पास बैठकर शराब पीना शुरू कर दिया। परिजनों का कहना है कि तीनों ने जैसे ही शराब पी, कुछ ही मिनटों के भीतर उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    सबसे पहले उन्हें भयंकर उबकाई और उल्टी (Vomiting) होने लगी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    इसके बाद तीनों ने पेट में तेज जलन और असहनीय दर्द की शिकायत की।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    देखते ही देखते उनकी आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा और वे बदहवास होकर जमीन पर गिरने लगे।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पास-पड़ोस के लोगों और वहां मौजूद कुछ अन्य लोगों ने जब तीनों को इस तरह तड़पते हुए देखा, तो उनके हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन में स्थानीय लोगों और सूचना पाकर पहुंचे परिजनों ने तीनों को तुरंत कस्बे के एक प्रतिष्ठित प्राइवेट अस्पताल 'आर्यावर्त अस्पताल' (Aryavart Hospital) में इलाज के लिए भर्ती कराया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अस्पताल में चीख-पुकार और डॉक्टरों का बयान

\r\n\r\n
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की टीम ने तीनों की जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन शराब में मौजूद कथित 'जहर' अपना काम कर चुका था। इलाज के दौरान ही बारी-बारी से तीनों (बाबूराम, जितेंद्र और अंकित) ने दम तोड़ दिया।
\r\n\r\n

 शराब से तीन मौत की सूचना पर पुलिस अस्पताल पहुंची। परिजनों ने हंगामा किया।

\r\n\r\n
जैसे ही डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित किया, अस्पताल परिसर चीख-पुकार और रोने की आवाजों से गूंज उठा। एक साथ तीन मौतों की खबर सुनते ही सरस्वती कॉलोनी और दयानंदपुरी से भारी भीड़ अस्पताल में जमा हो गई। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। उनका सीधा आरोप था कि सरकारी ठेके से बेची जा रही शराब 'जहरीली' या 'मिलावटी' थी, जिसने उनके घर उजाड़ दिए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
क्या कहा इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर ने? आर्यावर्त अस्पताल के ईएमओ (EMO) डॉ. प्रफुल्ल चौहान ने मरीजों की प्रारंभिक स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए बताया, "तीनों मरीजों को जब यहां लाया गया था, तो उनके लक्षण स्पष्ट रूप से किसी अत्यधिक विषैले (जहरीले) पदार्थ के सेवन की ओर इशारा कर रहे थे। प्रथम दृष्टया (Prima facie) यह शराब में किसी जानलेवा केमिकल के रिएक्शन का मामला प्रतीत होता है। हालांकि, मौत का सटीक और वैज्ञानिक कारण केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Post-mortem Report) आने के बाद ही पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगा।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

एक्शन में प्रशासन: रात में ही दौड़े DM और SSP, ठेका सील

\r\n\r\n
अस्पताल में हंगामे और एक साथ तीन मौतों की सूचना जैसे ही जिला मुख्यालय पहुंची, पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मामले की नजाकत और संभावित कानून-व्यवस्था बिगड़ने के खतरे को भांपते हुए, मेरठ के जिलाधिकारी (DM) डॉ. वीके सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय और जिला आबकारी अधिकारी प्रदीप कुमार भारी पुलिस बल के साथ रात में ही आर्यावर्त अस्पताल पहुंच गए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अधिकारियों ने सबसे पहले पीड़ित परिवारों को शांत कराया और निष्पक्ष जांच व कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद अधिकारियों का काफिला सीधे उस देसी शराब के ठेके पर पहुंचा जहां से मौत का सामान खरीदा गया था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई:

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    छापेमारी और जब्ती: आबकारी विभाग (Excise Department) की टीम ने तत्काल ठेके पर छापा मारा। पुलिस ने वहां से खाली टेट्रा पैक और शराब की कई पेटियों को सबूत के तौर पर जब्त कर लिया है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    हिरासत: ठेके पर मौजूद मुख्य सेल्समैन और उसके एक अन्य साथी को पुलिस ने तुरंत हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    फोरेंसिक जांच: जब्त की गई शराब के सैंपल (नमूने) उसी बैच के अन्य पैकेट्स से लेकर उन्हें परीक्षण के लिए राजकीय फोरेंसिक लैब (FSL) भेज दिया गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि शराब में मेथेनॉल (Methanol) या कोई अन्य जहरीला रसायन तो नहीं मिला था।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

परिवार की गुहार: "दुकानदार पर हो सख्त से सख्त कार्रवाई"

\r\n\r\n
मृतकों के घरों में चूल्हे बुझ गए हैं। जितेंद्र के बुजुर्ग पिता राजपाल का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बिलखते हुए बताया कि उनका बेटा कई सालों से सचिन की दुकान पर मेहनत से काम कर रहा था और उसी की कमाई से घर चलता था। उन्होंने प्रशासन से शराब माफियाओं और ठेका संचालक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने और कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
वहीं, मृतक बाबूराम के बेटे (किराना व्यापारी सचिन) ने बताया, "मेरे पिता अक्सर दुकान का काम खत्म होने के बाद मजदूर जितेंद्र और दौलत के साथ ही उठते-बैठते थे। कल भी वे साथ ही गए थे।" सचिन ने दौराला थाने में शराब विक्रेता के खिलाफ बाकायदा एक लिखित तहरीर (Complaint) दी है और न्याय की गुहार लगाई है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

SSP अविनाश पांडेय का अहम बयान: मौत की गुत्थी में एक 'पेंच' 

\r\n\r\n
घटनास्थल का मुआयना करने और डॉक्टरों से बात करने के बाद मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय ने मीडिया को कुछ अहम जानकारियां दीं, जो इस केस को थोड़ा पेचीदा भी बनाती हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एसएसपी अविनाश पांडेय ने कहा, "यह घटना बेहद दुखद है, लेकिन अभी सीधे तौर पर 'शराब के जहरीले होने' की आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती है। हमारी प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस बैच (लॉट) की शराब इन तीनों मृतकों ने पी थी, उसकी कुल 9 पेटियां उसी दिन ठेके से बिकी हैं। उन 9 पेटियों की शराब कई अन्य लोगों ने भी पी होगी, लेकिन पूरे इलाके से किसी अन्य व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने या अस्पताल में भर्ती होने की कोई सूचना अब तक हमारे पास नहीं आई है।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एसएसपी ने आगे स्पष्ट किया कि, "फिलहाल एहतियात के तौर पर ठेके की सभी शराब जब्त कर ली गई है। हमने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उनके विसरा (Viscera) को भी सुरक्षित रखा जाएगा। आबकारी टीम की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह तस्वीर साफ हो सकेगी कि इन मौतों की असली वजह वह शराब थी, या फिर शराब पीने के दौरान तीनों ने किसी बाहरी जहरीली चीज (जैसे कोई विषाक्त नमकीन या स्नैक) का सेवन किया था।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ का यह शराब कांड कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। क्या सरकारी ठेकों पर बिकने वाली शराब की गुणवत्ता से खिलवाड़ हो रहा है? या यह किसी स्थानीय स्तर पर मिलावटखोरी का नतीजा है? इन तीनों मौतों का सच जो भी हो, लेकिन इसने तीन परिवारों को हमेशा के लिए गहरे दुख में धकेल दिया है। फिलहाल पूरे इलाके में भारी पुलिस फोर्स तैनात है और प्रशासन को अब बस फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही इस 'मौत के जाम' के असली गुनहगारों का पर्दाफाश हो सकेगा।