खबरीलाल डेस्क
आगरा (Agra News): अपने बेबाक और अक्सर विवादों में रहने वाले बयानों के लिए मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद कंगना रनौत एक बार फिर नई मुसीबत में घिर गई हैं। देश में नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्र-छात्राओं को सोशल मीडिया पर 'गटर जेनरेशन' (Gutter Generation) और 'गटर छाप' कहने के मामले में उनके खिलाफ आगरा में एक कड़ा कानूनी कदम उठाया गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने आगरा स्थित स्पेशल कोर्ट (MP-MLA) में कंगना रनौत के खिलाफ परिवाद दाखिल किया है। इस परिवाद को गंभीरता से लेते हुए स्पेशल जज अनुज कुमार सिंह की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अगस्त की तारीख मुकर्रर कर दी है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

क्यों भड़का है यह पूरा विवाद? (छात्रों का दर्द और पुलिसिया कार्रवाई)

\r\n\r\n
इस पूरे विवाद की जड़ में वह देशव्यापी आक्रोश है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की धांधली को लेकर पनपा है। परिवाद दाखिल करने वाले अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने अदालत को बताया कि पिछले कुछ समय से देश में नीट (NEET-UG) और अन्य कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं के पेपर बार-बार लीक हुए हैं। इससे देश के लाखों मेधावी छात्र-छात्राओं को अपना भविष्य अंधकारमय लगने लगा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस भयंकर मानसिक दबाव और निराशा के कारण कई होनहार छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया। इसी अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए निराश और आक्रोशित छात्र-छात्राओं ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अधिवक्ता का आरोप है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इन छात्रों की आवाज को दबाने के लिए 20 जुलाई को पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा बर्बर लाठीचार्ज किया गया। छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पेलेट गन तक का इस्तेमाल किया गया। परिवाद में स्पष्ट कहा गया है कि छात्र-छात्राओं और उनके साथ मौजूद छोटे-छोटे बच्चों के साथ अमानवीय और बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की गई, जिसने हर संवेदनशील नागरिक को झकझोर कर रख दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

विपक्ष का समर्थन और कंगना का विवादित प्रहार

\r\n\r\n
जब जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए इस लाठीचार्ज की खबर फैली, तो देशभर में छात्र आंदोलन तेज हो गए। विपक्ष के बड़े नेताओं, जिनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल हैं, ने छात्रों के समर्थन में प्रधानमंत्री आवास के घेराव का आह्वान किया। छात्रों और विपक्ष के भारी दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक की मांग उठने लगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इन्हीं गहमागहमी भरे राजनीतिक और सामाजिक हालात के बीच भाजपा सांसद कंगना रनौत ने सोशल मीडिया (Instagram) पर एक लंबा वीडियो और पोस्ट साझा किया, जिसने आग में घी डालने का काम किया। कंगना ने आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करते हुए उन्हें 'गटर जेनरेशन' करार दे दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या था कंगना रनौत का वह पूरा विवादित बयान?

\r\n\r\n
कंगना रनौत ने 27 जुलाई को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के स्टोरी सेक्शन में एक लंबा चौड़ा नोट लिखा था, जिसे परिवाद का मुख्य आधार बनाया गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
महिलाओं और Gen-Z पर कंगना की बेबाक टिप्पणी: "सबसे शर्मनाक बात उन युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है, जो स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को नहीं निभाना चाहतीं। असल में स्वतंत्र महिलाएं विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की पूरी जिम्मेदारी भी उठाती हैं। उन्हें अपने कर्मों की कीमत खुद चुकानी पड़ती है। वे अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर ऐसा नहीं करतीं।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
'गटर जेनरेशन' और 'गटर छाप' शब्दों का प्रयोग: कंगना ने आगे लिखा, "आज तथाकथित वेस्टर्न सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है। मैं इन्हें 'गटर जेनरेशन' कहती हूं। इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं, लेकिन इतनी बदसूरत सोच और भ्रष्ट मानसिकता रखती हैं कि अच्छी हाउसवाइफ भी नहीं बन सकतीं। इसके बावजूद वे अपनी तथाकथित आजादी का दिखावा करती हैं। एक छोटी-सी याद दिला दूं, आजाद जीवन कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, 'गटर छाप'।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

छात्रों के प्रदर्शन (Student Protest) को बताया 'घिनौना' और 'हुड़दंग'

\r\n\r\n
सिर्फ इतना ही नहीं, कंगना रनौत ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट की वीडियो और रील्स साझा करते हुए तीखा हमला बोला था:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
"अपनी पूरी जिंदगी में मैंने कभी इतनी बदसूरती एक साथ नहीं देखी। Gen-Z के विरोध-प्रदर्शनों की ये रीलें देखकर घिन आती है। इन लोगों के बोलने का तरीका और जिस भाषा का ये इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा। हर फ्रेम इतना अजीब और परेशान करने वाला है कि देखकर घिन होती है। आखिर इन्हें जन्म कौन दे रहा है और इनकी परवरिश कौन कर रहा है?"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
आंदोलन के दौरान मीडिया से बात करते हुए कंगना ने जंतर-मंतर के प्रदर्शन को 'हुड़दंग' और 'उत्पात' करार दिया था। उन्होंने कहा था कि किसी को पद से हटाने या सरकार पर दबाव बनाने के लिए यह तरीका गलत है; सार्वजनिक बहस के लिए सड़क नहीं, बल्कि संसद सही जगह है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पुलिस ने नहीं सुनी, तो खटखटाया अदालत का दरवाजा
\r\n\r\n
परिवादी अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने बताया कि कंगना के इस बेतुके और अमर्यादित बयान से परिवादी सहित उनके तमाम साथी अधिवक्ताओं (राजवीर सिंह, एडवोकेट रामदत्त दिवाकर, एडवोकेट नवीन वर्मा, आईएस मौर्य आदि) और देश के करोड़ों नागरिकों की भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं, क्योंकि उनके भी बच्चे छात्र हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
परिवाद में गंभीर आरोप लगाया गया है कि एक सांसद के पद पर रहते हुए कंगना रनौत ने संविधान में वर्णित मूल कर्तव्यों से संबंधित धाराओं का खुला उल्लंघन किया है। उनका यह बयान राष्ट्र विरोधी और बेहद अपमानजनक है, जिससे देश की संसद, लोकतांत्रिक व्यवस्था और देश की गरिमा को भारी ठेस पहुंची है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अधिवक्ता शर्मा ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले इस मामले को लेकर थाना न्यू आगरा और आगरा के पुलिस कमिश्नर को शिकायत प्रार्थना पत्र भेजा था, लेकिन जब पुलिस प्रशासन की ओर से कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तब उन्हें मजबूर होकर न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

5 अगस्त को कोर्ट में क्या होगा?

\r\n\r\n
आगरा के स्पेशल जज अनुज कुमार सिंह की अदालत में परिवाद प्रस्तुत किए जाने के दौरान वरिष्ठ वकील सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, रामदत्त दिवाकर, सुमन्त चतुर्वेदी, बी.एस. फौजदार, प्रीति कुमारी सहित कई अन्य अधिवक्ताओं ने जोरदार तरीके से अपनी दलीलें पेश कीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कोर्ट ने अधिवक्ताओं की शुरुआती दलीलों को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद मामले को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है और अगली सुनवाई के लिए 5 अगस्त की तारीख नियत कर दी है। अब सभी की निगाहें 5 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं। यदि अदालत इस परिवाद में लगाए गए आरोपों (संविधान के उल्लंघन और मानहानि) को प्रथम दृष्टया सही मानती है, तो सांसद कंगना रनौत को समन जारी कर आगरा कोर्ट में तलब किया जा सकता है। यह मामला कंगना के लिए एक नई कानूनी और राजनीतिक चुनौती खड़ी कर सकता है।