लखनऊ (डेस्क रिपोर्ट): उत्तर प्रदेश की पहचान अब पूरे देश में 'एक्सप्रेसवे स्टेट' (Expressway State of India) के रूप में होने लगी है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे के बाद अब राज्य सरकार हाई-स्पीड रोड नेटवर्क को और भी अधिक मजबूत और विस्तृत करने की तैयारी में है।READ ALSO:-भारत के एविएशन सेक्टर में बड़ी क्रांति: पानी और हवा में उड़ेंगे प्रदूषण-मुक्त 'इलेक्ट्रिक सीप्लेन', लक्षद्वीप से होगी इस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत
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लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों की यह मांग थी कि उन्हें बुंदेलखंड और पूर्वांचल की तरफ जाने के लिए एक सुगम और सीधा रास्ता मिले। इसी जरूरत को समझते हुए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने बिजनौर-मुरादाबाद से कन्नौज के सौरिख तक एक नया शानदार लिंक एक्सप्रेसवे (Link Expressway) विकसित करने का मास्टरप्लान तैयार किया है। आइए विस्तार से जानते हैं इस नए मेगा प्रोजेक्ट की हर बारीकी और इसके दूरगामी फायदों के बारे में।
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क्या है 270 KM लंबे नए 'ग्रीनफील्ड कॉरिडोर' का रूट मैप?
\r\n\r\nयह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे पूरी तरह से एक 'ग्रीनफील्ड कॉरिडोर' (Greenfield Corridor) होगा। ग्रीनफील्ड का अर्थ है कि यह सड़क मौजूदा हाईवे की तर्ज पर नहीं, बल्कि खेतों और खाली जमीनों का अधिग्रहण करके बिल्कुल नए सिरे से बनाई जाएगी। इससे वाहन बिना किसी शहर या गांव के जाम में फंसे 100-120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फर्राटा भर सकेंगे।
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किन जिलों से होकर गुजरेगा नया एक्सप्रेसवे?
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- \r\n शुरुआती बिंदु: मुरादाबाद और बिजनौर का सीमावर्ती इलाका।\r\n \r\n
- \r\n मुख्य पड़ाव: यह एक्सप्रेसवे मुरादाबाद से आगे बढ़ते हुए संभल, बदायूं और शाहजहांपुर की भौगोलिक सीमाओं को छुएगा।\r\n \r\n
- \r\n अंतिम पड़ाव: इसके बाद यह सीधा फतेहगढ़ (फर्रुखाबाद) होते हुए 'इत्र नगरी' कन्नौज के सौरिख (Saurikh) तक पहुंचेगा।\r\n \r\n
- \r\n लंबाई: मुरादाबाद से सौरिख तक इस मुख्य ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की लंबाई लगभग 270 किलोमीटर तय की गई है।\r\n \r\n
- \r\n बिजनौर से सीधा कनेक्शन: बिजनौर-मुरादाबाद के मौजूदा 4-लेन मार्ग को भी इस विशाल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसे मिला लेने पर इस पूरे कनेक्टिविटी कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 350 किलोमीटर हो जाएगी।\r\n \r\n
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12,000 करोड़ का बजट और 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल की सुविधा
\r\n\r\nयह नया लिंक एक्सप्रेसवे अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस होगा। शुरुआती रूपरेखा के अनुसार:
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- \r\n यह एक 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड (Access-Controlled) हाईवे होगा। यानी इस पर बीच से कोई भी वाहन नहीं चढ़ सकेगा; चढ़ने और उतरने के लिए विशेष इंटरचेंज बनाए जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n भविष्य की जरूरतों (बढ़ते ट्रैफिक) को ध्यान में रखते हुए इस कॉरिडोर में पर्याप्त जगह छोड़ी जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से 6-लेन तक एक्सपैंड (विस्तारित) किया जा सके।\r\n \r\n
- \r\n जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) से लेकर सड़क निर्माण तक इस पूरे प्रोजेक्ट में लगभग 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान जताया गया है।\r\n \r\n
- \r\n फिलहाल इस प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR - Detailed Project Report) तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। यूपीडा (UPEIDA) से अंतिम वित्तीय और प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद ही जमीनी काम शुरू किया जाएगा।\r\n \r\n
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वेस्ट यूपी से सेंट्रल और ईस्ट यूपी तक सीधा और आसान सफर
\r\n\r\nइस नए लिंक एक्सप्रेसवे के बन जाने से उत्तर प्रदेश का नक्शा कनेक्टिविटी के लिहाज से पूरी तरह बदल जाएगा।
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- \r\n समय की भारी बचत: अभी पश्चिमी यूपी (बिजनौर, मुरादाबाद, संभल) से कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज या महोबा-चित्रकूट जाने वाले वाहनों को कई संकरे हाइवे और शहरों के भारी जाम से होकर गुजरना पड़ता है। इस कॉरिडोर के बनने से यह सफर कई घंटे कम हो जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ाव: यह नया रूट सीधे तौर पर निर्माणाधीन 'गंगा एक्सप्रेसवे' को क्रॉस करेगा या उससे जुड़ेगा। इससे वेस्टर्न यूपी का ट्रैफिक सीधे पूर्वी यूपी (प्रयागराज/बलिया) की ओर आसानी से मुड़ सकेगा।\r\n \r\n
- \r\n बुंदेलखंड और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से कनेक्शन: कन्नौज के सौरिख में यह एक्सप्रेसवे 'आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे' से कनेक्ट हो सकता है। इसके आगे यही नेटवर्क 'बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे' तक पहुंच प्रदान करेगा। यानी एक बार मुरादाबाद से एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के बाद आप सीधे बांदा, महोबा या चित्रकूट की पहाड़ियों तक का सफर बिना किसी रुकावट के पूरा कर सकेंगे।\r\n \r\n
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व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए बनेगा 'गेम चेंजर'
\r\n\r\nसड़कें सिर्फ दूरी कम नहीं करतीं, बल्कि वे विकास और समृद्धि का रास्ता भी लाती हैं। यह एक्सप्रेसवे यूपी की अर्थव्यवस्था को ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी (Trillion Dollar Economy) बनाने के लक्ष्य में बड़ा योगदान देगा:
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- \r\n इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स (औद्योगिक क्षेत्र): यूपीडा (UPEIDA) केवल सड़क नहीं बनाएगा, बल्कि इस पूरे नेटवर्क के आसपास औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना पर भी काम कर रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बिजनौर और इसके आसपास के इलाकों में करीब 1,000 हेक्टेयर भूमि पर एक बड़ा औद्योगिक क्लस्टर (Industrial Cluster) विकसित करने का प्लान है।\r\n \r\n
- \r\n स्थानीय उद्योगों को उड़ान: मुरादाबाद का पीतल उद्योग (Brass Industry), संभल का हैंडीक्राफ्ट (Handicraft), और कन्नौज का इत्र (Perfume) उद्योग पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इस नए रास्ते के जरिए यहां के व्यापारी अपने स्थानीय और कृषि उत्पादों को सीधे दिल्ली-एनसीआर, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida Airport), कानपुर और लखनऊ के बड़े बाजारों तक बेहद कम समय और लागत में पहुंचा सकेंगे।\r\n \r\n
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वर्तमान स्थिति: बिजनौर-मुरादाबाद सेक्शन पर क्या चल रहा है काम?
\r\n\r\nइस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए छोटे-छोटे चरणों में काम की नींव रखी जा रही है। बिजनौर-मुरादाबाद सेक्शन में लगभग 80 किलोमीटर के पुराने हाइवे को अपग्रेड किया जाना है।
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- \r\n प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुरुआती स्टेज में इस मार्ग के 42 किलोमीटर हिस्से को 4-लेन में तब्दील करने की दिशा में लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियों ने काम शुरू करने की तैयारी कर ली है।\r\n \r\n
- \r\n इस शुरुआती काम के लिए 75 करोड़ रुपये का बजट आवंटित करने की बात कही जा रही है। साथ ही, शहरों के बाहर से बाईपास निकालने और इंटरकनेक्टिंग रोड्स को बेहतर करने के लिए 65 करोड़ रुपये अलग से मंजूर किए जा रहे हैं।\r\n \r\n
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प्रगति के पथ पर दौड़ता उत्तर प्रदेश
\r\n\r\nबिजनौर-मुरादाबाद से लेकर कन्नौज (सौरिख) तक प्रस्तावित यह नया लिंक एक्सप्रेसवे सिर्फ कंक्रीट और तारकोल की एक सड़क नहीं होगा; बल्कि यह उत्तर प्रदेश के दो अलग-अलग छोरों—पश्चिमी उत्तर प्रदेश की औद्योगिक शक्ति और बुंदेलखंड/पूर्वांचल की सांस्कृतिक और कृषि संपन्नता—को जोड़ने वाला एक मजबूत सेतु साबित होगा। जेवर एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे तक इसकी सीधी पहुंच इसे भविष्य के ट्रांसपोर्टेशन का सबसे अहम 'लॉजिस्टिक्स हब' बना देगी। अब इंतजार है तो बस DPR के पूरा होने और टेंडर प्रक्रिया के शुरू होने का।