खबरीलाल डेस्क
बिजनौर: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों और उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से जारी लगातार भारी बारिश ने मैदानी जिलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बिजनौर जनपद में स्थिति इस समय बेहद गंभीर बनी हुई है। जनपद की प्रमुख नदियां—गंगा और मालन—अपने उफान पर हैं, जिससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पानी के लगातार बढ़ते स्तर ने किसानों की सैकड़ों बीघा फसलों को जलमग्न कर दिया है, जिससे अन्नदाताओं की मेहनत पल भर में बर्बाद हो गई है।Read also"-बिजनौर में बाढ़ का खतरा: DM जसजीत कौर ने ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार होकर नगीना के बाढ़ प्रभावित गांवों का किया तूफानी दौरा, ग्रामीणों और वन गुर्जरों को दिया सुरक्षा का भरोसा
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प्रशासनिक आंकड़ों और जमीनी रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी ताकत से जुटा हुआ है, लेकिन प्रकृति के इस प्रकोप के आगे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आइए, विस्तार से जानते हैं बिजनौर के विभिन्न इलाकों से आ रही बाढ़ की इस खौफनाक तस्वीर और प्रशासनिक तैयारियों के बारे में।
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 सड़कों पर लगा 3 फीट तक पानी। - Dainik Bhaskar

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गंगा नदी में डेढ़ लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज, खतरे के निशान के पास

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बिजनौर से गुजरने वाली जीवनदायिनी गंगा नदी इन दिनों रौद्र रूप धारण कर चुकी है। लगातार हो रही भारी बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण गंगा नदी में लगभग डेढ़ लाख क्यूसेक पानी का भारी डिस्चार्ज लगातार बना हुआ है। पानी के इस अप्रत्याशित दबाव के चलते गंगा नदी खतरे के निशान (Danger Mark) के बेहद करीब पहुंच गई है।
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गंगा का जलस्तर बढ़ने से इसके आसपास बसे खादर क्षेत्र के गांवों में पानी फैलने लगा है। जलीलपुर क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों में इस समय बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। कई रिहायशी इलाकों और घरों के अंदर तक बाढ़ का पानी घुस चुका है, जिससे लोगों को अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों की फसलें पानी में डूब जाने के कारण भारी आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
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मालन नदी का उफान: बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पर दो से तीन फीट पानी

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गंगा के अलावा बिजनौर में मालन नदी ने भी भयंकर तबाही मचा रखी है। मालन नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से इसका पानी उफनकर मुख्य मार्गों पर आ गया है। स्थिति यह है कि व्यस्ततम बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पर दो से तीन फीट तक पानी बह रहा है।
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सड़क पर भारी जलभराव और तेज बहाव के कारण इस महत्वपूर्ण मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं। राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से इस मार्ग पर यातायात को डायवर्ट करना शुरू कर दिया है ताकि किसी भी बड़े हादसे से बचा जा सके।
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बेगावाला और चांदपुर में नाव का सहारा, रास्तों पर लगा ब्रेक

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बरसात और बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालय से कटने लगा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बेगावाला क्षेत्र के शहजादपुर रावली रपटे पर पानी का बहाव बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। पानी का वेग इतना तेज है कि आम रास्तों से पैदल या वाहनों से निकलना असंभव हो गया है। मजबूरी में ग्रामीणों को एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
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ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर नाव के जरिए सफर कर रहे हैं। इसी प्रकार, चांदपुर-हस्तिनापुर मार्ग पर भी पानी भर जाने के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पानी के तेज बहाव और जलभराव के चलते राहगीरों और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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जिलाधिकारी जसजीत कौर की सख्ती: 32 बाढ़ चौकियां और 35 राहत आश्रय स्थल सक्रिय

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स्थिति की गंभीरता और विकलता को देखते हुए बिजनौर की जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर ने त्वरित और कड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने जिले के सभी उप जिलाधिकारियों (SDMs), तहसीलदारों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने और फील्ड में मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं।
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पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और जमीनी हालात पर सीधी नजर बनाए हुए हैं। आपातकालीन स्थितियों से निपटने और राहत कार्यों को गति देने के लिए जिले भर में कुल 32 बाढ़ चौकियां और 35 राहत आश्रय स्थल (Relief Shelters) स्थापित किए गए हैं। इन आश्रय स्थलों पर भोजन, पेयजल और चिकित्सा की प्राथमिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं ताकि प्रभावित लोगों को तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।
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गाँवों में मुनादी और प्रशासन की सख्त चेतावनी

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प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की अनहोनी को टालने के लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। गंगा और अन्य नदियों के किनारे बसे संवेदनशील गांवों में लगातार मुनादी (घोषणा) कराई जा रही है।
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प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी ग्रामीण, पशुपालक या बच्चे गंगा नदी के तटों के पास, रपटों पर या तेज बहाव वाले जल क्षेत्रों में बिल्कुल न जाएं। सेल्फी लेने या नदी के बढ़ते जलस्तर को देखने के चक्कर में लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, जिसके खिलाफ पुलिस को सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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स्थिति का आकलन

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संक्षेप में कहें तो, बिजनौर में भारी बारिश और नदियों के उफान ने आम जनजीवन को बुरी तरह पंगु बना दिया है। हालांकि जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें पूरी तत्परता के साथ राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं, लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यदि बारिश का दौर ऐसे ही जारी रहा, तो स्थिति और अधिक विकट हो सकती है। ऐसे में नागरिकों को प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करना चाहिए और सुरक्षित स्थानों पर रहना चाहिए।