बरेली/गुड़गांव: सदियों पुरानी एक कहावत है- 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय, बाल न बांका कर सके, जो जग बैरी होय।' यानी जिसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करता है, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में रविवार को घटी एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने इस कहावत को सौ फीसदी सच साबित कर दिया है। यह एक ऐसी घटना है जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगती, जहां अपहरणकर्ताओं की एक गहरी साजिश उसी वक्त चकनाचूर हो गई जब कुदरत ने अपना इंसाफ किया।Read also:-नशे के दानव ने निगला एक और परिवार: मेरठ में विवाद के बाद पति-पत्नी ने लगाई खुद को आग, तड़प-तड़प कर दोनों की दर्दनाक मौत, दो मासूम हुए अनाथ
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गुड़गांव से एक पिता और उसके दो मासूम बच्चों का अपहरण कर उन्हें बरेली लाया गया था। अपहरणकर्ताओं के मंसूबे बेहद खतरनाक थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मासूम बच्चों को किसी दूसरी जगह छिपाने या ठिकाने लगाने ले जा रहे किडनैपर्स की गाड़ी एक भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गई। इस दर्दनाक हादसे में तीन अपहरणकर्ताओं की मौके पर ही जान चली गई, लेकिन चमत्कारिक रूप से वो दोनों मासूम बच्चे पूरी तरह सुरक्षित बच गए। बाद में यूपी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बंधक बनाए गए पिता को भी सकुशल आजाद करा लिया। आइए, इस पूरी घटना को विस्तार से समझते हैं।
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कुदरत का सबसे बड़ा चमत्कार: जब मौत बनकर आई बोलेरो ही बन गई किडनैपर्स की कब्र
\r\n\r\nयह पूरा घटनाक्रम इंसानियत को शर्मसार करने वाला था, लेकिन इसका अंत ईश्वरीय न्याय की एक बड़ी मिसाल बन गया। रविवार की दोपहर जब अपहरणकर्ता अपने नापाक इरादों को अंजाम देने के लिए तेज रफ्तार से अपनी बोलेरो गाड़ी दौड़ा रहे थे, उन्हें जरा भी इल्म नहीं था कि यह सफर उनका आखिरी सफर होने वाला है। हादसे की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बोलेरो गाड़ी के पूरी तरह परखच्चे उड़ गए। गाड़ी लोहे के एक पिचक चुके डिब्बे में तब्दील हो गई थी।
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आसपास के जिन लोगों ने भी उस एक्सीडेंट के मंजर को देखा, उनकी रूह कांप गई। किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि इस गाड़ी में सवार कोई भी इंसान जिंदा बच पाएगा। लेकिन जब राहत और बचाव का काम शुरू हुआ, तो अंदर का नजारा देखकर पुलिस और पब्लिक दोनों हैरान रह गए। गाड़ी की अगली सीटों पर बैठे अपहरणकर्ता तो मौत की नींद सो चुके थे, लेकिन पीछे बैठे दोनों मासूम बच्चे- 3 साल का लक्ष्य और 6 साल का मयूर, खौफजदा तो थे, लेकिन उन्हें खरोंच तक नहीं आई थी। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
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गुड़गांव से बरेली तक बिछाया गया था खौफ का जाल: जानिए कौन है मास्टरमाइंड?
\r\n\r\nइस खौफनाक साजिश की शुरुआत दिल्ली से सटे हाईटेक शहर गुड़गांव (गुरुग्राम) से हुई थी। मनोज नाम का एक गरीब और सीधा-साधा व्यक्ति गुड़गांव में ऑटो चलाकर अपने परिवार की आजीविका चलाता है। दिन-रात मेहनत करके वह अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने बुन रहा था। लेकिन उसकी खुशियों को उसी के गांव के एक युवक की नजर लग गई।
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मनोज के ही गांव के रहने वाले मनमोहन नाम के एक शातिर युवक ने उसके अपहरण की साजिश रची। मनमोहन ने अपने तीन अन्य साथियों- विशेष यादव, सिकंदर और प्रिंस के साथ मिलकर एक खौफनाक योजना बनाई। उन्होंने मौका पाकर गुड़गांव से मनोज और उसके दोनों मासूम बेटों को जबरन अगवा कर लिया। अपहरण के बाद पुलिस से बचने और किसी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में मास्टरमाइंड मनमोहन उन्हें लेकर उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की तरफ भाग निकला।
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फरीदपुर के टांडा सिकंदरपुर में बंधक था बेबस पिता, आंखों में थे मौत के साये
\r\n\r\nगुड़गांव से अपहरण करने के बाद, बदमाश मनोज और उसके बच्चों को लेकर बरेली जिले के फरीदपुर थाना क्षेत्र में स्थित टांडा सिकंदरपुर गांव पहुंचे। यहां मनमोहन का अपना घर था, जिसे उसने अपहरणकर्ताओं का 'सेफ हाउस' बना लिया था। घर पहुंचते ही बदमाशों ने मनोज को एक अंधेरे कमरे में बंधक बना दिया।
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मनोज अंदर ही अंदर घुट रहा था। उसे अपनी जान से ज्यादा अपने जिगर के टुकड़ों- लक्ष्य और मयूर की चिंता सता रही थी। बेबस पिता कमरे में कैद होकर बस भगवान से प्रार्थना कर रहा था। बदमाशों ने मनोज से कहा था कि वे बच्चों को उनकी मां के पास सौंपने जा रहे हैं, लेकिन मनोज के दिल में एक अनजाना सा खौफ पल रहा था कि कहीं ये दरिंदे उसके बच्चों को कोई नुकसान न पहुंचा दें।
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सीबीगंज का वो खौफनाक मंजर: जब तेज रफ्तार बोलेरो और टैंकर की हुई जोरदार भिड़ंत
\r\n\r\nरविवार दोपहर करीब 3 बजे का वक्त था। मास्टरमाइंड मनमोहन अपने साथी विशेष यादव, सिकंदर और प्रिंस के साथ दोनों बच्चों को लेकर बोलेरो गाड़ी से निकला। उनका मकसद बच्चों को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करना या किसी बड़ी साजिश को अंजाम देना था। गाड़ी बेहद तेज रफ्तार में थी।
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बरेली के सीबीगंज इलाके में हाईवे पर एक भारी-भरकम टैंकर सड़क किनारे खड़ा हुआ था। बोलेरो चला रहे शख्स का गाड़ी के स्टेयरिंग से नियंत्रण अचानक खो गया और यह तेज रफ्तार गाड़ी सीधे जाकर उस खड़े टैंकर के पिछले हिस्से में जा घुसी। टक्कर इतनी भयानक और जोरदार थी कि धमाके जैसी आवाज हुई।
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इस भीषण सड़क हादसे में मास्टरमाइंड मनमोहन, विशेष यादव और सिकंदर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। गाड़ी के अंदर का नजारा बेहद वीभत्स था। उनका चौथा साथी प्रिंस गाड़ी में बुरी तरह फंस गया था और खून से लथपथ होकर गंभीर रूप से घायल हो गया था।
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पुलिस का एक्शन और घायल आरोपी का कबूलनामा: ऐसे खुला अपहरण का बड़ा राज
\r\n\r\nजैसे ही सीबीगंज में हाईवे पर इस भयानक एक्सीडेंट की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली, स्थानीय पुलिस तुरंत सायरन बजाती हुई मौके पर पहुंची। पुलिस ने सबसे पहले गाड़ी में फंसे लोगों को निकालने का काम शुरू किया। जब पुलिस ने गाड़ी का पिछला हिस्सा खोला, तो वहां दो छोटे और सहमे हुए बच्चे बैठे मिले।
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बच्चों की सुरक्षित स्थिति देखकर पुलिस ने राहत की सांस ली, लेकिन मामला तब गहरा गया जब घायल आरोपी प्रिंस को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया और पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू की। अपनी जान जाते देख प्रिंस टूट गया और उसने पुलिस के सामने गुड़गांव से अपहरण की पूरी कहानी उगल दी। उसने बताया कि कैसे उन्होंने मनोज और इन बच्चों को अगवा किया है और मनोज अभी भी फरीदपुर में बंधक है।
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यह जानकारी मिलते ही बरेली पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आ गई। बिना एक पल की देरी किए, पुलिस की एक भारी टीम ने घायल प्रिंस की निशानदेही पर फरीदपुर के टांडा सिकंदरपुर स्थित मनमोहन के घर पर धावा बोल दिया। वहां पुलिस ने एक कमरे का ताला तोड़ा तो अंदर मनोज बंधक अवस्था में मिला। पुलिस ने उसे सकुशल मुक्त करा लिया।
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मौत को मात देकर लौटे बच्चों को देख पिता की छलक उठी आंखें: यूपी पुलिस का जताया आभार
\r\n\r\nजब फरीदपुर से पुलिस मनोज को लेकर सीबीगंज पहुंची और उसे उसके दोनों बच्चों से मिलवाया गया, तो वह पल बेहद भावुक कर देने वाला था। अपने बच्चों को जिंदा और सुरक्षित देखकर मनोज फूट-फूट कर रोने लगा। उसने उन्हें सीने से लगा लिया।
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राहत की सांस लेते हुए मनोज ने कांपती आवाज में कहा, "मैं तो अपनी उम्मीद छोड़ चुका था। इन दरिंदों ने मुझे एक अंधेरे कमरे में बंद कर दिया था। ये मेरे बच्चों को यह कहकर ले गए थे कि वो उन्हें उनकी मां के पास छोड़ देंगे, लेकिन मुझे उन पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं था। मैं अंदर ही अंदर घबरा रहा था। फिर अचानक मुझे पुलिस ने आकर दरवाजा खोला और बताया कि अपहरणकर्ताओं का एक्सीडेंट हो गया है और वो मारे गए हैं।" मनोज ने दोनों हाथ जोड़कर ईश्वर और बरेली पुलिस का अपनी और बच्चों की जान बचाने के लिए बार-बार आभार जताया।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\nथाना सीबीगंज, बरेली क्षेत्रांतर्गत हुई सड़क दुर्घटना के सम्बंध में बरेली पुलिस द्वारा जांच के दौरान दुर्घटना में घायल गुरुग्राम (हरियाणा) से अपहृत 02 बच्चों को उनके अपहृत पिता सहित सकुशल बरामद करने के संबंध में श्री मानुष पारीक, पुलिस अधीक्षक नगर, बरेली की बाइट।#UPPolice https://t.co/D6Y4mRzSHJ pic.twitter.com/zn5nvXGSbp
\r\n— Bareilly Police (@bareillypolice) April 6, 2026
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बरेली एसपी सिटी का आधिकारिक बयान: आगे क्या कर रही है पुलिस?
\r\n\r\nइस पूरे दिल दहला देने वाले मामले पर बरेली के एसपी सिटी मानुष पारीक ने मीडिया को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं, बल्कि एक बड़े अपराध का पर्दाफाश था।
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एसपी सिटी ने कहा, "सड़क हादसे की सूचना मिलने पर जब हमारी पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची, तो क्षतिग्रस्त बोलेरो में से दो मासूम बच्चे पूरी तरह सुरक्षित अवस्था में बरामद हुए। यह एक बहुत बड़ी राहत थी। जब मामले की गहराई से जांच की गई और घायल शख्स से पूछताछ हुई, तो पता चला कि यह पूरा मामला गुड़गांव से जुड़ी एक किडनैपिंग का है। घायल आरोपी की पुख्ता निशानदेही पर हमारी टीम ने फरीदपुर में रेड की और वहां से बच्चों के पिता को भी सकुशल बरामद कर लिया है। इस पूरे हादसे में तीन मुख्य आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि एक घायल आरोपी का पुलिस की निगरानी में अस्पताल में इलाज चल रहा है। गुड़गांव पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है और मामले में आगे की सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।"
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जब भगवान खुद करता है न्याय
\r\n\r\nयह पूरी घटना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि अपराध का रास्ता हमेशा तबाही की ओर ले जाता है। जिन अपहरणकर्ताओं ने एक गरीब परिवार की खुशियां छीनने और मासूमों की जान जोखिम में डालने की जुर्रत की थी, उन्हें कुदरत ने कुछ ही घंटों के भीतर ऐसी खौफनाक सजा दी जिसे सुनकर हर कोई सिहर उठे।
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वहीं, मनोज और उसके परिवार के लिए यह किसी पुनर्जन्म से कम नहीं है। बरेली पुलिस की तत्परता और ईश्वर के आशीर्वाद से आज एक परिवार उजड़ने से बच गया। यह खबर न सिर्फ अपराध के खौफनाक चेहरे को बेनकाब करती है, बल्कि इस बात का भी भरोसा दिलाती है कि अंत में जीत हमेशा सत्य और मासूमियत की ही होती है।