खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था (Law and Order) को लेकर राज्य सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति किसी से छिपी नहीं है। अपराधों पर लगाम कसने, प्रशासनिक कसावट लाने और आगामी चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार समय-समय पर पुलिस महकमे में महत्वपूर्ण बदलाव करती रहती है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश शासन (गृह विभाग) ने एक बार फिर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 15 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं।READ ALSO:-अब आपस में 'बात' करेंगी गाड़ियां! अंधे मोड़ों और कोहरे में नहीं होंगे एक्सीडेंट; सरकार 2028 से अनिवार्य करने जा रही है 'V2V' तकनीक
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इस बड़े फेरबदल में राजधानी लखनऊ (Lucknow) से लेकर संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj), मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर (Gorakhpur) और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (Varanasi) तक में पुलिस के बड़े ओहदेदारों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में हुए बदलाव की हो रही है, जहां अब एक नए और तेजतर्रार अधिकारी की एंट्री हुई है। आइए, इस पूरी 'प्रशासनिक सर्जरी' का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
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लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट: तरुण गाबा के हाथों में राजधानी की कमान

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लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी है और राज्य का सबसे वीआईपी (VIP) जिला होने के नाते यहां की पुलिसिंग हमेशा चुनौतियों से भरी होती है। राजनीतिक रैलियां, वीआईपी मूवमेंट, और शहर की घनी आबादी के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखना एक पुलिस कमिश्नर के लिए अग्निपरीक्षा होती है।
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सरकार ने अमरेन्द्र के. सेंगर (1995 बैच) को लखनऊ पुलिस कमिश्नर के पद से हटाकर एक बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP), अभिसूचना (इंटेलिजेंस) नियुक्त किया है। इंटेलिजेंस विंग राज्य की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार होता है, और इसके साथ ही उन्हें डीजी सुरक्षा का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। यह दिखाता है कि सरकार सेंगर के अनुभव का इस्तेमाल राज्य के खुफिया तंत्र को मजबूत करने में करना चाहती है।
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वहीं, लखनऊ पुलिस कमिश्नर की अहम कुर्सी पर 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी तरुण गाबा को बैठाया गया है। तरुण गाबा इससे पहले अपर पुलिस महानिदेशक (ADG), सुरक्षा के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। सुरक्षा मामलों में उनके गहरे अनुभव और प्रशासनिक पकड़ को देखते हुए उन्हें राजधानी के लॉ एंड ऑर्डर को संभालने की यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।
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संगम नगरी में बदलाव: पीयूष मोर्डिया बने प्रयागराज के नए पुलिस कमिश्नर

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लखनऊ के अलावा प्रदेश के एक और महत्वपूर्ण कमिश्नरेट— प्रयागराज में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रयागराज न केवल इलाहाबाद हाईकोर्ट का केंद्र है, बल्कि यहां होने वाले आयोजनों (जैसे महाकुंभ) को लेकर पुलिस को हमेशा अलर्ट मोड पर रहना पड़ता है।
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शासन ने जोगेन्द्र कुमार (2007 बैच) को प्रयागराज पुलिस कमिश्नर के पद से हटाकर मुरादाबाद पीटीएस (पुलिस ट्रेनिंग स्कूल) में पुलिस महानिरीक्षक (IG) बना दिया है। उनकी जगह 1998 बैच के अनुभवी अधिकारी पीयूष मोर्डिया को प्रयागराज का नया पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) नियुक्त किया गया है। मोर्डिया इससे पहले एडीजी वाराणसी जोन के पद पर तैनात थे और उन्होंने पूर्वांचल में कानून व्यवस्था को संभालने का लंबा अनुभव हासिल किया है।
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जोनल स्तर पर बड़े बदलाव: गोरखपुर और वाराणसी जोन को मिले नए ADG

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राज्य के दो सबसे हाई-प्रोफाइल जोन— गोरखपुर (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह क्षेत्र) और वाराणसी (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र) में भी एडीजी (ADG) स्तर के अधिकारियों को बदला गया है।
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    गोरखपुर जोन: 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी मथुरा अशोक जैन को गोरखपुर जोन के एडीजी पद से हटाकर मुख्यालय लखनऊ में पुलिस महानिदेशक, अग्निशमन (Fire) एवं आपात सेवाएं की अहम कमान सौंपी गई है। उनकी जगह राम कुमार (1995 बैच) को एडीजी लॉजिस्टिक्स से हटाकर गोरखपुर जोन का नया अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) बनाया गया है।
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    वाराणसी जोन: पीयूष मोर्डिया के प्रयागराज जाने के बाद वाराणसी जोन खाली हो गया था। अब 1997 बैच के आईपीएस नवीन अरोरा को एडीजी तकनीकी सेवाएं से हटाकर अपर पुलिस महानिदेशक, वाराणसी जोन नियुक्त किया गया है।
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15 IPS अधिकारियों के तबादलों की पूरी लिस्ट (एक नजर में)

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इस व्यापक फेरबदल में डीजीपी (DGP) से लेकर एसपी (SP) स्तर तक के अधिकारियों के विभाग बदले गए हैं। सभी अधिकारियों की नई और पुरानी तैनाती का पूरा ब्यौरा नीचे दी गई टेबल में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है:
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अधिकारी का नाम (बैच)
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पुरानी तैनाती (कहां से हटे)
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नई तैनाती (वर्तमान जिम्मेदारी)
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मथुरा अशोक जैन (1995)
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एडीजी, गोरखपुर जोन
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महानिदेशक (डीजी), अग्निशमन एवं आपात सेवाएं, लखनऊ
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अमरेन्द्र के. सेंगर (1995)
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पुलिस कमिश्नर, लखनऊ
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महानिदेशक (डीजी), इंटेलिजेंस (अतिरिक्त प्रभार: डीजी सुरक्षा)
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राम कुमार (1995)
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एडीजी, लॉजिस्टिक्स
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अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), गोरखपुर जोन
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नवीन अरोरा (1997)
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एडीजी, तकनीकी सेवाएं
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अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), वाराणसी जोन
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पीयूष मोर्डिया (1998)
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एडीजी, वाराणसी जोन
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पुलिस कमिश्नर, प्रयागराज
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भगवान एस. श्रीवास्तव (1998)
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एडीजी, अभिसूचना
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अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), तकनीकी सेवाएं
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डॉ. संजीव गुप्ता (1999)
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एडीजी, पुलिस मुख्यालय
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एडीजी, पुलिस मुख्यालय (अतिरिक्त प्रभार: एडीजी, लॉजिस्टिक्स)
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तरुण गाबा (2001)
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एडीजी, सुरक्षा
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पुलिस कमिश्नर, लखनऊ
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धर्मवीर (2002)
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आईजी, होमगार्ड्स
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महानिरीक्षक (आईजी), पीएसी पूर्वी जोन, प्रयागराज
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मोहित गुप्ता (2006)
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सचिव, गृह विभाग
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महानिरीक्षक (आईजी), भ्रष्टाचार निवारण संगठन (ACO)
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विनोद कुमार सिंह (2007)
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डॉ. भीमराव अंबेडकर पुलिस अकादमी
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महानिरीक्षक (आईजी), विशेष जांच, उत्तर प्रदेश
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जोगेन्द्र कुमार (2007)
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पुलिस कमिश्नर, प्रयागराज
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महानिरीक्षक (आईजी), पीटीएस, मुरादाबाद
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आनंद एस.आर. कुलकर्णी (2008)
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आईजी, भ्रष्टाचार निवारण संगठन
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सचिव, गृह विभाग, उत्तर प्रदेश
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अनूप कुमार सिंह (2014)
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संबद्ध: डीजीपी मुख्यालय
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पुलिस अधीक्षक (SP), आर्थिक अपराध शाखा (EOW)
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आनंद कुमार (2015)
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संबद्ध: डीजीपी मुख्यालय
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पुलिस अधीक्षक (SP), लोक शिकायत, डीजीपी मुख्यालय
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इन तबादलों के पीछे क्या है सरकार की रणनीति?

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जब भी इतने बड़े पैमाने पर शासन द्वारा आईपीएस अधिकारियों के तबादले (IPS Transfer UP) किए जाते हैं, तो उसके पीछे एक स्पष्ट प्रशासनिक और रणनीतिक सोच होती है:
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  1. \r\n
    खुफिया तंत्र (Intelligence) की मजबूती: अमरेन्द्र के. सेंगर को इंटेलिजेंस और सुरक्षा का प्रमुख बनाना यह दर्शाता है कि सरकार राज्य में आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद निरोधक गतिविधियों और खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत करना चाहती है। आगामी त्योहारों और राजनीतिक हलचलों को देखते हुए इंटेलिजेंस का अलर्ट मोड पर होना बेहद जरूरी है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों पर प्रहार: आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निवारण संगठन (ACO) में नए अधिकारियों (जैसे मोहित गुप्ता और अनूप कुमार सिंह) की तैनाती यह स्पष्ट करती है कि सरकार सफेदपोश अपराधों (White-collar crimes) और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में तेजी लाना चाहती है।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    ग्राउंड पुलिसिंग और पब्लिक ग्रिवांस: आनंद कुमार को लोक शिकायत (Public Grievance) का एसपी बनाकर यह संदेश दिया गया है कि जनसुनवाई और आम लोगों की शिकायतों के निवारण तंत्र को ज्यादा जवाबदेह और त्वरित बनाया जा रहा है।
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  6. \r\n
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उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम राज्य की कानून व्यवस्था को एक नया और आक्रामक रूप देने की दिशा में उठाया गया है। लखनऊ में तरुण गाबा और प्रयागराज में पीयूष मोर्डिया जैसे अनुभवी अधिकारियों की तैनाती से पुलिसिंग में नया विजन देखने को मिलेगा। अधिकारियों को अपनी नई जिम्मेदारी के तहत यह साबित करना होगा कि वे मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं (विशेष रूप से महिला सुरक्षा, माफियाओं पर नकेल और साइबर अपराध पर नियंत्रण) को धरातल पर सफलतापूर्वक लागू कर सकते हैं। राज्य की जनता को अब इन नए पुलिस कप्तानों और ज़ोनल प्रमुखों से बेहतर और सुरक्षित माहौल की उम्मीद है।