खबरीलाल डेस्क
एलन मस्क (Elon Musk) की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी Starlink भारत में अपनी कमर्शियल सर्विस शुरू करने के अंतिम चरण में है। इस सप्ताह कंपनी मुंबई में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। 30 और 31 अक्टूबर को Starlink भारत में अपने नेटवर्क की सुरक्षा और इंटरसेप्शन (Lawful Interception) क्षमता का एक आधिकारिक Demo Run दिखाने वाली है। यह प्रदर्शन Starlink को देश में पूर्ण वाणिज्यिक संचालन (Commercial Operation) की मंजूरी दिलाने के लिए एक अहम सुरक्षा शर्त है।READ ALSO:-1 हफ्ते में शुरू होगी 'कॉलर नेम' सर्विस! अब नंबर के साथ दिखेगा कॉल करने वाले का नाम, सरकार ने दिया 60 दिन के ट्रायल का निर्देश
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DoT और IN-SPACe की मंजूरी

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Starlink को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए कई नियामकीय बाधाओं को पार करना पड़ा है।
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    लाइसेंस: कंपनी को पहले ही 20 साल के लिए वैध ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशंस बाय सैटेलाइट (GMPCS) लाइसेंस मिल चुका है।
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    अंतरिक्ष स्वीकृति: हाल ही में, कंपनी को भारतीय स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) से अपने Gen-1 सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन (Gen-1 satellite constellation) के लिए भी स्वीकृति मिली है।
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    सुरक्षा प्रोटोकॉल: DoT (Department of Telecommunications) ने कंपनी को डेमो और सुरक्षा जांच के लिए अस्थायी स्पेक्ट्रम आवंटित किया है। यह कदम देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
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मुंबई में Security Demo

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Elon Musk की Starlink इस हफ्ते 30 और 31 अक्टूबर को मुंबई में सिक्योरिटी डेमो आयोजित करेगी।
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    डेमो का उद्देश्य: इस प्रदर्शन के दौरान भारत की कानून प्रवर्तन एजेंसियां (LEAs) यह जांच करेंगी कि Starlink का सैटेलाइट ब्रॉडबैंड नेटवर्क भारत के सुरक्षा नियमों, खासकर 'लॉफुल इंटरसेप्शन' (कानूनी रूप से संचार को रोकना) का पूरी तरह से पालन करता है या नहीं।
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    ग्राउंड स्टेशन: SpaceX (स्टारलिंक की मूल कंपनी) ने मुंबई में पहले से ही तीन ग्राउंड स्टेशन तैयार कर लिए हैं, जो भारत में Starlink के मुख्य हब के रूप में काम करेंगे। कंपनी को चेन्नई और नोएडा में भी गेटवे स्टेशन स्थापित करने की अनुमति मिल चुकी है, जिनकी संख्या भविष्य में 9-10 तक बढ़ाई जाएगी।
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सख्त सुरक्षा नियम और घरेलू निर्माण पर जोर

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भारत सरकार ने मई 2024 में सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए कड़े सुरक्षा मानक लागू किए थे।
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    डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty): नए मानकों के तहत, सभी नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और यूजर डेटा रूटिंग सिस्टम भारत में ही स्थित होने चाहिए। किसी भी डायरेक्ट सैटेलाइट-टू-टर्मिनल कम्युनिकेशन की अनुमति नहीं होगी; सभी यूजर ट्रैफिक को भारतीय गेटवे के माध्यम से गुजरना होगा।
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    मेक इन इंडिया: कंपनियों के लिए सेवा शुरू करने के 5 साल के भीतर अपने ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर का कम से कम 20% हिस्सा मेड-इन-इंडिया बनाना अनिवार्य होगा।
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Starlink का कनेक्शन: कीमत और स्पीड

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ग्रामीण क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली Starlink की सर्विस फिलहाल महंगी है।
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विवरण
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एंट्री-लेवल प्लान
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हाई-एंड प्लान
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शुरुआती सेटअप कॉस्ट
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₹30,000 या उससे अधिक (डिश, राउटर)
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मासिक सब्सक्रिप्शन
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₹3,300 या उससे अधिक
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इंटरनेट स्पीड
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25 Mbps तक
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225 Mbps तक
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असली मकसद – हर कोने तक इंटरनेट (The Real Purpose)

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Starlink का असली उद्देश्य शहरी नहीं, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना है। पहाड़ी, जंगली और सीमावर्ती क्षेत्रों में, जहां फाइबर नेटवर्क बिछाना असंभव रहा है, वहां 25 Mbps की स्पीड भी एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। अपनी लो-लेटेंसी (Low-Latency) तकनीक के साथ Starlink भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी का एक नया अध्याय शुरू करने जा रही है।