खबरीलाल डेस्क
क्या आप जानते हैं कि आपकी जेब में रखा स्मार्टफोन अब एक ऐसे खतरे की चपेट में है, जिसे पकड़ना बेहद मुश्किल है? देश में साइबर ठगी (Cyber Fraud) के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे भी ज्यादा तेजी से ठग अपने तरीकों को बदल रहे हैं। पहले वो आपको फंसाने के लिए फर्जी लिंक (Fake Links) भेजते थे या कोई ऐप डाउनलोड करवाते थे, लेकिन अब खेल बदल चुका है।READ ALSO:-शुक्रवार का मौसम: उत्तर भारत 'फ्रीज' तो दक्षिण भारत 'पानी-पानी'! 9 जनवरी को 15 राज्यों में घने कोहरे का 'लॉकडाउन', IMD ने बजाई खतरे की घंटी
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गृह मंत्रालय (Home Ministry) के तहत काम करने वाली संस्था 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (I4C) ने देशवासियों के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी 'कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम' (Call Forwarding Scam) को लेकर है। इस नए तरीके में ठग बिना किसी लिंक या ऐप के, सिर्फ आपसे एक नंबर डायल करवाकर आपका पूरा मोबाइल, बैंक अकाउंट और सोशल मीडिया हैक कर सकते हैं।
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यह खबर हर मोबाइल यूजर के लिए जरूरी है, क्योंकि एक छोटी सी गलती आपकी जीवन भर की कमाई को मिट्टी में मिला सकती है।
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I4C का अलर्ट: क्या है यह नया 'साइबर हथियार'?

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I4C ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि साइबर अपराधी अब मोबाइल के एक बेहद उपयोगी फीचर 'Call Forwarding' (कॉल फॉरवर्डिंग) को अपना हथियार बना रहे हैं। आम तौर पर इस फीचर का इस्तेमाल हम तब करते हैं जब हमारा फोन नेटवर्क से बाहर हो या हम बिजी हों, ताकि हमारी कॉल किसी दूसरे नंबर पर ट्रांसफर हो जाए। लेकिन अब ठग इसी रास्ते से आपके फोन में सेंध लगा रहे हैं।
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कैसे शुरू होता है खेल? (Modus Operandi)

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इस ठगी की स्क्रिप्ट बहुत ही शातिराना तरीके से लिखी गई है। ठग आपकी रोज़मर्रा की ज़रूरतों का फायदा उठाते हैं:
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    कूरियर या डिलीवरी बॉय बनकर कॉल: ठग आपको कॉल करेंगे और खुद को किसी नामी कूरियर कंपनी या ई-कॉमर्स साइट का डिलीवरी एजेंट बताएंगे।
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    समस्या का बहाना: वो कहेंगे, "सर/मैडम, आपका एक पार्सल आया है, लेकिन एड्रेस नहीं मिल रहा" या "डिलीवरी अटक गई है।"
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    भरोसा जीतना: अपनी बातों को सच साबित करने के लिए वो आपको कोई फर्जी ट्रैकिंग आईडी भी भेज सकते हैं।
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    जाल में फंसाना: फिर वो कहेंगे कि "समस्या को सुलझाने के लिए या डिलीवरी कन्फर्म करने के लिए आपको एक कोड डायल करना होगा।" और यहीं यूजर गलती कर बैठता है।
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USSD कोड का रहस्य: 21, 61 और 67 का खतरनाक खेल

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ठग आपको जो नंबर या कोड डायल करने के लिए देते हैं, वो कोई साधारण नंबर नहीं होता। वह एक MMI (Man-Machine Interface) या USSD कोड होता है।
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I4C के मुताबिक, ये कोड अक्सर *21*, *61* या *67* से शुरू होते हैं, जिसके बाद ठग अपना मोबाइल नंबर जुड़वा देते हैं।
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    उदाहरण के लिए: ठग कहेगा डायल करें- *21*98XXXXX#
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जैसे ही आप यह कोड अपने फोन के डायलर पैड से डायल करते हैं, आपके फोन में Call Forwarding एक्टिवेट हो जाती है। इसका मतलब यह है कि अब आपके नंबर पर आने वाली सारी कॉल्स (Voice Calls) सीधे ठग के नंबर पर जाने लगेंगी।
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सबसे बड़ा खतरा: OTP और बैंक अकाउंट

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आप सोच रहे होंगे कि कॉल फॉरवर्ड होने से क्या होगा? यही सबसे बड़ी गलतफहमी है।
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    OTP की चोरी: आज के समय में बैंक ट्रांजैक्शन के लिए या सोशल मीडिया लॉगिन के लिए 'वॉयस कॉल ओटीपी' (Voice OTP) का विकल्प होता है। ठग लॉगिन करते वक्त 'Send OTP via Call' चुनते हैं।
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    सीधा एक्सेस: चूंकि आपके फोन की कॉल ठग के पास जा रही हैं, तो बैंक से आने वाला ओटीपी वाला कॉल भी उसी के पास जाएगा।
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    खाता खाली: उस ओटीपी का इस्तेमाल करके वो आपका बैंक खाता खाली कर सकते हैं या WhatsApp/Telegram जैसे अकाउंट अपने फोन में लॉगिन कर सकते हैं।
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और सबसे डरावनी बात यह है कि आपके फोन में नेटवर्क तो रहेगा, लेकिन आपको पता ही नहीं चलेगा कि कॉल डायवर्ट हो चुकी हैं।
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क्यों खतरनाक है यह तरीका?

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    नो लिंक, नो ऐप: इसमें आपको किसी फिशिंग लिंक पर क्लिक नहीं करना पड़ता, जिससे एंटी-वायरस या सुरक्षा सिस्टम इसे पकड़ नहीं पाते।
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    मानवीय भूल: यह पूरी तरह से यूजर की जागरूकता की कमी पर आधारित है। लोग कोड डायल करते समय ज्यादा नहीं सोचते।
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    साइलेंट अटैक: पैसे कटने का मैसेज भी कई बार यूजर नहीं देख पाता क्योंकि ठग पहले ही सिस्टम को हैक कर चुके होते हैं।
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बचाव का तरीका: तुरंत डायल करें यह 'मैजिकल कोड'

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अगर आपको जरा सा भी शक हो कि आपने किसी के कहने पर कोई कोड डायल किया है, या आपका फोन अजीब व्यवहार कर रहा है, तो I4C ने इसका तोड़ भी बताया है।
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रामबाण इलाज: ##002#

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अपने फोन से तुरंत ##002# डायल करें।
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    यह एक इरेज़ (Erase) कोड है।
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    इसे डायल करते ही आपके फोन पर एक्टिवेट की गई सभी प्रकार की कॉल फॉरवर्डिंग (All Call Forwarding) तुरंत निष्क्रिय (Deactivate) हो जाएगी।
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    सारी कॉल्स वापस आपके ही नंबर पर आने लगेंगी।
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जांचने का तरीका

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आप यह भी चेक कर सकते हैं कि कहीं आपका फोन पहले से तो फॉरवर्ड नहीं है। इसके लिए डायल करें:
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    *#21# : यह बताएगा कि कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव है या नहीं।
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    *#62# : यह बताएगा कि जब आपका फोन 'Not Reachable' हो, तो कॉल कहां जा रही है।
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खबरीलाल की पाठकों को सलाह: इन 5 बातों की गांठ बांध लें

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साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। 'खबरीलाल' आपसे अपील करता है कि इन सुरक्षा नियमों का पालन करें:
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    अनजान कोड से बचें: कोई भी व्यक्ति, चाहे वो बैंक अधिकारी हो या डिलीवरी बॉय, अगर आपको कोई कोड (जैसे 401 या 21) डायल करने को कहे, तो साफ मना कर दें।
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    पासवर्ड शेयर न करें: अपना पिन, पासवर्ड या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।
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    अलर्ट रहें: अगर आपके फोन पर अचानक कॉल्स आनी बंद हो जाएं, तो तुरंत दूसरे नंबर से अपने नंबर पर कॉल करके चेक करें।
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    सेटिंग्स चेक करें: समय-समय पर अपने फोन की 'Call Forwarding' सेटिंग्स चेक करते रहें।
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    शिकायत दर्ज करें: अगर आपके साथ ठगी हो जाती है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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यह अलर्ट अपने परिवार और दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें। एक शेयर किसी की गाढ़ी कमाई बचा सकता है।
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(अस्वीकरण: यह जानकारी गृह मंत्रालय के I4C विभाग द्वारा जारी अलर्ट और साइबर सुरक्षा मानकों पर आधारित है।)