लखनऊ/नोएडा: नोएडा में बन रहा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सिर्फ कंक्रीट का एक ढांचा नहीं, बल्कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास का नया 'ग्रोथ इंजन' है। और हर इंजन को चाहिए एक मजबूत 'फ्यूल लाइन'। इसी फ्यूल लाइन को बिछाने का काम अब अंतिम चरण में है। सरकार ने एनएच-34 को नोएडा एयरपोर्ट से जोड़ने वाली एक ऐसी सड़क परियोजना को मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया है, जिसे सिर्फ एक रास्ता कहना गलत होगा - यह असल में इस पूरे क्षेत्र का नया 'इकोनॉमिक कॉरिडोर' बनने जा रहा है।READ ALSO:-मेरठ को जाम से मिलेगी मुक्ति! बीच सड़क से हटेगी बुढ़ाना गेट पुलिस चौकी, जली कोठी में नाले पर बनेगा स्लैब
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क्या है यह 'सुपरफास्ट' कॉरिडोर?
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यह प्रोजेक्ट सिर्फ यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि व्यापार और तरक्की के लिए बनाया जा रहा है। इसके दो मुख्य हिस्से हैं:
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    विकास की डबल लेन: खुर्जा-जेवर रोड, जो अब तक एक सिंगल रोड है, उसे 15.43 किलोमीटर तक डबल लेन में बदला जाएगा। यह इस कॉरिडोर की मुख्य धमनी (main artery) होगी।
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    जाम-मुक्त बाईपास: खुर्जा शहर के ट्रैफिक को बायपास करने के लिए 4 किलोमीटर लंबा एक नया बाईपास बनाया जाएगा, जो सीधे एनएच-34 को इस डबल लेन सड़क से जोड़ देगा।
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इन दोनों के बनने का मतलब है - एयरपोर्ट तक 'जीरो ट्रैफिक' और 'नॉन-स्टॉप' पहुंच।
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सिर्फ सफर नहीं, व्यापार भी होगा आसान
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इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा सिर्फ यात्रियों को नहीं, बल्कि यहां के स्थानीय उद्योगों को मिलेगा।
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    खुर्जा की पॉटरी को मिलेंगे पंख: खुर्जा, जिसे 'पॉटरी नगर' कहा जाता है, उसके कारीगरों के लिए यह सड़क एक वरदान साबित होगी। वे अपने उत्पाद बिना किसी जाम में फंसे, कम समय में सीधे एयरपोर्ट कार्गो तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उनके लिए दुनिया भर के बाजार खुल जाएंगे।
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    मेरठ और हापुड़ के उद्योगों को रफ्तार: यही फायदा मेरठ के खेल के सामान और हापुड़ के अन्य उद्योगों को भी मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी सीधे तौर पर व्यापार को बढ़ाएगी।
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किसकी मेहनत लाई रंग?
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इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को हकीकत में बदलने के पीछे जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह का लंबा संघर्ष और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक उनकी मजबूत पैरवी है। वहीं, 4 किलोमीटर लंबे बाईपास के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की संस्तुति ने इस योजना को और गति दी है।
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यह कॉरिडोर जब बनकर तैयार होगा, तो यह सिर्फ मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर की दूरी ही कम नहीं करेगा, बल्कि यह पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को विकास के एक नए 'रनवे' पर लाकर खड़ा कर देगा, जहां से तरक्की की नई 'उड़ान' भरी जाएगी।
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