खबरीलाल डेस्क
मेरठ (Meerut): पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक, मेरठ का प्रतिष्ठित शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट (Shastri Nagar Central Market) इन दिनों भारी संकट के दौर से गुजर रहा है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के आदेश और आवास विकास परिषद (Avas Vikas Parishad) द्वारा जारी ध्वस्तीकरण के नोटिस के बाद से व्यापारियों की नींद उड़ी हुई है। दहशत और अनिश्चितता के इस माहौल में, व्यापारियों ने अब अपनी लड़ाई को सड़क पर लड़ने का फैसला किया है।READ ALSO:-मेरठ के लिए 'सुपर संडे' की तैयारी: 16 या 22 फरवरी से दौड़ सकती है नमो भारत; जानिए स्टेशनों और प्लेटफॉर्म का पूरा रूट मैप
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इसी क्रम में बुधवार को सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों ने एक आपात बैठक की, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 14 फरवरी को बाजार बंद (Bandh) रखा जाएगा और एक विशाल 'आम महापंचायत' का आयोजन किया जाएगा। इस पंचायत का उद्देश्य न केवल प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाना है, बल्कि पूरे जिले के व्यापारियों को एकजुट कर इस संकट का सामना करना भी है।
\r\n\r\n
ध्वस्तीकरण का डर और व्यापारियों की लामबंदी
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
Meerut Central Market Demolition की लटकती तलवार ने व्यापारियों को एकजुट होने पर मजबूर कर दिया है। बुधवार को हुई बैठक में व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे। उनका कहना है कि यह केवल ईंट-पत्थर की दुकानों का सवाल नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का प्रश्न है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
व्यापारी नेता निमित्त जैन ने बैठक के दौरान बताया कि यह लड़ाई अब अकेले सेंट्रल मार्केट की नहीं रह गई है। उन्होंने घोषणा की कि इस महापंचायत में जिले भर के प्रमुख व्यापार संघों को आमंत्रित किया गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    किस-किस को बुलावा: संयुक्त व्यापार संघ के दोनों गुटों के अलावा, जागृति विहार, शास्त्री नगर, आबूलेन, सदर बाजार और अन्य प्रमुख बाजारों के व्यापार संघों के पदाधिकारियों को विशेष रूप से निमंत्रण भेजा गया है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मकसद: सभी को एक मंच पर लाकर प्रशासन को अपनी पीड़ा बताना और एक सम्मानजनक रास्ता निकालने की मांग करना। निमित्त जैन ने कहा, "हम अपनी व्यथा सबको बताएंगे और उसी आधार पर आगे की रणनीति तय करेंगे।"
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

14 फरवरी की रणनीति: बंदी और महापंचायत

\r\n\r\n
आगामी 14 फरवरी का दिन सेंट्रल मार्केट के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। व्यापारियों ने तय किया है कि इस दिन बाजार पूरी तरह से बंद रहेगा। हालांकि, अभी बंदी का समय दोपहर 2:00 बजे तक निर्धारित किया गया है, लेकिन इसे आगे बढ़ाने के विकल्प भी खुले रखे गए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
व्यापारियों का कहना है, "जो बंदी अभी 14 फरवरी को 2:00 बजे तक के लिए निर्धारित की गई है, वह दो बजे ही पूरी होगी या उसका समय आगे तक के लिए बढ़ाया जाएगा, इसको लेकर पंचायत में ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अगर हमें अपनी दुकानें बचाने के लिए बंदी का समय अनिश्चितकाल के लिए भी बढ़ाना पड़ा, तो हम पीछे नहीं हटेंगे। हम इस आंदोलन को अंजाम तक लेकर जाएंगे।"
\r\n\r\n
क्या है पूरा विवाद? (आवासीय बनाम कमर्शल)
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस पूरे विवाद की जड़ में 'भू-उपयोग परिवर्तन' (Land Use Change) का मामला है। शास्त्री नगर योजना में जो प्लॉट आवास विकास परिषद ने आवासीय (Residential) उद्देश्य के लिए आवंटित किए थे, वहां पिछले तीन दशकों में एक विशाल कमर्शल मार्केट खड़ा हो गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    आवास विकास का पक्ष: परिषद का कहना है कि आवासीय प्लॉटों पर दुकानें चलाना अवैध है और यह नियमों का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी आधार पर अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    व्यापारियों का तर्क: व्यापारियों का कहना है कि यह बाजार 30-35 साल पुराना है। प्रशासन की नाक के नीचे यह बाजार बसा और अब अचानक इसे उजाड़ने का फरमान तुगलकी है। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार कोई 'शमन शुल्क' (Compounding Fee) लेकर या मार्केट को 'स्ट्रीट मार्केट' घोषित करके इसे नियमित करे।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

700 दुकानों पर संकट: खुद हथौड़ा चलाने को मजबूर व्यापारी

\r\n\r\n
आवास विकास परिषद की हालिया कार्रवाई और नोटिस के बाद सेंट्रल मार्केट के लगभग 700 दुकानदार सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। यह आंकड़ा छोटा नहीं है; इसका मतलब है कि शहर की अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से पर ताला लग सकता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
दहशत का आलम यह है कि कुछ व्यापारियों ने कार्रवाई से बचने के लिए खुद ही अपनी दुकानों को पीछे हटाना शुरू कर दिया है। उन्हें उम्मीद है कि अगर वे नाले से 10 फीट पीछे अपनी दुकानें कर लेते हैं और अतिक्रमण हटा लेते हैं, तो शायद वे ध्वस्तीकरण की जद से बाहर आ जाएंगे। व्यापारियों के बीच यह असमंजस बना हुआ है कि क्या सिर्फ पीछे हटने से काम चलेगा, क्योंकि मूल विवाद तो प्लॉट के कमर्शल उपयोग का है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
यादें 25 अक्टूबर की: व्यापारियों का यह डर बेवजह नहीं है। इससे पहले 25 अक्टूबर 2025 को प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए एक सख्त कार्रवाई की थी, जिसमें 22 दुकानों वाले एक पुराने कॉम्प्लेक्स को जमींदोज कर दिया गया था। उस मंजर को याद कर आज भी दुकानदार सहम जाते हैं।
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

प्रशासन की तैयारी और व्यापारियों की गुहार

\r\n\r\n
एक तरफ जहां व्यापारी महापंचायत की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आवास विकास परिषद भी कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए अपनी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने चिन्हित दुकानों की सूची तैयार कर ली है और पुलिस बल की मांग भी की जा सकती है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
व्यापारी लगातार स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायकों और सांसदों के चक्कर काट रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार बीच का कोई रास्ता निकाले। वे कह रहे हैं, "हम टैक्स देते हैं, हम शहर के विकास में भागीदार हैं। हमें उजाड़ने के बजाय हमें नियमित करने की नीति बनाई जाए।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ का सेंट्रल मार्केट इस समय एक चौराहे पर खड़ा है। एक तरफ कोर्ट का सख्त आदेश है, तो दूसरी तरफ हजारों लोगों की आजीविका। 14 फरवरी को होने वाली महापंचायत में व्यापारियों की एकता और प्रशासन का रुख यह तय करेगा कि ऊंट किस करवट बैठता है। क्या सरकार कोई राहत का पैकेज लेकर आएगी, या फिर बुलडोजर की कार्रवाई होकर रहेगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल मेरठ के व्यापारिक जगत में Meerut Central Market Demolition का मुद्दा सबसे गर्म है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के नोटिस के खिलाफ व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि 14 फरवरी को बाजार बंद रखकर एक विशाल महापंचायत आयोजित की जाएगी। इसमें जिले भर के व्यापार संघों को आमंत्रित किया गया है। लगभग 700 दुकानों पर लटके इस संकट के बीच, कुछ व्यापारियों ने खुद ही दुकानें पीछे हटानी शुरू कर दी हैं। व्यापारी प्रशासन से बीच का रास्ता निकालने की गुहार लगा रहे हैं।