उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिक्षण संस्थान मोनाड यूनिवर्सिटी (Monad University) के चेयरमैन विजेंद्र हुड्डा की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। वह पहले से ही बाइक बोट (Bike Bot) जैसे बड़े वित्तीय घोटाले के आरोपी हैं और वर्तमान में फर्जी मार्कशीट प्रकरण में जेल में बंद हैं। अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ईडी की हालिया छापेमारी विजेंद्र हुड्डा के बड़े स्कैम (Scam) की ओर इशारा करती है। यह तय है कि सलाखों के पीछे होने के बावजूद आने वाले दिनों में उनकी मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं।READ ALSO:-उत्तराखंड की हवाओं से कांपा यूपी: कानपुर सीजन में पहली बार 10°C से नीचे; लखनऊ की हवा सुधरी, पर गाजियाबाद 'खतरनाक'
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फर्जीवाड़े से भरा विजेंद्र हुड्डा का सफर
\r\n\r\nविजेंद्र हुड्डा पर दो अत्यंत गंभीर और बड़े आपराधिक व वित्तीय धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं, जो लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं:
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- \r\n बाइक बोट घोटाला: एक विशाल वित्तीय घोटाला जिसमें हजारों करोड़ रुपये की ठगी हुई।\r\n \r\n
- \r\n फर्जी मार्कशीट प्रकरण: शिक्षा के क्षेत्र में फर्जीवाड़ा और डिग्री बेचने का गंभीर आरोप।\r\n \r\n
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ईडी ने हुड्डा के ठिकाने पर की छापेमारी
\r\n\r\nबाइक बोट घोटाले और मोनाड यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसी ईडी (ED) कर रही है।
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- \r\n ईडी की कार्रवाई: गुरुवार को ईडी ने विजेंद्र हुड्डा के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की। मेरठ में कंकरखेड़ा स्थित शिवलोकपुरी में उनके मकान पर ईडी ने छापा मारा।\r\n \r\n
- \r\n समय अवधि: यह कार्रवाई करीब आठ घंटे तक चली।\r\n \r\n
- \r\n नतीजा: हालांकि, ईडी को तुरंत कुछ हाथ नहीं लगा और शाम करीब सवा छह बजे टीम नोटिस लगाकर वापस लौट गई। यह कार्रवाई संकेत देती है कि ईडी जल्द ही हुड्डा की संपत्तियों और उनके वित्तीय लेन-देन पर शिकंजा कसने वाली है।\r\n \r\n
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बाइक बोट घोटाला: ₹15,000 करोड़ की ठगी
\r\n\r\nयह घोटाला गाजियाबाद के दादरी में वर्ष 2010 में रजिस्टर्ड गर्वित इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी से जुड़ा है।
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- \r\n स्कीम: कंपनी ने बाइक बोट नाम से एक प्रोजेक्ट लॉन्च किया। निवेशकों को ₹62,000 निवेश करने पर प्रति माह ₹9,500 देने का लालच दिया गया। बाद में ₹1.24 लाख के निवेश पर ₹17,000 प्रति माह देने की नई स्कीम भी लॉन्च की गई।\r\n \r\n
- \r\n धोखाधड़ी: बड़ी संख्या में लोगों ने निवेश किया, लेकिन कुछ महीने तक रिटर्न मिलने के बाद कंपनी अचानक बंद हो गई।\r\n \r\n
- \r\n 규모: अनुमान है कि इस घोटाले में देश भर के 2 लाख से अधिक निवेशकों से लगभग ₹3 हजार करोड़ से ₹15 हजार करोड़ तक की ठगी की गई।\r\n \r\n
- \r\n मुख्य आरोपी: मुख्य आरोपी संजय भाटी की गिरफ्तारी के बाद ही इस वित्तीय घोटाले में विजेंद्र हुड्डा के नाम का भी खुलासा हुआ था।\r\n \r\n
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मोनाड यूनिवर्सिटी फर्जीवाड़ा: शिक्षा में सेंध
\r\n\r\nफर्जी डिग्री का मामला 2023 अक्टूबर में सामने आया था, जो शिक्षा के क्षेत्र में सेंधमारी को दर्शाता है।
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- \r\n एसटीएफ की कार्रवाई: एसटीएफ (STF) की टीम ने ग्राहक बनकर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में इसी मोनाड यूनिवर्सिटी की फर्जी मार्कशीट और डिग्री पकड़ीं।\r\n \r\n
- \r\n फर्जी सत्यापन: सभी डिग्री पिलखुवा स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी के कार्यालय से जारी की गई थीं और यूनिवर्सिटी ने स्वयं इनका रिकॉर्ड अपडेट किया तथा सत्यापन करते हुए सही बताया।\r\n \r\n
- \r\n गिरफ्तारी: एसटीएफ लखनऊ यूनिट ने 17 मई को छापा मारा, जहाँ 1372 फर्जी मार्कशीट, 262 फर्जी प्रोविजनल व माइग्रेशन बरामद किए गए। 18 मई को विजेंद्र हुड्डा समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। विजेंद्र हुड्डा तब से सलाखों के पीछे चल रहे हैं।\r\n \r\n
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विजेंद्र का जेल से भागने का षड्यंत्र
\r\n\r\nजेल में रहते हुए भी विजेंद्र हुड्डा ने भागने का षड्यंत्र रचा था।
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- \r\n षड्यंत्र: गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हुड्डा ने जेल से भागने की साजिश रची, जिसमें सिपाहियों की संलिप्तता भी सामने आई।\r\n \r\n
- \r\n गिरफ्तारी: बाद में पुलिस ने हुड्डा के रिश्तेदार सहित दो आरोपियों (मुकुल तोमर और वंश सैनी) को गिरफ्तार किया, जिन्होंने फरारी का षड्यंत्र रचा था। जेल प्रशासन की शिकायत पर यह साजिश विफल हो गई।\r\n \r\n
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राजनीतिक महत्वाकांक्षा और कानूनी शिकंजा
\r\n\r\nविजेंद्र हुड्डा ने बाइक बोट घोटाले से खुद को सुरक्षित करने के बाद राजनीति का रुख किया था। लोकदल के बाद वह बीएसपी (BSP) में शामिल हुए और बिजनौर लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा, जिसमें वह तीसरे स्थान पर रहे। चुनाव के तुरंत बाद उन पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया। ईडी की हालिया कार्रवाई दर्शाती है कि आने वाले दिनों में उनकी चल-अचल संपत्तियों की कुर्की हो सकती है।
Sabse pehle comment karne wale banein.