यूजीसी नियमों का विरोध (UGC Rules Protest) आज पूरे देश में सवर्ण समाज के लिए एक बेहद संवेदनशील और बड़ा मुद्दा बन चुका है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए जारी किए गए कथित भेदभावपूर्ण दिशा-निर्देशों के खिलाफ सवर्ण और सामान्य वर्ग का गुस्सा लगातार सड़कों पर फूट रहा है। इसी कड़ी में, आज शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, युवा ब्राह्मण समाज संगठन (Yuva Brahmin Samaj Sangathan) की एक अति-महत्वपूर्ण और विशाल बैठक ईवज चौराहे (Eves Chauraha) के निकट संपन्न हुई। इस बैठक में यूजीसी के इन नए दिशा-निर्देशों को 'सवर्ण विरोधी' करार देते हुए इसके खिलाफ राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन खड़ा करने और आगामी चुनावों में राजनीतिक बहिष्कार का स्पष्ट संकल्प लिया गया है।READ ALSO:-VVIP सुरक्षा में बड़ी सेंध: हरदोई में संघ प्रमुख मोहन भागवत की वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव, बाल-बाल बचे सरसंघचालक; मेरठ में हाई अलर्ट के बीच शुरू हुआ महामंथन
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस उच्च स्तरीय बैठक में संगठन के पदाधिकारियों ने न केवल यूजीसी (UGC) की कथित भेदभावपूर्ण नीतियों की कड़ी निंदा की, बल्कि केंद्र सरकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत और सत्ताधारी राजनीतिक दलों की नीतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि योग्यता और प्रतिभा का इसी प्रकार गला घोंटा जाता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब देश में भयंकर सामाजिक असंतोष और 'गृह युद्ध' (Civil War) जैसी विकट स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
आइए, इस विस्तृत न्यूज़ रिपोर्ट में जानते हैं कि मेरठ में आयोजित युवा ब्राह्मण समाज संगठन की इस बैठक में क्या-क्या बड़े फैसले लिए गए, विभिन्न वक्ताओं ने किन अहम बिंदुओं पर अपने विचार रखे, और इस यूजीसी नियमों का विरोध करने के पीछे सवर्ण समाज के क्या तर्क हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बैठक का कुशल नेतृत्व और संचालन (Leadership and Conduct of the Meeting)

\r\n\r\n
मेरठ के ईवज चौराहे के पास आयोजित इस भव्य बैठक में समाज के विभिन्न वर्गों, जागरूक युवाओं और बुद्धिजीवियों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। बैठक की अध्यक्षता युवा ब्राह्मण समाज संगठन के वरिष्ठ सदस्य और स्थाई समिति के प्रमुख श्री जितेंद्र कुमार गौतम ने की। उनके गरिमामयी नेतृत्व में इस बैठक ने एक अनुशासित लेकिन बेहद आक्रामक वैचारिक आंदोलन का रूप ले लिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
वहीं, मंच का कुशल संचालन संगठन के जुझारू अध्यक्ष कुलदीप शर्मा जी द्वारा किया गया। उन्होंने अपने ओजस्वी संचालन से उपस्थित जनसमूह में ऊर्जा का संचार किया और बैठक की रूपरेखा को स्पष्ट करते हुए बताया कि आज का यह एकत्रीकरण केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह सवर्ण समाज के अस्तित्व, मान-सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने की एक निर्णायक लड़ाई का शंखनाद है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पुनीत शर्मा का तीखा प्रहार: "सवर्णों को भी मिले जाति परिवर्तन का संवैधानिक अधिकार"

\r\n\r\n
इस बैठक में सबसे तीखे और उग्र विचार संगठन मंत्री पुनीत शर्मा ने व्यक्त किए। उनका संबोधन सीधे तौर पर वर्तमान व्यवस्था और राजनेताओं की दोहरी नीतियों पर एक करारा प्रहार था। यूजीसी नियमों का विरोध (UGC Rules Protest) करते हुए उन्होंने सरकार की 'भेदभावपूर्ण नीति' को आड़े हाथों लिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पुनीत शर्मा ने एक बेहद चौंकाने वाली और क्रांतिकारी मांग रखते हुए कहा, "यदि सरकार अपनी सवर्ण-विरोधी और भेदभावपूर्ण नीति को तत्काल खत्म नहीं करती है, तो संविधान में संशोधन करके सवर्ण समाज (General Category) के लोगों को भी अपनी 'जाति परिवर्तन' (Right to change caste) का कानूनी अधिकार दिया जाना चाहिए।" उनका यह बयान इस बात का प्रतीक है कि आज का सवर्ण युवा आरक्षण और जातिगत प्रताड़ना के कारण किस हद तक मानसिक कुंठा और निराशा से गुजर रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर साधा निशाना

\r\n\r\n
अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए पुनीत शर्मा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत और देश के अन्य बड़े नेताओं की नीतियों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, "मोहन भागवत जी और देश के अनेक वरिष्ठ नेता मंचों से हमेशा समानता, हिंदू एकता और अखंडता की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। लेकिन जब बात अधिकारों और न्याय की आती है, तो स्वर्ण वर्ग (सवर्ण वर्ग) के साथ पूर्णतया सौतेला और भेदभावपूर्ण व्यवहार अपनाया जाता है। यह किसी भी दृष्टिकोण से न्याय संगत नहीं है।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

'आर्थिक आधार पर हो आरक्षण, वरना छिड़ेगा गृह युद्ध'

\r\n\r\n
संगठन मंत्री ने आरक्षण व्यवस्था की मूल खामियों को उजागर करते हुए तर्क दिया कि समानता का अधिकार (Right to Equality) संविधान के तहत सभी वर्गों को समान रूप से प्राप्त है। गरीबी, लाचारी, बेरोजगारी और भुखमरी किसी जाति विशेष की मोहताज नहीं है; ये समस्याएं सवर्ण समाज सहित सभी वर्गों में मौजूद हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उन्होंने सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा, "अगर देश में आरक्षण दिया जाना वास्तव में उचित है, तो वह मात्र और मात्र 'आर्थिक आधार' (Economic Basis) पर दिया जाना चाहिए, न कि किसी भी तरह के जातिगत आधार पर। केवल आर्थिक आरक्षण से ही देश में वास्तविक समानता लागू हो पाएगी। यदि ऐसा नहीं हुआ और यूजीसी नियमों का विरोध अनसुना कर सवर्णों को हाशिए पर धकेलने का प्रयास जारी रहा, तो समाज में जातिगत भेदभाव चरम पर पहुंच जाएगा, जो आने वाले समय में देश को एक खतरनाक 'गृह युद्ध' (Civil War) की स्थिति में धकेल देगा।" 
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कुलदीप शर्मा की गहरी चिंता: प्रतिभाओं का विदेश पलायन और आत्महत्याएं

\r\n\r\n
संगठन के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा जी ने अपने संबोधन में एक बेहद मार्मिक और राष्ट्रीय चिंता का विषय उठाया। उन्होंने समाज के दर्द को बयां करते हुए कहा कि आज भारत में सवर्ण वर्ग का संस्थागत और मानसिक उत्पीड़न इतना अधिक बढ़ गया है कि इसके विनाशकारी परिणाम सामने आने लगे हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

उन्होंने वर्तमान व्यवस्था को दोहरी मार वाला बताते हुए कहा:

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    प्रतिभाओं का विदेश पलायन (Brain Drain): "सवर्ण वर्ग के वे मेधावी बच्चे और परिवार जो आर्थिक रूप से थोड़े संपन्न हैं, वे इस देश की दमघोंटू और जातिवादी आरक्षण व्यवस्था से तंग आकर बड़े पैमाने पर विदेशों की ओर पलायन (Migration) कर रहे हैं। वे अपनी प्रतिभा का लाभ उन देशों को दे रहे हैं जो उनकी योग्यता का सम्मान करते हैं।"
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    गरीब सवर्णों की आत्महत्याएं: "दूसरी ओर, जो सवर्ण युवा मेधावी तो हैं लेकिन आर्थिक रूप से संपन्न नहीं होने के कारण विदेश नहीं जा सकते, वे इस सिस्टम से हारकर हताशा में आत्महत्या (Suicide) करने को मजबूर हो रहे हैं। डिप्रेशन आज सवर्ण युवाओं की सबसे बड़ी बीमारी बन चुका है।"
    \r\n
  4. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कुलदीप शर्मा ने स्पष्ट किया कि ये दोनों ही स्थितियां राष्ट्र के लिए बेहद घातक हैं। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया, "अगर देश में प्रतिभाशाली युवा ही नहीं बचेंगे, तो इस देश का तकनीकी, बौद्धिक और आर्थिक विकास कैसे होगा? सरकार एक तरफ विश्वगुरु और 'विकसित भारत' (Developed India) बनाने की बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, और दूसरी तरफ उनकी यही नीतियां देश को तेजी से पीछे की ओर धकेल रही हैं।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

रमाकांत पचौरी का स्पष्ट आह्वान: "यह विरोध राष्ट्र हित में है"

\r\n\r\n
मेरठ की इस बैठक में अपने ओजस्वी विचार व्यक्त करते हुए रमाकांत पचौरी जी ने कहा कि सवर्ण समाज को अब अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर पूरी तरह से एकजुट होना पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूजीसी नियमों का विरोध (UGC Rules Protest) केवल सवर्णों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह पूरे देश को बचाने की लड़ाई है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उन्होंने कहा, "स्वर्ण समाज को एकजुट होकर इस काले यूजीसी बिल (UGC Bill/Regulations) का सड़कों पर उतरकर पुरजोर विरोध करना चाहिए। हमारी यह मांग किसी जाति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पूर्ण रूप से 'राष्ट्र हित' (National Interest) में है। देश में जातिगत व्यवस्था और वैमनस्य को घटाने के लिए यह नितांत आवश्यक है कि हम योग्यता को प्राथमिकता दें। इसलिए, हमें इस नियम का हर स्तर पर विरोध करना चाहिए।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

रवि मिश्रा का विश्लेषण: विश्वविद्यालयों में जहर घोलने की साजिश

\r\n\r\n
यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों के दूरगामी और शैक्षणिक प्रभावों का बारीकी से विश्लेषण करते हुए रवि मिश्रा जी ने अपने विचार रखे। उनका मानना है कि विश्वविद्यालय (Universities) शिक्षा, शोध और मानसिक विकास के मंदिर होते हैं, जिन्हें राजनीति और जातिवाद के जहर से दूर रखा जाना चाहिए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
रवि मिश्रा ने कहा, "यह नया यूजीसी कानून सीधे तौर पर देश की शुद्ध प्रतिभा (Talent) का हनन करने वाला है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि यह बिल विश्वविद्यालय स्तर पर छात्रों के बीच जातिगत वैमनस्य (Caste-based enmity) को बढ़ाने वाला है। जहां हम यह उम्मीद करते हैं कि विश्वविद्यालय स्तर का छात्र मानसिक रूप से परिपक्व (Mature) होकर राष्ट्रीय और सामाजिक विकास की वैज्ञानिक सोच रखता है, वहीं यूजीसी जैसे संस्थान इस तरह के नियम थोपकर उन नौजवानों में जातिगत भेदभाव को हवा दे रहे हैं। ऐसा करके हम जानबूझकर समाज में एक भयंकर विकृति (Social Distortion) को जन्म दे रहे हैं।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इसी क्रम में, बैठक में मौजूद आनंद भारद्वाज ने भी अपने संक्षिप्त लेकिन बेहद प्रभावशाली विचार व्यक्त करते हुए यूजीसी के इस ड्राफ्ट के पुरजोर विरोध की मांग रखी। उन्होंने कहा कि ज्ञापन सौंपने का समय अब जा चुका है; अब हमें आर-पार की लड़ाई लड़नी होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सुरेंद्र शर्मा की रणनीति: संगठन का विस्तार और राजनीतिक 'वोट बहिष्कार'

\r\n\r\n
आंदोलन को केवल एक कमरे की बैठक तक सीमित न रखकर इसे एक जमीनी जनांदोलन बनाने की रूपरेखा सुरेंद्र शर्मा ने प्रस्तुत की। उन्होंने संगठन के विस्तार और राजनीतिक दबाव (Political Pressure) की रणनीति पर बल दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सुरेंद्र शर्मा ने अपने संबोधन में कहा, "हमें अपने इस आंदोलन को और व्यापक रूप देना होगा। हमें संगठन की अलग-अलग क्षेत्रों, मुहल्लों और गांवों में बैठकें करनी चाहिए ताकि स्वर्ण समाज का एक-एक व्यक्ति इस संगठन से जुड़ सके। यूजीसी नियमों का विरोध (UGC Rules Protest) में चलाए जा रहे हमारे इस 'धर्म यज्ञ' में हर सवर्ण की आहुति होनी चाहिए।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
"उसी को वोट, जो सवर्णों के साथ" (Vote Boycott Strategy): उन्होंने आने वाले चुनावों के लिए एक स्पष्ट 'वोट बहिष्कार' का नारा देते हुए ऐलान किया, "हम अब उसी राजनीतिक दल को, उसी व्यक्ति को, और उसी संगठन को अपना पूर्ण सहयोग और अपना बहुमूल्य 'वोट' देंगे, जो इस काले यूजीसी कानून का खुलकर विरोध करेगा और समाज में प्रतिभाओं के सम्मान के लिए खड़ा होगा। जो हमारी अनदेखी करेगा, हम उसे सत्ता से बेदखल करने का काम करेंगे।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अध्यक्षीय उद्बोधन: जितेंद्र कुमार गौतम का 'आर-पार का बिगुल'

\r\n\r\n
बैठक के अंतिम चरण में, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे युवा ब्राह्मण समाज संगठन के वरिष्ठ सदस्य और स्थाई समिति के प्रमुख श्री जितेंद्र कुमार गौतम ने अपना अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी युवाओं के आक्रोश और दर्द को आत्मसात करते हुए एक बेहद कड़ा और स्पष्ट निर्णय सुनाया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जितेंद्र गौतम ने कहा, "आज इस बैठक में सभी सदस्यों के रोष, उनकी पीड़ा और उनके तर्कों को देखते हुए हमारे संगठन को यह कठोर निर्णय लेना ही होगा कि अब हम सिर्फ उसी का साथ देंगे जो हमारे 'स्वर्ण समाज के हित' (Welfare of Savarna Samaj) को दृष्टिगत रखते हुए आगे बढ़ेगा। राजनीतिक पार्टियों ने दशकों से सवर्णों को अपना बंधुआ वोटर समझ रखा है, लेकिन अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा, "अन्यथा, संपूर्ण सवर्ण समाज सड़कों पर उतरकर इस व्यवस्था के विरोध में आर-पार का बिगुल बजाएगा। इसके जो भी दूरगामी परिणाम होंगे, वे देश के सभी राजनीतिक दलों को आगामी चुनावों में स्पष्ट रूप से देखने होंगे। अब हमारा यह संगठन चुप नहीं बैठेगा। हमारा संगठन इसके विरोध में जगह-जगह बैठकें करेगा, व समाज में एकजुटता लाने के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध रहेगा।" 
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बैठक में उपस्थित अन्य प्रमुख चेहरे और सामूहिक संकल्प

\r\n\r\n
मेरठ के ईवज चौराहे पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन के कई अन्य सक्रिय सदस्यों और युवाओं ने भी भारी संख्या में भाग लिया। उपरोक्त मुख्य वक्ताओं के अलावा, इस महाबैठक में मुख्य रूप से कपिल शर्मा, गौरव, सौरभ, गिरीश, हरेंद्र, शैलेंद्र, मनीष, राजीव, राजू शर्मा, अखिल, अंकुर और विकास आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बैठक के अंत में, इन सभी सदस्यों और उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे यूजीसी नियमों का विरोध (UGC Rules Protest) करने के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध हैं। सभी ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर यह वादा किया कि आगे आने वाले हर आंदोलन, चाहे वह धरना-प्रदर्शन हो या जमीनी स्तर पर जन-जागरण अभियान, वे इसमें अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
आज 20 फरवरी 2026 को मेरठ में संपन्न हुई युवा ब्राह्मण समाज संगठन की यह बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सवर्ण समाज के भीतर व्यवस्था को लेकर एक गहरा आक्रोश सुलग रहा है। योग्यता के आधार पर अवसरों की कमी, प्रतिभाओं का विदेश पलायन, और लगातार बनाए जा रहे कथित सवर्ण-विरोधी कानूनों ने इस वर्ग के युवाओं को हताशा से भर दिया है। संगठन के पदाधिकारियों द्वारा यूजीसी नियमों का विरोध (UGC Rules Protest) में दिए गए कड़े बयान, विशेषकर 'जाति परिवर्तन का अधिकार' मांगने और 'गृह युद्ध' की चेतावनी देने जैसी बातें, सरकार और नीति-निर्माताओं के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी (Alarm Bell) होनी चाहिए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार और यूजीसी इस भारी विरोध प्रदर्शन पर क्या संज्ञान लेते हैं, क्योंकि सवर्ण समाज का यह 'वोट बहिष्कार' का संकल्प किसी भी राजनीतिक दल के चुनावी समीकरण बिगाड़ने की पूरी क्षमता रखता है।
विज्ञापन
विज्ञापन