जनपद (News Desk): विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में लाए जा रहे नए 'ड्राफ्ट रेगुलेशन' (Draft Regulation) का विरोध अब छात्र संगठनों से निकलकर सामाजिक संगठनों तक पहुंच गया है। अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा (Akhil Bharatvarshiya Brahmin Mahasabha) ने इन नियमों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। महासभा के जिला अध्यक्ष पंडित घनश्याम शर्मा ने यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को "सवर्ण विरोधी" और "समाज को बांटने वाला" करार दिया है।READ ALSO:-लखनऊ में 'अर्धनग्न' आक्रोश: यूजीसी के खिलाफ करणी सेना और छात्रों का महासंग्राम, बोले- 'सरकार ने हमें नंगा कर दिया', विश्वविद्यालय कैंपस बना छावनी
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इतना ही नहीं, महासभा ने केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि यह "एकपक्षीय कानून" वापस नहीं लिया गया, तो आगामी विधानसभा चुनावों में सवर्ण समाज भाजपा का पूर्ण बहिष्कार करेगा और वोट नहीं देगा।
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"उच्च शिक्षा में असमानता और भेदभाव की साजिश"

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पंडित घनश्याम शर्मा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि यूजीसी के ये नए नियम देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था (Higher Education System) में गहरी असमानता और भेदभाव पैदा करने वाले हैं। उन्होंने कहा, "यह कानून अपने वर्तमान स्वरूप में पूरी तरह से एकपक्षीय (One-sided) प्रतीत होता है। इसके लागू होने से विशेष रूप से सामान्य वर्ग (General Category) या सवर्ण वर्ग के छात्रों का शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।"
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शर्मा का तर्क है कि भारत की शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य "सबका साथ, सबका विकास" और सभी वर्गों को साथ लेकर चलना होना चाहिए। लेकिन यूजीसी का यह ड्राफ्ट अगड़े और पिछड़े के आधार पर विभाजन करके एक विशेष वर्ग के अधिकारों का हनन करने का प्रयास कर रहा है।
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संविधान और सामाजिक न्याय की दुहाई

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महासभा ने संविधान का हवाला देते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। पंडित घनश्याम शर्मा ने कहा, "भारत का संविधान समानता, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय (Social Justice) की भावना पर आधारित है। संविधान किसी के साथ भेदभाव की अनुमति नहीं देता। लेकिन यूजीसी की कमेटियों में जिस तरह से प्रतिनिधित्व तय किया गया है, वह असंतुलित है।"
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उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी निर्णय लेने वाली समिति (Decision Making Committee) का संतुलित, बहुवर्गीय और समावेशी होना अनिवार्य है। नीति निर्धारण समितियों में सवर्ण समाज के प्रतिनिधित्व का अभाव यह दर्शाता है कि कानून की ड्राफ्टिंग निष्पक्ष नहीं है और इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
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छात्रों के बीच बढ़ेगा वैमनस्य

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ब्राह्मण महासभा का मानना है कि ऐसे कानून न केवल सवर्ण छात्रों के खिलाफ हैं, बल्कि यह आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए भी हितकारी नहीं हैं। शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि कानून एकपक्षीय होगा, तो इसका परिणाम "दीर्घकालीन सामाजिक विभाजन" के रूप में सामने आएगा।
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उन्होंने कहा, "कॉलेज और यूनिवर्सिटी पढ़ाई की जगह हैं, राजनीति की नहीं। ऐसे कानूनों के कारण SC/ST/OBC छात्रों को भी अन्य छात्रों से अलग-थलग किया जा रहा है, जिससे परिसरों में आपसी वैमनस्य (Hostility) और टकराव की स्थिति पैदा होगी। यह देश की अखंडता के लिए खतरा है।"
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अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा की 6 प्रमुख मांगें

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पंडित घनश्याम शर्मा ने सरकार और यूजीसी के सामने 6 सूत्रीय मांग पत्र रखा है। उनका कहना है कि सरकार को इन मांगों पर तत्काल विचार करना चाहिए:
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    तत्काल रोक: यूजीसी के इस एकपक्षीय एवं सवर्ण छात्रों के विरुद्ध नकारात्मक प्रभाव डालने वाले UGC Draft Regulation को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
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    समान अवसर: सवर्ण, SC/ST/OBC सहित सभी वर्गों के छात्रों के लिए शिक्षा में समान अवसर, योग्यता (Merit) और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। किसी को भी केवल जाति के आधार पर अपराधी या पीड़ित न माना जाए।
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  4. \r\n
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    संतुलित प्रतिनिधित्व: नीति निर्धारण समितियों और कॉलेजों की इक्विटी कमेटियों में सभी सामाजिक वर्गों का संतुलित और पारदर्शी प्रतिनिधित्व (Representation) किया जाए।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    व्यापक संवाद: छात्रों, शिक्षकों, शिक्षाविदों एवं राज्य सरकारों से व्यापक संवाद और चर्चा के बाद ही कोई नई शिक्षा नीति या नियम लागू किए जाएं। बंद कमरों में फैसले न लिए जाएं।
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  9. \r\n
    विविधता का सम्मान: निर्णय समितियों में सामाजिक विविधता का अभाव नीति को एकपक्षीय, पक्षपातपूर्ण और अविश्वसनीय बनाता है, इसे तुरंत दूर किया जाए।
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  11. \r\n
    कानून की वापसी: यूजीसी के प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन को पूर्ण रूप से वापस लिया जाए।
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चुनावी चेतावनी: "मांग नहीं मानी तो भाजपा को वोट नहीं"

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प्रेस वार्ता के अंत में पंडित घनश्याम शर्मा ने सबसे आक्रामक रुख अपनाते हुए राजनीतिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "सवर्ण समाज हमेशा से राष्ट्र निर्माण में अग्रणी रहा है। यदि सरकार हमारे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाला यह कानून वापस नहीं लेती है, तो आगामी विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में सवर्ण समाज एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का विरोध करेगा और वोट नहीं देगा।"
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यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में चुनावी हलचल तेज है और सवर्ण वोट बैंक भाजपा का मुख्य आधार माना जाता है। ब्राह्मण महासभा की इस नाराजगी से पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
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UGC Draft Regulation Protest अब केवल अकादमिक चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। पंडित घनश्याम शर्मा और अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के विरोध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समाज का एक बड़ा तबका इन नियमों से डरा हुआ और आक्रोशित है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार और यूजीसी इस विरोध को शांत करने के लिए क्या कदम उठाते हैं, या फिर यह मुद्दा आगामी चुनावों में एक बड़ा कारक बनकर उभरेगा।
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अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के जिला अध्यक्ष पंडित घनश्याम शर्मा ने यूजीसी के प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे एकपक्षीय और सवर्ण छात्रों के भविष्य के लिए घातक बताया है। शर्मा ने 6 प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि समितियों में सभी वर्गों का समान प्रतिनिधित्व होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह नियम वापस नहीं लिया गया, तो आगामी विधानसभा चुनावों में सवर्ण समाज भाजपा को वोट नहीं देगा।
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