प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर को मेट्रो और नमो भारत (Namo Bharat) ट्रेन की ऐतिहासिक सौगात दे दी है। इस मेगा सौगात के साथ ही रैपिड रेल अब मेरठ के मोदीपुरम से लेकर दिल्ली के सराय काले खां तक पूरी रफ्तार से दौड़ने लगी है। इस वर्ल्ड-क्लास ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी के कारण दिल्ली और आसपास के लोगों का रुझान मेरठ की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। शहर के गली-कूचों में नए युग की ताजगी और आधुनिकता की रोशनी फैल गई है। दिल्ली, एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह शहर अब एक प्रमुख 'आवासीय हब' (Residential Hub) के रूप में रफ्तार पकड़ रहा है, जिसके चलते मेरठ रियल एस्टेट (Meerut Real Estate) बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है।READ ALSO:-प्यार का दर्दनाक अंजाम: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर प्रेमी युगल ने कार में खाया जहर, 24 वर्षीय युवक की मौत, युवती की हालत नाजुक
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इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कैसे नमो भारत ट्रेन, शहर के भीतर दौड़ने वाली मेट्रो, नई इंटीग्रेटेड टाउनशिप और आगामी गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ की पूरी तस्वीर बदल रहे हैं और क्यों निवेशक यहां संपत्ति खरीदने के लिए बेताब हैं।
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नमो भारत और मेट्रो का प्रभाव: अब किराए से मिलेगी आजादी

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रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक उद्घाटन के बाद अब नमो भारत से दिल्ली जाना बेहद आसान और सुलभ हो गया है। अब मेरठ शहर के भीतर भी नमो भारत का प्रवेश हो गया है, जिसके मेरठ साउथ, शताब्दीनगर, बेगमपुल और मोदीपुरम स्टेशन प्रमुख हैं। इसके साथ ही शहर के भीतर दौड़ने वाली मेट्रो के 13 स्टेशन बनाए गए हैं। नमो भारत के शुरू होने से अब दिल्ली तक का सफर महज 55 मिनट में तय हो जाएगा, जो पहले घंटों जाम में बर्बाद होता था।
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प्रधानमंत्री ने अपने उद्घाटन भाषण के दौरान एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही कि अब दिल्ली में नौकरी करने वालों को वहां महंगे किराए पर रहने की मजबूरी नहीं होगी। यह स्पष्ट संकेत है कि गाजियाबाद, दिल्ली, नोएडा, गुड़गांव आदि क्षेत्रों में नौकरी करने वाले लोग अब आसानी से मेरठ से 'अप-डाउन' (Daily Commute) कर सकेंगे।
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एनसीआरटीसी (NCRTC) की रिपोर्ट के मुताबिक, नमो भारत के पूर्ण संचालन से सड़कों से लगभग एक लाख वाहनों का दबाव कम हो जाएगा। इससे न केवल दिल्ली-एनसीआर के भयंकर ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा, जो पर्यावरण हित में एक बड़ा और सकारात्मक कदम है।
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मेरठ रियल एस्टेट के लिए गेमचेंजर: प्रदेश की पहली इंटीग्रेटेड टाउनशिप

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विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम जैसे मेट्रो शहरों में बढ़ती जमीन की कीमतों और सीमित उपलब्धता के चलते अब निवेशक और घर खरीदार तेजी से मेरठ की ओर आकर्षित हो रहे हैं। रियल एस्टेट डेवलपर्स की हालिया रिपोर्ट में मेरठ को 'वाइब्रेंट सिटी' (Vibrant City) के रूप में शीर्ष स्थान दिया गया है।
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इस बढ़ती आवासीय मांग को पूरा करने के लिए शहर में प्रदेश की पहली 'इंटीग्रेटेड टाउनशिप' (Integrated Township) विकसित की जा रही है।
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    जमीन का अधिग्रहण और प्लॉटिंग: मोहिउद्दीनपुर और छज्जूपुर में इस प्रोजेक्ट के लिए 150 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है। पहले फेज के अंतर्गत मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) 50 हेक्टेयर में ब्लॉक तैयार करेगा, जिसमें इसी साल अप्रैल से प्लॉटिंग की तैयारी शुरू हो जाएगी।
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    हर वर्ग के लिए आशियाना: मेडा की प्लानिंग के मुताबिक, 2500 करोड़ रुपये से विकसित होने वाली इस टाउनशिप में चौड़ी सड़कें होंगी और आसपास के गांवों से फीडर मार्ग के जरिए बेहतरीन कनेक्टिविटी होगी। इसमें आवासीय, व्यावसायिक, शैक्षिक, ग्रुप हाउसिंग, अस्पताल और हेल्थ क्लब आदि के लिए प्लॉट होंगे।
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    निवेशकों के लिए अवसर: इसमें उच्च आय वर्ग, मध्यम आय वर्ग, अल्प आय वर्ग और दुर्बल आय वर्ग (EWS) सभी के लिए मकान और प्लॉट होंगे। टाउनशिप में बड़े निवेशकों को लाने के लिए ग्रुप हाउसिंग के प्लॉट भी आरक्षित होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते साल 4 अगस्त को मेरठ आकर इस नई टाउनशिप का शिलान्यास किया था।
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संपत्तियों के प्रति भारी रुझान: एक प्लॉट के लिए 67 दावेदार

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मेरठ रियल एस्टेट के प्रति लोगों के बढ़ते रुझान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में आवास एवं विकास परिषद की ओर से माधवपुरम में महज 30 प्लॉट के लिए आवेदन मांगे गए थे। लेकिन विभाग भी तब हैरान रह गया जब इन 30 प्लॉटों के लिए कुल 2029 आवेदन प्राप्त हुए। यह संपत्तियों के प्रति बाजार के जबर्दस्त रुझान को साफ बता रहा है। इन आवेदनों में केवल मेरठ ही नहीं, बल्कि दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव और चंडीगढ़ तक के लोगों ने दिलचस्पी दिखाई थी।
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इसके अलावा, आवास एवं विकास परिषद की ओर से गंगा एक्सप्रेस-वे और बिजली बंबा बाईपास पर सलेमपुर, ततीना, नरहेड़ा, बजौट आदि दस गांवों की भूमि पर एक 'न्यू टाउनशिप' बनाई जानी है। शासन इस योजना को हरी झंडी दे चुका है और विभाग की ओर से किसानों से सहमति के आधार पर जमीन लेने के लिए लगातार कैंप लगाए जा रहे हैं।
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गंगा एक्सप्रेस-वे: कनेक्टिविटी की नई जीवन रेखा

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नमो भारत के अलावा, मेरठ की तकदीर बदलने वाला दूसरा सबसे बड़ा प्रोजेक्ट 'गंगा एक्सप्रेस-वे' (Ganga Expressway) है। बिजौली से प्रयागराज तक बन रहे 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का काम बेहद तेजी से चल रहा है।
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    निर्माण की स्थिति: माना जा रहा है कि इस साल मई-जून तक इसे आम जनता के लिए शुरू कर दिया जाएगा। मेरठ में 22 किलोमीटर के दायरे में गंगा एक्सप्रेस-वे का काम पूरा हो चुका है। वहीं, अमरोहा जनपद की हसनपुर तहसील क्षेत्र में 23.60 किमी लंबे एक्सप्रेसवे पर भी सड़क बनकर तैयार हो गई है, जहां प्रकाश व्यवस्था के लिए लाइटिंग का कार्य भी पूर्ण हो चुका है।
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    परियोजना का विस्तार: 36,400 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च वाले इस एक्सप्रेसवे का निर्माण 12 चरणों में किया जा रहा है। अभी यह छह लेन का है, लेकिन भविष्य में इसे आठ लेन तक चौड़ा किया जा सकेगा।
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    रूट: मेरठ-बुलंदशहर हाईवे पर बिजौली गांव से शुरू होकर यह एनएच-19 पर जुदापुर दादू गांव के पास तक जाएगा। यह एक्सप्रेस-वे 12 जिलों के 516 गांवों से होकर गुजरेगा, जिसमें मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज शामिल हैं।
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विशेषज्ञों की नजर में मेरठ रियल एस्टेट का सुनहरा भविष्य
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तेजी से विकसित होते इस विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण रियल एस्टेट सेक्टर के दिग्गजों को बाजार में बड़े और सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है:
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    दिल्ली-NCR के लोगों की बढ़ेगी आवक: एपेक्स ग्रुप के प्रबंध निदेशक अतुल गुप्ता के अनुसार, "नमो भारत के शुरू होने से दिल्ली तक कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाएगी। ऐसे में गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के लोगों की मेरठ में आवक होगी। यहां जमीन की कम कीमत होने से बेहतर आवासीय सुविधा मिलेंगी।"
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    व्यावसायिक संपत्तियों की भारी मांग: आवास एवं विकास परिषद के संपत्ति प्रबंधक सुनील कुमार शर्मा का कहना है, "शहर में बन रहे एक्सप्रेस-वे और नमो भारत का चलना लोगों में संपत्तियों के प्रति रुझान बढ़ा रहा है। विभाग की व्यावसायिक संपत्तियों की ई-नीलामी में लोग चार गुना तक संपत्ति की बोली लगा रहे हैं।"
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    फ्लैट कल्चर में आएगा बूम: रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन के महामंत्री कमल ठाकुर मानते हैं कि, "अभी तक मेरठ में अपनी जमीन और अपनी छत का ही ट्रेंड है। अब दिल्ली तक नमो भारत के चलने से इसमें बदलाव आना निश्चित है। आने वाले दिनों में मेट्रो शहरों की तरह यहां भी फ्लैट (Flat Culture) में रहने का चलन बढ़ने की पूरी उम्मीद है।"
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    व्यापार और मकान दोनों के अवसर: इंडसवैली प्रा. लि. के प्रबंध निदेशक अजय गुप्ता का स्पष्ट मत है कि, "दिल्ली में जमीन की कीमतें बहुत अधिक हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह भी संभव है कि दिल्ली से संपत्ति बेचकर लोग मेरठ में रहने लगें। ऊंची कीमत पर बेची गई संपत्ति से वह मेरठ में बड़ा मकान और व्यापार दोनों कर सकेंगे।"
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संक्षेप में कहा जाए तो, वर्ल्ड-क्लास ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी, नमो भारत की बुलेट जैसी रफ्तार और शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस ऐतिहासिक शहर की तस्वीर पूरी तरह से बदल दी है। नमो भारत, मेरठ शहर की अपनी मेट्रो, नई इंटीग्रेटेड टाउनशिप और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स के कारण आज मेरठ रियल एस्टेट भविष्य के सबसे सुरक्षित और मुनाफे वाले निवेश विकल्पों में से एक बनकर उभरा है। आने वाले समय में यह शहर न केवल एनसीआर का एक प्रमुख आवासीय हब बनेगा, बल्कि एक शानदार लाइफस्टाइल, बढ़ता व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगा। जो निवेशक आज मेरठ में कदम रख रहे हैं, वे निश्चित रूप से भविष्य के एक बड़े आर्थिक विकास का हिस्सा बनने जा रहे हैं।
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