खबरीलाल विशेष खेल रिपोर्ट | मेरठ/बागपत: पश्चिमी उत्तर प्रदेश हमेशा से ही देश के लिए होनहार एथलीट और फौलादी खिलाड़ी देने वाली एक प्रमुख नर्सरी रहा है। लेकिन, सुविधाओं के अभाव और कच्चे मैदानों की वजह से यहां के ग्रामीण युवाओं को अक्सर संघर्ष करना पड़ता था। अब मेरठ और बागपत जिले के ग्रामीण अंचलों से खेल जगत में अपना भविष्य संवारने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी सामने आई है।READ ALSO:-सरकार का बड़ा फैसला: अब नए स्मार्टफोन्स में पहले से इंस्टॉल नहीं मिलेगा Aadhaar App, Apple और Samsung के विरोध के बाद वापस लिया प्लान
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केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत चौधरी के विशेष प्रयासों से मेरठ के रोहटा ब्लॉक स्थित रासना गांव (Rasna Village) में एक अत्याधुनिक सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक (Synthetic Track) का निर्माण होने जा रहा है। गांव के शालीग्राम शर्मा स्मारक महाविद्यालय में बनने वाला यह ट्रैक खेल जगत में एक नई क्रांति लेकर आएगा। खबरीलाल (Khabreelal) की इस विस्तृत रिपोर्ट में आइए जानते हैं इस पूरे प्रोजेक्ट की खासियत, इसका बजट और इससे किन-किन गांवों के खिलाड़ियों की तकदीर बदलने वाली है।
\r\n\r\nधूल-मिट्टी के मैदानों से मिलेगी मुक्ति, आसान होगी सफलता की राह
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एथलेटिक्स की दुनिया में सिंथेटिक ट्रैक का होना किसी भी धावक के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। अब तक बागपत और मेरठ के ग्रामीण अंचलों के धावक खेतों की पगडंडियों, सड़कों या धूल-मिट्टी से भरे कच्चे मैदानों पर पसीना बहाने को मजबूर थे। कच्चे मैदानों पर दौड़ने से न केवल खिलाड़ियों की 'टाइमिंग' (Timing) अंतरराष्ट्रीय मानकों से पीछे रह जाती है, बल्कि घुटनों और टखनों में चोट (Injury) लगने का खतरा भी हमेशा बना रहता है।
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रासना गांव में इस नए सिंथेटिक ट्रैक के बन जाने से ग्रामीण एथलीटों की राह बेहद आसान हो जाएगी। उन्हें अपने ही गांव-देहात के करीब एक ऐसा विश्वस्तरीय प्लेटफॉर्म मिलेगा, जिस पर दौड़कर वे ओलंपिक और एशियन गेम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए खुद को तैयार कर सकेंगे।
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मेरठ जिले का दूसरा सिंथेटिक ट्रैक, खत्म होगा एकाधिकार
\r\n\r\nखेल सुविधाओं के नजरिए से देखा जाए तो यह ट्रैक मेरठ के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। आपको बता दें कि पूरे मेरठ जनपद में अब तक केवल एक ही सिंथेटिक ट्रैक मौजूद है, जो शहर के बीचों-बीच स्थित कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम (Kailash Prakash Sports Stadium) में है।
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ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को रोज शहर आना-जाना काफी महंगा और समय खपाने वाला साबित होता था। रासना गांव में ट्रैक बनने के बाद अब जनपद में दो सिंथेटिक ट्रैक हो जाएंगे। यह नया ट्रैक बागपत और मेरठ की सीमा पर होने के कारण दोनों ही जनपदों के होनहार खिलाड़ियों के लिए एक बेहतरीन 'स्पोर्ट्स हब' (Sports Hub) के रूप में विकसित होगा।
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जयंत चौधरी की पहल और 2.5 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट
\r\n\r\nरासना गांव की विधानसभा सिवालखास है और यह लोकसभा क्षेत्र बागपत के अंतर्गत आता है। यहां स्थित शालीग्राम शर्मा स्मारक महाविद्यालय की समिति के मंत्री प्रदीप त्यागी और क्षेत्र के कुछ अन्य प्रबुद्ध लोगों ने कुछ समय पहले खेल सुविधाओं को लेकर एक मांग पत्र सौंपा था।
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केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया चौधरी जयंत चौधरी ने युवाओं की इस मांग को तुरंत संज्ञान में लिया और इस ट्रैक के निर्माण की घोषणा कर दी। फंडिंग का विवरण (Budget Breakdown):
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- \r\n इस आधुनिक ट्रैक के निर्माण के लिए केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने अपनी निधि से 1 करोड़ रुपये जारी किए हैं।\r\n \r\n
- \r\n बागपत के वर्तमान सांसद राजकुमार सांगवान ने 20 लाख रुपये का योगदान दिया है।\r\n \r\n
- \r\n सिवालखास से विधायक गुलाम मोहम्मद ने भी विकास निधि से 10 लाख रुपये जारी किए हैं।\r\n \r\n
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अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने में लगभग ढाई करोड़ रुपये (2.5 Crore) का कुल खर्च आएगा। शेष राशि की व्यवस्था भी प्रशासन और अन्य निधियों के माध्यम से की जा रही है।
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6 लेन का होगा ट्रैक, अंतरराष्ट्रीय मानकों का रखा जाएगा ध्यान
\r\n\r\nमेरठ की मुख्य विकास अधिकारी (CDO) नूपुर गोयल ने इस प्रोजेक्ट की प्रगति पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि रासना में सिंथेटिक ट्रैक बनाने की कागजी और तकनीकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं।
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- \r\n ट्रैक की विशेषताएं: यह ट्रैक कुल छह लेन (6 Lanes) का बनाया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n लंबाई और गोलाई: दौड़ने के लिए इसकी कुल गोलाई मानक के अनुरूप ठीक 400 मीटर की होगी।\r\n \r\n
- \r\n अंतरराष्ट्रीय मानक: इस ट्रैक का निर्माण पूरी तरह से इंटरनेशनल (International) और नेशनल एथलेटिक फेडरेशन के मानकों के आधार पर किया जाएगा, ताकि यहां आधिकारिक खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा सकें।\r\n \r\n
- \r\n चहारदीवारी का निर्माण: मैदान को सुरक्षित रखने और बाहरी दखल रोकने के लिए ट्रैक के चारों ओर एक मजबूत चहारदीवारी (Boundary Wall) भी बनाई जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n शुरुआत: सीडीओ के अनुसार, जून माह के पहले सप्ताह में ही इस ट्रैक का निर्माण कार्य जमीनी स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।\r\n \r\n
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मेरठ और बागपत के इन गांवों के खिलाड़ियों को होगा सीधा फायदा
\r\n\r\nइस सिंथेटिक ट्रैक का सबसे बड़ा लाभ उन ग्रामीण धावकों को मिलेगा जो सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखते हैं।
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- \r\n मेरठ जिले के लाभार्थी गांव: रोहटा ब्लॉक के गांव कल्याणपुर, उकसिया, कैथवाड़ी, मिर्जापुर, ईकड़ी, उकलीना, जिटौला, किनौनी, मीरपुर, रासना, चिंदौड़ी, रोहटा, नारंगपुर, दुर्जनपुर, फतेहपुर, और पथैली सहित कई अन्य गांवों के युवाओं को इसका लाभ मिलेगा।\r\n \r\n
- \r\n बागपत जिले के लाभार्थी गांव: सीमा से सटे बागपत के ऐतिहासिक गांव बरनावा, हर्रा, खिवाई, जैनपुर, सलापुर, और पूठ आदि के खिलाड़ी भी इस ट्रैक पर अपना दमखम दिखा सकेंगे।\r\n \r\n
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चौधरी चरण सिंह ने रखी थी इस ऐतिहासिक महाविद्यालय की नींव
\r\n\r\nजिस शालीग्राम शर्मा स्मारक महाविद्यालय में यह ट्रैक बनने जा रहा है, उसका अपना एक समृद्ध और ऐतिहासिक अतीत है।
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महाविद्यालय समिति के मंत्री प्रदीप त्यागी ने बताया कि इस शिक्षण संस्थान की शुरुआत उनके दादा चौधरी नियादर सिंह ने वर्ष 1975 में की थी। ग्रामीण शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खोले गए इस महाविद्यालय की आधारशिला (नींव) देश के पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के मसीहा स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) ने अपने कर कमलों से रखी थी।
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वर्तमान में इस महाविद्यालय का कुशल संचालन एक समिति द्वारा किया जा रहा है। चूंकि यह कॉलेज भौगोलिक रूप से बागपत और मेरठ की सीमा पर बिल्कुल सटीक स्थान पर स्थित है, इसलिए यहां सिंथेटिक ट्रैक बनाने का निर्णय लिया गया है। इससे एक ही स्थान पर दोनों जिलों की खेल प्रतिभाओं को निखारने का शानदार अवसर मिलेगा।
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रासना गांव में बनने वाला यह सिंथेटिक ट्रैक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खेल इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। धूल-मिट्टी से उठकर जब ये ग्रामीण युवा सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ेंगे, तो निश्चित रूप से उनके मेडल का रंग भी चमकेगा। मेरठ और बागपत से जुड़ी खेल, राजनीति और विकास की हर प्रामाणिक और विस्तृत खबर के लिए लगातार पढ़ते रहें खबरीलाल (Khabreelal)।
Sabse pehle comment karne wale banein.