मेरठ (06 अप्रैल 2026): उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के प्रतिष्ठित शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट (Shastri Nagar Central Market) में इन दिनों भारी उथल-पुथल और दहशत का माहौल है। दशकों से आवासीय भूखंडों (Residential Plots) पर धड़ल्ले से चल रहे अवैध व्यावसायिक निर्माणों—विशेषकर स्कूलों, नर्सिंग होम, अस्पतालों और बैंकों—पर अब देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का डंडा चल गया है। सोमवार को हुई एक बेहद अहम और सख्त सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रूप से चल रहे इन प्रतिष्ठानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत के इस सख्त रुख के बाद न केवल मेरठ प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं, बल्कि स्थानीय व्यापारियों की रातों की नींद भी उड़ गई है।READ ALSO:-सुभारती यूनिवर्सिटी में संगीत की महफिल बनी रणभूमि: सुनंदा शर्मा के लाइव शो में छात्रों के बीच चले लात-घूंसे, मची भारी भगदड़
\r\n\r\n\r\n\r\n
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: "बच्चों और मरीजों की जान है जोखिम में"
\r\n\r\nसोमवार को इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की खंडपीठ में हुई। अदालत ने आवासीय क्षेत्रों में बिना मानक और सुरक्षा के चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
\r\n\r\n\r\n\r\n
खंडपीठ ने सबसे अधिक चिंता अवैध इमारतों में चल रहे स्कूलों और अस्पतालों को लेकर जताई। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि, "ऐसे घने और अवैध रूप से निर्मित इलाकों में चल रहे स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की जान हमेशा जोखिम में रहती है। आग लगने या किसी अन्य आपात स्थिति (Disaster) में यहां कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिससे बच्चों और मरीजों की जान जा सकती है।" अदालत ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि जब ये निर्माण पूरी तरह से अवैध और गैर-मानक हैं, तो इन स्कूलों और अस्पतालों को वाणिज्यिक बिजली कनेक्शन (Commercial Electricity Connection) आखिर कैसे और किसने दे दिया? कोर्ट ने इस पूरे मामले की गहन जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
24 घंटे का अल्टीमेटम और फिर राहत: शिफ्ट करने के निर्देश
\r\n\r\nसुनवाई की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट का रुख इतना सख्त था कि अदालत ने 24 घंटे के भीतर सभी अवैध स्कूलों और अस्पतालों को सील करने का फरमान सुना दिया था। इस आदेश से प्रशासनिक अधिकारियों और संचालकों में हड़कंप मच गया।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
हालांकि, बाद में जमीनी हकीकत और मानवीय पहलू (Humanitarian Ground) को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने 24 घंटे की समय सीमा (Time Limit) को समाप्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के भविष्य और अस्पतालों में भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसलिए, सीलिंग की कार्रवाई से पहले प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि सभी बच्चों और मरीजों को सुरक्षित स्थानों या अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों में शिफ्ट (Shift) किया जाए। स्थानीय पुलिस और प्रशासन को इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से अमल में लाने की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है। बताया जा रहा है कि अकेले शास्त्रीनगर योजना संख्या सात में ही 4 से 6 बड़े स्कूल इस तरह के अवैध निर्माण की श्रेणी में आते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
प्रशासनिक अमले में हड़कंप: रविवार को भी खुले रहे दफ्तर
\r\n\r\nसुप्रीम कोर्ट द्वारा एक अप्रैल को हुई पिछली सुनवाई में अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) तलब करते हुए आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती का असर यह हुआ कि सरकारी महकमे की छुट्टी भी रद्द हो गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
रविवार के दिन भी प्रशासन और आवास विकास परिषद के कार्यालय खुले रहे। अधिकारी दिन-रात एक करके पूरे मामले से जुड़ी फाइलें और दस्तावेज तैयार करते नजर आए। 2 अप्रैल को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे अपर्याप्त मानते हुए एक विस्तृत हलफनामा (Detailed Affidavit) दायर करने को कहा था। उसी के आधार पर सोमवार (6 अप्रैल) को यह कड़ी सुनवाई हुई। परिषद ने अब तक कोर्ट के समक्ष 44 संपत्तियों को व्यावसायिक रूप से अवैध घोषित किया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पूर्व कमिश्नर के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
\r\n\r\nइस पूरे विवाद में मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। दरअसल, 27 अक्टूबर 2025 को पूर्व कमिश्नर यशोद ने एक आदेश पारित किया था, जिसमें उन्होंने ध्वस्तीकरण (Demolition) की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही, उन्होंने सेंट्रल मार्केट को 'मार्केट स्ट्रीट' (Market Street) घोषित करने के लिए मास्टर प्लान में संशोधन करने का भी आदेश दिया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सुप्रीम कोर्ट ने इस कदम को अपने पूर्व के निर्देशों के विपरीत और न्याय की प्रक्रिया में बाधा माना है। अदालत ने प्रमुख सचिव (आवास एवं शहरी नियोजन) पी. गुरु प्रसाद के साथ-साथ मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद को भी इस मामले में अपना पक्ष रखने और यह स्पष्ट करने के लिए तलब किया है कि उन्होंने किस अधिकार से ध्वस्तीकरण पर रोक लगाई थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कार्रवाई के खौफ से व्यापारियों ने खुद चलाए हथौड़े
\r\n\r\nसुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये को देखते हुए शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों में भारी खौफ है। उन्हें पता है कि अगर बुलडोजर चला, तो नुकसान कहीं अधिक होगा। इसी डर और कार्रवाई से बचने के लिए रविवार को बाजार में एक अजीब नजारा देखने को मिला। दर्जनों व्यापारियों ने प्रशासन के आने से पहले ही अपने हाथों से अपनी दुकानों के आगे किए गए अवैध निर्माण, छज्जों और रैंप पर हथौड़े और बुलडोजर चलवा दिए। लोग खुद अपनी संपत्तियों को तोड़ते हुए नजर आए ताकि मूल ढांचे को बचाया जा सके।
\r\n\r\n\r\n\r\n
250 कारोबार बंद, 550 पर मंडरा रहा है बर्बादी का खतरा
\r\n\r\nइस कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई का सबसे बड़ा खामियाजा आम व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट मेरठ के सबसे व्यस्त और पुराने बाजारों में से एक है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कार्रवाई की दहशत के चलते बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, अब तक लगभग 250 से अधिक व्यापारी अपना कारोबार पूरी तरह से बंद कर चुके हैं। वहीं, करीब 550 अन्य व्यापारियों पर ध्वस्तीकरण और सीलिंग की नंगी तलवार लटक रही है। लाखों-करोड़ों का माल दुकानों में फंसा है और कई परिवारों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ गई है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
अपनी इस दुर्दशा से परेशान होकर रविवार को भारी संख्या में व्यापारी, तिरंगा चौक व्यापार संघ के अध्यक्ष मनोज कुमार गर्ग के नेतृत्व में, भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष विनीत शारदा अग्रवाल के शास्त्रीनगर स्थित कैंप कार्यालय पहुंचे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
टैक्स देते हैं, फिर भी उजाड़ा जा रहा है: व्यापारी व्यापारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी व्यक्त की। व्यापारी नेताओं ने इसे 'जीवन-मरण का संकट' करार देते हुए प्रदेश की योगी सरकार से तत्काल राहत पैकेज और नियम में ढील की मांग की है। उनका तर्क है कि वे पिछले कई वर्षों से सरकार को नियमित रूप से कमर्शियल हाउस टैक्स, बिजली बिल और जीएसटी (GST) चुका रहे हैं। जब सरकार उनसे व्यावसायिक कर वसूल रही है, तो अब अचानक उनके प्रतिष्ठानों को अवैध बताकर कैसे उजाड़ा जा सकता है?
\r\n\r\n\r\n\r\n
आगे क्या? 9 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं निगाहें
\r\n\r\nफिलहाल, सभी पक्षों की निगाहें अब 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली अहम सुनवाई पर टिकी हुई हैं। याचिकाकर्ता लोकेश खुराना के वकील तुषार जैन ने कोर्ट में यह भी दलील दी है कि अवैध निर्माण की यह स्थिति केवल शास्त्रीनगर तक सीमित नहीं है, बल्कि आवास विकास परिषद की कई अन्य कॉलोनियों और योजनाओं में भी यही हाल है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
9 अप्रैल की सुनवाई न केवल शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के सैकड़ों व्यापारियों और वहां चल रहे स्कूलों-अस्पतालों के भविष्य का फैसला करेगी, बल्कि यह पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक नजीर बन सकती है कि आवासीय क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों से किस प्रकार निपटा जाएगा। तब तक के लिए, मेरठ के इस इलाके में खौफ, अनिश्चितता और हथौड़ों की आवाजें गूंजती रहेंगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.