शादाब जकाती न्यूज़ (Sub-headline): “यह 10 रूपए का बिस्कुट का पैकेट कितने का है जी...!” सोशल मीडिया पर अपने इस एक मासूम और मजाकिया डायलॉग के जरिए रातों-रात इंटरनेट सेंसेशन बने शादाब जकाती (Shadab Jakati) अब केवल रील्स और मीम्स तक सीमित नहीं हैं। शुक्रवार को आजाद समाज पार्टी (ASP) की 'सत्ता परिवर्तन यात्रा' में उनकी धमाकेदार मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। गले में पार्टी का पटका, हाथ में झंडा और सांसद चंद्रशेखर आजाद के ठीक पीछे उनकी काली स्कॉर्पियो... क्या यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए युवा चेहरे की लॉन्चिंग है? आइए इस पूरी राजनीतिक हलचल का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।READ ALSO:-दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले सावधान! 2 दिनों के लिए बंद रहेगा यह अहम रास्ता, घर से निकलने से पहले जानें पूरा डायवर्जन प्लान
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सोशल मीडिया के स्टार से राजनीतिक मंच तक का सफर
\r\n\r\nआज के दौर में सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर (Social Media Influencer) केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि वे जनमत को प्रभावित करने की एक बड़ी ताकत बन चुके हैं। शादाब जकाती इसका एक जीता-जागता उदाहरण हैं। उनका '10 रुपये के बिस्कुट' वाला वीडियो इतना वायरल हुआ था कि बच्चे-बच्चे की जुबान पर उनका डायलॉग चढ़ गया। लेकिन शुक्रवार को उनका एक अलग ही अवतार देखने को मिला, जिसने उनके फैंस और राजनीतिक विश्लेषकों, दोनों को चौंका दिया।
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नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (Aazad Samaj Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) इन दिनों उत्तर प्रदेश में 'सत्ता परिवर्तन यात्रा' निकाल रहे हैं। इसी यात्रा के दौरान जब काफिला मेरठ और उसके आसपास के इलाकों से गुजरा, तो लोगों की नजरें एक विशेष काली स्कॉर्पियो पर जाकर टिक गईं। यह गाड़ी किसी और की नहीं, बल्कि इंटरनेट के चहेते शादाब जकाती की थी।
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काली स्कॉर्पियो, गले में पटका और सांसद के पीछे-पीछे शादाब
\r\n\r\nशादाब जकाती की इस रैली में एंट्री कोई आम एंट्री नहीं थी। वह पूरी तरह से एक वीआईपी (VIP) राजनीतिक अंदाज में नजर आए।
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रैली में शादाब की मौजूदगी के मुख्य आकर्षण:
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- \r\n काफिले में सबसे आगे: इंचौली से ही शादाब जकाती चंद्रशेखर आजाद के काफिले में शामिल हो गए थे। दिलचस्प बात यह रही कि पूरे रास्ते शादाब की ब्लैक स्कॉर्पियो सांसद चंद्रशेखर की गाड़ी के ठीक पीछे-पीछे चलती रही।\r\n \r\n
- \r\n पार्टी के रंगों में रंगे शादाब: शादाब ने बाकायदा आजाद समाज पार्टी का नीला पटका अपने गले में डाला हुआ था और उनके हाथ में पार्टी का झंडा भी शान से लहरा रहा था। उनका यह गेटअप पूरी तरह से एक समर्पित युवा नेता जैसा लग रहा था।\r\n \r\n
- \r\n भव्य स्वागत: काफिले में जुड़ने से पहले शादाब ने चंद्रशेखर आजाद का जोरदार स्वागत किया, जिसने वहां मौजूद सभी कार्यकर्ताओं और मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।\r\n \r\n
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चंद्रशेखर मंच पर, तो बाहर शादाब के लिए मची 'सेल्फी की होड़'
\r\n\r\nजब आजाद समाज पार्टी की यह यात्रा पीवीएस रोड स्थित एक सभागार के पास पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद दिलचस्प था। एक तरफ सांसद चंद्रशेखर आजाद अंदर महिलाओं के समूह और कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे, तो दूसरी तरफ सभागार के बाहर शादाब जकाती का 'स्टारडम' चरम पर था।
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जैसे ही रैली में शामिल दर्जनों गाड़ियों और ट्रैक्टर-ट्रालियों पर सवार कार्यकर्ताओं की नजर शादाब जकाती पर पड़ी, वे अपना राजनीतिक एजेंडा कुछ देर के लिए भूल गए और 'वायरल बॉय' की तरफ दौड़ पड़े।
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- \r\n युवाओं में भारी क्रेज: वहां मौजूद युवा कार्यकर्ताओं के बीच शादाब के साथ एक सेल्फी लेने की होड़ मच गई।\r\n \r\n
- \r\n भीड़ से घिरे रहे: कार्यक्रम स्थल के बाहर शादाब काफी देर तक लोगों की भीड़ से घिरे रहे। उनकी लोकप्रियता यह साबित कर रही थी कि युवा वर्ग में उनकी कितनी मजबूत पकड़ है और वे किसी भी रैली में 'क्राउड पुलर' (भीड़ जुटाने वाले) साबित हो सकते हैं।\r\n \r\n
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आसपा के मंच पर दिग्गजों के साथ साझा किया मंच
\r\n\r\nशादाब जकाती का सफर केवल सड़क के काफिले तक ही सीमित नहीं रहा। पीवीएस के पास जब चंद्रशेखर आजाद जनसभा को संबोधित करने पहुंचे, तो कुछ ही देर बाद पीछे-पीछे शादाब जकाती भी मंच पर आसीन हो गए।
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यह कोई साधारण बात नहीं थी। शादाब को मंच पर एक प्रमुख स्थान दिया गया। वे हाल ही में समाजवादी पार्टी (SP) का दामन छोड़कर आजाद समाज पार्टी में शामिल हुए दिग्गज नेता बाबर चौहान खरदौनी के ठीक बगल में बैठे दिखाई दिए। शादाब लगभग आधा घंटा तक मंच पर रुके। दिग्गजों के साथ उनका इस तरह मंच साझा करना इस बात का प्रबल संकेत था कि आजाद समाज पार्टी उन्हें कितना महत्व दे रही है।
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मीडिया के तीखे सवाल और शादाब का 'बिस्कुट वाला' स्मार्ट जवाब
\r\n\r\nजब कोई इतना बड़ा सोशल मीडिया स्टार, गले में किसी राजनीतिक दल का पटका डालकर उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ मंच साझा करे, तो 'राजनीतिक एंट्री' के सवाल उठना लाजमी है। लोगों के जहन में दिन भर केवल यही सवाल घूमता रहा कि क्या शादाब जकाती आधिकारिक रूप से आजाद समाज पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं?
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कुछ कार्यकर्ताओं और फैंस ने उनसे सीधे यह सवाल पूछ भी लिया, लेकिन शादाब वहां कूटनीतिक तरीके से बचते हुए नजर आए। जब मीडिया के कैमरों ने उन्हें घेरा और राजनीति में प्रवेश को लेकर सीधा सवाल दागा, तो शादाब ने अपने ही मजाकिया और वायरल अंदाज में एक बेहद स्मार्ट जवाब दिया।
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शादाब जकाती का बयान:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"वह (चंद्रशेखर आजाद) बहुत अच्छे वक्ता हैं। वे हमेशा गरीबों, मजलूमों और दबे-कुचले लोगों की मदद करते हैं। उनकी यह भावना मुझे बहुत पसंद है। इसलिए मैं आज केवल उनको अपना मोरल सपोर्ट (समर्थन) देने के लिए यहां आया हूं। मैं कोई राजनीतिक पार्टी ज्वाइन नहीं कर रहा हूं। मैं तो अपने 10 रूपए के बिस्कुट में ही बहुत खुश हूं जी!"\r\n
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यह कहकर शादाब हंस पड़े। उनका यह "10 रुपये का बिस्कुट" वाला तंज और मुस्कान बहुत कुछ कह रही थी। उन्होंने पार्टी ज्वाइन करने की बात को भले ही सिरे से खारिज कर दिया हो, लेकिन उनका खुला समर्थन बहुत मायने रखता है।
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क्या है चंद्रशेखर आजाद की 'इनफ्लुएंसर स्ट्रेटजी'?
\r\n\r\nराजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो शादाब जकाती का रैली में शामिल होना महज एक संयोग नहीं है। आज के समय में राजनीतिक पार्टियां युवाओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स का जमकर इस्तेमाल कर रही हैं।
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आजाद समाज पार्टी (ASP) के नजरिए से इसके क्या मायने हैं?
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- \r\n युवा मुस्लिम वोटर्स पर फोकस: चंद्रशेखर आजाद दलित-मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। शादाब जकाती मुस्लिम युवाओं के बीच एक जाना-माना और चहेता चेहरा हैं। उनका समर्थन आसपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n सोशल मीडिया रीच: शादाब के लाखों फॉलोअर्स हैं। उनका एक वीडियो या फोटो पार्टी की रैली को नेशनल मीडिया और सोशल मीडिया ट्रेंड्स में ला सकता है।\r\n \r\n
- \r\n सॉफ्ट पॉलिटिक्स की शुरुआत: राजनीति में अक्सर लोग पहले 'समर्थक' के रूप में जुड़ते हैं और फिर धीरे-धीरे मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखते हैं। शादाब का यह कदम भी उसी 'सॉफ्ट लॉन्चिंग' का हिस्सा माना जा रहा है।\r\n \r\n
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शादाब जकाती भले ही अभी यह कह रहे हों कि वे अपने 10 रुपये के बिस्कुट में खुश हैं और राजनीति में नहीं आ रहे हैं, लेकिन शुक्रवार की तस्वीरों ने कुछ और ही कहानी बयां की है। गले में आसपा का पटका, सांसद की गाड़ी के पीछे काली स्कॉर्पियो और मंच पर दिग्गजों के साथ उनकी मौजूदगी ने यह तो साफ कर दिया है कि शादाब की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं धीरे-धीरे हिलोरें मारने लगी हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में शादाब का यह 'बिस्कुट' सोशल मीडिया की दुनिया से निकलकर पूरी तरह से राजनीतिक 'थाली' में सजता है या नहीं।
Sabse pehle comment karne wale banein.